हैदराबाद में सर्वश्रेष्ठ सहभागी विधि वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

RVK Law Associates
हैदराबाद, भारत

2015 में स्थापित
English
हैदराबाद, भारत स्थित आरवीके लॉ एसोसिएट्स एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है जो विभिन्न अभ्यास क्षेत्रों में व्यापक कानूनी...
SJ Law Firm
हैदराबाद, भारत

2005 में स्थापित
English
एसजे लॉ फर्म, 2005 में स्थापित, हैदराबाद, भारत में आधारित एक प्रतिष्ठित विधिक अभ्यास है, जिसके मियापुर और गाचीबाउली...
Kamal & Co. Advocates
हैदराबाद, भारत

1998 में स्थापित
English
कमल एवं कंपनी एडवोकेट्स, जिसकी स्थापना 1998 में हुई थी, विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक कानूनी सेवाएँ प्रदान करता है,...

1999 में स्थापित
उनकी टीम में 5 लोग
English
कृष्णा मुर्ति पसुपुला | हाई कोर्ट अधिवक्ता एवं कानूनी सलाहकार, हैदराबाद में स्थित, व्यापक अभ्यास क्षेत्रों में...
हैदराबाद, भारत

English
हैदराबाद, भारत में स्थित एचिवर्स लॉ फर्म एक प्रमुख कानूनी प्रतिष्ठान है जो आपराधिक और सिविल कानून के व्यापक...
Legal Luminaries LLP
हैदराबाद, भारत

2017 में स्थापित
English
Legal Luminaries LLP, 2017 में स्थापित, हैदराबाद, तेलंगाना, भारत में आधारित एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है। यह फर्म पारिवारिक कानून,...
Misra Law Office
हैदराबाद, भारत

English
मिस्रा लॉ ऑफिस, जो 1970 के दशक में दिवंगत ओम प्रकाश मिस्रा—बार एसोसिएशन के दो बार निर्वाचित अध्यक्ष—द्वारा स्थापित...
Sai Krishna Azad Advocate
हैदराबाद, भारत

2003 में स्थापित
English
साई कृष्ण आज़ाद एडवोकेट एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है जो भारत में स्थित है और तलाक और पारिवारिक कानून, नागरिक और...
Legal Universe Advocates
हैदराबाद, भारत

English
लीगल यूनिवर्स एडवोकेट्स, अधिवक्ता सयदा असीमा उननीसा द्वारा स्थापित, जो तेलंगाना उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस...
Somireddy Law
हैदराबाद, भारत

2017 में स्थापित
English
सोमिरेड्डी लॉ ग्रुप (एसएलजी) एक पूर्ण-सेवा विधिक फर्म है जिसका हाइड्राबाद, भारत और संयुक्त राज्य में कार्यालय है,...
जैसा कि देखा गया

1. हैदराबाद, भारत में सहभागी विधि कानून का संक्षिप्त अवलोकन

हैदराबाद, तेलंगाना में सहभागी विधि के नियम मुख्यतः भागीदारी कानून और LLP कानून से संचालित होते हैं. ये कानून छोटे व्यवसायों से लेकर मध्यम आकार के उद्यमों तक के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं. निजी पार्टनरशिप और LLP दोनों ढांचे के भीतर अधिकार, दायित्व और करविहीनता के नियम स्पष्ट रहते हैं.

भागीदारी (General Partnership) एक सरल, कम लागत वाला ढांचा है, जिसमें भागीदार साझे लाभ और हानि के लिए जिम्मेदार रहते हैं. LLP एक अलग कानूनी इकाई है, जिसमें भागीदारों की जिम्मेदारी उनके योगदान तक सीमित रहती है. हैदराबाद के वकील और कानूनी सलाहकार इन दोनों ढांचों के चयन और अनुपालनों में सहायता देते हैं.

Partnership is the relation between persons who have agreed to share the profits of a business carried on by all or any of them acting for all. (The Indian Partnership Act, 1932, Section 4)
Limited Liability Partnership is a body corporate formed and registered under this Act; it has a separate legal personality and perpetual succession. (Limited Liability Partnership Act, 2008, Section 3)

Hyderabad में पंजीकरण, भागीदारों की नियुक्ति, लाभ-हानि वितरण और dissolution जैसी प्रक्रियाओं के लिए स्थानीय अदालतों और Telangana State के न्यायिक निकायों के नियम भी लागू होते हैं. आधुनिक व्यवसायों में LLP का चयन कर देना अक्सर अधिक सुरक्षित और लचीला होता है. यह शहर तेजी से विकसित हो रहे उद्यमों के लिए सुरक्षित संरचना उपलब्ध कराता है.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है?

हैदराबाद के व्यवसायों के लिए नीचे दिए गए 4-6 परिदृश्य आम तौर पर कानूनी सहायता मांगते हैं. सही वकील चुनने से देरी कम होती है और विवाद हल होने की संभावना बढ़ जाती है.

  • एक सामान्य भागीदारी फर्म में लाभ वितरण, निर्णय-निर्माण अधिकार या दायित्व पर मतभेद के कारण विवाद उभरना. ऐसे मामलों में एक अनुभवी अधिवक्ता समझौते और सेक्शन-वार दायित्व स्पष्ट कर सकता है.
  • नए पार्टनर के प्रवेश या पहले से जुड़ी साझेदारी से बाहर निकलने पर पंजीकरण, अनुबंध संशोधन और व्यवस्थाओं की जरूरत. Hyderabad के स्थानीय नियमों के अनुसार दस्तावेज तैयार करने में वकील मदद करेगा.
  • पार्टनरशिप फर्म की पंजीकरण आवश्यकताओं के अनुसार गलतियाँ, विलंब या अस्वीकृति के मामलों में कानूनी सलाह जरूरी हो सकती है. अप्रत्याशित फॉर्म-फॉलो-अप में वकील मार्गदर्शन देगा.
  • पारिवारिक या स्थानीय व्यवसायों में भागीदार के निधन, विकलांगता या आय-समूह परिवर्तन पर dissolution या transfer के मुद्दे. ऐसे परिस्थितियों में सही प्रक्रिया जरूरी है.
  • LLP बनाम सामान्य भागीदारी के चयन के समय, कर-दायित्व और दायित्व सीमाओं के न्यायसंगत आकलन के लिए कानूनी सलाह आवश्यक होती है.
  • Hyderabad के कॉरपोरेट या व्यापारी क्लस्टर में dispute resolution के लिए अदालत या arbitration में प्रतिनिधित्व चाहिये. एक अनुभवी वकील प्रक्रिया चयन में मदद करेगा.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

इन कानूनों के माध्यम से हैदराबाद में सहभागी विधि के नियम स्पष्ट रहते हैं. नीचे 2-3 प्रमुख कानूनों का नाम और उनका मूल तात्पर्य दिया गया है.

  • The Indian Partnership Act, 1932 - भागीदारी की परिभाषा, पार्टनरशिप के गठन, दायित्व और निष्कर्षण के नियम निर्धारित करता है.
  • The Limited Liability Partnership Act, 2008 - LLP के गठन, अलग कानूनी इकाई, भागीदारों की सीमित जिम्मेदारी आदि को नियंत्रित करता है.
  • Income Tax Act और GST/Taxation provisions - भागीदारी फर्म और LLP की कर-स्थिति, लाभ-हानि, पंजीकरण और अनुपालन से जुड़े नियम लागू होते हैं.

स्थानीय न्याय-प्रक्रिया के अनुसार हैदराबाद के Civil Courts और Telangana High Court Partnership-से जुड़े विवादों का हल करते हैं. LLP के मामलों में MCA portal पर रिपोर्टिंग और annual filing का भी महत्त्व है.

अतिरिक्त आधिकारिक संदर्भ

The Indian Partnership Act, 1932 defines partnership as the relation between persons who have agreed to share the profits of a business carried on by all or any of them acting for all. (Section 4)
Limited Liability Partnership Act, 2008 defines LLP as a body corporate formed and registered under this Act with separate legal personality. (Section 3)

इन उद्धरणों के आधिकारिक पाठ उपलब्ध हैं: The Indian Partnership Act, 1932 और Limited Liability Partnership Act, 2008 के आधिकारिक दस्तावेज़ पर जा कर देखें. देखें- legislation.gov.in और mca.gov.in.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सहभागी कानून क्या है?

सहभागी कानून भागीदारी की व्यवस्था को नियंत्रित करता है. यह सामाजिक-धन साझा और दायित्वों के विभाजन से जुड़ा है. (The Indian Partnership Act, 1932 के अनुसार)

क्या है हैदराबाद में पार्टनरशिप फर्म का पंजीकरण आवश्यक है?

पंजीकरण सामान्य तौर पर वैकल्पिक होता है, पर कुछ परिस्थितियों में पंजीकरण जरूरी हो सकता है. Hyderabad के व्यापार-समूहों के लिए पंजीकरण लाभ-हानि और कानूनी प्रमाणिकता देता है.

पार्टनर कौन-कौन हो सकता है?

किसी भी व्यक्ति या संस्था जो भागीदारी समझौते के अनुसार व्यापर में भागीदारी करता है, पार्टनर माना जा सकता है. आय-व्यय और दायित्व साझा होते हैं.

पंजीकरण कैसे करें?

पंजीकरण के लिए पार्टनरशिप एग्रीमेंट, पते, पहचान, IDENTIFICATION और अन्य आवश्यक दस्तावेज चाहिए होते हैं. Hyderabad में यह प्रक्रिया ऑनलाइन या फीजिकल फॉर्म में पूरी हो सकती है.

भागीदार की जिम्मेदारियाँ कैसी होती हैं?

सामान्य भागीदारी में प्रत्येक भागीदार व्यवसाय के दायित्वों के लिए व्यक्तिगत रूप से liable होता है. LLP में liability सीमित रहती है, पर निर्धारित योगदान तक सीमित रहती है.

dissolution के समय क्या होता है?

dissolution में समस्त संपत्ति-विवरण, ऋणों का भुगतान और बची-बार हिस्सेदारी का वितरण तय होता है. इसके लिए फर्म एग्रीमेंट और कानून की प्रक्रियाओं का पालन करना होता है.

नए पार्टनर का प्रवेश कैसे होता है?

नए पार्टनर का प्रवेश साझेदारी एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार होता है. दस्तावेजों में बदलाव, रजिस्ट्रेशन और शेयर-सम्बन्धी संशोधन जरूरी हो सकता है.

कौन सा ढांचा चुनना उचित होगा?

यदि आपके दायित्वों की सुरक्षा, निवेश-लचीलापन और कर-स्थिति स्पष्ट चाहिए, तो LLP को सामान्य भागीदारी पर प्राथमिकता मिल सकती है. वकील आपकी व्यवसाय योजना पर निर्णय लेने में मार्गदर्शन करेगा.

कर विषयक प्रश्न?

भागीदारी फर्म पर टैक्स, आय-कर और GST के प्रकार नियम लागू होते हैं. एक प्रमाणित टैक्स एडवाइजर के साथ परामर्श करें ताकि सही दरें और कटौतियाँ मिलें.

विवाद उठने पर क्या करें?

सबसे पहले आंतरिक मध्यस्थता या विवाद-समाधान की ऑफर देखें. अगर असहमति बनी रहे, तो स्थानीय हैदराबाद के सिविल कोर्ट में मुकदमा प्रस्तुत करें; वकील के साथ उचित री-फॉर्मेशन करें.

LLP बनाम Partnership में क्या फर्क है?

LLP एक अलग कानूनी इकाई है और भागीदारों की liability उनके योगदान तक सीमित रहती है; सामान्य भागीदारी में पार्टनर व्यक्तिगत दायित्व के लिए liable होते हैं.

GST और पंजीकरण की जरूरत कब है?

अगर फर्म सेवाएं या उत्पाद बेचती है तो GST पंजीकरण आवश्यक हो सकता है. Hyderabad में स्थानीय कर-नियमों के अनुसार GST और registration जुड़ी आवश्यकताएँ बदल सकती हैं.

Hyderabad में dispute resolution के उपाय?

कानूनी सलाहकार से प्रारम्भिक फोरेंसिक समीक्षा करें. विकल्पों में mediation, arbitration या civil litigation शामिल हो सकते हैं, एक अनुभवी वकील मार्गदर्शन देगा.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराता है. वेबसाइट: https://nalsa.gov.in
  • NALSAR University of Law - Legal Aid Clinic - हैदराबाद स्थित कानून विश्वविद्यालय का क्लिनिक, लागू मामले और मार्गदर्शन देता है. वेबसाइट: https://www.nalsar.ac.in
  • Bar Council of India - मानक अधिवक्ता पंजीकरण और पेशेवर नियमों के लिए प्रमुख निकाय. वेबसाइट: https://barcouncilofindia.org

6. अगले कदम

  1. अपने व्यवसाय के लिए चाहिए किस प्रकार का ढांचा (General Partnership बनाम LLP) तय करें.
  2. Hyderabad की स्थानीय जरूरतों के अनुसार एक प्रारम्भिक भागीदारी एग्रीमेंट बनवाएं.
  3. कारोबार के दस्तावेज, पहचान-प्रमाण और पते के प्रमाण जुटाएं.
  4. कानूनी सलाहकार (advocate) या कानूनी सलाहकार से पहले परामर्श बुक करें.
  5. प्रारम्भिक बैठक में पार्टनर-समझौते के सभी महत्त्वपूर्ण बिंदु स्पष्ट करें.
  6. दस्तावेजों की समीक्षा कर सही फॉर्म्स और पंजीकरण फाइलिंग के लिए तैयारी करें.
  7. कानूनी प्रतिनिधि नियुक्त करें और आवश्यक अदालत/न्यायिक प्रक्रिया की योजना बनाएं.

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