दार्जीलिंग में सर्वश्रेष्ठ बच्चे से मिलने की व्यवस्था वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
दार्जीलिंग, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

1. दार्जीलिंग, भारत में बच्चे से मिलने की व्यवस्था कानून के बारे में: दार्जीलिंग, भारत में बच्चे से मिलने की व्यवस्था कानून का संक्षिप्त अवलोकन

दार्जीलिंग, पश्चिम बंगाल में बच्चों से मिलने की व्यवस्था सामान्यतः परिवार अदालत के आदेश से तय होती है। अदालतें बच्चों के हित को सर्वोच्च मानकर visitation या access के अधिकार तय करती हैं।

मुख्य सिद्धांत यह है कि हर निर्णय का उद्देश्य बच्चे के भलाई और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। कानून के अनुसार माता-पिता के अलावा अन्य कानूनी अभिभावक भी यह अधिकार मांग सकते हैं, पर निर्णय बच्चे के सर्वोत्तम हित पर आधारित रहता है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: दार्जीलिंग, भारत से संबंधित 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों के उदाहरण

परिदृश्य 1-तलाक के बाद एक्सेस अधिकार का अनुरोध: माता-पिता अलग रहते हैं और एक पक्ष बच्चे से नियमित मिलना चाहता है। वकील मदद करेगा कि visitation schedule, holidays, school timings शामिल हो।

परिदृश्य 2-बच्चे के साथ स्थानांतरित होने पर चुनौतियाँ: एक पक्ष राज्य से बाहर बच्चा लेकर चला गया है। कानूनी सहायता से कोर्ट visitation के समय-सीमा, यात्रा मार्ग, सुरक्षा उपाय तय करा सकता है।

परिदृश्य 3-सुरक्षितता concerns के कारण नियंत्रित एक्‍सेस: अगर अभिभावक द्वारा बच्चों की सुरक्षा को खतरा माना जाता है, तो अदालत निगरानी अधीन visitation या supervised visits दे सकती है।

परिदृश्य 4-maintenance और access का संयुक्त मामला: कई बार अदालत maintenance के साथ access rights को जोड़ कर देखती है ताकि बच्चे की आर्थिक एवं भावनात्मक आवश्यकताएँ पूरी हों।

परिदृश्य 5-बच्चे की इच्छा या पसंद निभाने की स्थिति: किशोर बच्चों की स्पष्ट इच्छा को अदालत उचित प्रचलन में मान सकती है, buzzy-परिषद के अनुसार बच्चों की वयस्कता के अनुसार निर्णय होते हैं।

परिदृश्य 6-दादी-दादा या अन्य परिवारिक सदस्य के अधिकार: grandparents या अन्य रिश्तेदार भी अदालत द्वारा visitation के अधिकार पाने के लिए आवेदन कर सकते हैं, अगर यह बच्चे के हित में हो।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: दार्जीलिंग, भारत में बच्चे से मिलने की व्यवस्था को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

  • गार्जियंस एंड वॉर्ड्स एक्ट, 1890 - यह अधिनियम_minor की guardianship और custody से जुड़ी मूल प्रावधान देता है।
  • हिंदू मिनोरिटी एंड गार्डियन्शिप एक्ट, 1956 - हिंदू बच्चों के guardianship के कानून-निर्णय के लिए प्रासंगिक है।
  • फैमिली कोर्ट अधिनियम, 1984 - परिवार अदालत की स्थापना और विवाह, रख-रखाव, बच्चों की custody/access जैसे मामलों के निपटारे के लिए मूल ढांचा देता है।
  • जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) अधिनियम, 2015 - बच्चों के संरक्षण, देखभाल और कल्याण से जुड़े मामलों में प्रावधान रखता है; सुरक्षा-हित के क्षेत्र में लागू होता है।

इन कानूनों के आधार पर दार्जीलिंग जिले के परिवार अदालतें visitation आदेश, custody निर्णय और child welfare से जुड़े अन्य आदेश जारी करती हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बच्चे से मिलने की व्यवस्था क्या है?

यह बुनियादी रूप से access या visitation अधिकार है। अदालतें बच्चे के हित को सर्वोच्च मानकर निर्णय करती हैं।

मगर अगर मां-बाप अलग रहते हैं तो कैसे तय होता है?

कथित custody या access schedule बच्चे के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा आदि को ध्यान में रखकर तय किया जाता है।

क्या अदालत supervised visitation दे सकती है?

हाँ, अगर बच्चे की सुरक्षा या भलाई को खतरा हो। supervision के साथ मिलने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।

क्या मैं वकील के बिना अदालत में दायर कर सकता हूँ?

कानूनी सलाह लेना लाभकारी है। विशेषकर guardianship, maintenance, custody जैसे मामलों में advicate की जरूरत उचित है।

कौन-सी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है?

पहले फॉर्मेटेड शिकायत/petition, फिर वैकल्पिक दावा, फिर mediation और अंत में Family Court के समक्ष सुनवाई।

क्या बच्चों की उम्र निर्णय को प्रभावित करती है?

हां, बच्चों की उम्र और इच्छा अदालत के निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, पर यह welfare standard के अनुरूप होता है।

अगर एक पक्ष दूसरी जगह चले जाए तो?

यात्रा-लागू constraints और custody orders के अनुसार visitation schedule तय होते हैं। अदालत relocation के कारणों को भी देखती है।

क्या grandparents के visitation के अधिकार होते हैं?

हो सकते हैं, बशर्ते बच्चे के हित में हो; अदालत देखते हैं कि कौन सा arrangement बच्चें के लिए सर्वोत्तम है।

क्या custody सिर्फ माँ के पास रहती है?

नहीं, guardianship का निर्णय माता-पिता के अलावा अन्य कानूनी अभिभावकों के साथ भी हो सकता है, यदि बच्चे के हित में हो।

क्या visitation पैसे से जुड़ी चीजों पर निर्भर होती है?

Visitation स्वयं अलग अधिकार है, पर maintenace आदि से जुड़े निर्देश भी court orders में जुड़ सकते हैं।

कायदे कानून में कितनी जल्दी निर्णय होता है?

यह कोर्ट के कार्यक्रम और मामले की जटिलता पर निर्भर है; आम तौर पर कुछ महीनों से एक वर्ष तक समय लग सकता है।

क्या child’s preference age किस स्तर पर मान्य होती है?

कई मामलों में किशोरों की इच्छा को कोर्ट ध्यान से मानती है, पर यह बच्चे की सुरक्षा और विकास के अनुसार हो।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता और परामर्श के लिए साइट: https://nalsa.gov.in
  • National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) - बाल संरक्षण निर्देश और संसाधन: https://ncpcr.gov.in
  • West Bengal Department of Women & Child Development - राज्य स्तरीय मार्गदर्शन और सहायता: https://www.wbwd.gov.in

6. अगले कदम: बच्चों से मिलने की व्यवस्था वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने मामले के सभी दस्तावेज तैयार करें-गवाही, स्कूल रिकॉर्ड, मेडिकल रिकॉर्ड आदि।
  2. दार्जीलिंग में परिवार अदालत के क्षेत्राधिकार और प्रक्रिया की जानकारी एकत्र करें।
  3. परिवार कानून का अनुभव रखने वाले advicate ढूंढ़ें; पूर्व मामलों के परिणाम देखें।
  4. पहला परामर्श तय करें; शुल्क-नियम और अपेक्षित परिणाम साफ़ करें।
  5. कानूनी रणनीति पर निर्णय लें-visitation schedule, mediation, वाद दाखिल करने की तिथि तय करें।
  6. यदि संभव हो तो mediation/सरोकार से मामले को सुलझाने की कोशिश करें।
  7. फाइलिंग के लिए आवश्यक फॉर्म और प्रक्रिया पूरी करें; अदालत के निर्देशों का पालन करें।

उद्धरण (आधिकारिक स्रोत)

“An Act to consolidate and amend the law relating to guardians and guardianship of minors.”

Source: Guardians and Wards Act, 1890 - India Code

“The Court may make such order as it thinks fit with regard to the custody of a minor.”

Source: Guardians and Wards Act, 1890 - India Code

“The Family Courts Act, 1984 provides for the establishment of Family Courts for the trial of matrimonial and related matters, including custody of children.”

Source: The Family Courts Act, 1984 - Legislative.gov.in

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