लखनऊ में सर्वश्रेष्ठ बाल समर्थन वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड


1980 में स्थापित
English
1980 में स्थापित, डी एस चौबे एंड एसोसिएट्स (एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स) लखनऊ, भारत में आधारित एक पूर्ण-सेवा विधिक फर्म...
लखनऊ, भारत

English
एटी लॉ चैम्बर एक गतिशील पूर्ण-सेवा कानूनी फर्म है जिसका मुख्यालय लखनऊ, भारत में स्थित है, और इसके अतिरिक्त...
Max Law Firm
लखनऊ, भारत

English
मैक्स लॉ फर्म एक पंजीकृत पार्टनरशिप फर्म है जिसमें विभिन्न कानूनी क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले कुशल व...
LEXAMEET PROFESSIONAL'S LLP - A LAW FIRM
लखनऊ, भारत

2020 में स्थापित
English
LEXAMEET PROFESSIONAL'S LLP भारत में स्थित एक पूर्ण-सेवा विधिक फर्म है, जो देश भर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्राहकों को कानूनी...
Advo Talks
लखनऊ, भारत

2019 में स्थापित
English
AdvoTalks, जो अकरशन श्रीवास्तव द्वारा मुख्य विधि अधिकारी वत्सल्य अजीत श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में स्थापित एक...

2017 में स्थापित
English
लॉयर कॉर्पोरेट, मुख्यालय लखनऊ में स्थित, एक प्रतिष्ठित कानूनी फर्म है जो कॉर्पोरेट, संपत्ति, रियल एस्टेट, तलाक,...
Mishra & Associates Law Firm

Mishra & Associates Law Firm

30 minutes मुफ़्त परामर्श
लखनऊ, भारत

2012 में स्थापित
उनकी टीम में 6 लोग
English
Hindi
मिश्रा एंड एसोसिएट्स दशकों से एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है। हमारे विशेषज्ञ कानूनी पेशेवरों की टीम के साथ, हम सिविल,...

2010 में स्थापित
उनकी टीम में 500 लोग
English
ABHISHEK BHATNAGAR AND ASSOCIATES LEGAL CONSULTANTS LLP is a Lucknow-based law firm with PAN India reach, founded in 2010 by Adv. Abhishek Bhatnagar. It is recognized for its focus on cyber laws and cyber forensics, and has grown into a prominent, dedicated, committed, tested, and trusted name for...
LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH
लखनऊ, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

1. लखनऊ, भारत में बाल समर्थन कानून के बारे में

लखनऊ में बाल समर्थन से जुड़े मामले परिवार अदालतों के सक्षम क्षेत्राधिकार में आते हैं। परिवार अदालतें “फैमिली कोर्ट्स ऐक्ट 1984” के अनुरूप स्थापित हुई हैं ताकि बच्चों के हित को प्राथमिकता दी जा सके।

बाल समर्थन कानून के मुख्य स्रोत 125 सीआरपीसी, हिन्दू मैरेज एक्ट 1955, और DV अधिनियम 2005 हैं, जो बच्चों के बुनियादी संरक्षण की गारंटी देते हैं। अदालत माता-पिता की आय और बाल की आवश्यकताओं के अनुसार भरण-पोषण निर्धारण करती है।

Lucknow की स्थानीय प्रक्रियाओं में डिफॉल्ट भरण-पोषण से लेकर संशोधित बेरोजगारी या आय परिवर्तन के मामलों तक फाइलिंग, सुनवाई और लागू करना शामिल है। अक्षम योजनाओं और कानूनी सहायता के लिए जिला न्याय सेवा एजेंसी (DLSA) से सहायता मिल सकती है।

उद्धरण: “125 सीआरपीसी के अंतर्गत पति, पत्नी और बच्चों के लिए भरण-पोषण के लिए न्यायालय आदेश देता है।”
Source: Code of Criminal Procedure, 1973, Section 125. https://legislative.gov.in
उद्धरण: “हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के अधीन धारा 24 और 25 में पत्नी और बच्चों के लिए维护 का प्रावधान है।”
Source: Hindu Marriage Act, 1955. https://legislative.gov.in

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे Lucknow से संबद्ध 4-6 वास्तविक परिदृश्य दिए जा रहे हैं जिनमें कानूनी सलाह आवश्यक हो सकती है।

  • पिता-या मातापिता द्वारा भरण-पोषण भुगतान रोकना - Lucknow में रहने वाले पिता ने बच्चों के लिए भरण-पोषण का भुगतान रोक रखा है, तो आपको वैधानिक चरणों के साथ अदालत का सहारा लेना चाहिए।
  • बच्चे के हित में संरक्षित पाने के लिए चिकित्सा और शिक्षा खर्च का निर्धारण - малы बच्चे के लिए आवश्यक खर्चों की स्पष्ट सूची और भुगतान का निर्धारण, अदालत से आदेश चाहिए हो सकता है।
  • गैर-निवासी माता/पिता के विरुद्ध भरण-पोषण संशोधन申请 - विदेश में काम कर रहे पिता/माता Lucknow से संपर्क कर रहे हों, फिर भी अदालत से modification या enforcement की जरूरत पड़ सकती है।
  • DV एक्ट के साथ भरण-पोषण और संरक्षण एक साथ चाहिए - घरेलू हिंसा के मामलों में संरक्षण के साथ बच्चों के लिए भरण-पोषण का भी दावा किया जा सकता है।
  • युवा-या असंवधन आय होने पर भरण-निर्धारण - आय परिवर्तन के कारण अदालत से भरण-निर्धारण में बदलाव की मांग करना पड़ सकता है।
  • एनीमिक-गरीबी या आय-संसाधन में बदलाव के बाद पुनः सुनवाई - नौकरी घटने या आय घटने पर भरण-पोषण की मात्रा संशोधित किया जा सकता है।

Lucknow में कानूनी सहायता के लिए आमतौर पर परिवार अदालत के साथ-साथ डिस्टिक्ट लॉ फोर और लोक अदालतें भी मार्गदर्शन देते हैं।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

Lucknow के लिए बाल समर्थन को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानूनों के नाम:

  • Code of Criminal Procedure, 1973 - धारा 125 - बच्चों, महिलाओं और वृद्ध पिताओं/माताओं के लिए भरण-पोषण का आदेश दिया जा सकता है।
  • Hindu Marriage Act, 1955 - धारा 24-25 के तहत हिंदू पति-पत्नी के लिए भरण-पोषण और अदायगी के आदेश का प्रावधान।
  • Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 - घरेलू हिंसा के साथ बच्चों के लिए सुरक्षा और सुरक्षा-भरण-पोषण के reliefs प्रदान करता है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ में बाल भरण- पोषण क्या है?

बाल भरण-पोषण अदालत द्वारा तय किया गया वित्तीय समर्थन है जो बच्चे की देखभाल, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्चों के लिए दिया जाता है।

कौन भरण-पोषण के लिए दायर कर सकता है?

विधवा, विवाहित या अविवाहित माता-पिता, संरक्षक, और अदालत के आदेश से नियुक्त अभिभावक भरण-पोषण के लिए दायर कर सकते हैं।

125 CrPC किसके लिए लागू है?

125 CrPC के अंतर्गत पति, पत्नी और बच्चों के लिए भरण-पोषण का आदेश दिया जा सकता है।

भरण-पोषण की रकम कैसे तय होती है?

आय-उत्पत्ति, बच्चों की जरूरतें, शिक्षा और बीमारी जैसी परिस्थितियाँ देख कर अदालत तय करती है।

क्या भरण-पोषण उम्र बढ़ने पर समाप्त हो जाता है?

आमतौर पर तब तक जब तक बच्चा पूर्ण रूप से स्वतंत्र रूप से आय कमाने में सक्षम न हो या शिक्षा समाप्त न हो जाए।

क्या बेटा-बेटी दोनों के लिए भरण-पोषण शामिल है?

हां, भरण-पोषण सभी बच्चों के लिए हो सकता है, बशर्ते अदालत की अनुमति और कानून के अनुसार हो।

क्या अलग राज्य से अदालत में केस लड़ा जा सकता है?

हाँ, Lucknow की फैमिली कोर्ट में दायर किया जा सकता है, अगर माता-पिता या बच्चा Lucknow से जुड़ा हो।

भरण-पोषण संशोधन कब हो सकता है?

आय में बदलाव, नौकरी छूटना या बच्चे की आवश्यकताओं में परिवर्तन पर संशोधन संभव है।

भरण-पोषण कैसे लागू कराया जाता है?

आदेश मिलने के बाद उसकी पालन न हो तो कोर्ट-आदेश की निष्पादन प्रक्रिया से enforce किया जा सकता है।

कौन से प्रमाण आवश्यक होंगे?

आय के दस्तावेज, बच्चे के रहने-खर्च के बिल, शैक्षणिक खर्च के रिकॉर्ड, और चिकित्सा खर्च के प्रमाण जरूरी होते हैं।

बच्चा यदि गुदगुदा या विकलांग हो?

तब विशेष खर्चों के लिए अदालत से अतिरिक्त सहायता/वित्तीय संसाधन मांगने का अधिकार होता है।

क्या maintenance का अधिकार DV केस के साथ जुड़ा रहता है?

हाँ, DV केस के दौरान भी भरण-पोषण के reliefs और सुरक्षा-आदेश मिल सकते हैं।

क्या बाहर रहने वाले पिता से भरण-पोषण करवाया जा सकता है?

हाँ, अदालत के आदेश से विदेश में रहने वाले पिता से भी भरण-पोषण प्राप्त हो सकता है और पालन कराया जा सकता है।

5. अतिरिक्त संसाधन

बाल समर्थन से जुड़ी जानकारी और सहायता के लिए निम्न संगठनों से संपर्क करें:

6. अगले कदम

  1. अपने नजदीकी फैमिली कोर्ट Lucknow में भरण-पोषण से जुड़ा मामला दर्ज कराने के लिए एक वकील से मिलें।
  2. आवश्यक दस्तावेज एकत्र करें जैसे आय प्रमाण, बच्चे के खर्च के बिल, परिवार का residential proof।
  3. कानूनी सलाह के बाद उचित आवेदन-प्रपत्र तैयार करें और अदालत में दाखिल करें।
  4. समझौते के विकल्प पर विचार करें, परन्तु बच्चों के हित को प्राथमिक रखें।
  5. चालू सुनवाई और देयत की निगरानी के लिए निर्धारित तिथि पर अदालत में उपस्थित रहें।
  6. यदि भुगतान न हो तो वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ निष्पादन (execution) प्रक्रिया शुरू करें।
  7. डील-श्योरिटी और सहायता के लिए NCPCR, Childline और E-Courts जैसे आधिकारिक संसाधनों का उपयोग करें।

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