चंडीगढ़ में सर्वश्रेष्ठ बच्चे से मिलने की व्यवस्था वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

DHIRS & DHIRS ATTORNEYS
चंडीगढ़, भारत

1999 में स्थापित
English
DHIRS & DHIRS ATTORNEYS चंडीगढ़ स्थित एक विधिक अभ्यास है जो व्यक्तियों और व्यवसायों को दीवानी और आपराधिक कानूनी सेवाएं प्रदान...
Bhandari Law Firm
चंडीगढ़, भारत

English
एडवोकेट जगन नाथ भंडारी द्वारा स्थापित भंडारी लॉ फर्म ने अपनी ईमानदारी और मूल्य-आधारित, सक्रिय कानूनी सलाह के लिए...
The Law Codes
चंडीगढ़, भारत

1984 में स्थापित
English
The Law Codes एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है जिसका मुख्यालय चंडीगढ़ में स्थित है और इसका पूरे भारत में व क्षेत्रीय...
Oberoi Law Chambers

Oberoi Law Chambers

15 minutes मुफ़्त परामर्श
चंडीगढ़, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
English
Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
Avish Malhotra
चंडीगढ़, भारत

English
अविश मल्होत्रा भारत में एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है, जो सिविल कानून, आपराधिक न्याय, तलाक और पारिवारिक कानून सहित...
जैसा कि देखा गया

1. चंडीगढ़, भारत में बच्चों से मिलने की व्यवस्था कानून के बारे में

चंडीगढ़ में बच्चों के अतुलनीय कल्याण को सर्वोच्च मानकर custody और visitation के मामलों का निर्णय फैमिली कोर्ट द्वारा किया जाता है। यह प्रक्रिया Guardians and Wards Act 1890 और Family Courts Act 1984 के प्रावधानों के अनुसार चलती है। अदालतें बच्चे के हित को प्राथमिक मानकर समय-सारिणी और शिक्षा-सम्बंधी स्थिति को भी ध्यान में रखती हैं।

चंडीगढ़ के निवासियों के लिए आप एक कानूनी सलाहकार या advokat से मिलकर अपने केस की सही दिशा तय कर सकते हैं। आम तौर पर याचिका दाखिल करन के साथ मोडरेशन, mediation और interim orders मिलना संभव होता है। निर्णय खासकर बच्चे की सुरक्षा, शिक्षा और मानसिक सुख के अनुरूप होता है।

क्योंकि बच्चों के कल्याण पर निर्णय लिया जाता है, नीचे के उद्धरण इस विषय में आधिकारिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हैं:

The welfare of the minor shall be the paramount consideration.
Source: Guardians and Wards Act 1890, Section 4, India Code
In matters relating to the custody of a child, the best interests of the child shall be of paramount importance.
Source: UN Convention on the Rights of the Child Article 3, un.org
The child shall not be separated from his or her parents against their will, except when it is in the best interests of the child.
Source: UNCRC Article 9, unicef.org

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  1. विवाह विच्छेद के बाद बच्चों के visitation और custody के लिए बाबा-या माँ के अधिकार निर्धारण करना जरूरी होता है। Chandigarh के फैमिली कोर्ट में यह प्रक्रिया तेज नहीं हो पाती है यदि दस्तावेज और तर्क स्पष्ट न हों। इन स्थितियों में एक अनुभवी कानूनी सलाहकार बहुत मददगार होता है

  2. यदि आप गैर-हिरासत वाले पक्ष हैं और बच्चों से मिलने के अधिकार मांगना चाहते हैं तो कोर्ट के समक्ष उचित याचिका, आवेदन और सुराग प्रस्तुत करने के लिए वकील चाहिए होता है। Chandigarh में guardian and access petitions के लिए वकील मार्गदर्शन आवश्यक है।

  3. relocation यानि दूसरे शहर या राज्य में स्थानांतरण के समय अदालत की अनुमति जरूरी होती है। कानूनी सलाहकार से योजना बनाकर स्थानीय अदालत में उचित आवेदन बन सकता है।

  4. यदि माता-पिता के बीच सुरक्षा के डर या घरेलु हिंसा के मामले हों, तब child safety के साथ visitation arrange करना कठिन हो सकता है। ऐसे मामलों में कानूनी सलाहकार सुरक्षा और custody के संतुलन पर मार्गदर्शन देते हैं।

  5. अंतर-राज्यीय मुद्दों में Chandigarh और पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार की जाँच जरूरी रहती है। इस प्रकार के मामलों में एक advokat की जरूरत पड़ती है ताकि उचित फार्मिंग और निर्देश मिल सके।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

2-3 विशिष्ट कानून

  • Guardians and Wards Act, 1890 यह कानून बच्चों की देखरेख और संरक्षण से जुड़ी याचिकाओं के नियम निर्धारित करता है। बच्चों की कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

  • Hindu Minority and Guardianship Act, 1956 हिन्दू बच्चों के प्राकृतिक अभिभावक कौन होंगे इसके नियम निर्धारित करते हैं। इसमें अभिभावक की भूमिका और अधिकार स्पष्ट हैं।

नोट Chandigarh UT के लिए Family Courts Act 1984 के अनुसार फैमिली कोर्ट परिवार के मामलों की सुनवाई करता है। Chandigarh District Court के अंतर्गत custody और visitation के आदेश भी जारी होते हैं।
Chandigarh District eCourts Portal पर अदालती प्रक्रियाओं और फॉर्म्स की जानकारी मिलती है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बच्चे से मिलने की व्यवस्था के लिए मुझे कौन-सी अदालत में याचिका दायर करनी चाहिए?

Chandigarh में custody और visitation के लिए सामान्यतः Family Court, Chandigarh में याचिका दायर की जाती है। यदि मामला किसी विशेष आयु या सुरक्षा से जुड़ा है तो District Court के उचित विभाग में भी आवेदन किया जा सकता है।

कब संयुक्त पालकत्व (joint custody) संभव हो सकता है?

अगर बच्चों का welfare संयुक्त रूप से बेहतर समझा जाए और दोनों माता-पिता बच्चों की देखरेख में समान भागीदारी निभाने को तैयार हों, तो संयुक्त पालकत्व का आदेश दिया जा सकता है। अदालत बच्चों के शिक्षा, सुरक्षा और भावनात्मक विकास को प्रमुख मानती है।

क्या मैं visitation के लिए interim orders मांग सकता हूँ?

हाँ, यदि स्थिति तुरंत visitation की मांग बनाती है तो अदालत interim or ex parte orders दे सकती है ताकि बच्चे की सुरक्षा और संबंध बना रहे।

relocation के समय क्या अनुमति अनिवार्य है?

हाँ, Chandigarh से relocation के लिए भी अदालत से पूर्व अनुमति आवश्यक है ताकि बच्चे के हितों का संतुलन बना रहे।

grandparents या अन्य सम्बन्धी क्या visitation मांग सकते हैं?

कभी-कभी अदालत guardianship के अधिकार के बाहर भी visitation rights दे सकती है, जब यह बच्चे के best interests के अनुरूप हो।

कायदे के अनुसार custody निर्णय कैसे लिया जाता है?

सबसे पहले welfare of the child को ध्यान में रखा जाता है; उम्र, शिक्षा, स्वास्थ्य, माता-पिता की स्थिति और बच्चे की आवाज आदि तत्वों पर निर्णय होता है।

कानूनी सहायता कौन दे सकता है?

NALSA और Chandigarh District Legal Services Authority जैसे प्रावधान मुफ्त या सस्ती कानूनी सहायता देते हैं, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए।

क्या अदालत फीडबैक के लिए स्कूल डेटा माँग सकती है?

हाँ, अदालत बच्चे के शिक्षा रिकॉर्ड, स्कूल से पंक्ति, मेडिकल रिकॉर्ड आदि मांग कर निर्णय लेने में उपयोग कर सकती है।

क्या बच्चे की उम्र का निर्णय में असर होता है?

हाँ, बच्चे की उम्र और उसकी इच्छा का आकलन किया जाता है, पर final निर्णय welfare के आधार पर लिया जाता है।

क्या ऑनलाइन या डिजिटल संकेत अदालत मानती है?

हाँ, दस्तावेज़ी साक्ष्य, ईमेल, व्हाट्सएप संदेश आदि भी पत्राचार के रूप में प्रस्तुत किए जा सकते हैं; अदालत इन्हें सुनवाई के दौरान मान सकती है।

कानूनी सहायता कैसे पाएं और शुल्क कितने होते हैं?

Nalsa और Local Legal Services Authority के तहत कई बार शुल्क से मुक्त या कम रखा जाता है; शुरुआत में आवेदन पत्र देकर eligibility चेक कर सकते हैं।

क्या अदालत आवश्यक mediation या counseling आदेश दे सकती है?

हाँ, कई बार अदालत mediation या family counseling के लिए निर्देश दे सकती है ताकि बच्चों के हित में व्यवहारिक समाधान निकल सके।

क्या बच्चों की आवाज सुनना आवश्यक होता है?

हां, अदालत आयु-अनुसार बच्चों से मुलाकात और उनकी राय को सुनने का अवसर दे सकती है ताकि निर्णय उनके हित में हो सकें।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) राष्ट्रीय स्तर पर नि:शुल्क या कम शुल्क पर कानूनी सहायता प्रदान करता है. https://nalsa.gov.in
  • Chandigarh District Legal Services Authority Chandigarh जिले में कानूनी सहायता सेवाओं के लिए स्थानीय सुविधा प्रदान करता है. https://districts.ecourts.gov.in/chandigarh
  • Punjab and Haryana High Court Legal Services Committee उच्च न्यायालय स्तर पर कानूनी सहायता के निर्देश देता है. https://highcourtchd.gov.in

6. अगले कदम

  1. अपना लक्ष्य स्पष्ट करें कि आपको custody, visitation या both चाहिए।
  2. बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड, मेडिकल रिकॉर्ड और पिछले कोर्ट के आदेश इकट्ठा करें।
  3. Chandigarh के एक अनुभवी फैमिली लॉयर या वैध सलाहकार से मिलें और केस की रणनीति बनाएं।
  4. Family Court, Chandigarh में याचिका डाकिए या online portal के माध्यम से दाखिल करें; mediator से भी मिलें।
  5. अस्थाई आदेश (interim order) के लिए आवेदन करें ताकि बच्चों की संरक्षा और संबंध बना रहे।
  6. यदि relocation या दूसरे शहर जाने की योजना हो, तो कोर्ट से अनुमति लेने की तैयारी करें।
  7. आवश्यक होने पर NALSA या CHDLSA जैसे संसाधनों से मुफ्त या कम शुल्क की कानूनी सहायता प्राप्त करें।

नोट्स: Chandigarh के क्षेत्राधिकार से संबंधित निष्कर्ष स्थानीय अदालतों के निर्देशों पर निर्भर करते हैं। आधिकारिक स्रोतों से आगे के मार्गदर्शन के लिये देखें:

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