जम्मू में सर्वश्रेष्ठ कॉर्पोरेट शासन वकील

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Mehta Law Associates
जम्मू, भारत

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मेहा लॉ एसोसिएट्स, जम्मू, जम्मू और कश्मीर में स्थित, नागरिक मुकदमों, आपराधिक मामलों, कॉर्पोरेट और वाणिज्यिक कानून,...
ADV HARPREET SINGH AND ASSOCIATES
जम्मू, भारत

2022 में स्थापित
उनकी टीम में 19 लोग
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अधिवक्ता हरप्रीत सिंह: जटिल कराधान और कॉर्पोरेट विधि में एक भरोसेमंद कानूनी रणनीतिकारविधिक जटिलताओं की निरंतर...
Sushil Wattal

Sushil Wattal

30 minutes मुफ़्त परामर्श
जम्मू, भारत

2009 में स्थापित
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सुशील वाट्टल एक अभ्यासरत अधिवक्ता हैं और कानून के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक अनुभव रखते हैं। वह व्यवसायों,...
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1. जम्मू, भारत में कॉर्पोरेट शासन कानून के बारे में: जम्मू, भारत में कॉर्पोरेट शासन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

कॉर्पोरेट शासन का मुख्य उद्देश्य संस्थागत जवाबदेही, पारदर्शिता और हितधारकों के समुचित हितों की सुरक्षा है। भारत में ये नियम केंद्रीय विधान द्वारा नियंत्रित होते हैं। जम्मू तथा कश्मीर UT में भी इन केंद्रीय कानूनों की वैधता एवं अनुपालन अनिवार्य है।

“An Act to provide for the incorporation, regulation and dissolution of companies.” यहCompanies Act, 2013 का प्रमुख उद्देश्य बताता है (उद्धरण: Ministry of Corporate Affairs).

“An Act to provide for the incorporation, regulation and dissolution of companies.”

उद्धरण स्रोत: Ministry of Corporate Affairs, The Companies Act, 2013

“To protect the interests of investors in securities and to promote the development of, and to regulate the securities market.”

उद्धरण स्रोत: Securities and Exchange Board of India (SEBI)

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: कॉर्पोरट शासन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। जम्मू, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें

  • बोर्ड संरचना और स्वतंत्र निदेशक नियुक्ति: जम्मू आधारित एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में कॉर्पोरेट गवर्नेंस पॉलिसी बनानी हो, तो सही निदेशक चयन आवश्यक हैं ताकि सरकारी गाइडलाइंस पूरी हों।
  • CSR नीति और रिपोर्टिंग: Samba-Akhnoor क्षेत्र की एक निर्माण कंपनी CSR के मानदंड पूरे करती है या नहीं इसकी पुष्टि के लिए वकील की जरूरत पड़ती है।
  • Related party transactions: जम्मू क्षेत्र में निजी इकाइयों द्वारा related party ट्रांज़ैक्शन की जाँच और अनुपालन सुनिश्चित करना जरूरी होता है।
  • मर्जर और डील्स या पुनर्गठन: जम्मू-कश्मीर आधारित कंपनी के अधिग्रहण, विलय या कॉर्पोरेट पुनर्गठन के लिए due diligence और दस्तावेजी प्रमाणन चाहिए होता है।
  • लिस्टिंग-रेडीनेस: यदि कोई जम्मू-स्थित कंपनी NSE/BSE पर सूची बनना चाहती है, तो LODR नियमों के अनुपालन की जाँच अनिवार्य होगी।
  • आपातकालीन निर्णय-निर्माण और बोर्ड मीटिंग: किसी वित्तीय संकट या कानूनी पाबंदियों के समय बोर्ड के अधिकार-सीमाओं को स्पष्ट करना आवश्यक है।

इन सभी परिस्थितियों में एक अनुभवी अधिवक्ता या कानूनी सलाहकार दस्तावेज़ीकरण, दाखिलियाँ, और बोर्ड-नीतियों के निर्माण में साथ देता है। जम्मू-भारत निवासियों के लिए स्थानीय निवेदनात्मक नियमों का सही संदर्भ देना भी जरूरी है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: जम्मू, भारत में कॉर्पोरेट शासन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें

  • Companies Act, 2013 - निगमों के गठन, संरचना, निदेशक मंडल, ऑडिट और CSR सहित governance के प्रमुख प्रावधान।
  • Securities and Exchange Board of India Act, 1992 - निवेशकों के हितों की सुरक्षा और सिक्योरिटीज़ मार्केट के विकास, नियंत्रण के लिए केंद्रीय कानून।
  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - गंभीर वित्तीय कठिनाई में कंपनियों के पुनर्गठन और दायित्व-निपटान के लिए आवश्यक गवर्नेंस उपायों को स्थापित करता है।

नोट: जम्मू एवं कश्मीर UT में कॉर्पोरेट कानून का प्रमुख विधान केंद्रीय है; राज्य-स्तरीय स्वतंत्र कानून यहां नहीं हैं, पर स्थानीय पाबंदियाँ और बताए मार्ग MCA तथा SEBI के साथ अद्यतन रहते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉर्पोरेट शासन क्या है?

कॉर्पोरेट शासन वह ढांचा है जो निर्णय-निर्माण, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को संगठित करता है। यह बोर्ड,管理-प्रणालियाँ और नियंत्रण-सम्पादन पर केंद्रित है।

क्या जम्मू, भारत में ये कानून सभी कंपनियों पर लागू होते हैं?

हाँ, केंद्रीय Companies Act 2013 और SEBI नियम सभी कंपनियों पर लागू होते हैं, चाहे वे जम्मू-खंड में स्थित हों या नहीं।

Independent director कब आवश्यक होता है?

नीति के अनुसार, निर्धारित आयु, आकार और प्रकार की कंपनी पर independent director नियुक्त करने की आवश्यकता हो सकती है। कृपया कंपनी आयु और शेयरधारिता मानदंडों को देखें।

CSR के लिए न्यूनतम रकम कितनी है?

दोनों प्रकार की कंपनियाँ CSR के लिए निर्धारित निर्धारित मानदंड पूरी करें। यह राशि औसत वर्ष-नीत लाभ पर निर्भर होती है और नियमों के अनुसार संचालित होती है।

अगर कंपनियाँ गलत वित्तीय रिपोर्ट बनाती हैं तो क्या होगा?

ऐसी स्थिति में ऑडिटर की जिम्मेदारी, बोर्ड-रिपोर्टिंग और संभवतः regulation के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।

Jammu के कोर्ट में कौन से विवाद सुنے जाते हैं?

कॉर्पोरेट मामलों के विवाद सामान्य तौर पर उच्च न्यायालय के अधीन आते हैं, पर विशेष स्थितियों में नजदीकी क्षेत्रीय अदालतों में भी निर्णय हो सकता है।

फॉर्म-फाइलिंग में समय-सीमा कितनी है?

पहचानित फॉर्म्स MCA portal पर जमा करने की समय-सीमा निर्धारित है; कई मामलों में छूट और extensions मिल सकती है, आधिकारिक निर्देश देखें।

नियुक्त निदेशक के खिलाफ क्या कार्रवाइयां हो सकती हैं?

जवाबदेही और गलत-फैसला लेने पर पेनalties, disqualification और हिसाब-किताब से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाएं शुरू हो सकती हैं।

कब external auditor चाहिए होता है?

कंपनी आय-प्रकार और शेयरधारिता के अनुसार external auditor की नियुक्ति आवश्यक हो सकती है, विशेषकर सार्वजनिक या Listed कंपनियों में।

क्या जम्मू- कश्मीर में CSR reportिंग अलग है?

CSR reporting के मुख्य सिद्धांत एक ही हैं, पर स्थानीय उद्योग-क्षेत्र और disclosure norms में कुछ regional nuances हो सकते हैं।

लिस्टिंग के लिए किन नियमों का पालन चाहिए?

LODR regulations, disclosure और corporate governance standards का पालन करना आवश्यक है; सूचीबद्ध बनने के लिए SEBI के नियम अनिवार्य होते हैं।

कहाँ से शुरू करें अगर कानूनी सलाह चाहिए?

आप स्थानीय corporate law firms, advocates या company secretaries से initial consultation ले सकते हैं; आवश्यकता अनुसार विशेषज्ञ पर्सनल-फोलो-अप लेते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Ministry of Corporate Affairs (MCA) - https://www.mca.gov.in
  • Securities and Exchange Board of India (SEBI) - https://www.sebi.gov.in
  • Institute of Company Secretaries of India (ICSI) - https://www.icsi.edu

6. अगले कदम

  1. अपनी स्थिति स्पष्ट करें: कंपनी का प्रकार, आकार, और योजना साफ़ करें।
  2. जम्मू-भारत में कॉर्पोरेट शासन के मुद्दे पहचानें और आवश्यकताओं को सूचीबद्ध करें।
  3. स्थानीय वकील या कानूनी सलाहकार से प्रारंभिक परामर्श लें।
  4. उचित फॉर्म-फाइलिंग, रिकॉर्ड-कीपिंग और बोर्ड-नीतियाँ बनवाएं।
  5. CSR, स्वतंत्र निदेशक और ऑडिटिंग से जुड़ी आवश्यकताओं पर चेकलिस्ट बनाएं।
  6. अनुपालन-टाइमलाइन और दंड-प्रावधानों को समझें और लागू करें।
  7. नवीनतम आधिकारिक स्रोतों से अपडेट प्राप्त करें और नियमित अनुपालन की पुष्टि करें।

आधिकारिक स्रोत संकेतक: Ministry of Corporate Affairs (MCA), SEBI

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