भारत में सर्वश्रेष्ठ प्रमाणित सत्य प्रतियाँ वकील

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Vidhiśāstras-Advocates & Solicitors
दिल्ली, भारत

2011 में स्थापित
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विधिशास्त्र - अधिवक्ता एवं सलिसिटर, 2011 में श्री आशीष दीप वर्मा द्वारा स्थापित, भारत में एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है...
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1. भारत में प्रमाणित सत्य प्रतियाँ कानून का संक्षिप्त अवलोकन

प्रमाणित सत्य प्रतियाँ वह कॉपी होती है जिसे मूल दस्तावेज के समान सत्य माना गया हो और जिसे किसी अधिकृत अधिकारी ने सत्यापित किया हो।

भारत में एक एकल विशिष्ट कानून नहीं है; इसे अभ्यास के स्तर पर विभिन्न अधिकारिक प्रावधानों के जरिए संचालित किया जाता है।

इन प्रतियों का उपयोग शिक्षा, रोजगार, बैंकिंग, आव्रजन, अदालत आदि कई क्षेत्रों में किया जाता है ताकि मूल दस्तावेज के वैध प्रमाण जमा किये जा सकें।

ऐतिहासिक तौर पर प्रमुख भूमिका भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872, Notaries Act, 1952 और पंजीयन अधिनियम, 1908 के प्रावधानों के तहत बनती है।

हाल के परिवर्तन और डिजिटल फॉर्म के प्रचलन के बीच इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल सिग्नेचर को भी कानूनी मान्यता दी गई है।

“Electronic records have the same legal recognition as paper records.”

Information Technology Act, 2000 (official text)

“Notaries may authenticate the execution of instruments and certify copies of documents.”

उपयुक्त आधिकारिक संदर्भ के लिए देखें Notaries Act, 1952 (भारतीय सरकार की आधिकारिक स्रोत साइटों पर उपलब्ध पाठ).

Notaries Act, 1952 (official text)

“A copy attested by a Gazetted Officer or a Court is admissible as a certified copy in many administrative and legal processes.”

यह अवधारणा भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 और संबंधित प्रशासनिक प्रावधानों में व्यवस्था के रूप में है।

Indian Evidence Act, 1872 (official text)

नोट: प्रमाणित सत्य प्रतियाँ बनाने की प्रक्रिया राज्य-स्तर पर भी भिन्न हो सकती है। पात्र अधिकारी, दस्तावेज के प्रकार और प्रयोजन के अनुसार आवश्यक attestation नियम तय होते हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

कानूनी सहायता लेने से पहले यह समझना आवश्यक है कि किस प्रकार की प्रमाणित प्रतियाँ कहाँ मान्य हैं।

नीचे भारत से सम्बंधित 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं जहाँ वकील की मदद लाभकारी रहती है।

  • शैक्षणिक प्रवेश और प्रमाणन - विश्वविद्यालय या कॉलेज में दाखिले के लिए प्रमाणित सत्य प्रतियाँ चाहिए होती हैं, खासकर निश्‍चित वर्षों के मार्कशीट्स, जन्म प्रमाण पत्र आदि।
  • पासपोर्ट और वीजा आवेदन - पासपोर्ट कार्यालय या इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के लिए पहचान-प्रमाण पत्रों की attested प्रतियाँ अनिवार्य हो सकती हैं।
  • बैंकिंग और ऋण प्रक्रियाएं - गृह ऋण, शिक्षा ऋण आदि के समय आय, पते आदि की प्रमाणित प्रतियाँ मांगी जाती हैं।
  • कानूनी दस्तावेज़ दाखिले - अदालत में याचिका, साक्ष्य या रजिस्ट्रेशन के लिए प्रमाणित प्रतियाँ आवश्यक हो सकती हैं।
  • प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन - पंजीयन, बिक्री-समझौते आदि के लिए प्रमाणीकरणयुक्त प्रतियाँ जरूरी होती हैं।
  • सरकारी सेवाओं के आवेदन - निवास-प्रमाण, आय-प्रमाण आदि के लिए attested copies मांगें जा सकते हैं।

ये निष्कर्ष आम तौर पर वास्तविक परिस्थितियों में सामने आते हैं, लेकिन विशिष्ट प्रावधानों के लिए वकील की सलाह लें ताकि आपकी स्थिति के अनुरूप प्रमाण-पत्र निर्धारित किया जा सके।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

प्रमाणित सत्य प्रतियाँ बनवाने और उनकी वैधता के लिए भारत में मुख्य रूप से निम्न कानून प्रभावी हैं:

  • Indian Evidence Act, 1872 - दस्तावेज़ के प्रमाण के लिए प्रमाणित प्रतियों की भूमिका और secondary evidence के नियम स्थापित करता है।
  • Notaries Act, 1952 - Notaries को दस्तावेजों की सत्यापना और प्रतियों की प्रमाणित प्रतियाँ जारी करने के अधिकार देता है।
  • Registration Act, 1908 - पंजीकृत दस्तावेजों की प्रतियाँ और उनसे जुड़ी सत्यापन प्रक्रिया निर्धारित करता है।

प्रत्येक कानून के अंतर्गत प्रमाण-प्रतियों के लिए मान्यता प्राप्त अधिकारियों की सूची बहुधा राज्य स्तर पर भी निर्धारित होती है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न? प्रमाणित सत्य प्रतियाँ क्या होती हैं?

प्रमाणित सत्य प्रतियाँ वह कॉपी है जिसे मूल दस्तावेज के समान माना गया हो और जिसे किसी प्राधिकृत अधिकारी ने सत्यापित किया हो।

प्रमाणित सत्य प्रतियाँ कौन बनाता है?

Gazetted Officer, Notary Public, Court की अदालत अधिकारी और कुछ मामलों में Registrar आदि प्रमाणित कर सकते हैं।

क्या हर दस्तावेज की कॉपी attested होनी चाहिए?

नहीं, यह प्रत्येक संस्थान के निर्देश पर निर्भर करता है। कुछ जगह government portal या ऑनलाइन आवेदन भी स्वीकार करते हैं।

ડिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक प्रतियाँ मान्य होंगी?

आईटी एक्ट 2000 के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स और डिजिटल सिग्नatures की कानूनी मान्यता है; परन्तु प्रमाण के लिए निर्धारित संस्थान खर्च-पर निर्भर attestation को भी मान सकता है।

क्या बैंक ऋण के लिए attested कॉपियाँ जरूरी हैं?

हाँ, सामान्यतः आय प्रमाण, पते, पहचान जैसे दस्तावेज़ की प्रमाणित प्रतियाँ बैंक ऋण प्रक्रिया में मांगते हैं।

कौन-सा अधिकारी कॉपी प्रमाणित कर सकता है?

Gazetted Officer, Judicial Officer, Court Clerk, Notary Public आदि प्रमाणित कर सकते हैं, जहां आवश्यक हो।

क्या मैं खुद अपने प्रमाणित दस्तावेज़ बना सकता हूँ?

स्व-प्रमाणन (Self-attestation) सामान्यतः नहीं माना जाता; अधिकृत अधिकारी से प्रमाण करवाना चाहिए।

कितनी कीमत लगती है प्रमाणित प्रतियाँ बनवाने में?

यह दर्जे, दस्तावेज़ के प्रकार और राज्य अनुसार भिन्न होता है; सामान्यतः 20 से 200 रुपये तक प्रति प्रतिलिपि शुल्क हो सकता है।

कौन सा दस्तावेज़ attested copies के लिए सबसे आम है?

पहचान पत्र (Pan, Aadhaar) और शिक्षा-related प्रमाण पत्र सबसे सामान्य cobranा होते हैं।

क्या अदालत के रिकॉर्ड की certified copy अलग से चाहिए होती है?

pública रिकॉर्ड के लिए अदालत/कোর্ট-प्राधिकृत अधिकारी से प्राप्त प्रमाणित प्रतियाँ आवश्यक हो सकती हैं।

यदि मैं एक से ज्यादा संस्था के लिए प्रमाणित प्रतियाँ बनवाऊं तो?

हर संस्था के निर्देश-वाले प्रभाग के अनुसार प्रतियाँ बनवाएं; कभी-कभी एक ही attested copy कई संस्थाओं में स्वीकार हो जाती है, पर पुष्टि आवश्यक है।

क्या मैं Certified Copy के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता हूँ?

कुछ राज्य और संस्थान ऑनलाइन attestation-सेवा देते हैं; हर जगह उपलब्धता और मान्यता भिन्न हो सकती है।

प्रमाणित प्रतियाँ कब अवैध हो सकती हैं?

यदि attestation गलत अधिकारी द्वारा किया गया हो या दस्तावेज़ के मूल से भिन्न हो तो वैधता समाप्त हो सकती है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - कानूनी सहायता और सूचना के लिए official साइट: https://www.nalsa.gov.in/
  • Bar Council of India (BCI) - भारतीय वकीलों के पंजीकरण और मार्गदर्शन के लिए: https://www.barcouncilofindia.org/
  • National Judicial Portal (NJP) - न्यायिक सेवाओं और प्रक्रियाओं के लिए: https://www.nationaljudicialportal.in/

6. अगले कदम

  1. देखें कि किस प्रकार की प्रमाणित प्रतियाँ आपकी स्थिति के लिए चाहिएं।
  2. मूल दस्तावेज़ एकत्र करें और उनके स्पष्ट फोटोकॉपी बनाएं।
  3. कौन सा अधिकारी प्रमाणन कर सकता है, यह तय करें (Gazetted Officer, Court, Notary आदि).
  4. आवेदन के लिए आवश्यक फॉर्म और शुल्क जुटाएं।
  5. आवश्यक अधिकारी के सामने या ऑनलाइन attestation कराएं।
  6. प्रमाणित प्रतियाँ प्राप्त होने के बाद उनके रिकॉर्ड की पुनः पुष्टि करें और हर एक संस्था के निर्देश पढ़ें।
  7. यदि किसी संस्था में स्वीकार्यता में संदेह हो, तो वकील से तुरंत सलाह लें।

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