हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ लेखांकन और ऑडिट वकील

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Oberoi Law Chambers
हरियाणा, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
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फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
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हरियाणा, भारत में लेखांकन और ऑडिट कानून का संक्षिप्त अवलोकन

हरियाणा में लेखांकन और ऑडिट के प्रमुख नियम केंद्रीय कानून द्वारा संचालित होते हैं। राज्य में कोई विशेष स्वतंत्र कानून नहीं है, पर केंद्रीय कानून हरियाणा क्षेत्र पर ही लागू होते हैं।

मुख्य सतर्कताएं MCA, ICAI, RBI और GST विभाग से जुड़ी होती हैं। ये संस्थान हरियाणा के व्यवसायों के लिए अनुपालन मानक तय करते हैं।

“The Companies Act 2013 is the primary law governing corporate affairs in India.”
“Ind AS is the set of accounting standards converged with IFRS used by Indian companies.”
“Tax audit under section 44AB applies to certain businesses and professions as per the Income Tax Act.”

इन नियमों के अनुसार हरियाणा के कंपनियाँ, विभागीय पंजीकरण से लेकर सालाना वित्तीय विवरण दाखिल करने तक सभी मानकों का पालन करती हैं।

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

हरियाणा में लेखांकन और ऑडिट से जुड़ी अधिकांश समस्याओं के लिए उपयुक्त कानूनी सलाह आवश्यक होती है।

  1. नया व्यवसाय शुरू करने पर सही पंजीकरण, खाता-पुस्तिका और पुस्तकों की संरचना निर्धारित करनी हो।
  2. कंपनी अधिनियम 2013 के अनुसार ऑडिटर नियुक्ति, ऑडिट रिपोर्ट और वार्षिक रजिस्टर दाखिले में सहायता चाहिए।
  3. GST, आयकर और CSR आदि केंद्रीय कर नियमों के अनुपालन में जटिलताओं का समाधान चाहिए।
  4. हरियाणा-आधारित कॉन्ट्रैक्ट और बिज़नेस-डायवर्जन के कारण कॉन्ट्रैक्ट-लॉकिंग और dispute का निपटारा चाहिए।
  5. कंपनी-सीमाओं के भीतर आंतरिक नियंत्रण और नैतिक आडिट के मामलों में सलाह चाहिए।
  6. हाइलाइटेड CSR-प्रत्यायोजनों, रिपोर्टिंग, और फाइन-शोल्डिंग से जुड़ी गाइडेंस चाहिए।

हरियाणा में स्थानीय केसों के उदाहरण सामने आने पर कानूनविद, कॉन्टैक्ट-वर्कर्स और क्षेत्रीय स्तर के उद्योग-समितियों के साथ संयुक्त सलाह अधिक प्रभावी होती है।

स्थानीय कानून अवलोकन

हरियाणा में लेखांकन और ऑडिट से जुड़ी परिसीमा के लिए प्रमुख कानून नीचे दिए गए हैं।

  • Companies Act 2013 - कंपनियों के गठन, प्रशासन, ऑडिट तथा वित्तीय स्टेटमेंट के लिए केंद्रीय कानून।
  • Income Tax Act 1961 और अब गोलीबारी-आशय के साथ 44AB टैक्स ऑडिट नियम
  • Goods and Services Tax Act 2017 - समस्त माल और सेवाओं केकर सेGST के लिए अनुपालन और रिटर्निंग

हरियाणा में cooperative societies के लिए राज्य अधिनियम भी प्रभावी है, जिसका ऑडिट और लेखा-जोखा नियम स्थानीय संघों के लिए अनुकूल होते हैं।

हाल के परिवर्तन में Schedule III के वित्तीय विवरण फॉर्मैट के सुधार और disclosures में विस्तार शामिल है।

उद्धरण:

“Schedule III amendments enhance disclosure requirements for true and fair presentation.”

Source: Ministry of Corporate Affairs (MCA) and Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) guidance.

आमतौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा में लेखांकन और ऑडिट के लिए कौन-कौन से प्रमुख कानून लागू होते हैं?

केंद्रीय कानून, विशेषकर Companies Act 2013, Income Tax Act 1961 और GST Act 2017 लागू होते हैं। राज्य-स्तर पर Cooperative Societies Act भी मायने रखता है।

किस सूरत में मुझे पंजीकरण कराना या ऑडिट करवाना आवश्यक है?

कंपनी को वैधानिक ऑडिट के लिए ऑडिटोर चाहिए होता है। CSR-योग্য कंपनियाँ CSR रिपोर्ट भी प्रस्तुत करती हैं।

हरियाणा में कौन से ऑडिटकर्ता कानून-आधारित रूप से मान्य होते हैं?

कॉन्ट्री-टर्न key-प्रावधानों के अनुसार पंजीकृत Chartered Accountant (CA) को ऑडिट करना होता है।

मैं GST और आयकर से जुड़ी गलतियों को कैसे रोक सकता हूँ?

GAAP और GST-नियमों के अनुपालन से. जमा-रिपोर्टिंग समय पर करें, और रिटर्निंग सही रखें।

CSR से जुड़ी जानकारी Haryana-स्थित कंपनियों के लिए कैसे लागू होती है?

CSR-धाराओं के अनुसार योग्यता-घटक कंपनियाँ CSR गतिविधियों के लिए आवंटित फंड का विवरण देना होता है।

अगर मेरी कंपनी Haryana के बाहर पंजीकृत है तो क्या नियम बदल जाते हैं?

प्रधान नियम केंद्रीय हैं; Haryana-स्थित व्यवसाय पर स्थानीय रिकॉर्ड-रिपोर्टिंग और पंजीकरण आवश्यक हो सकता है।

कौन-सी स्थिति में आंतरिक ऑडिट आवश्यक है?

कई कंपनियों के लिए 138-के अंतर्गत आंतरिक ऑडिट अनिवार्य होता है; यह निर्भर करता है कंपनी के आकार और गतिविधियों पर।

क्या हरियाणा में कॉपरेटिव सोसाइटी में ऑडिट की बाध्यता है?

हाँ; हरियाणा Cooperative Societies Act के अनुसार सोसाइटियाँ ऑडिट कराती हैं और कुछ स्थितियों में वार्षिक रसीदें दाखिल करती हैं।

कौन सा ऑडिटिंग स्टैंडर्ड हरियाणा पर लागू होता है?

ICAI के संस्थागत मानक, भारतीय GAAP, Ind AS और IFRS-समकक्ष मानक लागू होते हैं।

क्या मैं कानूनी मदद के बिना अपने ऑडिट-वर्क को संभाल सकता हूँ?

संभावनाएँ सीमित रहती हैं। अनुभवी advokat/वकील से अस्सी-से-नब्बे प्रतिशत मामलों में मार्गदर्शन जरूरी होता है।

हरियाणा में किस प्रकार के दस्तावेज़ ऑडिट के लिए जरूरी होते हैं?

कंपनी फाइलिंग-डाक्यूमेंट्स, बैंक स्टेटमेंट्स, इनकम-टैक्स रिकॉर्ड, GST रिटर्न और CSR रिपोर्ट आवश्यक हो सकते हैं।

अतिरिक्त संसाधन

  • Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) - https://www.icai.org/
  • Ministry of Corporate Affairs (MCA) - https://www.mca.gov.in/
  • Income Tax Department - https://www.incometaxindia.gov.in/

अगले कदम

  1. अपना उद्देश्य तय करें-कंपनी पंजीकरण, ऑडिट, टैक्स, CSR आदि कौन सा क्षेत्र है।
  2. हरियाणा के लिए उपयुक्त कानूनी सलाहकार खोजें-कानूनी फर्म, CA फर्म या स्वतंत्र advokat से संपर्क करें।
  3. कानूनी दस्तावेज़ एकत्र करें-पंजीकरण प्रमाणपत्र, रजिस्टर ऑफ कंपनीज़, वित्तीय रिकॉर्ड, GST रिटर्न आदि।
  4. आवश्यक ऑडिट प्रकार तय करें- statutory audit, internal audit या tax audit।
  5. अनुपालन मानक समझें-Schedule III, Ind AS या GAAP की समझ बनाएं।
  6. पूर्व-ऑडिट चेकलिस्ट बनाएं-डिस्क्लोजर, आंतरिक नियंत्रण, रिकॉर्ड-कैप्चरिंग चेक करें।
  7. अनुपालन-टाइमलाइन बनाएं-ROC फाइलिंग और आईटी रिटर्न दाखिले की समयसीमा निर्धारित करें।

उद्धरण

“The Companies Act 2013 is the primary law governing corporate affairs in India.”
“Ind AS is the set of accounting standards converged with IFRS used by Indian companies.”
“Tax audit under section 44AB applies to certain businesses and professions as per the Income Tax Act.”

संशोधित और अद्यतन जानकारी के लिए आप निम्न आधिकारिक साइटों को बार-बार देखें:

  • Ministry of Corporate Affairs (MCA) - https://www.mca.gov.in/
  • Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) - https://www.icai.org/
  • Income Tax Department - https://www.incometaxindia.gov.in/
  • GST Portal - https://www.gst.gov.in/

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अस्वीकरण:

इस पृष्ठ पर दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। हम सामग्री की सटीकता और प्रासंगिकता सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन कानूनी जानकारी समय के साथ बदल सकती है, और कानून की व्याख्या भिन्न हो सकती है। आपको अपनी स्थिति के लिए विशिष्ट सलाह हेतु हमेशा एक योग्य कानूनी पेशेवर से परामर्श करना चाहिए।

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