भारत में सर्वश्रेष्ठ जैव-प्रौद्योगिकी वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
रांची, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
J.P. GADIYA & Associates
ठाणे, भारत

English
जे.पी. गड़िया एंड एसोसिएट्स एक प्रतिष्ठित भारतीय लॉ फर्म है जो विभिन्न अभ्यास क्षेत्रों में अपने व्यापक कानूनी...
Chambers Of George Rebello
मुंबई, भारत

1991 में स्थापित
English
दिवंगत श्री जॉर्ज ए. रेबेलो द्वारा तीन दशकों से अधिक समय पहले स्थापित, जॉर्ज रेबेलो के चैंबर्स ने अपनी प्रारंभिक...
मुंबई, भारत

2021 में स्थापित
English
जैन लॉ पार्टनर्स एलएलपी (जेडएलपी), जिसकी स्थापना 2021 में हुई थी, मुंबई, भारत में स्थित एक पूर्ण-सेवा कानून फर्म है, जो...
CHANDRAKANT M JOSHI
मुंबई, भारत

1968 में स्थापित
English
मिस्टर चंद्रकांत एम. जोशी द्वारा 1968 में स्थापित, विधिक फर्म CHANDRAKANT M JOSHI विशेष रूप से बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के...
मुंबई, भारत

English
Court Case Diary (CCD) Jevon Software का एक इन-हाउस उत्पाद है जो वकीलों को उनके केस डायरी को उनकी उंगलियों पर आसान और प्रभावी तरीके से...
Ackno Legal Firm
देहरादून, भारत

2015 में स्थापित
English
अक्नो लीगल फर्म एक पूर्ण सेवा भारतीय कानूनी फर्म है जिसकी स्थापना 2015 में नई दिल्ली में मुख्यालय और देहरादून में एक...
Legal Luminaries LLP
हैदराबाद, भारत

2017 में स्थापित
English
Legal Luminaries LLP, 2017 में स्थापित, हैदराबाद, तेलंगाना, भारत में आधारित एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है। यह फर्म पारिवारिक कानून,...
UBR LEGAL ADVOCATES
मुंबई, भारत

2015 में स्थापित
English
यूबीआर लीगल एडवोकेट्स, जिसकी स्थापना 12 जून 2015 को मैनेजिंग पार्टनर श्री भरत रैचंदानी के नेतृत्व में की गई थी, भारत...
जैसा कि देखा गया

भारत में जैव-प्रौद्योगिकी कानून के बारे में

भारत में जैव-प्रौद्योगिकी कानून एक बहु-एजेंसी ढांचा है. बड़े पैमाने पर जीव-जनित संशोधन, परीक्षण या रिलीज के लिए नियोजन और अनुमोदन अनिवार्य रहते हैं. प्रमुख नियंत्रण GEAC, NBA और CDSCO से जुड़े हैं.

यह ढांचा पर्यावरण सुरक्षा, जैव विविधता के संवर्धन और स्वास्थ्य-उत्पादों के नियमन को समेटता है. कानून का उद्देश्य सुरक्षा, नैतिकता और लाभ-साझाकरण सुनिश्चित करना है. स्थानीय उद्योगों के लिए अनुपालन-निर्धारण स्पष्ट नियमों के तहत होता है.

हाल के वर्षों में जैव-प्रौद्योगिकी विनियमन पर BRAI जैसे प्रस्ताव विधायिका में चर्चा के केन्द्र में रहे हैं. अभी तक एक संपूर्ण कानून नहीं बना है, पर नीति-निर्माताओं ने नियम-रेखा विकसित की है. भारत निवासियों के लिए व्यावहारिक सलाह है कि वे अनुपालन गाइड-लाइनें नियमित रूप से देखें.

“The Environment Protection Act, 1986 provides for the protection and improvement of environment and for matters connected therewith.” - Ministry of Environment, Forest and Climate Change
“The Biological Diversity Act, 2002 aims at the conservation of biological diversity, sustainable use of its components and fair and equitable sharing of benefits arising from the use of biological resources.” - Department of Biotechnology
“The National Ethical Guidelines for Biomedical and Health Research Involving Human Participants emphasize protecting the rights, safety and well-being of research participants.” - ICMR

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

क्या आप जैव-प्रौद्योगिकी से जुड़ी कानूनी कार्रवाई में फँस रहे हैं? यहाँ 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए जा रहे हैं जिनमें वकील की जरूरत पड़ती है. भारत के वास्तविक उदाहरण इन स्थितियों में स्पष्ट रूप से सामने आते हैं.

जैव-प्रौद्योगिकी उत्पाद को इम्पोर्ट, एक्सपोर्ट या बड़े स्तर पर रिलीज के लिए नियामक अनुमोदन की प्रक्रिया स्पष्ट करनी हो?

GEAC, EP Act 1986 और GM Rules के अंतर्गत प्रमाणीकरण आवश्यक है. उचित दस्तावेज, जोखिम आकलन और हितधारक असहमति के समाधान जरूरी होते हैं.

स्टेम सेल, जीन-थेरेपी या क्लोनिंग से जुड़ी नैतिकता और नियमन के अनुसार मंजूरी चाहिए?

ICMR के नैतिक Guidelines और CDSCO के स्वास्थ्य-उत्पादन नियम चलते हैं. अनुसंधान योजनाओं का ethically clear और regulatory compliant होना आवश्यक है.

जैव विविधता संसाधनों के उपयोग, पंजीकरण और लाभ-साझाकरण के नियम स्पष्ट चाहिए?

Biological Diversity Act 2002 के तहत NBA से एक्सेस परमिशन और लाभ-साझाकरण अनुबंध अनिवार्य होते हैं. किसी तरह के लाभ-खर्च की विश्वसनीय व्यवस्था बनानी होती है.

जैव-प्रौद्योगिकी पेटेंट और IP सुरक्षा के लिए कानूनी सलाह चाहिए?

3j नियम, पेटेंट आवेदन की प्रक्रियाएं और मौजूदा बौद्धिक संपत्ति सुरक्षा संरचना समझनी चाहिए. ठोस दस्तावेजीकरण और सर्वाधिक मजबूत दावेन आवश्यक हैं.

उद्योग-स्तर अनुपालन, लाइसेंसिंग और निगरानी के संदर्भ में कानूनी सहायता चाहिए?

कंपनी सेट-अप, लाइसेंस-अनुमोदन, संशोधन और वार्षिक दाखिले जैसे कदमों में अधिवक्ता मार्गदर्शन देते हैं. नियमानुसार अद्यतन रखना जरूरी है.

स्थानीय कानून अवलोकन

भारत में जैव-प्रौद्योगिकी को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानूनों के बारे में किया गया संक्षिप्त अवलोकन नीचे दिया गया है.

Environment Protection Act, 1986 किस प्रकार जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र को कवर करता है?

EP Act 1986 पर्यावरण संरक्षण के लिए कानूनी ढांचा देता है. GEAC जैसे निकाय इसAct के अंतर्गत बड़े स्तर के परीक्षण और रिलीज को नियंत्रित करते हैं. आधिकारिक नियमावली के अनुसार जैव-खतरे वाले कार्यों पर अनुकूलन आवश्यक है.

Biological Diversity Act, 2002 जैव विविधता संसाधनों के एक्सेस और लाभ-साझाकरण को कैसे नियंत्रित करता है?

यह कानून जैव संसाधनों की पहचान, एक्सेस परमिशन और लाभ-साझाकरण के लिए NBA के नियम बनाता है. स्थानीय समुदायों के अधिकार और पारिस्थितिकी-संतुलन के संरक्षण का ध्यान रखा जाता है.

Hazardous Microorganisms Rules, 1989 में जैव-उत्पादन के सुरक्षा मानक क्या हैं?

GM Rules 1989 के अनुसार Hazardous Microorganisms तथा Cells के उपयोग के लिए अनुसंधान-उद्योगों को सुरक्षा-प्रोटोकॉल और अपशिष्ट-नियंत्रण लागू करना होता है. esto<|> यह नियम जैव-खतरे के नियंत्रण हेतु आवश्यक अनुपालन बताते हैं.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जैव-प्रौद्योगिकी कानून क्या है?

यह बहु-एजेंसी ढांचा है जो पर्यावरण, जैव विविधता और स्वास्थ्य-उत्पाद के नियमन को समाहित करता है. GEAC, NBA, CDSCO प्रमुख निकाय हैं.

GEAC क्या है और किन के लिए है?

GEAC(Environment Protection Act 1986) के अंतर्गत apex-समिति है. यह बड़े स्तर पर GE प्रयोगों के लिए अनुमोदन देती है. अनुमोदन से पहले जोखिम आकलन जरूरी है.

BRAI बिल क्या है और कब तक लागू होता?

BRAI भारत में जैव-प्रौद्योगिकी उत्पादों के Regulation एन्ड नियंत्रण के लिए प्रस्तावित Authority है. अभी तक बहुप्रतीक्षित कानून नहीं बना है. नीति-निर्माताओं ने ढांचे पर चर्चा जारी रखी है.

स्टेम सेल और जीन-थेरेपी के लिए नैतिक अनुमतियाँ कैसे मिलती हैं?

ICMR Guidelines और CDSCO के दिशानिर्देश मार्गदर्शन करते हैं. अध्ययन-डिज़ाइन और मानव-भागीदारी की सुरक्षा सर्वोपरि रहती है.

जैव विविधता कानून के अंतर्गत लाभ-साझाकरण कैसे तय होता है?

NBA से एक्सेस परमिशन आवश्यक है. संसाधन का उपयोग स्थानीय समुदायों के अधिकारों के अनुरूप किया जाना चाहिए. संविदात्मक समझौते सुरक्षा देते हैं.

क्या जैव-प्रौद्योगिकी के लिए पेटेंट संभव है?

Patents Act की धारा 3jPlants और Animals को प्रत्यक्ष पेटेंट से बाहर रखती है. माइक्रो-ऑर्गैनिज्म के लिए परिस्थितियाँ देखी जाती हैं. उपकरण और प्रक्रियाओं पर पेटेंट संभव हो सकता है.

GM फसलों के बारे में कानूनी स्थिति क्या है?

भारत में Bt Cotton को 2002 में GEAC ने अनुमति दी थी. Bt Brinjal जैसी फसलों के विकास पर निर्णय सार्वजनिक रूप से चर्चित रहा है.

विदेशी फंडिंग और सहयोग के लिए क्या कदम जरूरी हैं?

Foreign contributions और निवेश के नियमों के अनुसार FCRA और संबंधित प्रावधानों का पालन करना होता है. प्रोजेक्ट-वार अनुमतियाँ आवश्यक रहती हैं.

जैव-संस्थानों के लिए सबसे आम अनुपालन चुकाने कौन से हैं?

LICENCE, रजिस्ट्रेशन, और सुरक्षा-अनुदान के नियमित दाखिले प्रमुख हैं. गलत-जानकारी पर दंड और परमिशन-रद्दी हो सकती है.

स्टेम सेल अनुसंधान में क्या सीमाएं हैं?

कानूनी और नैतिक मानक सबसे ऊपर होते हैं. भ्रूण-उत्पत्ति के अनुसंधान पर विशेष अनुमतियाँ और निगरानी आवश्यक है.

जैव-डायवर्सिटी के क्षेत्र में नागरिक कैसे सुरक्षित रहें?

स्थानीय नियमों के अनुसार एक्सेस और लाभ-साझाकरण के लिए NBA-संरचना से अवगत रहें. अनुचित दावा-नुकसान से बचना चाहिए.

अतिरिक्त संसाधन

जैव-प्रौद्योगिकी से संबंधित प्रशस्त जानकारी और मार्गदर्शन के लिए नीचे 3 प्रतिष्ठित संगठन दिए गए हैं.

  • Department of Biotechnology (DBT), Government of India - https://dbtindia.gov.in
  • Indian Council of Medical Research (ICMR) - https://www.icmr.nic.in
  • National Biodiversity Authority (NBA) - https://nbaindia.org

अगले कदम

  1. अपने अनुसंधान या उत्पाद के प्रकार स्पष्ट करें कि क्या यह जैव-उत्पादन, स्वास्थ्य उत्पाद या जैव विविधता से जुड़ा है.
  2. कौन-कौन से नियामक निकाय इकाई से संबंध रखते हैं, यह पहचानें और उनके नियम पढ़ें.
  3. अपने उद्देश्य के लिए दस्तावेज, जोखिम आकलन और नैतिक-पत्र तैयार रखें.
  4. कानूनी सलाहकार से पूर्व-योग्यता और विशेषज्ञता की पुष्टि करें.
  5. Bar Council of India के मानक प्रमाण-पत्र और क्लायंट रिफरेंस देखें.
  6. कम-से-कम 2-3 कानून-विरोधी और 2-3 प्रशंसक संस्थाओं से साक्षात्कार करें.
  7. फीस-स्तर, समयसीमा और आउट-ऑफ-पीक सहायता के बारे में स्पष्ट लिखित समझौता करें.

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