हज़ारीबाग में सर्वश्रेष्ठ बाल समर्थन वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
हज़ारीबाग, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

1. हज़ारीबाग, भारत में बाल समर्थन कानून के बारे में

हज़ारीबाग झारखंड का एक प्रमुख जिला है जहां बाल समर्थन कानून लागू होते हैं. प्राथमिक कानून CrPC की धारा 125 और Guardians and Wards Act 1890 प्रमुख हैं.

«If any person having sufficient means neglects or refuses to maintain his wife, a legitimate or illegitimate child, or his legitimate or illegitimate parent, unable to maintain themselves, he shall be punishable»

यह प्रवधान अदालत से मासिक भत्ते की मांग करने के अधिकार को स्थापित करता है. Guardians and Wards Act 1890 के तहत अदालत बच्चों के देखभाल और maintenance का निर्देश दे सकती है.

«The guardian of a minor or the person of a minor may be ordered to pay for the maintenance of the minor; the court may make such order as it thinks fit for the custody, care and maintenance of the minor»

हज़ारीबाग के फेमिली कोर्ट में इन धाराओं के अनुसार मामले सुने जाते हैं. यदि हिन्दू परिवार के बच्चे हैं, तो Hindu Marriage Act के प्रावधान भी लागू होते हैं. यह क्षेत्रीय अदालतों में लंबी दूरी के बजाय स्थानीय प्रक्रियाओं को सरल बनाता है.

आधिकारिक स्रोत जानकारी के लिए देखें: Legislative - Code of Criminal Procedure, eCourts - District Hazaribagh.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

हज़ारीबाग में बाल समर्थन मामलों में एक वकील या कानूनी सलाहकार की मदद आवश्यक होती है. नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों के उदाहरण हैं.

  • CrPC धारा 125 के अंतर्गत maintenance आदेश के लिए आवेदन देना होता है, जिसे समझना और सही तरीके से दायर करना जरूरी है.
  • बाल-भरण के साथ अभिभावकत्व और रख-रखाव के लिए गार्जियन एंड वार्ड्स एक्ट के निहित आदेशों की क्रियान्वयन की जरूरत होती है.
  • अगर भरण-भत्ता अदायगी में देरी हो रही है, तो अदालत से arrears recovery के उपाय चाहिये.
  • हज़ारीबाग की फेमिली कोर्ट में interim maintenance और final maintenance के लिए अलग-अलग प्रक्रियाएँ समझनी होंगी.
  • हिन्दू परिवार में शिक्षा-भरण और तलाक के समय майनеспубликरी भरण-भत्ता के मामले आते हैं; अनुभवी advokat की जरूरत रहती है.
  • कथित द्वৈल के मामले में कानूनी सहायता का लाभ उठाने के लिए सरकारी या NGO-आधारित मदद लेना फायदेमंद होता है.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • Code of Criminal Procedure 1973 - धारा 125 - पत्नी, बच्चों या माता-पिता के maintenance के लिए अदालत द्वारा मौसिक अंश-भत्ते का आदेश दिया जा सकता है.
  • Guardians and Wards Act 1890 - अदालत बाल के देखभाल, शिक्षा और maintenance के लिए आवश्यक आदेश दे सकती है.
  • Hindu Marriage Act 1955 - हिन्दू परिवार में पत्नी और बच्चों के लिए maintenance के interim और permanent प्रावधान उपलब्ध हैं;Sections 18 और 25 प्रमुख हैं.

इन शब्दावली के साथ हज़ारीबाग के निवासियों के लिए स्थानीय अदालतों के पते और संपर्क आवश्यक होते हैं. स्थानीय फेमिली कोर्ट और जिला न्यायालय के बारे में जानकारी eCourts पोर्टल पर मिलती है.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाल भरण-भत्ता क्या है?

यह अदालत द्वारा माता-पिता में से किसी को मासिक भुगतान के रूप में निर्देशित किया गया राशि है जिससे बच्चा आवश्यक देखभाल प्राप्त करे. भुगतान का उद्देश्य बच्चे की शिक्षा और स्वास्थ्य को सुनिश्चित करना है.

कौन पात्र है maintenance के लिए?

विधिमान्य रूप से पत्नी, बच्चे और कभी-कभी माता-पिता जिस समूह के पास पर्याप्त आय नहीं है, उनके लिए maintenance संभव है. अदालत यह तय करती है कि भुगतान कितना और कब तक देना है.

फाइल कैसे करें?

हज़ारीबाग के फेमिली कोर्ट में आवेदन फॉर्म और supporting दस्तावेज साथ में दायर करना होता है. आम दस्तावेज पहचान-पत्र, बच्चों के जन्म प्रमाण, खर्च का ब्योरा और आय प्रमाण होते हैं.

व्यक्ति को कितना भुगतान करना होगा, यह कैसे तय होता है?

आय, बचत, चिकित्सा खर्च, बच्चों की आवश्यकताएं और निवास स्थान जैसे कारकों पर फैसला होता है. अदालत इन सभी तत्वों का मूल्यांकन करके आदेश देती है.

क्या interim maintenance मिल सकता है?

हाँ, अदालत proceedings के दौरान अस्थाई maintenance दी जा सकती है ताकि बच्चे की तत्काल जरूरतें पूरी हों. यह अक्सर शुरुआती चरणों में तय किया जाता है.

क्या maintenance को अस्वीकार किया जा सकता है?

यदि संपार्श्विक प्रमाण मिलते हैं जैसे आय की गलत सूचना, आदेश का उल्लंघन या दखलदारी, तब अदालत निर्णय पलट सकती है.

क्या उनके पास कानूनी Aid मिल सकता है?

हाँ, NALSA और JHALSA जैसी संस्थाएं मुफ्त या सस्ती Legal Aid उपलब्ध कराती हैं. आवेदन के साथ आवश्यक प्रमाण दे कर लाभ लिया जा सकता है.

कौन से दस्तावेज जरूरी होते हैं?

आय प्रमाण पत्र, बच्चे के जन्म प्रमाण, बच्चे की देखभाल के खर्चों का रिकॉर्ड, स्कूल फीस, इलाज खर्च आदि जरूरी हो सकते हैं.

अगर पिता- माता-पिता अलग रहते हैं, तब भरण-भत्ता कैसे तय होगा?

अलग रहते हुए भी भरण-भत्ता का अनुरोध किया जा सकता है. अदालत निर्देशन कर देती है कि किस समय, कहाँ, और कितनी राशि देनी है.

अधिकार किसका है: custody बनाम maintenance?

custody (देखभाल) अलग विषय है और maintenance से अलग निर्णय होता है. कई बार दोनों मामलों को साथ रखा जा सकता है.

कब तक child maintenance जारी रहता है?

आमतौर पर बाल 18 वर्ष के होने तक या शिक्षा पूरी होने तक maintenance जारी रखा जाता है. शिक्षा पूरी होने के बाद अदालत भिन्न निर्णय दे सकती है.

क्या मैं एक advokat चुनकर हाई-कोर्ट तक जा सकता हूँ?

हाँ, यदि जरूरी हो तो आप अधिक अनुभवी advocate से विशिष्ट मार्गदर्शन ले सकते हैं और appellate options पर विचार कर सकते हैं.

हज़ारीबाग में किस प्रकार की राहत मिल सकती है?

Interim maintenance, arrears recovery, custody adjustments, और guardianship के अनुरोध जैसी राहतें मिल सकती हैं.

5. अतिरिक्त संसाधन

  1. National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता और जागरूकता कार्यक्रम. https://nalsa.gov.in
  2. Jharkhand State Legal Services Authority (JHALSA) - झारखंड में राज्य स्तर पर लिगल एड सेवाएं. http://jhalsa.org
  3. Childline India Foundation - बच्चों के संरक्षण के लिए Helpline और मार्गदर्शन. https://www.childlineindia.org.in

6. अगले कदम

  1. हज़ारीबाग के करीबी Family Court का संपर्क विवरण इकट्ठा करें. eCourts पोर्टल देखें.
  2. आवेदन के लिए आवश्यक Dcouments तैयार रखें-यानी आय प्रमाण, बच्चे का जन्म प्रमाण, फीस खर्च आदि.
  3. कानून विशेषज्ञ या कानूनी सलाहकार से initial consultation बुक करें.
  4. Legal aid के लिए आवेदन करें यदि आप पात्र हैं-NALSA या JHALSA के संकेतों के अनुसार।
  5. सीधे अदालत में एक वकील के साथ maintenance case दायर करें और अपने दावे का ठोस रिकॉर्ड बनाएं।
  6. आदेश के अनुसार भत्ते की अदायगी शुरू हो और arrears के लिए monitoring रखें.
  7. अगर निर्णय से संतुष्टि नहीं मिले तो उचित appellate options पर विचार करें और प्रक्रिया की समयसीमा जानें.

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