वाराणसी में सर्वश्रेष्ठ बाल शोषण वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
वाराणसी, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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वाराणसी, भारत में बाल शोषण कानून के बारे में

वाराणसी में बाल शोषण न रोकने के लिए भारत के पूर्ण कानून ढांचे लागू होते हैं। प्रमुख कानून POCSO Act 2012 है जो बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों से सुरक्षा देता है।

इसके अलावा Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 बच्चों की देखभाल, संरक्षण एवं पुनर्वास पर केंद्रित है। वाराणसी जिले में इन कानूनों के अनुसार सहायता और संरक्षण की प्रक्रियाएं चलती हैं।

स्थानीय स्तर पर Child Welfare Committee (CWC) और POCSO Special Courts के माध्यम से बच्चों के लिए सुरक्षा और त्वरित ट्रायल के प्रावधान हैं। वाराणसी के पुलिस स्टेशन में POCSO के अंतर्गत FIR दर्ज कराई जा सकती है।

“An Act to provide for the protection of children from offences of sexual assault, sexual harassment and pornography, and for matters connected therewith or incidental thereto.”

POCSO Act 2012 -pre amble

“An Act to provide for the care, protection, development and rehabilitation of children in need of care and protection and children in conflict with the law.”

Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act 2015 - pre amble

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

वाराणसी में बाल शोषण मामलों में विशेषज्ञ कानूनी सहयोग जरूरी है ताकि अधिकार सुरक्षित रहें। नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए जा रहे हैं जिनमें वकील की जरूरत बनती है।

  • बच्चे के साथ यौन अपराध के आरोप सामने आएं और प्राथमिकी POCSO के अंतर्गत दर्ज होनी हो-तुरंत कानूनी मार्गदर्शन चाहिए।
  • ऑनलाइन शोषण या मॉडर्न टेक्नोलॉजी से जुड़े अपराध हों, जिनमें एविडेन्स जुटाने और केस मैनेजमेंट की जरूरत हो।
  • स्कूल या शिक्षण संस्थान में शोषण के मामले हों और CWC के साथ संरक्षण आदेश की आवश्यकता हो।
  • बाल मजदूरी या अन्य उत्पीड़न के मामलों में JJ Act के अनुसार देखभाल और पुनर्वास का चरण-बद्ध प्रकरण चाहिए।
  • घरेलू रिश्तों में घोर शोषण हो तो कानूनी उपाय, सुरक्षा आदेश और आश्रय की मांग करनी पड़े।

वाराणसी में ऊपर बताए परिदृश्यों के लिए स्थानीय अधिवक्ता क्षेत्राधिकार, POCSO Court और CWC से जुड़े अनुभव वाले वकील सबसे उपयुक्त रहते हैं।

स्थानीय कानून अवलोकन

वाराणसी, उत्तर प्रदेश में बाल शोषण से जुड़े कुछ प्रमुख कानून नीचे दिए गए हैं।

  • Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 (POCSO) - बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों के लिए कठोर दंड और विशेष प्रक्रिया की व्यवस्था।
  • Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 - बच्चों की देखभाल, संरक्षण और पुनर्वास के उद्देश्य से प्रावधान।
  • Indian Penal Code के प्रासंगिक प्रावधान - यौन अपराधों से संबंधित धारा 354, 354A, 376 आदि बच्चों के विरुद्ध अपराधों पर लागू होते हैं।

वाराणसी जिले में CWC, DLSA और POCSO Courts की व्यवस्था से बच्चों को त्वरित संरक्षण और वकील की सहायता मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

POCSO क्या है?

POCSO एक ऐसा कानून है जो बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों से सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यह अपराधों के लिए त्वरित ट्रायल और बच्चे-हिताशीत प्रक्रियाएं प्रदान करता है।

कौन FIR दर्ज कर सकता है?

किसी भी व्यक्ति, बच्चा या उसका संरक्षक पुलिस स्टेशन में POCSO के अंतर्गत FIR दर्ज करा सकता है। सुरक्षा और त्वरित सुनवाई के उपाय लागू होते हैं।

क्या बच्चे की पहचान गुप्त रखी जाएगी?

हाँ, POCSO के अंतर्गत बच्चे की पहचान गुप्त रखने के नियम स्पष्ट हैं। मीडिया कवरेज और सार्वजनिक प्रदर्शन पर विशेष रोक है।

अगर मुझे डर लग रहा हो तो क्या मैं संरक्षण मांग सकता हूँ?

हाँ, CWC के अंतर्गत सुरक्षा-आदेश, गवाह सुरक्षा और संरक्षण योजनाओं की व्यवस्था मिलती है।

कौन सा अधिकारी या अधिकारी ड्यूटी पर है?

वाराणसी में थाना-स्तर पर महिला पुलिस अधिकारी POCSO मामलों की प्राथमिक जाँच करते हैं, इसके बाद POCSO कोर्ट का ट्रायल होता है।

मेरा बच्चा ऑनलाइन शोषण का शिकार हो तो क्या करना चाहिए?

PSOCSO के अंतर्गत ऑनलाइन शोषण भी अपराध है। तुरंत FIR दर्ज कराकर एविडेन्स सुरक्षित करें और पुख्ता कानून सलाह लें।

क्या बची सुरक्षा के समय बच्चा स्कूल जा सकता है?

बच्चे को सुरक्षा ख्याल से स्कूल से दूरी बनाकर सीसीटीवी और सुरक्षा उपाय के साथ लौटना चाहिए।

कानूनी सहायता कैसे मिलेगी?

वाराणसी में DLSA तथा CWC से फ्री कानूनी सहायता मिल सकती है। अनुभवी अधिवक्ता POCSO व JJ Act के मामलों में मार्गदर्शन देंगे।

POCSO में बचाव पक्ष के अधिकार क्या हैं?

आरोपी के भी मौलिक अधिकार रहते हैं, पर बच्चों के हित के अनुरूप गवाह सुरक्षा और त्वरित सुनवाई प्राथमिकता में रहती है।

क्या बच्चे को चिकित्सा परीक्षण जरूरी है?

POCSO के अनुसार मेडिकल टेस्ट और दस्तावेजी साक्ष्यों का संकलन किया जाता है, ताकि साक्ष्यों में सफाई हो।

अगर शिकायत गलत हो तो क्या करें?

गलत शिकायत पर विभागीय जाँच और उचित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कदम उठते हैं।

वाराणसी से बाहर किसी अन्य शहर में मामला ट्रांसफर हो सकता है?

हाँ, परिस्थितियों के अनुसार ट्रांसफर या स्थानांतरण सम्भव है, पर नियम और न्यायिक मानकों के अनुसार ही किया जाता है।

अतिरिक्त संसाधन

बाल शोषण के विरुद्ध सहयोग के लिए इन आधिकारिक संसाधनों का उपयोग करें:

  • National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) - राष्ट्रीय स्तर पर बाल अधिकार संरक्षण संस्थान। लिंक: https://ncpcr.gov.in
  • Childline India Foundation - 1098 हेल्पलाइन और बाल संरक्षण सेवाएं। लिंक: https://www.childlineindia.org.in
  • UNICEF India - Child Protection - बाल संरक्षण के राष्ट्रीय और स्थानीय पहलें. लिंक: https://www.unicef.org/india/child-protection

अगले कदम

  1. तुरंत सुरक्षित स्थिति सुनिश्चित करें; बच्ची या बच्चे को सुरक्षित स्थान पर रखें।
  2. नजदीकी थाने में POCSO/अन्य कानूनों के अनुसार FIR दर्ज कराएं।
  3. प्राप्त दस्तावेज-फरिश्ते, मेडिकल रीकॉर्ड, स्कूल रिकॉर्ड आदि एकत्र करें।
  4. वाराणसी के DLSA/DCPO से मिलकर अनुभवी वकील तय करें जो POCSO और JJ Act में विशेषज्ञ हो।
  5. सीधे CWC से संपर्क कर सुरक्षा आदेश व गाइडेड फैसिलिटेशन माँगें।
  6. कानूनी सलाह लेने के साथ-साथ per-petition रिकार्ड और गवाह सुरक्षा की जिम्मेदारी समझें।
  7. बच्चे के हित के अनुरूप उनके लिए उपयुक्त counselling और पुनर्वास योजना सुनिश्चित करें।

वाराणसी निवासियों के लिए व्यावहारिक सुझाव: पहले स्थानीय अदालतों, CWC और DLSA के संपर्क नंबर जुटाएं, और एक विशेषज्ञ वकील से मिलने के लिए appointment लें। यदि बच्चा छोटा है, तो बच्चे के स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

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