पुणे में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील

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Reddy & Reddy Law Firm
पुणे, भारत

2010 में स्थापित
English
पुणे, भारत में आधारित रेड्डी & रेड्डी लॉ फर्म विभिन्न अभ्यास क्षेत्रों में व्यापक कानूनी सेवाएं प्रदान करती है,...
Kothari & Jain; Advocates & Law Advisors
पुणे, भारत

2020 में स्थापित
English
कोठारी एंड जैन; एडवोकेट्स एंड लॉ एडवाइज़र्स भारत का एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है, जो व्यापक विधिक विशेषज्ञता के...
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1. पुणे, भारत में दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

दिवालियापन कानून भारत में एक समेकित ढांचे के रूप में Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 के तहत संचालित है। इसका उद्देश्य संस्थागत स्तर पर समय-सीमा के भीतर पुनर्गठन या समाधान प्रदान करना है। पुणे जैसे शहरों में मामलों की सुनवाई generally Mumbai benches वाली NCLT के अंतर्गत होती है और निरीक्षण और प्रवर्तन IBBI द्वारा होता है।

IBC का लक्ष्य आर्थिक दबाव में आए क्रेडिटर्स और डि-फॉरम्ड डिबॉन्डर्स के बीच संतुलन बनाते हुए पुनर्गठन के प्रावधान देता है। यह कंपनियों, साझेदारी फर्मों और व्यक्तियों के लिए एक एकीकृत उपाय प्रदान करता है।

The Code aims to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner.

पुणे में दिवालियापन प्रक्रियाएं अधिकतर NCLT मुंबई बेंच के समक्ष संचालित होती हैं। साथ ही IBBI इस प्रणाली के नियामक के रूप में कार्य करता है और प्रोफेशनल एजेंसी तथा पेशेवरों के पंजीकरण की देखरेख करता है। स्रोत: Insolvency and Bankruptcy Code 2016 - indiacode.nic.in

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • पुणे के एक मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट द्वारा ऋण के कारण क्रेडिटर्स के नोटिस मिलने पर CIRP शुरू होता है; ऐसे समय में एक अनुभवी अधिवक्ता सलाह दे सकता है ताकि प्रक्रिया सही ढंग से शुरू हो और आपका दावा सुरक्षित रहे।
  • एक स्टार्ट-अप या SME पर नकदी संकट आ जाए तो PPIRP जैसे प्री-पैक विकल्पों की शर्तें समझना जरूरी है ताकि समय और लागत कम हो सके।
  • यदि आप किसी मौजूदा ऋण के विरुद्ध सुरक्षा के साथ ऋण चुकाने को लेकर पुनर्गठन की मांग कर रहे हैं, तो एक वकील उचित प्रक्रिया और दस्तावेजीकरण की दिशा दिखाएगा।
  • यदि आप व्यक्तिगत दिवालियापन के अंतर्गत दावा कर रहे हैं या Guarantor हैं, तो व्यक्तिगत insolvency से जुड़ी जटिलताओं का प्रबंधन आवश्यक है।
  • पुणे में बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा ऋण-समझौते, ऋण-धनादेश और सुरक्षा-अनुबंध पर स्पष्टीकरण चाहिए हो, तो एक कानूनी सलाहकार के बिना जोखिम बढ़ सकता है।
  • क्रेडिटर्स के साथ सामंजस्य, योजना क्रियान्वयन और पूरक उपायों के लिए IBC प्रोसेस के अनुभव वाले अधिवक्ता की जरूरत रहती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 : यह केंद्रीय कानून दिवालिया और पुनर्गठन के समय-सीमा-आधार प्रावधान देता है। पुणे-क्षेत्र के मामलों की सुनवाई मुंबई बेंच में होती है।
    To consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner.
    स्रोत: indiancode.nic.in
  • Companies Act, 2013 : कंपनी एक्ट कॉर्पोरेट ढांचे और संहिता के साथ CIRP के पूरक नियंत्रण प्रदान करता है; कुछ स्थितियों में NCLT के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट करता है।
  • SARFAESI Act, 2002 और RDDBFI Act, 1993 : बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को संपत्ति-सम्वन्धित सुरक्षा के आधार पर वसूली के उपाय देता है; IBC के जोड़-तोड़ मामलों में क्रेडिटर्स के विकल्प को प्रभावित करते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवालियापन क्या है?

दिवालियापन एक कानूनी स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति या संस्था अपनी देनदारियों के योग का संतुलन नहीं बना पाती। यह स्थिति समय-सीमा के भीतर समाधान या पुनर्गठन के लिए प्रक्रियाओं के माध्यम से निपटाई जाती है।

पुणे में दिवालियापन केस कहाँ दायर होते हैं?

पुणे के दिवालिया मामलों की सुनवाई सामान्यतः NCLT मुंबई बेंच के सामने होती है। इसके लिए आवेदन IBC के प्रावधानों के अनुसार दायर किए जाते हैं।

CIRP और PPIRP में क्या अंतर है?

CIRP एक संगठनात्मक दिवालियापन प्रक्रिया है जो बहु-क्रेडिटर्स द्वारा चलती है। PPIRP एक प्री-पैक समाधान है जिसे छोटे व्यवसाय के लिए तेज़ किया गया है ताकि पुनर्गठन जल्दी हो सके।

क्या कोई व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए आवेदन कर सकता है?

हाँ, IBC के अंतर्गत व्यक्तिगत insolvency का प्रावधान है। यह प्रक्रिया NCLT के समक्ष Initiate की जाती है और परिसमापन या पुनर्गठन पर आधारित होती है।

मैं क्या खुद प्रक्रिया शुरू कर सकता हूँ?

कानूनी सलाह आवश्यक है ताकि सही अर्ज़ी, दस्तावेज़, क्रेडिटर्स की सूची और आगे की रणनीति तय की जा सके। अधिवक्ता के साथ प्रारम्भिक परामर्श फायदेमंद रहता है।

सबसे प्रभावी समय-सीमा क्या है?

IBC के अनुसार CIRP का समय-सीमा सामान्यतः 180 दिनों के भीतर पूरी करनी होती है; कुछ स्थितियों में अतिरिक्त समय की अनुमति मिल सकती है।

कौनसे दायित्व मेरी फीस और लागत पर असर डालते हैं?

कानूनी शुल्क, अदालत शुल्क, विशेषज्ञों के शुल्क और अनुमानित मामलों की जटिलता आपके total खर्च को प्रभावित करते हैं। शुरुआती परामर्श में स्पष्ट अनुमान मांगें।

नकद-प्राप्ति के लिए कौन से विकल्प उपलब्ध हैं?

क्रेडिटर्स के साथ प्रतिसंयोजन, पुनर्गठन योजना या liquidation के विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं। IBC प्रक्रियाओं में यही मुख्य विकल्प होते हैं।

क्या मैं अपने कानूनी कदम के साथ बैंक से बातचीत कर सकता हूँ?

हाँ, बैंकों के साथ संवाद और ऋण पुनर्गठन योजनाओं पर सहमति बनाना एक सामान्य चरण है। यह प्रक्रिया अधिवक्ता के मार्गदर्शन से ही करना चाहिए।

पुणे में किस प्रकार के वकील उपयुक्त रहते हैं?

IBC, CIRP, PPIRP, और व्यक्तिगत insolvency में अनुभव रखने वाले वकील चाहिए। ऐसे अधिवक्ता बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र और गोवा में पंजीकृत होने चाहिए।

कौनसे आधिकारिक संसाधन मिलते हैं?

IBC की आधिकारिक जानकारी IBBI के साइट पर मिलती है। NCLT के आदेश और सूचनाएं भी आधिकारिक साइट पर उपलब्ध हैं।

क्या मैं अपील कर सकता हूँ यदि मैं निर्णय से असहमत हूँ?

हाँ, आप निर्धारित समय सीमा के भीतर उच्च न्यायालय या अन्य प्राधिकरण के समक्ष अपील कर सकते हैं; यह मामले के प्रकार पर निर्भर करेगा।

पुणे में दिवालिया प्रक्रिया कितनी महंगी हो सकती है?

कानूनी शुल्क, सलाहकारों के शुल्क, कोर्ट फीस आदि मिलाकर लागत भिन्न होती है। प्रारम्भिक परामर्श में खर्च का अनुमान मांगना उचित है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक नियामक वेबसाइट और मार्गदर्शिका. https://www.ibbi.gov.in
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - दिवालियापन मामलों की अपीलीय एवं निर्णायक संस्था. https://nclt.gov.in
  • Ministry of Corporate Affairs (MCA) - कॉर्पोरेट कानूनों के नीतिगत पन्ने और कानूनों का पाठ्य संकलन. https://www.mca.gov.in

6. अगले कदम

  1. अपने व्यक्तिगत या व्यापारी दिवालियापन मुद्दे का स्पष्ट सार प्रस्तुत करें और उद्देश्य निर्धारित करें।
  2. पुणे क्षेत्र के लिए उपयुक्त NCLT बेंच और स्थानीय नियमों की जानकारी एकत्र करें।
  3. IBC के अनुभवी अधिवक्ता या क़ानूनी सलाहकार से शुरुआती परामर्श लें।
  4. कौशल-आधारित प्रश्न, फीस-निर्धारण और केस-योजना के बारे में स्पष्ट लिखित बातचीत करें।
  5. आवेदनों के लिए आवश्यक दस्तावेजों की एक चेकलिस्ट बनाएं और पूरी तैयारी रखें।
  6. सार्वजनिक रिकॉर्ड, क्रेडिटर्स के प्रविष्टियाँ और अदालत के निर्देशों का पालन करें।
  7. यदि लागत नियंत्रण की आवश्यकता हो, तो विशेषज्ञों से लागत-वार चर्चा कर एक निर्णय लें।

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