जम्मू में सर्वश्रेष्ठ परिसर दायित्व वकील

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ADV HARPREET SINGH AND ASSOCIATES
जम्मू, भारत

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अधिवक्ता हरप्रीत सिंह: जटिल कराधान और कॉर्पोरेट विधि में एक भरोसेमंद कानूनी रणनीतिकारविधिक जटिलताओं की निरंतर...
Sushil Wattal

Sushil Wattal

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जम्मू, भारत

2009 में स्थापित
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सुशील वाट्टल एक अभ्यासरत अधिवक्ता हैं और कानून के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक अनुभव रखते हैं। वह व्यवसायों,...
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भारत परिसर दायित्व वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 1 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें परिसर दायित्व के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

क्या मैं अपनी बेटी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर सकता हूँ, क्योंकि मुझे उसके ठिकाने की जानकारी नहीं है?
परिवार गृह हिंसा अभिभावकत्व परिसर दायित्व संपत्ति क्षति
उसके बारे में मेरे पास कोई जानकारी नहीं है, इसलिए मुझे उसे अपनी बेटी कहना भी मुश्किल हो रहा है। मैंने उसकी पढ़ाई, कॉलेज हॉस्टल और ट्यूशन फीस में लाखों रुपये निवेश किए हैं और उसे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेजा था ताकि वह अपना एमएस कर सके। लेकिन...
वकील का उत्तर Aggarwals & Associates द्वारा

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1 उत्तर

जम्मू, भारत में परिसर दायित्व कानून के बारे में: जम्मू, भारत में परिसर दायित्व कानून का संक्षिप्त अवलोकन

परिसर दायित्व एक प्रकार का तॉर्ट कानून है जो परिसर के नियंत्रण-स्वामी पर आगंतुकों, कर्मचारियों या ग्राहकों की सुरक्षा रखने की जिम्मेदारी बनाता है।

जम्मू-कश्मीर सीमा के भीतर भी यह ढांचा भारत के अन्य राज्यों की तरह अधिकांश मामलों में आदर्श नियमावली पर चलता है, और यहाँ भी विशेष अधिनियम नहीं है कि “परिसर दायित्व अधिनियम” जैसा एक अलग कानून लागू हो।

प्रमुख दायित्वों में परिसर को साफ-सुथरा रखना, संरक्षा के उपाय अपनाना, रोशनी और निकासी के रास्तों को सुरक्षित रखना शामिल है।

यह दायित्व सामान्य तौर पर ग़ैर-उच्च-विशेषाधिकारियों, संचालकों और मालिकों के लिए है; विरोधी पक्षों के दावे न्यायालयीन निर्णयों और अदालतों के सिद्धांतों पर निर्भर रहते हैं।

आधिकारिक आधार के संकेत: भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार के प्रति सुरक्षा एक अक्सर संदर्भित धारणा है, और अनुच्छेद 14 के अनुरूप बराबरी की सुरक्षा भी दायित्वों के पीछे एक संदर्भ देती है।

“No person shall be deprived of life or personal liberty except according to procedure established by law.”

Official source: Constitution of India, Article 21. https://legislative.gov.in/constitution-of-india

“The State shall not deny to any person equality before the law or the equal protection of the laws within the territory of India.”

Official source: Constitution of India, Article 14. https://legislative.gov.in/constitution-of-india

जम्मू में परिसर दायित्व के मुद्दे सामान्यतः दायित्व-आधारित दावे, सुरक्षा उल्लंघन, और क्षतिपूर्ति से जुड़े होते हैं।

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: परिसर दायित्व कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। जम्मू, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें

  • विवेक-उल्लंघन से हिमशय्या के कारण, दुकान-यात्रियों को गिरकर चोट लगी हों; mall या shopping complex जम्मू में हो; मालिक या प्रबंधक पर क्षति-दावा बन सकता है।
  • होटल, रेस्टोरेंट या अस्पताल के परिसर में जमी-गीली सतह से आगंतुक घायल हों; सुरक्षा-उपायों की कमी पर क्लेम संभव है।
  • कारखाने में असुरक्षित निर्माण-स्थल या सुरक्षा उल्लंघन से कर्मचारी घायल हों; Workmen’s Compensation Act के दायरे में दावे उठते हैं।
  • किराएदार संपत्ति के भीतर सामान या संरचना के कारण चोट हो; मालिक-परिसर की सुरक्षा-देखभाल की जिम्मेदारी साबित होनी चाहिए।
  • स्कूल, कॉलेज या निजी संस्थान में सुरक्षा चूक से विद्यार्थियों या अभिभावकों को नुकसान पहुँचा हो; परिसर-स्वामित्व की जवाबदेही पर दावा संभव है।
  • गृह-नागरिक परिसर में चोरी, लूट या सुरक्षा-घटनों से लिंक्ड घटनाओं में सीधे दायित्व की स्थिति बनती है; सुरक्षा-उपाय न होना दावे का आधार बन सकता है।

स्थानीय कानून अवलोकन: जम्मू, भारत में परिसर दायित्व को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें

  • Workmen's Compensation Act, 1923 - केन्द्रीय कानून है जो çalışanों के कार्यस्थल पर चोट या बीमारी के मामले में मुआवजा देता है; जम्मू-कश्मीर सहित पूरे भारत में लागू माना जाता है जब premises पर कर्मचारी काम कर रहे हों।
  • Public Liability Insurance Act, 1991 - केंद्र सरकार का अधिनियम; दुर्घटना-घटित होने पर मुआवजे का बीमा कवरेज सुनिश्चित करता है; परिसर के मालिक/उद्धृत पक्ष पर बीमा अनिवार्य हो सकता है।
  • Factories Act, 1948 - कारखानों के संचालन में सुरक्षा मानक, स्वास्थ्य व लाभ-उन्नति के उपाय बताता है; जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक परिसरों पर लागू हो सकता है जहां यह उपयुक्त हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिसर दायित्व क्या है?

यह वह दायित्व है जिसमें परिसर के मालिक या प्रबंधक आगंतुकों की सुरक्षा के लिए उचित उपाय करने के लिए बाध्य होते हैं।

कौन-से आगंतुकों पर दायित्व लागू होता है?

आमंत्रित आगंतुक, ग्राहक या कर्मचारी आदि पर दायित्व लागू होता है। कुछ स्थितियों में trespassers पर भी सुरक्षा-उपाय की ज़रूरत हो सकती है।

अगर परिसर में चोट लग जाए, तो क्या दावा किया जा सकता है?

हाँ, संरक्षा, सफाई, प्रकाश-प्रबंधन, मरम्मत-गिरावट आदि से जुड़ी चूकों के आधार पर दावा किया जा सकता है।

दावा किस प्रकार का होता है और कितने समय में दायर किया जा सकता है?

आमतौर पर civil tort claims होते हैं। भारत में Limitation Act के अनुसार सामान्य दावे 3 वर्ष के भीतर दायर करने चाहिए, लेकिन वास्तविक समय-सीमा अदालत के अनुसार भिन्न हो सकती है।

बीमा का क्या रोल है?

Public Liability Insurance Act के तहत बीमा पॉलिसी से पीड़ित व्यक्तियों को मुआवजा मिल सकता है; चोट के प्रकार पर बीमा कवरेज लागू होती है।

अगर मैं किरायेदार/उप-परिसर मालिक हूँ तो दायित्व किन तक सीमाओं के साथ है?

किरायेदारी के मामलों में सुरक्षित परिसर, मरम्मत के दायित्व और उचित देखभाल का मानक संचालक पर लागू होता है; दायित्व एजेंसी-सेन्स के अनुसार निर्धारित होता है।

मैं नियुक्त कर्मचारी नहीं हूं, तो क्या दायित्व लागू होगा?

हां, आगंतुकों के लिए जिम्मेदारी प्राथमिक तौर पर परिसर-स्वामी/प्रबंधक की होती है; कर्मचारियों के लिए Workplace Safety कानून लागू होते हैं।

कौन-सी सुरक्षा सुविधाएँ जरूरी मानी जाएँगी?

साफ-सफाई, मजबूत संरचना, अच्छी रोशनी, स्पष्ट मार्गदर्शन, सुरक्षित पथ-निर्माण और आग-प्रतिरोधी उपाय प्रमुख हैं।

क्या परिसर मालिक बचाव के लिए कानूनी दलीलों का सहारा ले सकता है?

हाँ, कुछ परिस्थितियों में ड्यूटी-डिफेन्स (उदा-अनुचित प्रवेश, अपरिहार्य जोखिम) से मुआवजे में कमी हो सकती है, परन्तु यह अदालत के निर्णय पर निर्भर करता है।

किस प्रकार के नुकसान के दावे में अदालत का अधिकार है?

चोट, मौत, मानसिक आघात, और अप्रत्यक्ष नुकसान जैसे क्षतिपूर्ति दावे संभव हैं, खासकर अगर सुरक्षा-उपायों की कमी सिद्ध हो।

क्या अदालतें स्थानीय कानूनों के अनुसार निर्णय करती हैं?

हाँ, जम्मू-काश्मीर UT में भी केंद्रीय कानूनों के साथ स्थानीय अदालतें निर्णय लेती हैं; अदालतों के पूर्ववर्ती निर्णयों से दायित्व की मानक निर्धारित होते हैं।

मैं अपने दावे के लिए किन दस्तावेज़ों की तैयारी करूँ?

चोट-घटना की रिपोर्ट, medical records, photos, CCTV कैपचर, घटनास्थल का निरीक्षण-नोट्स और मौजुदा बीमा पॉलिसी के प्रमाण रखें।

कला-खाता बनाम दायित्व-निर्णय: कौन सा कदम पहले उठाऊं?

पहले किसी कानूनी सलाहकार से मिलकर तथ्य-समानता तय करें; फिर उचित दायित्व-कार्रवाई के अनुसार दावा या शिकायत शुरू करें।

मैं जिला स्तर पर किस प्रकार की मदद ले सकता हूँ?

JKLSA और राज्य-स्तर के न्यायिक संस्थान नागरिक-हित के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं; उनका उपयोग आप अपनी स्थिति के अनुसार कर सकते हैं।

अतिरिक्त संसाधन

  • Directorate General Factory Advice Service and Labour Institutes (DGFASLI) - आधिकारिक साइट: http://dgfasli.gov.in
  • Bureau of Indian Standards (BIS) - आधिकारिक साइट: https://bis.gov.in
  • Jammu and Kashmir Legal Services Authority (JKLSA) - आधिकारिक साइट: https://jklsa.nic.in

अगले कदम: परिसर दायित्व वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपना मामला स्पष्ट रूप से लिख लें; घटनाक्रम, स्थान, चोट-प्रकार और सभी दस्तावेज तैयार रखें।
  2. जम्मू-काश्मीर में tort law या personal injury میں अनुभव रखने वाले वकील खोजें; बार काउंसिल ऑफ इंडिया और JK बार असोसिएशन की सूची देखें।
  3. वरिष्ठ वकीलों के क्लाइंट-फीडबैक और केस-हिस्ट्री चेक करें; ऑनलाइन प्रतिष्ठा देखें, जैसे न्यायालय-निर्देशन और अन्य उपलब्धियाँ।
  4. पहला परामर्श निर्धारित करें; शुल्क-रचना, समय-सीमा, और उम्मीदें साफ़ करें।
  5. परामर्श के दौरान सवाल पूछें: चोट की प्रकृति, दस्तावेज, हित-ध्यान और संभावित परिणाम।
  6. एजेंसी-फीस, एविडेंस-वार, और स्टेट के अनुसार कोर्ट-फीस जैसी चीजों पर स्पष्ट समझ बनाएं।
  7. यदि आप संतुष्ट हों तो अगला कदम बढ़ाएं; लिखित अनुबंध और केस-स्टेप-टेम्पलेट पर हस्ताक्षर करें।

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