जम्मू में सर्वश्रेष्ठ लेखांकन और ऑडिट वकील

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ADV HARPREET SINGH AND ASSOCIATES
जम्मू, भारत

2022 में स्थापित
उनकी टीम में 19 लोग
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अधिवक्ता हरप्रीत सिंह: जटिल कराधान और कॉर्पोरेट विधि में एक भरोसेमंद कानूनी रणनीतिकारविधिक जटिलताओं की निरंतर...
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1. जम्मू, भारत में लेखांकन और ऑडिट कानून के बारे में: जम्मू, भारत में लेखांकन और ऑडिट कानून का संक्षिप्त अवलोकन

जम्मू- कश्मीर UT में लेखांकन और ऑडिट के नियम मुख्यतः केंद्र सरकार के कानूनों के अनुसार चलते हैं। केंद्र के MCA, CBDT और GST नीति इन नियमों को सीधे लागू करते हैं। कुछ मामलों में Ind AS लागू होते हैं, खासकर बड़ी कंपनियों पर।

स्थानीय अनुपालन में कंपनी पंजीकरण, ऑडिट रिपोर्ट और सभी वित्तीय विवरणों की प्रस्तुति शामिल है। साथ ही आयकर और जीएसटी नियमों के अनुरूप टैक्स ऑडिट और रिटर्न फाइलिंग जरूरी होती है। छोटे व्यवसायों के लिए भी सही रिकॉर्डिंग और आडिट अनिवार्य हो सकता है।

हाल के परिवर्तनों में जम्मू- कश्मीर UT के प्रशासनिक परिवर्तन के साथ केंद्रीय कानूनों का प्रभाव बना रहा है। इस क्षेत्र में कारोबारी संरचना भी बदली है, जिससे नियामक सहयोग और Compliance चेन daha स्पष्ट हुई है।

उद्धरण: "The audit of the financial statements of every company shall be conducted by a Chartered Accountant."

Source: The Companies Act, 2013 - Ministry of Corporate Affairs (MCA) - https://www.mca.gov.in

उद्धरण: "Auditors must comply with the Standards on Auditing issued by the Institute of Chartered Accountants of India."

Source: Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) - https://www.icai.org

उद्धरण: "Tax audit under section 44AB is mandatory for specified businesses."

Source: Central Board of Direct Taxes (CBDT) - https://www.incometaxindia.gov.in

व्यावहारिक संकेतिक सुझाव (जम्मू निवासियों के लिए): केंद्र के नियमों के अनुसार अपने कारोबार का पंजीकरण समय पर कराएं। वर्ष-वार ऑडिट और आयकर ऑडिट की तैयारी शुरू करें। ऑडिटर्स और कानूनी सलाहकार से प्रारम्भिक बैठक में अपने उद्योग के निर्गम मानदंड स्पष्ट करें।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: लेखांकन और ऑडिट कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं

परिदृश्य 1: जम्मू में एक निजी कम्पनी ने हाल ही में Regulary thresholds पार कर लिए हैं और Ind AS रोलआउट के अंतर्गत बदलाव चाहिए। कानूनी सलाहकार के साथ Ind AS से GAAP तक के अनुपालन मार्गदर्शन की जरूरत होगी।

परिदृश्य 2: जम्मू में Cooperative Society पंजीकरण और संचालन के लिए Co-operative Societies Act के अधीन अनुपालनों का पालन कर रही है। Registrar of Co-operative Societies के साथ दाखिले और ऑडिट संबंधी कानूनी सलाह आवश्यक होगी।

परिदृश्य 3: उत्पादन इकाई के लिए आयकर विभाग के अधीन 44AB टैक्स ऑडिट अनिवार्य है। स्थानीय कर कानून और ऑडिट पद्धतियों के किस भाग में कानूनी मार्गदर्शन चाहिए, यह स्पष्ट करना होगा।

परिदृश्य 4: जम्मू- कश्मीर UT में जीएसटी पंजीकृत व्यापारी के लिए जीएसटी ऑडिट और फाइलिंग के लिए GST Act के अंतर्गत आवश्यकताओं को स्पष्ट करने के लिए कानूनी सलाहकार की जरूरत होगी।

परिदृश्य 5: एक स्थानीय चैरिटेबल ट्रस्ट में 12A और 80G जैसी मानदंडों के अनुरूप पंजीकरण और अनुपालन की जरूरत हो। स्थानीय ऑडिट, दान रिकॉर्डिंग और नियामक दाखिले के लिए कानूनी सहायता उचित होगी।

परिदृश्य 6: जम्मू में एक व्यवसाय cross border operations चलाता है और transfer pricing, inter company व्यय आदि मामले हैं। इन मामलों में ADVOCATE द्वारा उचित रणनीति और दस्तावेजीकरण आवश्यक होगा।

परिदृश्य 7: कोई स्टार्टअप या SME है जो वर्ष-वार ऑडिट ऑडिटर्स के चयन में देरी कर रहा है या स्वतंत्र आडिट मानक (ISA) की पूर्ण अनुपालना सुनिश्चित नहीं कर रहा। नियुक्ति और कॉन्ट्रैक्टिंग के लिए कानूनी सहायता लाभदायक होगी।

व्यावहारिक टिप्स: जम्मू में कानूनी सलाहकार चुनते समय स्थानीय ROC filings, Cooperative Department और Tax Department के साथ अनुभव देखते रहें। इंड AS, 44AB और GST के क्षेत्र में संयुक्त सलाहकार टीम बनाएं।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: जम्मू, भारत में लेखांकन और ऑडिट को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

कम्पनी कानून - The Companies Act, 2013 के अंतर्गत संस्थाओं का ऑडिट, ऑडिटर की नियुक्ति, आडिटर के Independence और Standards on Auditing जैसी बातें निर्धारित हैं। UT जम्मू-कश्मीर पर यह केंद्रीय कानून लागू होता है।

यह कानून सभी प्रकार की कंपनियों पर ऑडिट अनिवार्य बनाता है और वार्षिक वित्तीय विवरणों की जाँच कराता है। साथ ही ऑडिटर्स के पंजीकरण और सामग्री की रिपोर्टिंग की आवश्यकताएं भी तय करता है।

आयकर अधिनियम - आयकर अधिनियम 1961 के अनुसार जिन व्यवसायों पर 44AB के अंतर्गत टैक्स ऑडिट अनिवार्य है, उनके वित्तीय रिकॉर्ड और ऑडिट रिपोर्ट के साथ आयकर रिटर्न फाइल करना होता है।

जीएसटी अधिनियम - जम्मू कश्मीर जीएसटी अधिनियम 2017 तथा केंद्रीय जीएसटी कानून लागू होते हैं। जीएसटी ऑडिट, रिटर्न और कम्प्लायंस के लिए CA या CMA की नियुक्ति जरूरी हो सकती है।

इन कानूनों के अनुसार जम्मू निवासियों के लिए स्थानीय वकील की सहायता से हर तीन चरण में अनुपालन सुनिश्चित करना व्यवहारिक है: रिकॉर्डिंग, ऑडिट, और दस्तावेजीकरण।

स्थानीय उदाहरणों में Jammu और Kashmir UT के भीतर पंजीकृत संस्थाओं के लिए Registrar of Companies, Registrar of Cooperatives, और Tax Department से समन्वय आवश्यक हो सकता है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: 10-12 प्रश्न-उत्तर जोड़े

आयकर ऑडिट कब अनिवार्य है?

आयकर अधिनियम के अनुसार 44AB के अंतर्गत टैक्स ऑडिट तब अनिवार्य है जब व्यवसाय या पेशे में निर्धारित सीमा से अधिक आय हो या निर्धारित turnover हो। जम्मू UT में यह नियम समान रूप से लागू होता है।

क्या Ind AS किस कंपनियों पर लागू होता है?

Ind AS उन कंपनियों पर लागू होते हैं जो सूचीबद्ध हैं या जिनकी कुल परिसंपत्तियाँ और नेट-वैल्यू निर्धारित मानदंड से अधिक होती हैं। बड़े निजी कंपनियाँ भी Ind AS में रिपोर्टिंग कर सकती हैं।

ऑडिट किसके द्वारा किया जाना चाहिए?

कौन व्यक्ति ऑडिट करेगा यह आम तौर पर कंपनी के शेयरहोल्डर तय करते हैं। मानक रूप से यह पात्र Chartered Accountant (CA) होता है जो ICAI के पंजीकृत सदस्य होते हैं।

GST ऑडिट कब आवश्यक है?

GST ऑडिट की आवश्यकता उन पंजीकृत व्यक्तियों पर लागू होती है जिनकी वार्षिक टर्नओवर सीमा से अधिक होती है और नियामक नियमों के अनुसार वार्षिक ऑडिट करवाया जाता है। जम्मू कश्मीर के अंतर्गत यह नियम लागू होते हैं।

J&K UT में Cooperative Societies के लिए कौन से कानून लागू होते हैं?

Cooperative Societies Act और संबंधित Rules UT में लागू होते हैं। इन संस्थाओं के लेखा-जोखा, ऑडिट और दाखिलियाँ Registrar of Co-operative Societies के अंतर्गत आती हैं।

कौन सा प्रमुख रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है?

वित्तीय पन्ने, बही-खाते, बैंक स्टेटमेंट, इन्वॉइस, कर रिटर्न और ऑडिट रिपोर्ट्स को नियमित रूप से बनाए रखना अनिवार्य है ताकि निरीक्षण के समय सभी दस्तावेज स्पष्ट रहें।

एक Not-for-Profit संस्था के लिए कर-योग्यता कैसे सुनिश्चित करें?

12A और 80G जैसी मानदंडों के अनुरूप पंजीकरण आवश्यक हो सकता है। इसके लिए रिकॉर्ड, फंड-रेजिज़्टर और आय-कर विभाग के साथ समन्वय जरूरी है।

कौन सा समय-सीमा ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की है?

ऑडिट रिपोर्ट और संबंधित फॉर्म आम तौर पर वित्तीय वर्ष के समाप्त होने के बाद तय समय-सीमाओं के भीतर दाखिल होते हैं. जम्मू क्षेत्र में भी यही समय-सीमा लागू होती है।

आउट-ऑफ-कॉम्पनी इकाइयों के लिए क्या नियम हैं?

यदि आपके समूह में विदेशी सहायक कंपनियाँ या शाखाएं हैं तो transfer pricing, intracompany शुल्क और विदेशी लेन-देन पर अतिरिक्त ऑडिटिंग आवश्यक हो सकती है।

कानूनी सलाहकार कौन-सी डिग्री रखे?

लेगल एडवाइजर या अड्वोकेट का अनुभव कॉर्पोरेट कानून, कंपनी कानून, आयकर और जीएसटी नियम में होना चाहिए। कई बार CA के साथ मिलकर काम करना प्रभावी रहता है।

व्यावसायिक निर्णय लेते समय ऑडिटर से किन बिंदुओं पर मार्गदर्शन लें?

ऑडिटर से आडिट पथ, आंतरिक नियंत्रण, जोखिम मूल्यांकन और अनुपालन के अंतर-खंडों पर स्पष्ट सलाह लें।

क्या जम्मू UT में IFRS या Ind AS चुनना चाहिए?

Ind AS को केंद्रित नियमों के अनुसार अपनाने वाले बड़े कंपनियों के लिए उचित हो सकता है। छोटे व्यवसायों के लिए GAAP पर्याप्त हो सकता है।

ऑडिटर नियुक्ति के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?

कंपनी पंजीकरण प्रमाण पत्र, पिछले वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट, शेयरहोल्डर मीटिंग के मिनट तथा लेखा-जोखा के दस्तावेज आवश्यक होते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन: लेखांकन और ऑडिट से संबंधित 3 विशिष्ट संगठन

  • Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) - https://www.icai.org
  • Ministry of Corporate Affairs (MCA) - https://www.mca.gov.in
  • Central Board of Direct Taxes (CBDT) - https://www.incometaxindia.gov.in

6. अगले कदम: लेखांकन और ऑडिट वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने व्यवसाय के प्रकार और आकार के अनुसार अनुपालन दायित्व तय करें।
  2. जम्मू क्षेत्र में अनुभव रखने वाले वकील और CA से प्राथमिक संपर्क करें।
  3. कानूनी फर्म के साथ initial consultation.Schedule करें और उद्योग-विशिष्ट प्रश्न तैयार करें।
  4. पिछले क्लाइंट टेस्टimonials और केस स्टडीज जाँचें। उनसे ड्यूरेशन, लागत और परिणाम जानें।
  5. लेगल-एक्सपर्ट और अकाउंटिंग-फर्म के साथ engagement letter पर हाँ कहें।
  6. आउट-ऑफ़-कॉम्पनी और कॉर्पोरेट-टायप ऑडिट के लिए एक थ्रेडेड टीम बनाएं जो Tax, GST और Co-operative कानून में दक्ष हो।
  7. प्रत्येक ट्रांसक्शन के लिए स्पष्ट सीधी लागत-का-फायदा विश्लेषण और समय-रेखा बनवाएं।

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