भोपाल में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील

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2021 में स्थापित
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लैक्सटेम्पल एलएलपी एक भारत आधारित लॉ फर्म है जिसका नेतृत्व अधिवक्ता सचिन नायक करते हैं, और यह भोपाल कार्यालय से...
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भोपाल, भारत में दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारतीय दिवालियापन कानून का मुख्य ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) है. यह समय-सीमित समाधान, पुनर्गठन या समाधान योजना के लिए एक एकीकृत ढांचा प्रदान करता है. भोपाल में निवास करने वाले व्यक्तियों और कंपनियों के मामले NCLT और NCLAT के न्याय-प्रकरणों के अधीन होते हैं. अदालत के बाहर भी कानूनी सलाहकार मदद कर सकते हैं.

IBC व्यक्तियों, असंगठित कारोबारियों, और कंपनियों के लिए insolvency और समाधान के नियम तय करता है. यह प्रक्रियाओं को समय-सीमित ढंग से पूरा करने की कोशिश करता है ताकि क्रेडिटर्स के हित सुरक्षित रहें. भोपाल के निवासी इन प्रक्रियाओं के लिये पंजीकृत अधिवक्ताओं और insolvency professionals पर निर्भर रहते हैं.

Insolvency and Bankruptcy Code provides for a time-bound process for reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals.

स्रोत: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI)

“The Code seeks to promote entrepreneurship, availability of credit and balance the interests of all stakeholders through a time-bound resolution process.”

स्रोत: IBBI प्रकाशन एवं आधिकारिक सामग्री

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे भोपाल-स्थित वास्तविक-स्थिति से मिलते-जुलते 4-6 परिदृश्य हैं जिनमें कानूनी सलाह आवश्यक रहती है. इन परिस्थितियों में उचित वकील आपकी सहायता करते हैं ताकि कानूनी प्रक्रिया सही समय पर पूरी हो सके.

  • भोपाल-स्थित एक लघु निर्माण व्यवसाय ने बैंक कर्ज के कारण CIRP हेतु आवेदन किया है; सही समय पर प्रस्तुति और डॉक्यूमेंटेशन जरूरी है.
  • किसी व्यावसायिक पार्टनर के साथ संबंध-विकास के दौरान रिटेल चेन के ऋण के कारण insolvency की स्थिति बन गई है; परिसंपत्ति संरचना और समाधान योजना आवश्यक होगी.
  • व्यक्ति के रूप में भारी चिकित्सा खर्च के कारण व्यक्तिगत दिवालियापन/इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया शुरू करनी पड़ रही है; व्यक्तिगत Insolvency के नियम लागू होते हैं.
  • एमएसएमई के रूप में भोपाल में ऋण पुनर्गठन या प्रीक-पैक insolvency प्रस्ताव की जरूरत है; PPIRP के विकल्प पर कानूनी मार्गदर्शन चाहिए.
  • पूर्व-समझौते (settlement) के बाद भी ऋण चुकाने में क्षमता नहीं रहते हुए भी संघर्ष-स्थिति है; क्रेडिटर्स-समन और समाधान योजना बनाने की जरूरत है.
  • स्थानीय होटल/रेस्टोरेंट व्यवसाय में देनदारी बढ़ने पर विदेशी ऋणदाता से करार-निर्णय और समाधान की आवश्यकता पड़ सकती है.

उच्च-स्तर पर नोट: भोपाल में इन परिसरों के लिये उचित Insolvency Professional, कानून-नियमन और कॅरीयर-चैनल चुने जाने चाहिए. IBBI के नियमन के अनुसार पंजीकृत पेशेवर ही CIRP, PPIRP आदि प्रक्रियाओं चलाने के अधिकारी होते हैं.

स्थानीय कानून अवलोकन

भोपाल, भारत में दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानूनों के नाम और उनका संक्षिप्त वर्णन नीचे दिया गया है.

  1. Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - यह मुख्य कानून है जो कॉरपोरेट ड Highly debtors, individuals और partnerships के लिए insolvency/rehabilitation प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है. समय-सीमित CIRP और IBC के अन्य प्रावधान यहाँ आते हैं.
  2. Companies Act, 2013 - कॉरपोरेट डेबटर्स के लिए winding up, corporate insolvency और related governance मानक निर्धारित करता है. IBC पारित होने के बाद भी कुछ स्थितियों में यह कानून महत्वपूर्ण रहता है.
  3. Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI Act) -secured creditors के माध्यम से संपत्तियों की पुनर्गठन, वसूली और सुरक्षा-हस्तक्षेप के उपायों के लिए प्रचलित है. IBC के साथ मिलकर क्रेडिटर्स के अधिकारों को सुनिश्चित करता है.

नोट: भोपाल में मामलों की अदालत-स्तर पर सुनवाई NCLT/NCLAT के पास जाती है. स्थान-विशिष्ट प्रशासनिक जानकारी MCA और IBBI साइटों पर भी देखी जा सकती है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवालियापन क्या है?

दिवालियापन एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति या संस्था के पास अब अपने ऋणों का भुगतान करने की क्षमता नहीं रहती. insolvency के बाद न्यायिक प्रक्रिया के तहत पुनर्गठन या दिवाला समाधान की कोशिश होती है. IBC इस प्रक्रिया को समय-सीमित बनाता है ताकि creditors के हित सुरक्षित रहें.

IBC क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?

IBC एक समेकित कानून है जो corporate, individual और partnership firms के लिए insolvency- resolution के नियम बनाता है. इसका उद्देश्य त्वरित, पारदर्शी और संतुलित समाधान प्रदान करना है. यह प्रत्याशित क्रेडिट-होल्डर के हितों को प्राथमिकता देता है.

CIRP क्या है और कितने समय में पूरा किया जाता है?

CIRP Corporate Insolvency Resolution Process है. सामान्यतः यह 270 दिन के भीतर पूरा किया जाता है और 90 दिनों तक extension संभव है. समय-सीमा के भीतर समाधान-योजना पेश करनी होती है.

PPIRP क्या है और MSMEs के लिए यह क्यों है?

Pre-Packaged Insolvency Resolution Process MSMEs के लिए एक तेज, मूल्य-प्रभावी औरPredictable विकल्प है. यह पूर्व-तैयार योजना के साथ insolvency-प्रक्रिया आरम्भ करने की इजाज़त देता है. यह छोटे व्यवसायों के लिए भुगतान-समझौते को सुगम बनाता है.

भोपाल में मुझे किस प्रकार का वकील चाहिए?

कॉन्टैक्ट करें: (1) Insolvency Lawyer जो IBBI पंजीकृत Insolvency Professionals के साथ काम करे. (2) कॉरपोरेट कानून संबंधी वकील जो CIRP/PPIRP प्रक्रियाओं के लिए अनुभवी हो. (3) क्षेत्रीय अदालतों में अनुभव रखने वाले Advocate जो NCLT/NCLAT प्रक्रियाओं से परिचित हो.

कौन से दस्तावेज़ मुझे तैयार रखने चाहिए?

ऋण विवरण, debt schedule, balance sheets, asset-register, contracts, correspondence with creditors आदि तैयार रखें. व्यक्तिगत insolvency के लिए medical bills, income proofs और खर्च-फॉर्म भी आवश्यक हो सकते हैं.

मैं IPC/कानूनी प्रक्रिया शुरू कैसे कर सकता हूँ?

सबसे पहले भोपाल-आधारित अनुभव-युक्त Insolvency Lawyer से konsult करें. उन्हें दस्तावेज दें, eligibility-criteria जाँचें और केस- strategy बनाएं. कोर्ट-फाइलिंग, समय-सीमा, और क्रेडिटर-नियोजन पर स्पष्ट योजना बनाएं.

क्या IBC में व्यक्तिगत दिवालियापन संभव है?

हाँ, IBC individuals को insolvency के तहत पुनर्गठन और resolving processes के लिए सक्षम बनाता है. व्यक्तिगत दिवालियापन प्रक्रियाएं राज्यों के नोटिस-आधारित कानून के अनुरूप चलती हैं, और IP-प्रक्रिया से जुड़ी शर्तें लागू होती हैं.

क्या भोपाल में कॉर्पोरेट दिवालिया प्रकरण NCLT में जाते हैं?

हाँ, सामान्यतः कॉर्पोरल दिवालिया मामलों की सुनवाई NCLT- bench में होती है. NCLAT पर अपील संभव है. स्थानीय वकील आपको सही bench के चयन में मार्गदर्शन करेंगे.

महत्वपूर्ण समय-सीमाएं क्या हैं?

किरपया CIRP के लिए 270 दिन की सामान्य अवधि याद रखें. 90 दिन तक extension संभव है. PPIRP में MSMEs के लिए अलग समय-सीमा लागू हो सकती है.

क्या अदालत के बाहर ऋण-समझौता संभव है?

हाँ, क्रेडिटर्स-समझौते के माध्यम से insolvency से बचना संभव है, बशर्ते यह कैंप-नीति के अनुसार वैध हो और अदालत-स्वीकृति प्राप्त हो. वैधानिक तंत्र के भीतर proper documentation आवश्यक है.

मैं किन स्थितियों में नोटिस से पहले सलाह ले सकता हूँ?

किसी भी ऋण-प्रदाय या क्रेडिटर्स के सचिव-नोटिस के पहले ही वकील से सलाह लेना उचित है. इससे आप संभावित रणनीति, प्रमाण-पत्र और डॉक्यूमेंटेशन योजना बना सकते हैं.

कानूनी प्रक्रिया में कितने पैसे लगते हैं?

खर्च केस-परिस्थिति पर निर्भर करता है; सामान्यतः वकील-फीस, कोर्ट-फीस और IP-फीस शामिल होते हैं. भोपाल में स्थानीय फर्मों द्वारा प्रारम्भिक मूल्य-परामर्श संभव है.

IBC के हाल के परिवर्तन कौन-से हैं?

IBC 2021 संस्करण में MSMEs के लिए PPIRP को सम्मिलित किया गया था ताकि MSMEs के लिए तेज, पूर्व-निर्मित Insolvency Resolution Process संभव हो सके. यह छोटे व्यवसायों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाता है.

“Pre-Packaged Insolvency Resolution Process is designed to provide a quicker, predictable and cost-effective insolvency resolution for MSMEs.”

स्रोत: IBBI आधिकारिक प्रकाशन, PPIRP पर जानकारी

अतिरिक्त संसाधन

नीचे भोपाल-आधारित दिवालियापन से जुड़ी मदद और जानकारी के लिये 3 विश्वसनीय संसाधन दिए जा रहे हैं.

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - नियामक प्राधिकारी और पेशेवर पंजीकरण के लिए मुख्य स्रोत. अधिक जानकारी: IBBI वेबसाइट.
  • National Company Law Tribunal (NCLT) और National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) - दिवालिया मामलों की अदालत-प्रक्रिया और अपील के लिये केंद्रीय न्यायिक मंच. अधिक जानकारी: NCLT, NCLAT.
  • Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) / Insolvency Professionals Agencies - Insolvenz मामलों, लेखांकन-नियमन और पेशेवर मार्गदर्शन के लिये. अधिक जानकारी: ICAI.

अगले कदम

  1. अपने दायित्वों का पूर्ण लेखाजोखा बनाएं और ऋण-स्तर की सूची तैयार करें.
  2. भोपाल के अनुभव-युक्त Insolvency Lawyer या Insolvency Professional सेInitial Consultation लें.
  3. आईडीपी नोटिस, ऋण-समझौतों और क्रेडिटर्स-कोर्ट-डाक्यूमेंट्स जुटाएं.
  4. I B B I पंजीकृत प्रोफेशनल के साथ CIRP/PPIRP-प्रक्रिया के लिए मार्गदर्शन बनाएं.
  5. प्रक्रिया के लिए समय-रेखा और संभावित समाधानों पर एक स्पष्ट योजना बनाएं.
  6. कानूनी खर्च और कोर्ट-फीस के बजट की योजना बनाएं और उसे व्यवस्थित करें.
  7. स्थानीय अदालतों, फोरम और क्रेडिटर्स के साथ संचार-योजना तय करें और दस्तावेज़ ट्रैकिंग रखें.

महत्वपूर्ण नोट: ऊपर दिए गए बिंदुओं के साथ-साथ स्थानीय कानून-परिस्थितियां और अदालत-निर्णय अस्थिर हो सकते हैं. नवीनतम जानकारी के लिये IBBI, NCLT/NCLAT और MCA की आधिकारिक साइटें देखें.

संदर्भ-उद्धरण और आधिकारिक स्रोत के लिंक: IBBI, NCLT, NCLAT, MCA.

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अस्वीकरण:

इस पृष्ठ पर दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। हम सामग्री की सटीकता और प्रासंगिकता सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन कानूनी जानकारी समय के साथ बदल सकती है, और कानून की व्याख्या भिन्न हो सकती है। आपको अपनी स्थिति के लिए विशिष्ट सलाह हेतु हमेशा एक योग्य कानूनी पेशेवर से परामर्श करना चाहिए।

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