बिहार शरीफ़ में सर्वश्रेष्ठ अपील वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
बिहार शरीफ़, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. बिहार शरीफ, भारत में अपील कानून का संक्षिप्त अवलोकन

बिहार शरीफ में अपील कानून नागरिक, दायर मामलों और दंडात्मक मामलों के निर्णय पर पुनः विचार हेतु अदालत के समक्ष एक नया अवसर देता है। उच्च न्यायालय Patna High Court को इस क्षेत्र की सर्वोच्च अपील अदालत माना जाता है। प्रथम स्तर पर जिला अदालते और सत्र न्यायालय के निर्णयों पर आपत्ति दर्ज की जाती है।

मुख्य कानून दो शीर्ष स्रोतों पर निर्भर है: Code of Civil Procedure, 1908 (सिविल अपीलें) और Code of Criminal Procedure, 1973 (CrPC) (क्रिमिनल अपीलें)। इन कानूनों के अनुप्रयोग के लिए बिहार की स्थानीय न्यायिक संरचना-जिला न्यायालय, सत्र न्यायालय और Patna High Court-अभिन्न होते हैं।

“Subject to the provisions of this Code, an appeal shall lie from every decree passed by a Court of first instance.”
-Code of Civil Procedure, 1908, Section 96. स्रोत: indiacode.nic.in

“Any person convicted on a trial held by a Magistrate may appeal to the Court of Sessions within such time as prescribed by law.”
-Code of Criminal Procedure, 1973, Section 374. स्रोत: indiacode.nic.in

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे बिहार से जुडे़ वास्तविक परिदृश्य बताए गए हैं जहाँ एक अनुभवी अधिवक्ता जरूरी होता है।

  • पूर्ण प्रमाण-पत्र और दस्तावेजों सहित एक civil decree के खिलाफ District Court से High Court में अपील करने की स्थिति। उदाहरण: पटना जिले में एक धारण-निर्णय के विरुद्ध निर्णय वापस लेने के लिए उचित अपील दाखिल करनी हो।
  • CrPC के अंतर्गत दंडनीय मामला में फैसले के विरुद्ध उच्च न्यायालय में न्यायिक पुनर्विचार या अपील की मांग। उदाहरण: Nalanda जिला के किसी नोटिस-आदेश के खिलाफ सत्र-न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध अपील।
  • परिवारिक मामलों में तलाक, अनुसूचित संतान, या धन-संपत्ति विवाद में उच्च न्यायालय की वैधानिक पुनर्विचार याचिका दायर करनी हो।
  • भूमि राजस्व मामले में राजस्व अपीलीय प्राधिकरण या आयुक्त के विरुद्ध अपील आवश्यक हो। बिहार में भूमि-राजस्व मामलों में विशिष्ट प्रक्रियाएं लागू होती हैं।
  • कई मामलों में समय-सीमा और अपीलीय अधिकारों के बारे में धारणा स्पष्ट न हो; एक अनुभवी वकील कानून की बारीकियों को संभाल सकता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

बिहार शरीफ में अपील को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानूनों के नाम नीचे दिए गए हैं:

  1. Code of Civil Procedure, 1908 (सिविल अपीलीय प्रक्रिया) - चरणबद्ध तरीके से Decree की अपील District Court से High Court तक जाती है।
  2. Code of Criminal Procedure, 1973 (क्रिमिनल अपील) - क्रिमिनल मामले में अपीलों की प्रक्रिया और समय-सीमा तय करती है।
  3. Indian Evidence Act, 1872 - अपील के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों की वैधता और अनुपलब्धता पर मार्गदर्शन देता है।

नोट: बिहार उच्च न्यायालय के नियम और स्थानीय विरोधी आदेश भी लागू होते हैं, जो इन प्रमुख कानूनों के साथ पढ़े जाते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अपील किसके खिलाफ दायर की जा सकती है?

किसी अदालत द्वारा दिया गया निर्णय, जो प्रथम-इंस्टेंस कोर्ट का डिक्री हो या फ्यूरेबल आर्डर हो, उसके विरुद्ध अपील की जा सकती है।

अपील दायर करने की सामान्य समय-सीमा कितनी है?

आमतौर पर 30 दिनों के भीतर अपील दाखिल करनी होती है, परंतु बिहार अदालतें विशेष परिस्थितियों में समय-सीमा बढ़ाने के लिए छूट दे सकती हैं।

क्या आप एचसी के अलावा अन्य कोर्ट में भी अपील कर सकते हैं?

सामान्यतः सिविल मामलों में District Court के निर्णय पर High Court में second appeal तक जाना संभव है, और CrPC के अंतर्गत Court of Sessions या High Court तक अपील जा सकती है।

कौन से दस्तावेज आवश्यक होंगे?

डिक्री की मूल प्रति, प्रमाण-पत्र, अपील-याचिका, मतभेद-प्रमाण, और संबंधित रिकॉर्ड्स आवश्यक होते हैं।

क्या फैसले के विरुद्ध तात्कालिक राहत संभव है?

कई परिस्थितियों में stay order या अन्य अस्थायी राहत High Court से मिल सकती है; यह तात्कालिक अनुमति पर निर्भर है।

क्या बिहार में डिजिटल फाइलिंग संभव है?

नवीनतम परिवर्तन में बिहार के कई न्यायालयों ने डिजिटल-फाइलिंग और वीडियो सुनवाई शुरू की है; स्थानीय नियम देखें।

अपील के लिए कितनी लागत लग सकती है?

फीस, रिकॉर्डिंग, और दस्तावेजों की लागत मामले के प्रकार पर निर्भर करती है; एक अनुभवी अधिवक्ता अनुमान बता सकता है।

अगर समय-सीमा खो दी जाए तो क्या संभव है?

आमतौर पर समय-सीमा बढ़ाने के लिए “सुसंवेग” (पूर्व-नोटिस) आवेदन आवश्यक होते हैं; High Court द्वारा अनुमति मिलना आवश्यक है।

ऐसे कौन से कदम हैं जिन्हें पहले करना चाहिए?

विधिक सलाह, दस्तावेज़ एकत्रित करना, केस स्टोरी बनाना और सही फाइलिंग रिकॉर्ड बनाना प्राथमिक कदम हैं।

क्या वैध अपील के लिए स्थानीय कानून की जानकारी जरूरी है?

हाँ, Bihar के स्थानीय अदालतों के नियम, क्षेत्रीय संकेत और अदालत-निर्देश जानना आवश्यक है।

कौन से स्रोत विश्वसनीय हैं?

सरकारी साइट्स और हाई कोर्ट के आधिकारिक पन्नों से मिली जानकारी सबसे विश्वसनीय मानी जाती है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Patna High Court - आधिकारिक वेबसाइट और नागरिक गाइड
  • Bihar State Legal Services Authority - मुफ्त कानूनी सहायता और अपील मार्गदर्शन
  • District Legal Services Authority, Nalanda/Patna - स्थानीय उपलब्ध सहायता और क्लिनिक

ये संसाधन अपील प्रक्रियाओं, नियमों और वकीलों की मदद के लिए विश्वसनीय संपर्क प्रदान करते हैं।

6. अगले कदम

  1. अपने मामले का प्रकार स्पष्ट करें (सिविल, क्रिमिनल, या अन्य अपील).
  2. स्थानीय अदालत के नियम और समय-सीमा की पुष्टि करें.
  3. कायदे-कानून की पहचान करें: CPC 1908, CrPC 1973, आदि.
  4. काबिल वकील की खोज शुरू करें-पटना, Nalanda, Muzaffarpur आदि के विशेषज्ञों से परामर्श लें।
  5. जरूरी दस्तावेज एकत्रित करें: निर्णय की कॉपी, रिकॉर्ड, प्रमाण-पत्र आदि।
  6. पहला कानूनी परामर्श निर्धारित करें और रणनीति तय करें।
  7. डिजिटल फाइलिंग और सुनवाई की उपलब्धता की पुष्टि करें और आवश्यक फॉर्म भरें।

उद्धृत आधिकारिक स्रोतों के लिंक

Code of Civil Procedure, 1908 (Act 5 of 1908) - Section 96 और अन्य प्रमुख अनुच्छेदों के लिए:

Code of Civil Procedure, 1908 - Official text

Code of Criminal Procedure, 1973 - Section 374 आदि के लिए:

Code of Criminal Procedure, 1973 - Official text

Patna High Court - अदालती नोटिस, मार्गदर्शन और ई-फाइलिंग के बारे में:

Patna High Court - Official Site

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