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संपत्ति विभाजन वह विधिक प्रक्रिया है जिसमें एक साथ स्वामित्व में मौजूद संपत्ति के अधिकार विभाजित होते हैं। यह अक्सर परिवार, सहस्वामित्व, या हाउसहोल्ड इन्वेस्टमेंट से जुड़ी परिसंपत्तियों पर लागू होता है। विशिष्ट नियम धर्म, परंपरा और कानूनों के अनुसार तय होते हैं।
भारत में सहस्वामित्व और अनुवांशिक संपत्ति के अधिकारों के लिए प्रमुख कानून हैं; इनमें हिन्दू समाज के लिए हिंदू सन्तति अधिनियम, मुस्लिम-निजी कानून के क्षेत्राधिकार तथा संपत्ति के ट्रांसफर से जुड़ा कानून शामिल है। अदालतें आम तौर पर पार्टिशन डीड या_partition suit के जरिये विभाजन कराती हैं।
ध्यान दें: हाल के वर्षों में महिलाओं के Coparcenary अधिकार को स्पष्ट करते हुए 2005 और 2015 के संशोधनों ने बेटा- बेटी समान अधिकार सुनिश्चित किया।
“On and from the commencement of the Hindu Succession (Amendment) Act, 2005, the daughter of a coparcener shall have the same rights in the coparcenary property as the son.”यह अधिकार कानून के अनुसार है। India Code का आधिकारिक पाठ देखें।
“An Act to consolidate and amend the law relating to the transfer of property.”
उपर्युक्त उद्धरण Transfer of Property Act, 1882 के आधिकारिक उद्देश्य को दिखाते हैं। Legislation.gov.in पर मूल पाठ मिल सकता है।
कई स्थितियों में संपत्ति विभाजन कठिन और विवादित हो सकता है। सही कानूनी मार्गदर्शन से नुकसान रोका जा सकता है और तेज विभाजन संभव रहता है। नीचे 4-6 वास्तविक परिदृश्य देखें जिनमें कानूनी सहायता जरूरी होती है।
“On and from the commencement of the Hindu Succession (Amendment) Act, 2005, the daughter of a coparcener shall have the same rights in the coparcenary property as the son.”officiel source: Supreme Court judgement links पर देखें।
भारत में संपत्ति विभाजन के लिए प्रमुख कानून नीचे दिए गए हैं। ये दो से तीन कानून मिलकर विभाजन की संरचना बनाते हैं।
“An Act to consolidate and amend the law relating to the transfer of property.”आधिकारिक पाठ के लिए India Code देखें।
“On and from the commencement of the Hindu Succession (Amendment) Act, 2005, the daughter of a coparcener shall have the same rights in the coparcenary property as the son.”आधिकारिक पाठ के लिए India Code
विभाजन एक ऐसी कानूनी प्रक्रिया है जिसमें संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्ति के अधिकार विभाजित होते हैं। यह आम तौर पर partition deed या partition suit से होता है।
हां, 2005 के संशोधन के बाद daughters coparcenary अधिकार पाती हैं। यह अधिकार जन्म से मिल जाता है।
जब सहस्वामित्व में मतभेद हो। अदालत से विभाजन का आदेश या निर्देश चाहिए होता है।
खुली पंक्तियाँ, स्वामित्व प्रमाण पत्र, तालिका, विरासत/Will, पंजीकृत partition deed आदि आवश्यक हो सकते हैं।
सिविल प्रक्रिया कानून के अंतर्गत partition suit दायर किया जा सकता है। अदालतें सत्यापन और आंवटन के आधार पर विभाजन करती हैं।
वकील के साथ विवाद समाधान और mediation/alternative dispute resolution (ADR) पर विचार करें।
Will के कारण विरासत निर्धारित होती है, जबकि intestate में कानून के अनुसार heirs मिलते हैं।
किरायेदारी संपत्ति में आबंटन सामान्यतः सह-स्वामियों के भाग-भाग हिस्से के अनुसार होता है।
महिला coparcenary अधिकार के कारण बराबर हिस्सेदारी में भाग ले सकती है।
जब संपत्ति स्पष्ट रूप से विभाजित हो चुकी हो और निर्दिष्ट हिस्से तय हों।
विभाजन में अक्सर कुछ वर्ष लग सकते हैं। यह मामले की जटिलता पर निर्भर है।
शुद्ध और सत्यापित दस्तावेज विभाजन के लिए आवश्यक होते हैं। गलत जानकारी से बचना चाहिए।
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