मुंबई में सर्वश्रेष्ठ आक्रमण और मारपीट वकील

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Solicis Lex
मुंबई, भारत

2013 में स्थापित
English
Solicis Lex एक तेजी से विस्तार कर रही भारतीय लॉ फर्म है, जो व्यक्तियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों...
मुंबई, भारत

English
JNA LAW भारत का एक प्रतिष्ठित विधि फर्म है, जो विभिन्न अभ्यास क्षेत्रों में अपने व्यापक विधिक सेवाओं के लिये विख्यात...
Kota Law Associates
मुंबई, भारत

English
कोटा लॉ एसोसिएट्स, हैदराबाद, भारत में स्थित एक पारिवारिक स्वामित्व वाला कानून फर्म है जो मूल मुकदमेबाजी, अपीलीय...
Ramkrishna Law Firm and Research Centre
मुंबई, भारत

उनकी टीम में 22 लोग
English
कर्नाटक के बेलगावी जिले के चिकोडी में स्थित, रामकृष्ण लॉ फर्म और रिसर्च सेंटर एक गैर-पंजीकृत लॉ फर्म के रूप में...
Adv K M Santhoshkumar and Associates
मुंबई, भारत

1994 में स्थापित
English
एडवोकेट के एम संकेतॉसकुमार एंड असोसिएट्स, 1994 में स्थापित, कोट्टायम, केरल स्थित एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है। तीन दशकों...
Falcon Legal Advocates & Solicitor
मुंबई, भारत

2016 में स्थापित
English
फाल्कन लीगल ऐडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स मुंबई, भारत आधारित एक प्रतिष्ठित पूर्ण-सेवा विधिक फर्म है, जिसकी दुबई में भी...
Nava Legal

Nava Legal

15 minutes मुफ़्त परामर्श
मुंबई, भारत

2011 में स्थापित
उनकी टीम में 20 लोग
English
Hindi
Marathi (Marāṭhī)
Nava.Legal ने 2021 में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन अनुभव किया, जब यह एक एकल स्वामित्व वाली फर्म से साझेदारी फर्म में परिवर्तित...
SLD Law Firm
मुंबई, भारत

English
एसएलडी लॉ फर्म मैसूर और बेंगलुरु, भारत में स्थित एक प्रतिष्ठित कानूनी प्रैक्टिस है। यह फर्म नागर मामलों, वैवाहिक...
जैसा कि देखा गया

1. मुंबई, भारत में आक्रमण और मारपीट कानून का संक्षिप्त अवलोकन

आक्रमण और मारपीट के मामलों में आरोपी द्वारा किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाने या चोट का भय दिखाने की गतिविधियाँ शामिल होती हैं।

मुख्य कानूनी ढांचा भारतीय दंड संहिता (IPC) और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) पर आधारित है।

“Whoever makes any gesture or preparation to cause hurt to any person, or to cause the fear of such hurt in the person” is defined as assault.

यह पंक्ति IPC के धारा 351 के अंतर्गत आती है और मुंबई में भी लागू होती है।

“Every information relating to the commission of a cognizable offense that is given to the police officer shall be recorded as First Information Report.”

यह CrPC धारा 154 के अंतर्गत FIR दर्ज करने के नियमों को स्पष्ट करती है।

“Domestic violence means any act or conduct that harms a woman physically, verbally or economically, within a domestic relationship.”

PWDVA के अंतर्गत घरेलू हिंसा के दायरे में आने वाली घटनाओं के कानूनी उपाय बताए जाते हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे Mumbai-स्थित वास्तविक-जीवन हालात में 4-6 उदाहरण दिए गए हैं।

  • जन-सार्वजनिक जगह पर मारपीट का मामला: सड़क, स्ट्रीट, या ट्रेन के भीतर अचानक धक्का-धक्की हो सकती है। आपात स्थिति में कानूनी सहायता आवश्यक होती है ताकि FIR दर्ज हो सके और आरोप तय हो सकें।
  • घरेलू हिंसा के मुकदमे: पति या साथी द्वारा शारीरिक, मौखिक या आर्थिक हिंसा हो तो TCL और PWDVA के अनुसार सुरक्षा-आदेश और सहायता चाहिए।
  • कार्यस्थल पर मारपीट या धमकी: सहकर्मी या वरिष्ठ द्वारा क्रूरता हो तो आपराधिक धाराओं के साथ कर्मचारी सुरक्षा के उपाय भी चाहिए।
  • यात्रा या सार्वजनिक परिवहन के दौरान आक्रमण: भीड़-भाड़ में केस को सही धाराओं के अंतर्गत दर्ज कराना कठिन हो सकता है; वकील सही रणनीति बताएगा।
  • बच्चों या बुजुर्गों के विरुद्ध हिंसा: खासकर सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत सुरक्षा-नियम लागू होते हैं; कानून पास कराने में विशेषज्ञ की मदद चाहिए।
  • डिजिटल या अंजीकृत धमकी के मामले: सामाजिक-परिवारिक या ऑनलाइन-धमकी में पुलिस सहायता और CrPC के प्रावधान लागू होते हैं; उचित परामर्श जरूरी होता है।

इन परिस्थितियों में एक अनुभवी अधिवक्ता, कानूनी सलाहकार या वकील आपके अधिकारों की रक्षा कर सकता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

मुंबई- क्षेत्र में आक्रमण और मारपीट को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानून निम्न हैं।

  • भारतीय दंड संहिता (IPC)- धारा 351 (आक्रमण), धारा 323 (स्वेच्छिक चोट), धारा 324-326 (हृदय-विध्वंस या घातक चोट), धारा 352 (क्रिमिनल फोर्स)
  • दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC)- धारा 154 ( FIR दर्ज कराने का प्रावधान), धारा 161 (पुलिस के समक्ष बयानी)
  • घरेलू हिंसा अधिनियम (PWDVA), 2005- घरेलू संबंधों में हिंसा के विरुद्ध सुरक्षा-आदेश, राहतें और संरक्षण

इन धाराओं के अनुप्रयोग से मुंबई में पुलिस, न्यायपालिका और लोक-सेवा संस्थान अपराध पर कार्रवाई करते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगर मुझे आक्रमण का मुकदमा दर्ज कराना है तो सबसे पहले क्या करना चाहिए?

सबसे पहले निकटतम थाना में FIR दर्ज कराएं. यदि घटना cognizable है, पुलिस स्वतः कार्रवाई शुरू करेगी। अपने पास मौजूद सबूत साझा करें-चोट के फोटो, मेडिकल रिकॉर्ड, गवाह आदि।

कौन से धाराओं के तहत आरोप तय हो सकते हैं?

आरोप चोट-नुकसान के अनुसार IPC धारा 323, 324, 325, 351, 352 आदि हो सकते हैं। गंभीर चोट पर 326 या 326A जैसी धाराएं भी लग सकती हैं।

क्या घरेलू हिंसा के मामलों में तुरंत सुरक्षा मिलती है?

हाँ, PWDVA के तहत राहत मिल सकती हैं-मनाही, सुरक्षा-आदेश, या आवास-उपाय।

मुझे किस प्रकार का साक्ष्य लाभदायक हो सकता है?

चोट के डॉक्टर-रिपोर्ट, CCTV क्लिप, मौखिक और लिखित गवाहियाँ, संदेश/ईमेल आदि अहम साक्ष्य होते हैं।

अगर पुलिस FIR नहीं दर्ज करती तो क्या करूँ?

Zero FIR के उपाय या उच्च अधिकारी को लिखित शिकायत दें। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से संपर्क करें या मानवाधिकार समितियों से सहायता लें।

क्या मैं अपने शहर मुंबई में मुफ्त कानूनी सहायता ले सकता हूँ?

हाँ, NALSA और महाराष्ट्र राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (MSLSA) से मुफ्त वकील सहायता मिल सकती है।

कहाँ से मैं अपने केस की स्टेटस चेक कर सकता हूँ?

पुलिस थाने, CrPC के अनुसार कोर्ट-वर्क, या ऑनलाइन "case status" पोर्टल से स्टेटस देखिए।

महिला सुरक्षा के लिए कौन-सी प्रक्रियाएँ उपलब्ध हैं?

घरेलू हिंसा से निपटने के लिए PWDVA के अंतर्गत सुरक्षा-आदेश और संरक्षण-ऑर्डर मिलते हैं।

क्या मारपीट सिर्फ पुरुषों के खिलाफ होती है?

नहीं, सभी आयु और लिंग के खिलाफ भी प्रयोग हो सकता है। कानून निष्पक्ष कार्रवाई को सुनिश्चित करता है।

प्रायः केस कैसे बढ़ते हैं, क्या समयसीमा है?

IPC धाराओं के अंतर्गत समयसीमा विभिन्न है; सामान्यतः फोरेंसिक और चश्मदीद गवाही पर निर्भर रहता है।

मैं कैसे अपने विरुद्ध दायर आरोपों के विरुद्ध बचाव करूँ?

अपने वकील के साथ साक्ष्यों की समीक्षा करें, गवाह-तैयारी करें, और अदालत में उचित बचाव-नोटेशन रखें।

5. अतिरिक्त संसाधन

नीचे Mumbai-स्थित आक्रमण और मारपीट से जुड़ी प्रमुख संस्थागत मदद के स्रोत दिए गए हैं।

  • National Legal Services Authority (NALSA)- मुफ्त कानूनी सहायता, वकील कनेक्शन और नीचे-तक सुविधाएं: https://nalsa.gov.in
  • मुंबई राज्य कानूनी सहायता प्राधिकरण (MSLSA)- महाराष्ट्र में मुफ्त कानूनी सहायता सेवाएं প্রদান करता है (NALSA के अधीन): https://nalsa.gov.in
  • महिला संरक्षण और सहायता- National Commission for Women (NCW): https://ncw.nic.in

इन संगठनों के अलावा मुंबई पुलिस की CAW Cell भी मदद दे सकती है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट देखें:

“कानून के मुताबिक पुलिस cognizable अपराध पर FIR दर्ज कर सकती है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकती है।”

स्थानीय पुलिस और जिला न्यायालय के निर्देश भी अनुकूल रहेंगे।

6. अगले कदम

  1. घटना की हर-परिचयात्मक जानकारी एकत्र करें-तारीख, समय, स्थान, प्रत्यक्ष गवाह, चोट के फोटो आदि।
  2. कनिष्ठ-चिकित्सा रिपोर्ट और चोट-डॉक्यूमेंट साझा करें ताकि चोट की प्रकृति स्पष्ट हो।
  3. तुरंत एक अनुभवी वकील या कानूनी सलाहकार से मिलें; IPC CrPC अनुभागों के अनुरूप सलाह लें।
  4. FIR दर्ज कराने के लिए Mumbai Police के CAW Cell या स्थानीय थाने से संपर्क करें।
  5. गवाहों की सूची बनाएँ और उनकी संपर्क जानकारी सुरक्षित रखें।
  6. Zero FIR या अन्य वैकल्पिक कदमों के बारे में वरिष्ठ अधिकारी से सलाह लें।
  7. यदि घरेलू हिंसा है, PWDVA के अंतर्गत सुरक्षा-आदेश के लिए आवेदन करें।

नोट: हाल-फिलहाल के परिवर्तन के बारे में अद्यतन जानकारी के लिए एक स्थानीय वकील से पुष्टि आवश्यक है। कानून परिवर्तन चालू रहते हैं और क्षेत्रीय अदालतों के फैसलों पर निर्भर करते हैं।

उद्धृत आधिकारिक स्रोतों के लिंक:

  • IPC धारा 351, 323, 324, 352 आदि- Indian Penal Code: https://legislative.gov.in/acts/indian-penal-code-1860
  • CrPC धारा 154- Criminal Procedure Code: https://legislative.gov.in/acts/criminal-procedure-code-1973
  • Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005: https://legislative.gov.in/acts-protection-women-from-domestic-violence-act-2005

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