लखनऊ में सर्वश्रेष्ठ नागरिक मुक़दमा वकील

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2010 में स्थापित
उनकी टीम में 500 लोग
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ABHISHEK BHATNAGAR AND ASSOCIATES LEGAL CONSULTANTS LLP is a Lucknow-based law firm with PAN India reach, founded in 2010 by Adv. Abhishek Bhatnagar. It is recognized for its focus on cyber laws and cyber forensics, and has grown into a prominent, dedicated, committed, tested, and trusted name for...
Max Law Firm
लखनऊ, भारत

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मैक्स लॉ फर्म एक पंजीकृत पार्टनरशिप फर्म है जिसमें विभिन्न कानूनी क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले कुशल व...
LEXAMEET PROFESSIONAL'S LLP - A LAW FIRM
लखनऊ, भारत

2020 में स्थापित
English
LEXAMEET PROFESSIONAL'S LLP भारत में स्थित एक पूर्ण-सेवा विधिक फर्म है, जो देश भर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्राहकों को कानूनी...
Mishra & Associates Law Firm

Mishra & Associates Law Firm

30 minutes मुफ़्त परामर्श
लखनऊ, भारत

2012 में स्थापित
उनकी टीम में 6 लोग
English
Hindi
मिश्रा एंड एसोसिएट्स दशकों से एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है। हमारे विशेषज्ञ कानूनी पेशेवरों की टीम के साथ, हम सिविल,...
LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH
लखनऊ, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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भारत नागरिक मुक़दमा वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें नागरिक मुक़दमा के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

मालिक सुरक्षा राशि नहीं दे रहा है
नागरिक मुक़दमा सामान्य मुकदमेबाजी
मेरे मकान मालिक ने पिछले महीने का किराया ले लिया और कुछ दिनों के बाद सुरक्षा जमा राशि देने का वादा किया, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया वह अत्यधिक मांग करता रहा और कहता है कि वह मेरी राशि नहीं दे सकता।
वकील का उत्तर D.H.Associates द्वारा

वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजें।

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1 उत्तर
धारा 377, 379, 498A और घरेलू हिंसा
आपराधिक मुकदमेबाजी नागरिक मुक़दमा परिवार
मेरी पत्नी ने मुझ पर और मेरे परिवार पर सात वर्षों की अलगाव के बाद पुलिस स्टेशन में आरोप लगाए हैं। अब पुलिस बार-बार मेरे और मेरे परिवार के बयान के लिए बुला रही है। मुझे क्या करना चाहिए?
वकील का उत्तर D.H.Associates द्वारा

पुलिस कर्मचारियों से शिकायत आपके साथ साझा करने को कहें। पत्नी द्वारा दर्ज शिकायत का उत्तर दें।

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1 उत्तर

1. लखनऊ, भारत में नागरिक मुक़दमा कानून के बारे में: लखनऊ, भारत में नागरिक मुकदमा कानून का संक्षिप्त अवलोकन

संक्षिप्त अवलोकन

नागरिक मुकदमा कानून केन्द्रीय तौर पर Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) से संचालित होता है. यह मुकदमा दायर करने से लेकर निर्णय, अपील और निष्पादन तक के चरण निर्धारित करता है. Lucknow के नागरिक विवाद भी CPC के कड़े प्रावधानों के अनुसार ही निपटते हैं.

Lucknow में जिला न्यायालय और Allahabad High Court के Lucknow बेंच के पास अदालती कार्यवाहियाँ होती हैं. District Court Lucknow, Allahabad High Court के अधीन क्षेत्रीय न्यायिक प्रशासन संभालता है. उच्च न्यायालय के आदेश से Lucknow उप-क्षेत्र के लिए मिसाल के तौर पर नियुक्त न्यायधीश और स्टाफ निर्धारित होते हैं.

स्थानीय सेवाएं और आधुनिक प्रगति

आधुनिक समय में ऑनलाइन फाइलिंग, केस स्टेटस और सेवाओं की उपलब्धता बढ़ी है. e-Courts प्लेटफॉर्म Lucknow के नागरिक मुकदमा प्रक्रियाओं को ऑनलाइन सक्षम बनाता है. यह कदम त्वरित सेवाएं और पारदर्शिता बढ़ाता है.

“eCourts परियोजना का उद्देश्य न्यायिक प्रणाली को सुलभ, तेज और पारदर्शी बनाना है ताकि कानून नागरिकों तक आसानी से पहुंचे।”

स्रोत: eCourts Portal, https://ecourts.gov.in

आधिकारिक स्रोतों के लिंक

Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) - आधिकारिक पाठ

Allahabad High Court - Lucknow Bench

District Court Lucknow - ऑनलाइन सेवाएं

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: नागरिक मुकदमा कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। Lucknow, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें

परिदृश्य 1: संपत्ति सम्बन्धी विवाद

Lucknow शहर में जमीनों, मकानों या भवनों के स्वामित्व, कब्ज़ा या सीमा-विवाद आम हैं. ऐसे मामलों में सही दस्तावेज़ और पुख्ता तर्क की जरूरत रहती है. एक अनुभवी अधिवक्ता अदालत के अनुरोध-पत्र और तर्क दे सकता है, ताकि अपने पक्ष को मजबूत बनाया जा सके.

परिदृश्य 2: किरायेदारी और कब्ज़ा से जुड़े मामले

किराये पर दी गई संपत्ति में विवाद, किरायेदारी ढांचे के उल्लंघन या eviction जनित मामलों में तर्क-वितर्क तेज़ी से बढ़ सकता है. Lucknow के क्षेत्रों में ये केस District Court Lucknow में अधिकतर आते हैं; वकील आपकी स्थिति की समस्त प्रक्रियाओं का प्रबंधन कर सकता है.

परिदृश्य 3: ऋण व बकायों के दावे

व्यापारिक या व्यक्तिगत ऋणों के मामलों में मौखिक या लिखित समझौते के उल्लंघन का दावा होता है. ऐसी स्थिति में देनदार-युग्म के पक्ष-विकल्प, प्रमाण-पत्र और समन-प्रस्तुति में कानूनी सलाह जरूरी हो जाती है.

परिदृश्य 4: अनुबंध तथा सप्लाई-विकल्प के मामले

स्थानीय दुकानों, निर्माण-कार्य और सेवाओं में अनुबंध विच्छेद या मानक-वारंटी संबंधी विवाद उठते हैं. एक अधिवक्ता बेहतर दलील बनाकर दावा-हक सुनिश्चित कर सकता है.

परिदृश्य 5: निषेधादेश और तात्कालिक राहत (इन्जंक्शन)

किसी संपत्ति पर कब्ज़ा रोकने या नुकसान से बचाने के लिए तत्काल राहत आवश्यक हो सकती है. इन मामलों में अदालत से प्रायः तात्कालिक प्रतिरोध-निर्णय चाहिए होता है, जिसे वकील सही समय पर प्रस्तुत कर सकता है.

परिदृश्य 6: अनुकरणीय वैधानिक उपाय और अपील

यदि पहली अदालत का निर्णय आपके पक्ष में नहीं हो, तो Lucknow में High Court के Lucknow Bench या अन्य क्लेम-आर्काइव में अपील की जा सकती है. अनुभवी वकील आपकी अपील-याचिका को मजबूत कर सकता है.

कैसे वकील चुने?

स्थानीय क्षेत्राधिकार में अनुभव, पंजीकरण और फीस स्पष्ट रूप से समझना ज़रूरी है. Lucknow में स्थानीय अभ्यास का ज्ञान रखने वाला वकील प्रभावित निर्णय के लिए अहम होता है.

3. स्थानीय कानून अवलोकन: लखनऊ, भारत में नागरिक मुकदमा को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें

Code of Civil Procedure, 1908 (CPC)

यह नागरिक मुकदमे की पूरी प्रक्रिया निर्धारित करता है. plaint से लेकर final order, आदेश और निष्पादन तक के नियम CPC में रहते हैं. Lucknow में भी यह कानून सर्वोच्च मानक है.

Indian Evidence Act, 1872

न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों की योग्यता और विश्वसनीयता निर्धारित करता है. यह civil proceedings के लिए आधार प्रस्तुत करता है.

Limitation Act, 1963

कौन-सी कार्रवाई कब तक दायर की जा सकती है यह निर्धारित करता है. UP के भीतर nullable समय-सीमा का पालन अनिवार्य है और निष्पादन के लिए भी नियम बनता है.

अन्य प्रासंगिक कानून (संक्षेप)

Transfer of Property Act, 1882 संपत्ति-सम्बंधी दावों के लिए; Specific Relief Act, 1963 injunction और अन्य राहतों के लिए; UP Court Fees Act आदि स्थानीय शुल्क-विधि लागू होती है.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागरिक मुकदमा क्या है?

नागरिक मुकदमा वह प्रक्रिया है जो व्यक्तिगत या अस्सोसिएटेड विवादों के समाधान के लिए अपनाई जाती है. यह Disease सुनवाई, निर्णय, और निष्पादन तक जाती है.

Lucknow में केस कैसे दायर करें?

सबसे पहले plaint तैयार करें, आवश्यक दस्तावेज जोड़े. फिर District Court Lucknow में फाइल करें और समस्त प्रक्रियात्मक शुल्क अदा करें. ऑनलाइन फाइलिंग संभव हो सकती है.

क्या मैं ऑनलाइन फाइलिंग कर सकता/सकती हूँ?

हाँ, Lucknow में eCourts के माध्यम से ऑनलाइन फाइलिंग और केस स्टेटस जाँच संभव है. इससे यात्रा समय और कागजी कार्य कम होते हैं.

क्या मुझे किस प्रकार की फीस देनी होती है?

कौन-सी अदालत, मुकदमे का प्रकार और दायर दस्तावेज पर Court Fees Act UP के अनुसार शुल्क तय होते हैं. एडिशनल स्टाम्प ड्यूटी भी लग सकती है.

एक केस कितने समय में समाप्त हो सकता है?

यह कई कारकों पर निर्भर है: जज की उपलब्धता, साक्ष्यों की प्रकृति, और विपक्षी पक्ष की प्रतिक्रियाएं. सामान्य तौर पर वर्षों भी लग सकते हैं किन्तु नियमित सुनवाई से समय घट सकता है.

सबूत कैसे प्रस्तुत करें?

सबूतों के लिए साक्ष्य-प्रति, दस्तावेज, साक्षी बयान आवश्यक होते हैं. Indian Evidence Act के अनुसार इन्हें अदालत के सामने पेश किया जाता है.

निर्णय के खिलाफ आप क्या कर सकते हैं?

यदि निर्णय असंतोषजनक हो तो High Court Lucknow Bench या अन्य उपयुक्त न्यायालय में अपील दायर की जा सकती है. अपील की समय-सीमा CPC के अनुसार है.

स्थानीय अदालत में दस्तावेज कैसे जमा करें?

आमतौर पर मोहर-युक्त प्रतियों की आवश्यकता होती है. कुछ दस्तावेज ऑनलाइन भी अपलोड किए जा सकते हैं. आधिकारिक निर्देश जिला न्यायालय से प्राप्त करें.

ELP/डिजिटल साक्ष्य कैसे मान्य होते हैं?

डिजिटल दस्तावेज़ और प्रस्तुतियाँ इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्वीकार्य हो सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के निर्देशों के अनुसार मान्यता मिलती है.

कौन से कारण से केस खारिज हो सकते हैं?

उचित जुरिस्डिक्शन न होना, मानक प्रक्रियात्मक त्रुटियाँ, या लचर प्रस्तुतियाँ केस खारिज करवाने का कारण बन सकती हैं. अधिवक्ता नियमों का सही अनुपालन कराते हैं.

क्या अदालतें बिना शुल्क के हार्ड कॉपी युद्ध नहीं करतीं?

सामान्यतः डिजिटल कॉपी पर्याप्त होती है, पर आवश्यक मामलों में हार्ड कॉपी और प्रमाण-पत्र आवश्यक हो सकता है. स्थानीय अदालत निर्देशों के अनुसार करें.

क्या वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) संभव है?

हाँ, Lucknow में mediation आदि ADR विकल्प उपलब्ध हैं. यह समय और लागत कम कर सकता है. अदालतों के निर्देशों के अनुसार लागू करें.

कैसे मैं केस स्टेटस चेक कर सकता/सकती हूँ?

NJDG या eCourts पोर्टल पर केस नंबर डालकर स्टेटस देखा जा सकता है. यह सुविधा Lucknow जिला न्यायालय के लिए उपलब्ध है.

5. अतिरिक्त संसाधन

1) District Court Lucknow - ऑनलाइन सेवाएं

Lucknow जिला न्यायालय की आधिकारिक साइट पर फाइलिंग, स्टेटस चेक और आदेश-प्रति उपलब्ध हैं. यह स्थानीय नागरिकों के लिए एक मुख्य संचार मंच है. आवेदन के लिए https://districts.ecourts.gov.in/lucknow देखें.

2) Allahabad High Court - Lucknow Bench

Lucknow Bench उच्च न्यायालय का क्षेत्रीय केंद्र है. अदालत के आदेश, स्थानांतरित याचिकाएं और अपील यहाँ सुनवाई के लिए आती हैं. आधिकारिक साइट https://allahabadhighcourt.in देखें.

3) National Legal Services Authority (NALSA)

NALSA मुफ्त कानूनी सहायता और सामाजिक-न्याय के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करता है. Lucknow क्षेत्र के लिए लोक-उपयोगी संसाधन भी उपलब्ध होते हैं. वेबसाइट https://nalsa.gov.in देखें.

6. अगले कदम: नागरिक मुकदमा वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने केस प्रकार तय करें जैसे संपत्ति, ऋण, अनुबंध आदि.
  2. Lucknow में स्थानीय वकीलों की सूची तैयार करें. बार काउंसिल से सत्यापित हों.
  3. कई वकीलों से प्रारम्भिक परामर्श तय करें और फॉर्मल क्लाइंट-एग्रीमेंट लें.
  4. पूर्व अनुभव और केस-रोडमैप समझें; क्या वे आपके प्रकार के मामलों में सफल रहे हैं?
  5. फीस संरचना और भुगतान-समय तय कर लें; लागत अनुमान प्राप्त करें.
  6. कौन-सी अदालत में दायर करना है, यह स्पष्ट करें: District Court Lucknow या High Court Lucknow Bench.
  7. पहला कदम: आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उनके साथ फाइलिंग-कायदे पूरा करें.

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अस्वीकरण:

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