सूरत में सर्वश्रेष्ठ दिवाला एवं ऋण वकील
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सूरत, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
भारत दिवाला एवं ऋण वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें दिवाला एवं ऋण के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- ऋण
- वर्तमान में मैं कई असुरक्षित ऋणों में फंसा हुआ हूँ। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैंने अपनी नौकरी और सभी संपत्तियाँ खो दी हैं। क्या मुझे व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए जाना चाहिए?
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
प्रत्यक्ष तथ्यों के आधार पर यह समझाया गया है कि वर्तमान में भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन पर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्सी कोड (IBC) लागू नहीं होता क्योंकि सामान्य व्यक्तियों से संबंधित प्रावधानों को अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया...
पूरा उत्तर पढ़ें - सर, मुझे अपने ग्राहक पार्टी से भुगतान लेना है और वह भुगतान नहीं कर रहा है।
- सर, मैं वस्त्र व्यापार कर रहा हूँ और मैंने अपनी पार्टी को 4,12,536/00 रुपये मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है। मेरा ग्राहक भुगतान नहीं कर रहा है, जबकि वह वित्तीय रूप से सक्षम है।
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
दिए गए तथ्यों के आधार पर, मेरा परिपक्व मत है कि आपने अपनी वस्त्र व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत अपने ग्राहक को ₹4,12,536 मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है, माल उचित रूप से डिलीवर और स्वीकृत हो चुका है,...
पूरा उत्तर पढ़ें
1. सूरत, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून का संक्षिप्त अवलोकन
सूरत गुजरात का प्रमुख उद्योग शहर है. यहाँ कपड़ा, हीरा उद्योग और रीयल एस्टेट क्षेत्र तेजी से चलते हैं. कई व्यवसाय ऋण पर निर्भर रहते हैं और वित्तीय दबाव कभी भी सामने आ सकता है.
दिवाला एवं ऋण कानून कॉरपोरेट और व्यक्तियों के लिए एक समान मंच बनाकर समस्या के समाधान का मार्ग देता है. यह कानून समय-सीमा, प्रक्रिया और क्रेडिटर-डिबॉर्टर के अधिकार स्पष्ट करता है. CIRP के लिए कोर्ट-प्रनाली व्यवस्था है जिससे परिसमापन से पहले समाधान की कोशिश होती है.
The Insolvency and Bankruptcy Code provides a time bound resolution mechanism to maximize asset value and preserve business viability.
Source: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - www.ibbi.gov.in
The Code aims to consolidate and amend laws relating to insolvency and bankruptcy to provide a clear framework for resolution of distressed business and debtors.
Source: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - MCA and IBBI overviews
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
परिदृश्य 1 Surat में एक कपड़ा मिल ने बैंक से लिया कर्ज चुकाने में देरी कर दी है. बैंकों ने ऋण वसूली के लिए CIRP शुरू करने की धमकी दी है. इस स्थिति में एक दिवाला वकील सही प्लान बनाकर राहत दे सकता है.
परिदृश्य 2 दीर्घकालीन डेब्ट के कारण Surat के ज्वेलरी डीलर पर न्यायालयीन प्रक्रिया शुरू हो सकती है. सही सलाहकार क्रेडिटर-डिबॉर्टर के बीच समझौतों और प्रस्तावों को समन्वयित कर सकता है.
परिदृश्य 3 MSME के मालिक को अपने व्यवसाय को संरक्षित रखते हुए ऋण पुनर्गठन की आवश्यकता हो. विशेषज्ञ वकील PPIRP और CIRP दोनों विकल्प समझा सकता है.
परिदृश्य 4 Surat के बिल्डर ने प्रोजेक्ट लोन में चूक कर दी हो और क्रेडिटर्स के पास सुरक्षा अधिनियम लागू करने की स्थिति हो. कृपया विशेषज्ञ से सुरक्षा हितों, repossession और पुनर्गठन पर मार्गदर्शन लें.
परिदृश्य 5 व्यक्तिगत ऋणों का जटिल जाल हो. क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन, स्टूडेंट लोन आदि एक साथ संकट बनाते हैं. व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया के सही तरीके जानना जरूरी है.
परिदृश्य 6 Cross border debt or विदेशी ऋणों के मुद्दे arise हों. ऐसे मामलों में कानूनी सलाहकार इंटरनैशनल फ्रेमवर्क के अनुसार कदम बताता है.
3. स्थानीय कानून अवलोकन
भारतीय दिवाला संहिता 2016 कॉरपोरेट तथा व्यक्तियों के लिए समय-सीमा, प्रक्रिया और निष्पादन के नियम निर्धारित करती है. CIRP 180 दिनों में निपटाने की कोशिश होती है, जिसमें अतिरिक्त 90 दिन तक विस्तार हो सकता है.
SARFAESI अधिनियम 2002 बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को सुरक्षा संपत्तियों के माध्यम से त्वरित ऋण वसूली का अधिकार देता है. यह प्रवर्तन अदालतों के बजाय सीधे सिक्योरिटी की वसूली पर केंद्रित है.
RDDBFI अधिनियम 1993 बैंकों और वित्त संस्थाओं के डेब्टर्स के लिए ऋण वसूली और परिसंपत्तियों के पुनर्निर्माण के उपाय स्थापित करता है. यह IBC के साथ क्रेडिटर-डिबॉर्टर के अधिकारों को संरक्षित करता है.
हाल के परिवर्तन शामिल हैं PPIRP की अनुमति, जिससे कॉरपोरेट डेब्टर्स के लिए पूर्व-न्यायिक समाधान संभव हो. यह लागत और समय दोनों में कमी का लक्ष्य है.
PPIRP aims to provide a faster resolution route for corporate debtors and reduce the burden on courts and creditors.
Source: IBBI overview on Pre-Packaged Insolvency Resolution Process (PPIRP) - www.ibbi.gov.in
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC क्या है?
IBC भारतीय दिवाला एवं ऋण संहिता 2016 है. इसका उद्देश्य ऋण संकट वाले व्यवसायों को समय पर समाधान देना है. इसे समय-सीमा के साथ लागू किया गया है.
CIRP क्या होता है?
CIRP is Corporate Insolvency Resolution Process. यह ऋणदाता-उधारकर्ता विवाद का सुलझाव समय-सीमा के भीतर करने के लिए है. सामान्यतः 180 दिनों की पूर्ति का लक्ष्य है.
क्या मैं स्वयं दिवाला दाखिल कर सकता हूँ?
व्यक्तिगत दिवाला के लिए विशेष प्रावधान हैं. कॉरपोरेट दिवाला के लिए CIRP और PPIRP हैं. एक अनुभवी अधिवक्ता इसके लिए उपयुक्त रास्ता तय करेगा.
Surat में केस कहाँ दायर होता है?
IBC के अंतर्गत केस NCLT में दायर होते हैं. गुजरात क्षेत्र के मामलों के लिए Ahmedabad/Mumbai Bench के साथ संभाला जाता है. अदालत चयन केस के आधार पर निर्भर है.
डिफॉल्टर की रक्षा कौन करता है?
डिफॉल्टर के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी मंच, डिफॉल्टर-क्रेडिटर के बीच व्यावहारिक संवाद और अदालतों के निर्णयों का पालन किया जाता है. वकील उचित दिखावे और प्रस्ताव बनाते हैं.
कौन-सी फीस लग सकती है?
वकील-चयन, अदालत शुल्क, और आवेदन शुल्क संबंधित होते हैं. साथ ही प्रोफेशनल इंटर्नशिप के खर्चे भी जोड़े जा सकते हैं. लागत केस के अनुसार भिन्न हो सकती है.
कौन सा वकील पर्याप्त माना जाएगा?
IBC, NCLT, SARFAESI मामलों में अनुभव वाले अधिवक्ता लाभदायक होते हैं. दिवाला विशेषज्ञों के साथ काम करना अधिक प्रभावी रहता है.
PPIRP कब लागू हुआ और किसके लिए?
PPIRP कॉरपोरेट डेब्टर्स के लिए एक पूर्व-न्यायिक समाधान प्रक्रिया है. यह लागत और समय बचाने के लिए प्रावधान बनाता है.
कौन से दस्तावेज जरूरी होते हैं?
बैंकों के ऋण दस्तावेज, स्वामित्व प्रमाण, वित्तीय विवरण, आय-व्यय विवरण, और देय तिथियों के रिकॉर्ड जरूरी होते हैं. यह प्रक्रिया में मदद करते हैं.
क्या मैं क्रेडिटर्स के साथ समझौता कर सकता हूँ?
हाँ, कई मामलों में क्रेडिटर्स के साथ आंशिक समाधान संभव है. पर यह अदालत की निगरानी में या वैधानिक मंच पर होता है.
क्या दिवाला के बाद व्यवसाय वापस खड़ा हो सकता है?
कुछ मामलों में पुनर्वास संभव है. सही पुनर्गठन योजना और समय पर क्रियान्वयन पर निर्भर है. विशेषज्ञ की सहायता जरूरी है.
क्या दिवाला के बावजूद अपील संभव है?
हाँ, अपीलीय प्रक्रिया उपलब्ध है. NCLT के फैसलों के विरुद्ध हाई कोर्ट तक अपील संभव हो सकती है. समय-सीमा का पालन आवश्यक है.
क्या घर-घटक ऋण के लिए भी IBC लागू होता है?
IBC मुख्य रूप से कॉरपोरेट और व्यक्तियों के बड़े ऋण पर लागू होता है. घरेलू ऋणों के लिए RBI के दिशा-निर्देश और SARFAESI लागू हो सकते हैं.
5. अतिरिक्त संसाधन
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक जानकारी, संशोधन और दिशानिर्देश. www.ibbi.gov.in
- National Company Law Tribunal (NCLT) - दिवाला-विवाद के न्यायिक मंच. www.nclt.gov.in
- Gujarat High Court - गुजरात क्षेत्र से इश्यूज पर उच्च न्यायालय का मार्गदर्शन. gujarathighcourt.nic.in
6. अगले कदम
- अपनी वित्तीय स्थिति का संक्षिप्त आकलन करें और ऋण-समस्या की सीमा निर्धारित करें.
- उचित कानून और विकल्प समझने के लिए Surat में Insolvency Lawyer सेInitial Consultation लें.
- कौन सा मार्ग सही है, इसे तय करने के लिए CIRP, PPIRP या SARFAESI जैसे विकल्प पर चर्चा करें.
- आवेदन/फाइलिंग के लिए आवश्यक दस्तावेज सूची बनाएं और एक समय-रेखा तय करें.
- अधिवक्ता के साथ एक साफ-सीट प्लान बनाएं जिसमें लागत और संभावित परिणाम स्पष्ट हों.
- आवश्यक अदालत-आधार दस्तावेज और सुरक्षित पक्ष खाता तैयार रखें.
- स्थानीय क्रेडिटर्स और बैंक के साथ समन्वय की योजना बनाएं ताकि समाधान समय पर निकल सके.
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