देवघर में सर्वश्रेष्ठ बाल समर्थन वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
देवघर, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. देवघर, भारत में बाल समर्थन कानून के बारे में: देवघर में बाल समर्थन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

देवघर, झारखंड में बाल समर्थन कानून मुख्यतः केंद्रीय कानूनों के आधार पर संचालित होते हैं। CrPC की धारा 125 के अंतर्गत बच्चों के लिए मासिकmaintenance तय किया जाता है। देवघर जिले में परिवार अदालत या मजिस्ट्रेट अदालत इस दायित्व के आदेश दे सकते हैं।

मूल उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा और उनके ठीक-ठीक पालन पोषण को सुनिश्चित करना है ताकि माता-पिता की आर्थिक जिम्मेदारी निभ सके। अदालतें सभी पक्षों की आय तथा जरूरतों को ध्यान में रखकर उचित राशि तय करती हैं।

“NALSA provides free legal services to eligible persons.”
स्रोत: National Legal Services Authority (NALSA) - https://nalsa.gov.in

“District Legal Services Authorities provide free legal aid, advice and representation to eligible persons in civil and criminal matters.”
स्रोत: District Courts eCourts Portal - https://districts.ecourts.gov.in

“JHALSA aims to provide legal aid and awareness to promote access to justice.”
स्रोत: Jharkhand State Legal Services Authority - https://jhalsa.nic.in

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: देवघर से संबंध रखने वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

  1. परिदृश्य 1 - तलाक के बाद बाल समर्थन: देवघर के एक माता-पिता ने CrPC 125 के तहत मासिक सहायता की मांग की है; अदालत उचित राशि तय करती है।
  2. परिदृश्य 2 - नॉर्वे-करतार रोजगार वाले पिता देवघर से बाहर रहते हैं: आय के स्रोत और अंतरराज्यीय/अंतरराष्ट्रीय प्रवास के कारण नियमित भुगतान सुनिश्चित कराना कठिन हो सकता है; वकील मदद से एग्रीमेंट और आदेश लागू कराते हैं।
  3. परिदृश्य 3 - पितृत्व सत्यापन और दायित्व तय करना: देवघर के परिवारों में कभी-कभी पितृत्व विवाद होते हैं; साक्ष्य एवं सत्यापन के आधार पर maintenance तय होता है।
  4. परिदृश्य 4 - राशि में कमी-बढ़ोतरी की मांग: आय परिवर्तन या बच्चों की जरूरतों के बढ़ने पर राशि संशोधित करवाने के लिए कानूनी मार्ग आवश्यक है।
  5. परिदृश्य 5 - एकल माता-पिता के लिए मुफ्त कानूनी सहायता: देवघर में DLSA द्वारा मुफ्त सलाह और प्रतिनिधित्व उपलब्ध हो सकता है।
  6. परिदृश्य 6 - अवहेलना पर प्रवर्तन: किसी कारण से भुगतान रुका हो तो अदालत के पास उत्तरदायित्व के प्रवर्तन के उपाय होते हैं।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: देवघर, भारत में बाल समर्थन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

  • Code of Criminal Procedure (CrPC) धारा 125 - कौन-कौन पात्र हैं, कितना भुगतान होगा, और किसकी आय के आधार पर रकम तय होगी-यह सभी निर्दिष्ट है।
  • Hindu Adoptions and Maintenance Act, 1956 (HAM Act) - हिंदू व्यक्तियों के लिए कानूनी रख-रखाव और बच्चों के लिए maintenance का प्रावधान प्रदान करता है।
  • Guardians and Wards Act, 1890 - अंश-पालन, अभिभावक-निर्णय और बालक के हित में रख-रखा निर्णयों पर कानूनन मार्गदर्शन देता है।

देवघर में ये कानून केंद्र-स्तरीय हैं और जिले के नागरिक वेवस्थित तरीके से Family Court या Magistrate Court में आवेदन कर सकते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाल समर्थन क्या है और यह क्यों जरूरी है?

बाल समर्थन वह राशि है जो माता-पिता में से कोई एक बच्चे की देखभाल के लिए देता है। यह सुनिश्चित करता है कि बच्चा शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन आदि से वंचित न हो।

अधिकारी कौन-सा कानून लागू होता है देवघर में?

देवघर में CrPC धारा 125 प्रमुख है, साथ में HAM Act और Guardians and Wards Act भी प्रासंगिक हैं।

किसे maintenance के लिए आवेदन कर सकते हैं?

मान्यताप्राप्त बच्चे, विवाहित-पत्नीया, और बूढ़े माता-पिता भी आवेदन कर सकते हैं, पर बच्चों के लिए सबसे सामान्य मार्ग CrPC 125 है।

Maintenance कितनी मात्रा होगी, यह कैसे तय होता है?

आय, संपत्ति, बच्चे की जरूरतें, शिक्षा और चिकित्सा खर्च आदि मिले-जुले मानदंड हैं। अदालत इन्हें देखकर राशी तय करती है।

क्या maintenance राशि मंजूर हो जाए तो उसे कैसे लागू करें?

आदेश मिलते ही उसे लागू कराने के लिए स्थानीय मजिस्ट्रेट या फैमिली कोर्ट के समकक्ष अधिकार का प्रयोग किया जाता है।

अगर भुगतान नहीं हो रहा हो तो क्या करें?

अदालत से प्रवर्तन आदेश, आय-ग्रहण, संपत्ति का अटैचमेंट आदि हो सकता है। सजा/जेल तक भी निर्णय लिया जा सकता है।

क्या राशि समय-समय पर बदली जा सकती है?

हाँ, आय के बदलाव, बच्चे की जरूरतों के बदलाव पर राशि संशोधित की जा सकती है।

क्या बच्चे की स्थिति के अनुसार मां या पिता प्रभावित होते हैं?

निर्णय बाल-हित पर आधारित होता है; custody और visitation भी निर्णय का हिस्सा बन सकता है।

डेगघर में फाइल कैसे करें?

सबसे पहले स्थानीय DLSA या Family Court से संपर्क करें; वे मुफ्त कानूनी सहायता और प्रक्रिया बतायेंगे।

क्या कोर्ट के बाहर समझौता संभव है?

हाँ, पक्षकार एक समझौते पर आपस में पहुंच सकते हैं; फिर इसे अदालत में प्रमाणित किया जा सकता है।

क्या सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में अपील संभव है?

हाँ, अगर किसी पक्ष को निर्णय से असंतुष्टि हो तो ऊपरी न्यायालय में अपील की जा सकती है।

क्या विदेशी या NRIs पर भी आदेश लागू होते हैं?

हाँ, CrPC 125 के अंतर्गत अंतर-राज्य या अंतर-देश प्रवास के बावजूद आदेश लागू हो सकता है और प्रवर्तन किया जा सकता है।

यदि बच्चे की आयु 18 वर्ष से अधिक हो जाए तो?

18 वर्ष के बाद भी यदि आश्रय या शिक्षा-समर्थन जरूरी हो, तो अदालत अनुरोध पर निर्णय दे सकती है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता और मार्गदर्शन के लिए मुख्य सरकारी संस्था। https://nalsa.gov.in
  • Jharkhand State Legal Services Authority (JHALSA) - राज्य-स्तर पर कानूनी सहायता और जागरूकता कार्यक्रम। https://jhalsa.nic.in
  • Deoghar District Legal Services Authority (DLSA) / Deoghar District Court eCourts Portal - स्थानीय कानूनी aid और मार्गदर्शन के साधन। https://districts.ecourts.gov.in/deoghar

6. अगले कदम: बाल समर्थन वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने नजदीकी DLSA या Family Court से संपर्क कर मुफ्त कानूनी सहायता के विकल्प जानें।
  2. Deoghar जिला कोर्ट के नाम-रजिस्ट्री और उपलब्ध वकीलों की सूची एकत्र करें।
  3. कानून-परामर्श के लिए एक प्रारम्भिक मुलाकात तय करें।
  4. आवश्यक दस्तावेज़ जैसे पहचान-पत्र, आय प्रमाण, बच्चे का जन्म-प्रमाण-पत्र, मौजूदा आदेश आदि तैयार करें।
  5. CrPC 125 के अंतर्गत आवेदन बनवाने या संशोधन के लिए सलाह लें।
  6. वकील के साथ संभव-जिम्मेदारी, फीस संरचना और समय-सीमा तय करें।
  7. अगर निर्देशित हो, तो अदालत के प्रवर्तन उपायों के लिए कदम उठाएँ और रिकॉर्ड रखें।

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