चेन्नई में सर्वश्रेष्ठ कॉर्पोरेट शासन वकील

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Chennai Law Associates
चेन्नई, भारत

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Chennai Law Associates (CLA) is a distinguished law firm based in Chennai, India, offering comprehensive legal solutions across banking, corporate, dispute resolution, employment, intellectual property, and real estate matters. Guided by over 30 years of collective experience, the firm provides...
A K Mylsamy Associates LLP
चेन्नई, भारत

1964 में स्थापित
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ए के मायल्सामी एसोसिएट्स एलएलपी भारत में एक प्रतिष्ठित वकील फर्म है, जो विभिन्न अभ्यास क्षेत्रों में व्यापक...
ADVOCATE SUMATHI LOKESH Chennai
चेन्नई, भारत

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एडवोकेट सुमathi लोकश चेन्नई चेन्नई स्थित एक विधिक प्रैक्टिस है जिसका नेतृत्व सुमathi लोकश द्वारा किया जाता है, जो एक...
Samvad Partners
चेन्नई, भारत

2013 में स्थापित
उनकी टीम में 150 लोग
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Samvād: Partners एक पूर्ण-सेवा भारतीय कानून फर्म है जिसकी बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई और नई दिल्ली में कार्यालय हैं। हम...
चेन्नई, भारत

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Absolute Legal भारत में एक प्रतिष्ठित बहु-विशेषज्ञता वाला लॉ फर्म है, जिसे विभिन्न प्रकार के कानूनी मामलों को संभालने का 25...
जैसा कि देखा गया

1. चेन्नई, भारत में कॉर्पोरेट शासन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

चेन्नई में कॉर्पोरेट शासन का ढांचा भारत के केंद्रीय कानूनों के अनुरूप है और क्षेत्रीय कम्प्लायंस आवश्यकताओं को भी प्रभावी बनाता है। यह ढांचा बोर्ड संरचना, पारदर्शिता, जवाबदेही और पूँजी निवेश के उचित प्रवाह पर केंद्रित है। स्थानीय कंपनियों के लिए नियमित घोषणाओं और आंतरिक नियंत्रणों की अनुपालना अनिवार्य है।

मुख्य ढांचे में Companies Act 2013, SEBIListing Obligations and Disclosure Requirements Regulations 2015 और Schedule IV Code for Independent Directors शामिल हैं। इन नियमों के अधीन चेन्नई-आधारित सूचीबद्ध और कुछ अन्य संस्थाएं भी आती हैं।

“An Act to consolidate and amend the law relating to companies.”
- Companies Act, 2013

“Independent directors shall adhere to the code of conduct prescribed by Schedule IV.”
- Schedule IV, Companies Act, 2013

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

चेन्नई में कॉर्पोरेट शासन नियमों की जटिलताओं के कारण कई स्थितियां उभरती हैं। सही सलाह से दायित्व स्पष्ट होते हैं और जोखिम कम होते हैं। नीचे 4-6 वास्तविक प्रकार के मामलों के उदाहरण दिए गए हैं।

  • Independent director नियुक्ति और परिवर्तन- Section 149 के अनुरूप बोर्ड पर महिलाओं निदेशकों और स्वतंत्र निदेशकों के प्रमाणन तथा नियुक्ति की प्रक्रिया में कानूनी सलाह आवश्यक हो सकती है।
  • Related party transactions (RPT) का समन्वय- RPT पर Audit Committee की अनुमति और आंतरिक नियंत्रणों की पुष्टि के लिए वकील की भूमिका जरूरी होती है।
  • CSR नीति और रिपोर्टिंग- Section 135 और CSR Rules के अनुसार नीति बनाना, निगरानी समितियों की समीक्षा और वार्षिक CSR disclosures सुनिश्चित करना आवश्यक हो सकता है।
  • Board evaluation और remuneration policy- Schedule IV के अनुरूप बोर्ड मूल्यांकन और निदेशकों के वेतन-परामर्श की वैधानिकताएं स्पष्ट कराने के लिए कानूनी सहायता चाहिए।
  • Listed company के लिए LODR अनुपालन- Chennai में स्थित सूचीबद्ध इकाइयों के लिए नियमावलियों, डिस्क्लोजर और बोर्ड संरचना पर SEBI निर्देशों का पालन जरूरी है।
  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के अनुपालन- cross-border transactions में FDI नियम, RBI निर्देशों और related disclosures के लिए कानून उपयुक्त मार्गदर्शन मांगते हैं।

उदा- चेन्नई-आधारित TVS Motor Company जैसी सूचीबद्ध कंपनी को RPT, independent director और LODR के अंतर्गत अनुपालन बढ़ाने पड़ सकते हैं। इन स्थितियों में अनुभवी कॉर्पोरेट गवर्नेंस वकील की सहायता फास्ट-टریک समाधान देती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

चेन्नई, भारत में कॉर्पोरट गवर्नेंस के प्रमुख कानून ये हैं जो देयता-निर्माण करते हैं। नीचे 2-3 कानूनों के नाम और उनका सार दिया गया है।

  • Companies Act, 2013- कंपनी पंजीकरण, बोर्ड संरचना, निदेशक‑योग्यता, RPT और CSR आदि नियम निर्धारित करता है।
  • SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015- सूचीबद्ध संस्थाओं के लिए बोर्ड, महिलाओं निदेशक, स्वतंत्र निदेशक, डिस्क्लोजर और वार्षिक अनुपालनों के मानक देता है।
  • Schedule IV Code for Independent Directors- स्वतंत्र निदेशकों के लिए आचार संहिता और बोर्ड के साथ उनकी जिम्मेदारियों को स्पष्ट करता है।
  • RBI Master Directions on Corporate Governance (Banks and NBFCs)- बैंकों और गैर-निधि-ऋण कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानक तय करता है, यदि आपकी इकाई बैंकिंग/ NBFC क्षेत्र में है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉर्पोरेट शासन क्या है?

यह वह व्यवस्था है जिसमें कंपनियों को किस प्रकार निर्देशित और नियंत्रित किया जाए यह तय किया जाता है। इसमें बोर्ड की जवाबदेही, शेयरधारक अधिकार और पारदर्शी डिस्क्लोजर शामिल हैं।

भारत में कौन से सार कानून लागू होते हैं?

कंपनी जैसी इकाइयों के लिए Companies Act 2013, SEBI LODR Regulations 2015 और Schedule IV लागू होते हैं। निजी कंपनियों पर भी कुछ प्रावधान लागू रहते हैं।

Independent director कैसे चुने जाते हैं?

Schedule IV के अनुसार स्वतंत्र निदेशकों को आचार संहिता का पालन करना होता है और वे न्यूनतम योग्यता तथा अपरिहार्य पार्टियों से स्वतंत्र रहते हैं। चयन प्रक्रिया स्पष्ट नीति से होनी चाहिए।

Related party transactions क्या होते हैं?

RP टी ट्रांज़ैक्शन वे लेनदेन हैं जहाँ निदेशक, प्रमुख सहयोगी या अन्य संबंधित पक्ष का हित शामिल हो। Audit Committee की मंजूरी और Disclosures आवश्यक होते हैं।

CSR नीति बनाना कब अनिवार्य है?

कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व नीति 135 के अंतर्गत ऐसी कंपनियाँ जिनकी नेटवर्थ, आय या लाभ निर्धारित मानदंड पार कर जाएं, CSR समिति बनाती हैं और नीति लागू करती है।

Board evaluation किसके द्वारा होती है?

Schedule IV के अनुसार बोर्ड अपनी परफॉर्मेंस का आकलन कराता है और निदेशकों के लिए नैतिकता और प्रदर्शन मानदंड तय होते हैं।

वार्षिक रिपोर्ट में कॉर्पोरेट गवर्नेंस डिस्क्लोजर क्यों आवश्यक है?

Listed कंपनियों के लिए LODR के अनुसार कॉर्पोरेट गवर्नेंस से सम्बन्धित विवरण, बोर्ड समिति की संरचना, निदेशक योगदान आदि दिखाने होते हैं।

बोर्ड में कितने independent directors चाहिए?

SEBI LODR 2015 के अनुसार शीर्ष 500 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए कम से कम दो independent directors की आवश्यकता होती है।

Related party transaction के लिए मैं क्या करूं?

RPT पर Audit Committee की समीक्षा और संपूर्ण डिस्क्लोजर आवश्यक है। यदि पार-दर्शिता में कमी हो तो नार्मल प्रक्रिया बदल जाती है।

पंजीकरण और शिकायत व्यवस्थाएं क्या हैं?

कंपनियाँ MCA और SEBI के पोर्टलों पर आवश्यक फॉर्म और शिकायत प्रावधान का पालन करती हैं। सही फॉर्म समय पर भरना जरुरी है।

क्या Chennai-based निजी कंपनियाँ भी इन नियमों से बंधी हैं?

हाँ, कई प्रावधान निजी कंपनियों पर भी लागू होते हैं, खासकर वे जो कहीं‑न कहीं सार्वजनिक हित में आते हैं या कुछ से अधिक आकार के होते हैं।

कंपनी गवर्नेंस रिपोर्ट क्या है?

यह वार्षिक रिपोर्ट का भाग है जिसमें बोर्ड संरचना, निदेशक के बारे में विवरण और governance practices का सार होता है।

5. अतिरिक्त संसाधन

कॉर्पोरेट शासन से जुड़ी जानकारी के लिए नीचे तीन विश्वसनीय संगठन दिए गए हैं।

  1. Ministry of Corporate Affairs (MCA) - https://www.mca.gov.in/
  2. Securities and Exchange Board of India (SEBI) - https://www.sebi.gov.in/
  3. Institute of Company Secretaries of India (ICSI) - https://www.icsi.edu/

6. अगले कदम

  1. अपने उद्देश्य स्पष्ट करें- सूचीबद्ध फर्म, निजी कंपनी, या NBFC है कौन सा प्रकार का शासन चाहिए।
  2. चेन्नई में अनुभवी कॉर्पोरेट गवर्नेंस वकील या फर्म खोजें- लिंक्डइन और प्रोफेशनल डायरेक्टरी से शुरुआत करें।
  3. पिछले केस-रिपोर्ट्स और क्लाइंट-टेस्टिमनियल देखें ताकि स्थानीय अनुभव समझ में आये।
  4. पहला आ nondisclosure समझौता (NDA) के साथ प्रारम्भिक मीटिंग तय करें।
  5. समझें कि फीस‑स्ट्रक्चर, उपलब्ध संसाधन और समयरेखा क्या है।
  6. कार्य-योजना, डिलीवरी और आउटपुट को लिखित में लें।
  7. चयन के बाद कानूनी दृष्टिकोण, संधिग्त नियमावलियों और प्राथमिकताओं की समीक्षा करें।

नोट: चेन्नई स्थित कंपनियों के लिए इन नियमों की जाँच स्थानीय MCA क्षेत्रीय कार्यालय और SEBI के नवीनतम अध्ययनों से करें।

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