लखनऊ में सर्वश्रेष्ठ दिवाला एवं ऋण वकील
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लखनऊ, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
भारत दिवाला एवं ऋण वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें दिवाला एवं ऋण के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- ऋण
- वर्तमान में मैं कई असुरक्षित ऋणों में फंसा हुआ हूँ। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैंने अपनी नौकरी और सभी संपत्तियाँ खो दी हैं। क्या मुझे व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए जाना चाहिए?
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
प्रत्यक्ष तथ्यों के आधार पर यह समझाया गया है कि वर्तमान में भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन पर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्सी कोड (IBC) लागू नहीं होता क्योंकि सामान्य व्यक्तियों से संबंधित प्रावधानों को अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया...
पूरा उत्तर पढ़ें - सर, मुझे अपने ग्राहक पार्टी से भुगतान लेना है और वह भुगतान नहीं कर रहा है।
- सर, मैं वस्त्र व्यापार कर रहा हूँ और मैंने अपनी पार्टी को 4,12,536/00 रुपये मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है। मेरा ग्राहक भुगतान नहीं कर रहा है, जबकि वह वित्तीय रूप से सक्षम है।
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
दिए गए तथ्यों के आधार पर, मेरा परिपक्व मत है कि आपने अपनी वस्त्र व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत अपने ग्राहक को ₹4,12,536 मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है, माल उचित रूप से डिलीवर और स्वीकृत हो चुका है,...
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1. लखनऊ, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून के बारे में
लखनऊ में दिवाला एवं ऋण संबंधी कानून का प्रमुख ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 के अधीन संचालित होता है. इसका उद्देश्य देनदारों के ऋण समाधान को समय पर और प्रभावी बनाना है. कार्यालय-स्तर पर NCLT Allahabad Bench यूपी के क्षेत्र के कॉरपोरेट डेब्टर्स को प्रस्तुत कर सकता है.
व्यावसायिक ऋणों के लिए NCLT Allahabad Bench जिला Lucknow से संबंधित मामलों की सुनवाई करता है. व्यक्तिगत देनदारी या साझेदारी फर्म के मामले DRT Lucknow के अंतर्गत आ सकते हैं. सरकारी निर्देशों के अनुसार ऋण निपटान में त्वरित प्रक्रिया लागू होती है.
"An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency."
"Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993."
उच्चस्तरीय कानून-निर्माता संस्थान IBBI, NCLT और RBI इन प्रक्रियाओं के प्रशासनिक पहलुओं को नियंत्रित करते हैं. Lucknow में कानूनी सलाह लेने वाले व्यक्तियों के लिए स्थानीय अदालतों, वकीलों और विधिक निकायों से मार्गदर्शन आवश्यक रहता है. आधिकारिक स्रोतों के अनुसार IBC, SARFAESI और RDDBFI जैसे कानून सुविधाजनक समाधान सुनिश्चित करते हैं.
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
Lucknow, UP में दिवाला एवं ऋण मामलों में विशेषज्ञ वकील इस प्रकार के मामलों को संभालते हैं. वे समय-सीमा, प्रक्रियात्मक बातें और क्रेडिटर्स के अधिकार स्पष्ट करते हैं. नीचे Lucknow-आधारित सामान्य परिस्थितियाँ दी गई हैं जिनमें कानूनी सहायता जरूरी होती है:
- एक Lucknow-आधारित कंपनी अत्यधिक ऋण के कारण CIRP में जाना चाहती है. यह IBC के अंतर्गत बुलाई जा सकती है.
- एक व्यक्तिगत व्यवसायी या жеке मालिक के दिवालिया होने पर व्यक्तिगत insolvency प्रक्रिया शुरू करनी हो.
- बैंकों द्वारा ऋण पुनर्गठन या सुरक्षा खंडों के मामले पर तात्कालिक समाधान चाहिए.
- ऋण दावों का खंडन या सभी तिथि-समय पर ऋण-निपटान के लिए कानूनी पथ चुनना हो.
- साझेदारी फर्म के विरुद्ध creditors द्वारा insolvency filing या recovery के मुद्दे हों.
- क्रेडिटर-क्रेडिटर की संयुक्त विवादों में निष्पादन और सुरक्षा-हित के सवाल हों.
Lucknow में एक अनुभवी अधिवक्ता इन स्थितियों में निम्न भूमिका निभाते हैं: उचित केस विश्लेषण, फाइलिंग-तिथि वार्गन, NCLT/DRT के समक्ष प्रस्तुति, और क्रेडिटर्स के साथ समाधान-योजनाओं का निर्माण. आधिकारिक मार्गदर्शन और स्थानीय अदालतों के अनुभव से निर्णय तेज होते हैं.
3. स्थानीय कानून अवलोकन
Lucknow के लिए प्रमुख क्षेत्राधिकार-आधारित कानून निम्न हैं:
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - कॉरपोरेट डेब्टर्स के लिए CIRP, MRPs और रीकंस्ट्रक्शन प्रक्रियाओं का मुख्य ढांचा. NCLT Allahabad Bench UP क्षेत्र संभालता है.
- Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 - बैंकों और वित्तीय संस्थाओं द्वारा बकाया ऋणों के लिए त्वरित ऋण-प्राप्ति प्रक्रिया देता है. DRAT और DRT के अधीन सुनवाई होती है.
- Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI) - बैंकिंग सुरक्षा-हित के जरिए ऋण-समायोजन और संपत्ति-निगमन के लिए कानून.
इन कानूनों का उद्देश्य देनदारों और creditors के बीच विकट स्थिति में त्वरित और न्याय-परक समाधान देना है. Lucknow में NCLT और DRT की प्रक्रियाएं UP के नागरिकों और व्यवसायों के लिए उपलब्ध हैं. IBC के संशोधित प्रावधानों के अनुसार व्यक्तिगत insolvency प्रक्रिया भी बढ़ी है, जिसका अभ्यास अलग चरणों में होता है.
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC क्या है?
IBC एक कानून है जो दिवाला एवं ऋण के मामलों का समय-सीमा में समाधान करने के लिए बनाया गया है. कॉरपोरेट डेब्टर्स और कुछ व्यक्तिगत मामलों पर लागू होता है. लाभार्थी प्रभावी-समाधान पाते हैं और वसूली प्रक्रियाओं में देयताओं को व्यवस्थित किया जाता है.
NCLT क्या है और कब जाना चाहिए?
NCLT एक विशेष न्यायाधिकरण है जो Corporate Insolvency Resolution Process के लिए जिम्मेदार है. यदि आपका मामला दिवाला समाधान के लिए CIRP के अंतर्गत आता है तो आपको NCLT में जाना होगा. Lucknow क्षेत्र के लिए Allahabad Bench प्रमुख है.
DRT कैसे काम करता है?
DRT बैंक-डेफॉल्ट से जुड़े ऋणों पर त्वरित दावा-निपटान करता है. यह Debt Recovery Tribunal है जो UP के क्षेत्र में Lucknow में भी उपलब्ध है. व्यक्तिगत ऋण के कुछ मामलों में DRT उपयुक्त रास्ता हो सकता है.
क्या व्यक्ति भी insolvency चरण से गुजर सकता है?
हाँ, IBC के संशोधनों के साथ व्यक्तिगत insolvency प्रक्रियाएं प्रवर्तित की गई हैं. यह छोटे व्यवसायों और प्राकृतिक व्यक्तियों के लिए राहत उपाय प्रदान करती है. परन्तु कुछ गतिविधियाँ और दायित्व सीमित हैं.
कौन सा दस्तावेज़ आवश्यक होते हैं?
आमतौर पर पहचान प्रमाण, पते का प्रमाण, ऋण-चुकौती रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, संपत्ति विवरण, कर-आधार दस्तावेज जैसे प्रमाण चाहिए होते हैं. अदालतें स्थिति के अनुसार अतिरिक्त दस्तावेज माँग सकती हैं.
धन लौटाने की समय-सीमा क्या है?
IBC अंतर्गत प्रक्रिया आम तौर पर 6 से 12 महीनों के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखती है. केस-आकार, क्रेडिटर्स की संख्या और अदालत की लोड पर निर्भरता रहती है.
Fresh start का मौका क्या है?
IBC संशोधनों के साथ कुछ व्यक्तियों को Fresh Start के अवसर मिलते हैं. यह कुछ परिसरों के लिए ऋण-मीता और पुनर्निर्माण के अवसर प्रदान करता है. यह व्यावसायिक राहत के तौर पर देखा जाता है.
क्या क्लेम फाइल करना अनिवार्य है?
हाँ, creditors केClaims File करना आवश्यक हो सकता है ताकि insolvency प्रक्रिया में उनके अधिकार संरक्षित रहें. अस्वीकरण या अनदेखी से नुकसान हो सकता है.
क्या मैं कानूनी सहायता के बिना आगे बढ़ सकता हूँ?
सम्भव है, परंतु उपयुक्त ज्ञान और समय-सीमा से सफल समाधान δύσβα रहा सकता है. कानूनी सलाहकार के साथ मिलकर बेहतर रणनीति बनानी चाहिए.
UK UP में किस अदालत में आवेदन करना चाहिए?
कॉरपोरेट मामलों के लिए NCLT Allahabad Bench UP क्षेत्र के अंतर्गत आता है. व्यक्तिगत मामलों के लिए DRT Lucknow उपयुक्त विकल्प हो सकता है. अदालतों की ठोस समझ जरूरी है.
प्रक्रिया कितनी महँगी हो सकती है?
खर्च मामला-आकार पर निर्भर करता है. दाखिला शुल्क, वकील रणनीति, विशेषज्ञ की सेवाएं और अदालत-फीस मिलाकर खर्च बढ़ सकता है. योजना बनाते समय लागत का आकलन करें.
क्या निर्णय पर रोक-तोड संभव है?
IBC में moratorium अवधि होती है और कई स्थितियाँ तब तक रोक रहती हैं. creditors द्वारा आगे की कार्रवाई रोक सकती है, जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती.
क्या विदेशी ऋणों पर भी यही नियम लागू होते हैं?
IBC सामान्यतः भारत में जारी ऋणों पर लागू होता है. विदेशी ऋण के मामले में विशिष्ट नियम लागू होते हैं और क्षेत्रीय अदालतों के निर्देश आवश्यक होते हैं.
5. अतिरिक्त संसाधन
नीचे Lucknow से जुड़े दिवाला और ऋण से संबंधित प्रमुख संगठनों के आधिकारिक स्रोत दिए जा रहे हैं:
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - IBC के क्रियान्वयन से जुड़े नियम और संसाधन.
- National Company Law Tribunal (NCLT) - कॉरपोरेट दिवाला मामलों की सुनवाई.
- Reserve Bank of India (RBI) - बैंकर-ऋण निवारण और SARFAESI से जुड़े दिशानिर्देश.
6. अगले कदम
- Lucknow में अनुभवी दिवाला वकील के साथ प्रारम्भिक Consultation बुक करें.
- अपना संपूर्ण ऋण-इतिहास और दस्तावेज तैयार रखें, ताकि कानूनी विकल्प स्पष्ट हों.
- उचित न्यायिक मंच (NCLT या DRT) का चयन समझें और आवेदन-पत्री प्रक्रिया शुरू करें.
- क्रेडिटर्स के साथ प्रस्तावित योजना पर चर्चा करें और सहमति-प्रक्रिया समझें.
- फाइलिंग के समय लागत और शुल्क का स्पष्ट बजट बनाएं.
- नीति-निर्देशन के लिए IBBI और RBI के आधिकारिक पन्नों से ताजा अद्यतन देखें.
- स्थानीय Lucknow बार-एजेंसी या कानूनी सहायता संस्थाओं से सहायता प्राप्त करें यदि आवश्यक हो.
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