कोलकाता में सर्वश्रेष्ठ आक्रमण और मारपीट वकील

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Civil law firm
कोलकाता, भारत

1988 में स्थापित
English
Six Lawyers, जिसे पहले Civil Law Firm के नाम से जाना जाता था, कोलकाता, भारत में आधारित एक विशिष्ट कानूनी फर्म है, जिसका 36 वर्षों से...
LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
कोलकाता, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
Hindi
English
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
कोलकाता, भारत

English
Legalglobus लॉ फर्म, जिसका मुख्यालय कोलकाता, भारत में है, कई अभ्यास क्षेत्रों में व्यापक कानूनी सेवाएँ प्रदान करती है।...
ANR & ASSOCIATES
कोलकाता, भारत

English
ANR & ASSOCIATES कोलकाता, भारत में स्थित एक सम्मानित विधिक फर्म है, जो वैवाहिक, नागरिक, आपराधिक, कॉर्पोरेट, संवैधानिक,...
जैसा कि देखा गया

1) कोलकाता, भारत में आक्रमण और मारपीट कानून के बारे में: कोलकाता-विशिष्ट संक्षिप्त अवलोकन

कोलकाता, पश्चिम बंगाल में आक्रमण और मारपीट के मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) से नियंत्रित होते हैं. bodily harm, शारीरिक चोट, डराने-धमकाने की क्रिया आदि सभी जगहों पर Ongत होते हैं. पुलिस के अधीन FIR दर्ज कर आगे की जांच CrPC के अनुसार होती है.

आक्रमण और मारपीट से जुड़े प्रमुख अपराधों में चोट पहुँचना (hurt) और गंभीर चोट (grievous hurt) शामिल हैं. कानून स्पष्ट करता है कि चोट पहुँचाने, धमकी देने, या सार्वजनिक स्थानों पर शारीरिक रूप से बाधा पहुँचाने पर आरोपी के विरुद्ध कदम उठाए जाते हैं. पश्चिम बंगाल में ये प्रवर्तन राज्य पुलिस के साथ केंद्रीय कानून से नियंत्रित होते हैं.

"Every information relating to the commission of a cognizable offence, if given to any police officer, or to the officer in charge of a police station, shall be reduced to writing."

स्रोत: CrPC धारा 154 के अनुसार सूचना FIR के लिए आवश्यक है. indiacode.nic.in

उद्धरण का सार यह है कि कोलकाता में हर cognizable offence पर सूचना लिखित रूप में पुलिस को दी जाती है और उसका पंजीकरण आवश्यक होता है. IPC और CrPC के धारा-नियम इन मामलों के आधार हैं.

"Section 351 IPC defines assault as making any gesture or preparation to use force against any person."

स्रोत: Indian Penal Code - Section 351 (indiacode.nic.in)

नोट: यह उद्धरण IPC के तत्वों का संक्षेप है; विस्तृत पाठ के लिएindiacode.nic.in देखें.

2) आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: कोलकाता में आक्रमण और मारपीट के कानूनी मामलों के लिए 4-6 वास्तविक-जीवंत परिदृश्य

  • परिदृश्य 1: सड़क-हुल्लड़ में एक व्यक्ति पर चोट पहुँचती है जबकि दूसरा डराने-धमकाने के इरादे से क्रिया करता है. मामला दर्ज करते समय सुरक्षा और उचित मुआवजे के लिए একজন वकील की मदद जरूरी होती है.

    यहाँ वकील आपत्तिजनक धाराओं का चयन कर, अभियोजन या बचाव के तर्क बनवाने में सहयोग देता है.

  • परिदृश्य 2: परिवार के भीतर घरेलू संघर्ष में मारपीट की घटनाएं होती हैं. धारा 323, 325, 506 के अनुसार कार्रवाई और सुरक्षा-उपाय तैयार करने के लिए कानूनी सलाह आवश्यक रहती है.

  • परिदृश्य 3: किसी ने आपको धारदार हथियार से हमला किया या आँख-नाक-गला पर चोट पहुंचाई. इस स्थिति में धारा 324/326 के साथ गंभीर चोट का आरोप लगता है; मुकदमे की तैयारी के लिए अनुभवी अधिवक्ता जरूरी होते हैं.

  • परिदृश्य 4: अपराधी ने झूठे आरोप लगाकर आपका चरित्र-उल्लंघन किया या धमकी दी. 504 और 506 जैसी धाराओं के अंतर्गत केस बनते हैं; अदालत में तर्क-सहायता के लिए वकील चाहिए.

  • परिदृश्य 5: अस्पताल, बार-गलियों या बाजार में दिन-प्रतिदिन की छेड़छाड़ के दौरान चोटें आईं. अदालत में आप्रत्यक्ष साक्ष्यों के साथ बचाव-योजनाएं बनानी पड़ती हैं.

  • परिदृश्य 6: पुलिस एफआईआर दर्ज कराने में देरी या गलत-गणना हो, तो प्रक्रिया और उपचारात्मक अधिकार समझाने के लिए वकील की आवश्यकता होती है.

उच्च-स्तरीय कानूनी सलाह और ठोस दस्तावेज़ीकरण के लिए कसौटी पर खरे आर्बिट्रेशन, फोरेंसिक-खोज और साक्ष्यों के संकलन में एक अनुभवी advpocate मदद कर सकता है।

3) स्थानीय कानून अवलोकन: कोलकाता, भारत में आक्रमण और मारपीट को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

  • Indian Penal Code (IPC) धारा 351 (Assault), 323 (Voluntarily causing hurt), 324 (Voluntarily causing hurt by dangerous weapon), 325-326 (Grievous hurt एवं dangerous weapon के साथ), 506 (Criminal intimidation), 354 (Sexual offences-related) आदि का समुच्चय. ये धाराएं सार्वजनिक सुरक्षा और निजी सुरक्षा दोनों के लिए प्रासंगिक हैं.
  • Criminal Procedure Code (CrPC) धारा 154 (FIR दर्ज कराने की सूचना), 161-162 (Witness examination), 200 (Complainant’s deposition before magistrate) आदि का क्रमिक प्रावधान. CrPC के अनुसार हर cognizable offence पर FIR दर्ज करने की प्रक्रिया स्थापित है.
  • Private Defence Provisions IPC के धाराओं 96-106 के तहत निजी रक्षा का अधिकार है. यदि आप अपने आप को या अपने प्रॉपर्टी को संरक्षित करने के लिए उचित मात्राओं में रक्षा करते हैं, तो कुछ स्थितियों में अभियोग से मुक्त हो सकते हैं.

उद्धरण स्रोत एवं पाठ्य संदर्भों के लिए देखें: indiacode.nic.in

4) अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न? आक्रमण और मारपीट के अपराध कौन से दर्ज़ होते हैं?

आक्रमण, धक्का-मुक्की और चोट पहुंचाने जैसी घटनाएं IPC के अंतर्गत आक्रमण (Section 351), चोट (Section 323) और गंभीर चोट (Sections 325-326) के रूप में दर्ज हो सकती हैं. CrPC के अनुसार FIR दर्ज कराई जाती है.

प्रश्न? अगर मैं प्रतिरक्षा कर रहा हूँ तो क्या बच सकता हूँ?

निजी रक्षा के लिए Section 96-106 के अंतर्गत उचित भावुक-स्तर की रक्षा मान्य है. अतः यदि आपके पास तर्कसंगत कारण है, तो आपको संरक्षण मिल सकता है.

प्रश्न? पुलिस FIR दर्ज करने से पहले मुझे क्या करना चाहिए?

बचाव के लिए प्रमाण-संग्रह करें, घटना-स्थल की तस्वीरें लें, चोट-के-चिह्न, और गवाहों के नाम नोट करें. यह क्रिया FIR के लिए मजबूत आधार बनाती है.

प्रश्न? अगर मुझे गलत धाराओं में फंसाया गया है तो क्या करूँ?

कानूनन उपलब्ध अधिकारों के अनुसार आप अपने वकील के साथ धारा-प्रतिशोध (challenging) और आवश्यक संशोधन के लिए आवेदन कर सकते हैं. उचित धाराओं की पुनर्विचार कराई जा सकती है.

प्रश्न? कोलकाता में किस प्रकार का कानूनी सहयोग मुफ्त मिल सकता है?

पश्चिम बंगाल स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (WB SLSA) और NALSA के अंतर्गत नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध है. आप जिला डिविजन DLSA से संपर्क कर सकते हैं.

प्रश्न? चोट लगने पर मेडिकल-एविडेन्स कैसे सुरक्षित रखें?

चिकित्सक के पास जाकर मेडिकल-चेकअप करवाएं, गोली-चिप्स की तस्वीरें बनवाएं और डाक्यूमेंट्स संभाल कर रखें. यह सब प्रमाण के रूप में उपयोगी होगा.

प्रश्न? क्या मैं कानूनी सलाह के बिना अदालत में पाहुच सकता हूँ?

हाँ, आप अदालत में भाग ले सकते हैं, पर एक वकील की सलाह से बेहतर सुरक्षा, प्रस्तुतिकरण और तर्क-योजना संभव है.

प्रश्न? क्या स्थानीय पुलिस मुझे उचित सहायता देगी?

सामान्यतः पुलिस FIR दर्ज करेगी और आवश्यक जांच शुरू करेगी. यदि कोई कठिनाई हो, तब उच्च-स्तरीय शिकायत-आयुक्त से संपर्क करें.

प्रश्न? शिकायत दर्ज कराने के बाद मुझे कितनी देर तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है?

यह मामले-पर-स्थिति पर निर्भर करता है: FIR के बाद जांच में कुछ सप्ताह तक समय लग सकता है और अदालत में सुनवाई समय भी बदलावपूर्ण हो सकता है.

प्रश्न? क्या जिला-स्तरीय कानूनी सहायता उपलब्ध है?

हाँ, Kolkata DLSA और WB SLSA के माध्यम से स्थानीय स्तर पर नि:शुल्क कानूनी सहायता मिलती है.

प्रश्न? माता-पिता के विरुद्ध घरेलू हिंसा के मामले में क्या प्रावधान हैं?

घरेलू हिंसा के मामलों में Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 के अंतर्गत सुरक्षा-ऑर्डर और अन्य उपाय उपलब्ध हैं. यह आक्रमण-आरोप में अलग से न्याय दे सकता है.

5) अतिरिक्त संसाधन: आक्रमण और मारपीट से जुड़े 3 विशिष्ट संगठन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता और obj vältव प्रणाली. nalsa.gov.in
  • West Bengal State Legal Services Authority (WB SLSA) - पश्चिम बंगाल के लिए राज्य-स्तरीय कानूनी सहायता कार्यक्रम. wbslsa.gov.in
  • Kolkata District Legal Services Authority (Kolkata DLSA) - जिला स्तर पर मुफ्त सहायता और प्रतीक्षा-लिस्टिंग. (उल्लेख)

नोट: स्थानीय जानकारी के लिए WB SLSA और DLSA साइट्स देखें और आपातकालीन मदद के लिए स्थानीय पुलिस से संपर्क करें.

6) अगले कदम: आक्रमण और मारपीट वकील खोजने के 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. तुरंत सुरक्षा सुनिश्चित करें; चोट के इलाज हेतु अस्पताल जाएँ और दस्तावेज़ सुरक्षित रखें.
  2. FIR दर्ज कराने के लिए नजदीकी थाने में जाएँ; CrPC धारा 154 के अनुसार सूचना दें.
  3. कानूनी सलाह के लिए अनुभवी वकील से संपर्क करें; IPC और CrPC के ज्ञान वाले एडवोकेट चुनें.
  4. अपने केस-डायरेक्टरी बनाएं: घटना-समय, स्थान, प्रत्यक्ष-दर्शी, चोट-चिह्न, चिकित्सा प्रमाण-पत्र इकट्ठा करें.
  5. वकील के साथ दलीलों की रूपरेखा बनाएं; कौन-सी धाराएं लगनी चाहिए और बचाव-तर्क क्या होंगे, सोचें.
  6. सबूतों को व्यवस्थित रखें: CCTV, मोबाइल रिकॉर्डिंग, संदेश, आवाज-रिकॉर्डिंग आदि।
  7. आवश्यक हो तो बाय-लॉ-केयर या स्टेट-लीगल-सेवा से नि:शुल्क सहायता भी देखें.

संदर्भ/आधिकारिक स्रोत

The Indian Penal Code (IPC) और The Code of Criminal Procedure (CrPC) के आधिकारिक पाठ के लिए देखें: indiacode.nic.in

FIR और cognizable offence के बारे में निर्देश: NALSA और WB SLSA

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