पटना में सर्वश्रेष्ठ शरण वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
पटना, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
Advocate Ankit Kumar Singh
पटना, भारत

2018 में स्थापित
उनकी टीम में 1 व्यक्ति
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एडवोकेट अंकित कुमार सिंह की विशेषज्ञता में आपका स्वागत है – प्रतिष्ठित पटना हाई कोर्ट में आपके विश्वसनीय कानूनी...
जैसा कि देखा गया

1. पटना, भारत में शरण कानून के बारे में

पटना, बिहार में शरण कानून का ढांचा भारत के संघीय कानूनों पर टिका है। भारत में शरणार्थी के लिए एक एकल राष्ट्रीय कानून नहीं है; शरण_status GOI के निर्णय एवं UNHCR के साथ समन्वय से निर्धारित होता है।

पटना में आव्रजन मामलों में स्थानीय वकील, सरकारी अधिकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं सक्रिय रूप से मदद देती हैं। शरण चाहने वाले लोग सामान्यतः UNHCR की सहायता से भविष्य के प्रतिरूप को देखते हैं और स्थानीय कानूनी सलाह भी लेते हैं।

India is not a party to the 1951 Refugee Convention or its 1967 Protocol.

Source: UNHCR India - UNHCR India - refugees in India

UNHCR works with the Government of India to protect and assist refugees and asylum-seekers.

Source: UNHCR India - UNHCR India - cooperation with GOI

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

पटना के शरण मामलों में विशिष्ट स्थितियाँ होना सामान्य है, जिनमें कानूनी सलाहकार की आवश्यकता स्पष्ट हो जाती है। नीचे 4-6 वास्तविक-प्रकार के घटनाक्रम दिए गए हैं:

  • रोहिंग्या या अन्य प्रवासी समुदाय का परिवार पटना में शरण के लिए UNHCR के साथ पंजीकरण और दावेदारी करना चाहता है।
  • विदेशी नागरिक का वीज़ा समाप्त हो गया है या प्रवेश-नियमों का उल्लंघन हो गया है; वह कानूनी बचाव चाहता है।
  • पटना या निकटवर्ती जिलों में सुरक्षा-उत्पादक स्थिति के कारण शरण-आवेदन का मार्ग ढूंढ़ना आवश्यक है।
  • स्थानीय NGO से मिले प्रमाण-पत्रों के साथ शरण-प्रतिष्ठान हेतु कोर्ट-या अधिकारी-सम्मुख प्रस्तुतियाँ करनी होंगी।
  • काउंसिलिंग के लिए मानसिक-सुरक्षा और परिवारिक सहायता सहित दीर्घकालिक उपाय चाहिए हों।
  • परिवार के बच्चों के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों की कानूनी राह समझनी हो।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

पटना समेत पूरे भारत में शरण-सम्बन्धी मामले मुख्यतः निम्न कानूनों के अंतर्गत नियंत्रित होते हैं:

  • Foreigners Act, 1946 - विदेशी नागरिकों के प्रवेश, प्रवास और निकासी के नियम निर्धारित करता है।
  • Registration of Foreigners Act, 1939 - विदेशी नागरिकों का पंजीकरण आवश्यक बनाता है।
  • Passport Act, 1967 - पासपोर्ट, वीजा और यात्रा-दस्तावेजों के संचालन को नियंत्रित करता है।

इन कानूनों के तहत शरणार्थियों के दर्जे की स्पष्ट national-स्तर पर व्यवस्था नहीं है; राहत और संरक्षण के लिए GOI के निर्णय और UNHCR के साथ समझौते महत्वपूर्ण हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शरणार्थी कौन होता है?

शरणार्थी वह व्यक्ति है जिसे जाति, धर्म, राष्ट्रीयता, किसी सामाजिक समूह के सदस्यता या राजनीतिक विचार के कारण persecution का वास्तविक डर हो और जिसकी स्थिति GOI/UNHCR द्वारा मान्यता प्राप्त हो।

भारत में शरण कानून कैसे काम करता है?

भारत में कोई एकीकृत शरण कानून नहीं है। refugee status GOI के निर्णय अथवा UNHCR के साथ मिलकर किया जाता है। भारत 1951 शरण-विधान का भागीदार नहीं है।

पटना में शरण मामलों को कौन देखता है?

UNHCR भारत कार्यालय तथा GOI के साथ साझेदारी में FRRO/स्थानीय प्रशासन से मिले सहयोग के जरिये शरण-संबंधी मामले चलते हैं। स्थानीय वकील इस प्रक्रिया को सुचारु बनाते हैं।

UNHCR की भूमिका क्या है?

UNHCR नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए GOI के साथ काम करता है और शरण-आवेदनों की मान्यता प्रक्रिया में भागीदारी देता है।

कौन से दस्तावेज चाहिए होते हैं?

पहचान पत्र, पासपोर्ट-वीजा की प्रतियाँ, प्रवास-तिथि का प्रमाण, स्थानीय निवास का प्रमाण, सुरक्षा/पुलिस रिकॉर्ड आदि अक्सर माँगे जाते हैं।

शरण के लिए आवेदन कब करें?

तुरंत प्रयास करना लाभकारी है; विशेषकर यदि आप संघर्ष-जोखिम या अत्याचार का सामना कर रहे हों। प्रारम्भिक दस्तावेज जुटाकर कानूनी सलाह लें।

अगर मेरा आवेदन अस्वीकार हो जाए तो क्या करें?

वकील के मार्गदर्शन से पुनर्विचार याचिका, अदालत में याचिका या अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

क्या शरणाधिकारियों को रोजगार मिल सकता है?

रोजगार के अवसर का अधिकार स्थिति पर निर्भर है; विशिष्ट अनुमति और वैध दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।

पटना में कानूनी सहायता कैसे मिले?

NGO और यूनहैचआर-सरकारी संपर्कों के साथ स्थानीय शरण-विशेषज्ञ वकील संपर्क में लाते हैं।

शरण-आवेदक कैसा व्यवहार करे?

सत्यापित जानकारी दें, दस्तावेज समय-सीमा के भीतर जमा करें, और किसी भी थर्ड-पार्टी के साथ व्यक्तिगत जानकारी साझा करते समय सतर्क रहें।

क्या बच्चे भी शरण पा सकते हैं?

यदि बच्चों की स्थिति सुरक्षा-जोखिम में है तो उनके लिए विशेष संरक्षण और शिक्षा के अधिकार पर विचार किया जाता है।

पصار में रहने के दौरान क्या कानून-उल्लंघन पर विचार करें?

स्थानीय कानूनों का उल्लंघन दण्डनीय हो सकता है; सुरक्षित यात्रा-बंधनों, पंजीकरण और अनुमति-विवरण पर ध्यान दें।

कौन-से कदम तुरंत उठाने चाहिए?

स्थानीय शरण-विशेषज्ञ से मिलें, UNHCR इंडिया से संपर्क करें, आवश्यक दस्तावेज इकट्ठा करें और कानूनी सलाह लें।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • UNHCR India - शरणार्थी और असाइलम seekers के लिए मार्गदर्शन और सहयोग
  • National Human Rights Commission (NHRC) - मानवीय अधिकारों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय मंच
  • Amnesty International India - मौलिक मानव अधिकारों के लिए advocacy

6. अगले कदम

  1. पटना में अनुभवी शरण वकील या कानूनी सलाहकार से मिलें।
  2. अपनी स्थिति का संक्षेप में दस्तावेजीकरण करें (पासपोर्ट, visa, पहचान पत्र, प्रवास-प्रमाण आदि)।
  3. UNHCR इंडिया से संपर्क करें और उनके बताये रास्ते के अनुसार आगे बढ़ें।
  4. GOI FRRO/स्थानीय प्रशासन के साथ आवश्यक पंजीकरण समझें और करें।
  5. कानूनी सहायता द्वारा शरण-आवेदन की तैयारी करें और समय-सीमा पर दायर करें।
  6. स्थानीय NGO से सहायता, चिकित्सा और शिक्षा-सम्बन्धी मार्गदर्शन लें।
  7. अगली संभावित तिथि/कार्य योजना तय करें और नियमित अपडेट रखें।

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