श्रीनगर में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील
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श्रीनगर, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1. श्रीनगर, भारत में दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन
श्रीनगर सहित पूरे भारत में दिवालियापन कानून का मूल ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) है. IBC का उद्देश्य corporate, partnership firm और individual देनदारों के लिए पुनर्गठन और insolvency resolution को समय-बद्ध तरीके से सुनिश्चित करना है.
IBC में देनदारियों के समाधान के लिए स्पष्ट प्रक्रियाएं और प्राधिकारी तय हैं ताकि क्रेडिटरों के हितों की रक्षा हो सके. यह कोड राष्ट्रीय स्तर पर लागू होता है, और जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए भी इन प्रक्रियाओं का मार्गदर्शन करता है.
“An Act to consolidate and amend the law relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time bound manner.”
IBC की प्रक्रिया में समय-सीमा और अदालतों की भूमिका स्पष्ट की गई है ताकि देनदारी जल्दी निपट सके. समन्वित और पारदर्शी निर्णय लेने हेतु NCLT और NCLAT जैसे उच्च संस्थान नियुक्त हैं.
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
श्रीनगर में दिवालियपन से जुड़ी अधिकांश स्थितियों में एक विशेषज्ञ कानूनी सलाहकार की आवश्यकता होती है. नीचे 4-6 विशिष्ट परिस्थितियाँ दी जा रही हैं जो आपको वकील से मदद लेने के लिए प्रेरित कर सकती हैं.
- परिदृश्य 1: पर्यटन संकट से चाल चल रहा एक होटल या रमन-होटल व्यवसाय कर्ज के भार से परेशान है. बेदखली और पुनर्गठन की प्रक्रियाओं के लिए एक वकील मार्गदर्शन दे सकता है.
- परिदृश्य 2: श्रीनगर में एक एमएसएमई इकाई के पास बैंक贷款 चुकाने में कठिनाई है. CIRP या PPIRP जैसे उपायों के लिए कानूनी सहायता आवश्यक होती है.
- परिदृश्य 3: एक साझेदारी फर्म का आंतरिक टकराव व देनदारियाँ एक दूसरे से जुड़ी हैं. सही करार, क्रेडिटर्स के अधिकार और प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए वकील की मदद जरूरी है.
- परिदृश्य 4: व्यक्तिगत ऋण और क्रेडिट-कार्ड देनदारियाँ बढ़ गईं हैं. व्यक्तिगत insolvency के लिए प्रक्रिया, दस्तावेज और निष्कर्ष निकालना मुश्किल हो सकता है.
- परिदृश्य 5: बैंकिंग क्रेडिटर्स दबाव डाल रहे हैं या SARFAESI के तहत सुरक्षा संपत्तियाँ जब्त होने की धमकी दे रहे हैं. कानूनी संरक्षण और वैकल्पिक समाधान के लिए पेशेवर सलाह आवश्यक है.
- परिदृश्य 6: कई lenders से ऋण और विदेशी देनदारियाँ जुड़ी हैं. cross‑border insolvency या बहुपक्षीय समाधान के लिए सही रणनीति बताने के लिए अनुभवी advisor चाहिए.
इन परिस्थितियों में एक अनुभवी adviser आपके अधिकारों की रक्षा कर सकता है, प्रक्रिया की समय सीमा रख सकता है, और सबसे उपयुक्त समाधान प्रस्तावित कर सकता है.
3. स्थानीय कानून अवलोकन
श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर के निवासी के लिए नीचे दिए गए कानून प्रमुख हैं. इनकी समझ से insolvency के मामलों में सही कदम उठाने में मदद मिलती है.
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - भारत के सभी नागरिकों के लिए insolvency regulation का केंद्रीय ढांचा. यह corporate, partnership firms और individuals दोनों पर लागू होता है.
- Companies Act, 2013 - corporate debtors के लिए Corporate Insolvency Resolution Process (CIRP) सहित कंपनी सम्मत प्रक्रियाओं का आधार.
- SARFAESI Act, 2002 - बैंकों कोsecured debt recovery के लिए संपत्तियों पर चाबियाँ लगाने, बिक्री करने आदि के उपाय देता है; IBC के साथ क्रेडिट सुधार का एक प्रमुख उपकरण है.
जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में UT के शासन और IBC के समानांतर अनुप्रयोग की धाराओं को ध्यान में रखा जाता है. 2019 के Jammu & Kashmir Reorganisation Act के बाद प्रशासनिक ढांचा केंद्र सरकार के अधीन रहा है, फिर भी IBC nationwide लागू है. यह श्रीनगर के निवासियों को एक ही कानूनी फ्रेमवर्क देता है.
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिवालियापन क्या है?
दिवालियापन वह स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति या संस्था अपने देनदारियों का पूरा भुगतान नहीं कर पाती. IBC के अनुसार यह insolvency और पुनर्गठन के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया शुरू कर देता है.
IBC से कौन फाइल कर सकता है?
कथित debtor, creditor या insolvency professional द्वारा insolvency प्रोसेस आरम्भ किया जा सकता है. व्यक्तिगत insolvency के लिए Part III के प्रावधान लागू होते हैं.
क्या व्यक्तिगत दिवालियापन संभव है?
हाँ. IBC Part III के अंतर्गतIndividuals और unincorporated entities के लिए insolvency resolution प्रक्रियाओं का प्रावधान है. स्थानीय वकील आपको आवश्यक कदम और दस्तावेज बताएंगे.
कितना समय लगता है CIRP के अंत तक?
कॉरपोरेट दिवालियापन प्रक्रिया सामान्यतः 180 दिनों में पूरी करने की कोशिश होती है; आवश्यकता पड़ने पर NCLT की अनुमति से इसे 270 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है.
नियुक्त insolvency professional कौन होता है?
IRP या Resolution Professional एक IBBI‑registered प्रोफेशनल होता है, जो CIRP के दौरान debtor के मामलों को संचालित करता है.
क्या मैं वकील के बग़ैर आगे बढ़ सकता हूँ?
IBC प्रक्रियाएं तकनीकी हैं और समय-सीमाएं हैं. एक अनुभवी adviser या IP के बिना जोखिम भरे निर्णय लेने से बचें.
छूट और ऋण निर्वहन कैसे मिलता है?
निर्णय, पुनर्गठन या liquidation की स्थिति में debt relief के विकल्प तय होते हैं. यह केस‑specific होता है और कोर्ट‑आदेश पर निर्भर है.
क्या जम्मू-कश्मीर से insolvency फाइलिंग के लिए किसी विशेष फॉर्म की जरूरत है?
IBC के तहत procedimento सामान्य है, लेकिन दाखिले की प्रक्रिया NCLT के पते और jurisdiction पर निर्भर करती है. स्थानीय adviser मार्गदर्शन देगा.
सीआईआरपी कितने शहरों या स्थानों पर हो सकता है?
IBC के अनुसार यह देशव्यापी कानून है. Bi‑city और NCLT bench के अंतर्गत proceedings हो सकते हैं; Srinagar से nearest NCLT bench का चयन jurisdiction पर निर्भर करेगा.
cross‑border insolvency क्या संभव है?
IBC amendments के अंतर्गत cross‑border insolvency के नियम बनते हैं. यदि विदेशी देनदारियाँ या क्रेडिटर्स हैं तो खास दिशा‑निर्देश लागू होते हैं.
क्या कर्जदार को क्रेडिट रिकॉर्ड पर असर होगा?
दिवालियापन के पथ पर जाने पर क्रेडिट हिस्ट्री पर प्रभाव पड़ सकता है. हालांकि bankruptcy resolution के बाद rehab or fresh start संभव है.
श्रीनगर में insolvency से जुड़ी सहायता कहां से मिल सकती है?
स्थानीय वकील, IBBI‑registered IP और जिला न्यायालय का सहारा लें. उपलब्ध संसाधनों और मदद के लिए IBBI और NCLT के आधिकारिक पन्नों को देखें.
5. अतिरिक्त संसाधन
नीचे श्रीनगर और भारत‑स्तर पर दिवालियापन से जुड़ी 3 विशिष्ट संस्थाओं के आधिकारिक संसाधन दिए गए हैं.
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - मुख्य नीति निर्माता और पंजीकृत Insolvency Professionals के रजिस्ट्रेशन के लिए आधिकारिक साइट: www.ibbi.gov.in.
- National Company Law Tribunal (NCLT) - insolvency मामलों की मुख्य adjudicating authority: www.nclt.gov.in.
- Jammu & Kashmir High Court - UT‑स्तर के कानूनी मामलों के लिए प्रधान अदालत: www.jkhighcourt.nic.in.
6. अगले कदम
- अपनी स्थिति का आकलन करें और स्पष्ट लक्ष्य तय करें- पुनर्गठन या liquidation।
- सभी वित्तीय दस्तावेज एक जगह रखें- बैंक statements, debt details, आवधिक आय/व्यय आदि.
- श्रीनगर में Insolvency से जुड़ा स्थानीय वकील खोजें- IBBI‑registered IP या ICL से पंजीकृत adviser देखें.
- पात्रता और प्रक्रिया के बारे में पहली मुलाकात में स्पष्ट प्रश्न पूछें- समय‑सीमा,fees, cases का प्रकार आदि.
- IRP/IP के साथ संभावित पूरक दस्तावेज़ों की सूची बनाएँ और प्रस्तुत करें.
- NCLT के jurisdiction के अनुसार सही seats और फाइलिंग पथ तय करें.
- केस के दौरान नियमित रूप से अद्यतन रखें- hearing dates, court orders, creditors committee की स्थिति आदि.
संदर्भ उद्धरण:
“An Act to consolidate and amend the law relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time bound manner.”
Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 का उद्देश्य सभी देनदारों के लिए एक समयबद्ध insolvency resolution framework स्थापित करना है.
नोट: ऊपर दी गई जानकारी सामान्य मार्गदर्शन हेतु है. वास्तविक केस के लिए अपनी परिस्थितियों के अनुसार स्थानीय वकील से अवश्य सलाह लें.
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