मधुबनी में सर्वश्रेष्ठ गोद लेना वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
मधुबनी, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
Hindi
English
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. मधुबनी, भारत में गोद लेना कानून के बारे में: मधुबनी, भारत में गोद लेना कानून का संक्षिप्त अवलोकन

मधुबनी जिले के निवासियों के लिए गोद लेना अधिकृत कानूनों और नियमन के अनुसार संचालित होता है। केंद्रीय कानूनों के अंतर्गत गोद लेने की प्रक्रिया समान होती है, और राज्य-स्तर पर स्थानीय नियम इसका पालन सुनिश्चित करते हैं।

गोद लेने की प्रक्रिया में काउंसलिंग, अभिभावक की सहमति, डीसीपीओ/जिला बाल सुरक्षा इकाई (DCPU) से मंजूरी, घर-आधारित आकलन और अदालत निर्देश शामिल रहते हैं। इन चरणों के लिए प्रमाण-समर्थित दस्तावेज जरूरी होते हैं।

Central Adoption Resource Authority is the nodal body for adoption of orphans, abandoned and surrendered children in India.
The Juvenile Justice Act provides for care, protection and rehabilitation of children in need of care and protection.
Adoption in India is regulated by the Juvenile Justice Act 2015 and the Adoption Regulations 2017.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: गोद लेने कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

  • परवरी सहमति के विवाद: मधुबनी जिले के कुछ मामलों में जन्म- माताओं या संरक्षित अभिभावकों की सहमति स्पष्ट नहीं होती है तथा इसे अदालत में सुदृढ़ करना पड़ता है। ऐसे में एक अनुभवी अधिवक्ता सही प्रलेखन और तर्क देता है।

  • इंटर-स्टेट या इंटर-राश्ट्रीय गोद लेना: बिहार से बाहर के राज्यों के साथ प्रक्रियात्मक फॉर्म, वेरिफिकेशन और अनुदान-धारणाओं में सलाह आवश्यक होती है।

  • घर-आधारित आकलन (होम स्टडी) और परिवारिक तइयारी: घर-आधारित आकलन की तकनीकी जटिलताओं के कारण वकील की मदद से सही रिपोर्ट बनती है।

  • कानूनी दस्तावेज़ की अंतर्दृष्टि और पंजीकरण: जन्म प्रमाण पत्र, निवासी प्रमाण, आय प्रमाण आदि के प्रामाणिकीकरण में एक कानूनी सलाहकर्ता सहयोग देता है।

  • विदेशी नागरिक द्वारा गोद लेना: विदेशी नागरिकों के लिए CARA नियमों के अनुरूप दस्तावेज and प्रक्रिया स्पष्ट करनी पड़ती है।

  • न्यायिक आदेश और अपील: गोद लेने से संबंधित आदेशों के विरुद्ध अपील या संशोधन के लिए कानूनी प्रतिनिधित्व आवश्यक हो सकता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: मधुबनी, भारत में गोद लेने को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 - यह कानून बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास के लिए मानक ढांचा देता है और गोद लेने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को निर्दिष्ट करता है।

Adoption Regulations, 2017 (CAR A द्वारा लागू) - यह केंद्रीय नियम हैं जो गोद लेने की inter-राष्ट्र/इन-स्टेट प्रक्रियाओं, आकलन, माँग-योग्यता, और अभिभावक चयन के मानक तय करते हैं।

Hindu Adoption and Maintenance Act, 1956 - हिन्दू बच्चों के लिए गोद लेना और देखभाल के लिए पुरानी वैधानिक व्यवस्था है; अन्य धर्मों के लिए वैकल्पिक कानून लागू होते हैं।

नोट: मधुबनी में इन कानूनों का अनुपालन जिला स्तर पर DCPU, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और CARA के निर्देशों के साथ सुनिश्चित होता है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोद लेना कैसे शुरू करें और कौन आवेदन दे सकता है?

गोद लेने की प्रक्रिया CARA पोर्टल से शुरू होती है। भारतीय नागरिक, विवाहित या अविवाहित व्यक्ति तथा हिन्दू-धर्म से जुड़े लोग पात्र हो सकते हैं, पर अलग-अलग परिस्थितियों में आयु एवं अन्य मानदंड तय होते हैं।

कौन से दस्तावेज़ चाहिए ہوتے हैं?

आमतौर पर पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण, आय प्रमाण, जन्म प्रमाण, माता-पिता की सहमति (यदि लागू हो), घर-आधारित आकलन नोट, और डाक्यूमेंट्स का सत्यापन जरूरी होता है।

इंटर-स्टेट गोद लेने में कितना समय लगता है?

समय अलग-अलग मामला-स्थिति पर निर्भर करता है, पर सामान्यतः 6 महीनों से 2 वर्ष तक लग सकता है जब तक आवश्यक दस्तावेज़ और प्रक्रिया पूरी हो जाए।

कौन से लोग गोद ले सकते हैं?

आमतौर पर वयस्क नागरिक, स्वस्थ आयु वर्ग के नागरिक, और कुछ विशेष स्थितियों में एकल माता-पिता भी योग्य हो सकते हैं। धर्म के आधार पर नियम क्षेत्र-विशिष्ट हो सकते हैं।

क्या विदेशी नागरिक भी गोद ले सकते हैं?

हाँ, पर यह inter-country adoption CARA के माध्यम से होता है और मंज़ूरी के कड़े मानदंड पूरे करने पड़ते हैं।

कौन सी स्थिति अस्वीकार हो सकती है?

जन्म- माता-पिता की सहमति नहीं मिलना, घर-आधारित आकलन में असफलता, या बच्चे के सर्वोत्तम हित के خلاف स्थिति स्वीकार नहीं की जाती है।

होम स्टडी क्या है और क्यों ज़रूरी है?

होम स्टडी एक स्वतंत्र आकलन है जो आवेदक के पारिवारिक वातावरण, सुरक्षा, आचार-व्यवहार आदि की जाँच करता है। यह गोद लेने के लिए जरूरी पूर्व-आकलन है।

अधिकार-स्वरूप कौन सा अदालती आदेश चाहिए?

गोद लेने के लिए कोर्ट से गोद लेने का आदेश आवश्यक होता है, जिसे स्थानीय अदालत और DCPU के साथ तय किया जाता है।

क्या गोद लेने के बाद बच्चे की पहचान बदल जाएगी?

हाँ, गोद लेने के बाद बच्चे की पहचान, नाम आदि परिवर्तन प्रक्रिया के अनुसार बदली जा सकती है और अदालत से अनुमति चाहिए होती है।

क्या गोद लेने के बाद भी जन्म माता-पिता से संपर्क संभव है?

कई मामलों में कानूनी रूप से संपर्क संभव होता है, पर यह अभिभावक और बच्चों के हित के अनुरूप होनी चाहिए और अदालत के आदेश से नियंत्रित होता है।

क्या गोद लेने के लिए आयु-सीमा निर्धारित है?

हाँ, आयु-सीमा और जोड़ी-युवा बच्चों के लिए अलग मानदंड तय होते हैं, जिसे CARA और JJ Act के अनुसार मानना पड़ता है।

स्थानीय अदालत में आवेदन कितनी अवधि में सुनवाई होती है?

यह जिला-स्तर पर निर्भर करता है, पर अक्सर 3-6 महीनों के भीतर सुनवाई शुरू हो जाती है जब सभी दस्तावेज़ पूरे हो जाते हैं।

क्या गोद लेने के लिए फोरीन कानून-परिवर्तनों का प्रभाव Madhubani पर पड़ेगा?

हां, विदेशी नागरिकों के जरिए गोद लेने के नियम CARA के अनुसार होते हैं और Madhubani के अभिभावक इसके लिए स्थानीय प्रशासन से मार्गदर्शन लेते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • CARA - Central Adoption Resource Authority - भारत की गोद लेने की आदर्श संस्था और केन्द्र सरकार का निकाय।
  • Bihar State Child Protection Society (BS CPS) - बिहार राज्य स्तर पर बाल सुरक्षा तथा गोद लेने के लिए नोडल इकाई।
  • SOS Children’s Villages of India - गोद लेने और देखभाल कार्यक्रमों में सक्रिय राष्ट्रीय संगठन।

6. अगले कदम: गोद लेना वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. CAR A empanelled adoption agencies की सूची तैयार करें और Madhubani के भीतर उपलब्ध सेवाओं का रिकॉर्ड बनाएं।

  2. अपने परिवार-परिसर, आयु-स्थिति और धर्म के अनुसार उपयुक्त कानूनी मार्ग तय करें।

  3. एक योग्य वकील या कानूनी सलाहकार से पहले-सर्वे करें; अनुभव, क्षेत्र-विशिष्ट ज्ञान और फीस-पैटर्न देखें।

  4. DCPU और जिला कोर्ट के साथ संपर्क करें; आवश्यक पत्रावली और दस्तावेज़ एकत्र करें।

  5. घर-आधारित आकलन (होम स्टडी) की तैयारी करें और वकील के साथ समन्वय करें।

  6. गोद लेने के लिए आवेदन, सहमति, और अदालत के निर्देश के अनुसार प्रक्रिया शुरू करें।

  7. समय-सीमा और न्यायिक आदेश के अनुसार आवश्यक दस्तावेज़-हस्तांतरण के लिए कदम उठाएं।

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