अयोध्या में सर्वश्रेष्ठ तलाक और अलगाव वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

Advocate Ravishankar Yadav

Advocate Ravishankar Yadav

30 minutes मुफ़्त परामर्श
अयोध्या, भारत

2020 में स्थापित
उनकी टीम में 20 लोग
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अधिवक्ता रविशंकर यादव अयोध्या में अत्यंत अनुभवी और नामी वकील हैं, जो पेशेवर, परिणाम-सक्षम और किफायती कानूनी...
जैसा कि देखा गया

भारत तलाक और अलगाव वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें तलाक और अलगाव के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

शादीशुदा जीवन का मुद्दा।
तलाक और अलगाव परिवार
डिवोर्स कैसे प्राप्त करें। इसके मानदंड क्या हैं?
वकील का उत्तर MAH&CO. द्वारा

आपके प्रश्न के लिए धन्यवाद।तलाक, खुला, और वैवाहिक विवाद समाधान में दशकों के अभ्यास के साथ एक अनुभवी पारिवारिक वकील के रूप में, मैं आपको पाकिस्तान में तलाक प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकता हूँ। तलाक प्रक्रिया...

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क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
विवाह परिवार तलाक और अलगाव
मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा

आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...

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1. अयोध्या, भारत में तलाक और अलगाव कानून का संक्षिप्त अवलोकन

अयोध्या में तलाक और अलगाव के मामले भारत के विविध व्यक्तिगत कानूनों के अंतर्गत आते हैं. नागरिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि हिन्दू एक-पर्सनल लॉ, मुस्लिम पर्सनल लॉ और विशेष विवाह अधिनियम जैसी व्यवस्थाएँ क्षेत्रीय निजता के साथ जुड़ी हैं. अदालती प्रक्रिया में जिला कोर्ट और फैमिली कोर्ट का रोल प्रमुख होता है. इस गाइड में स्थानीय पहुँच, मौजूदा कानून और हाल के परिवर्तन स्पष्ट किए गए हैं.

Section 13B of the Hindu Marriage Act, 1955 provides for dissolution of marriage by mutual consent.

Source: Hindu Marriage Act, 1955 - Legislation.gov.in

उत्तरी प्रदेश के अयोध्या में तलाक के लिए दंपतियों को अपने निवास स्थान के अनुसार फैमिली कोर्ट या जिला अदालत के समक्ष आवेदन देना होता है. डिजिटल फाइलिंग और वीडियो सुनवाई जैसे उपाय देशभर में लागू हैं, जिससे स्थानीय अदालतों तक पहुँच आसान होती है.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • गंभीर घरेलु हिंसा की स्थिति में DV कानून के तहत राहत लेने और तलाक-केस की रणनीति बनाने के लिए advoca­te की जरूरत पड़ेगी।
  • पति-पत्नी समान रूप से विदेश या दूसरे राज्य में रहने पर दस्तावेज, वीजा और उनके अधिकार सुनिश्चित करने के लिए कानूनी सलाह चाहिए होगी।
  • मायाजाल विवाह, interfaith विवाह या Special Marriage Act के अंतर्गत कानूनी मार्ग अपनाने के लिए अधिवक्ता जरूरी हो सकते हैं।
  • बच्चों की custody, maintenance और visitation rights तय करने के लिए न्यायिक मार्गदर्शन आवश्यक है।
  • Mutual consent divorce के लिए छह महीनों के cooling-off period और प्रक्रिया को निष्पादन के साथ समझाने के लिए वकील चाहिए।
  • जायदाद के बंटवारे, दायित्व-maintenance, alimony आदि के सही विकल्‍पों के चयन के लिए कानूनी सलाह जरूरी है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 - हिन्दू समुदायों में विवाहित जोड़ों के लिए तलाक, separation और maintenance की प्रमुख कानूनी व्यवस्था यह अधिनियम देता है.
  • विशेष विवाह अधिनियम, 1954 - interfaith और inter-caste विवाह के लिए नागरिक कानून; सामुदायिक पहचान से मुक्त वैवाहिक विकल्प और तलाक के तरीके इस अधिनियम के अंतर्गत आते हैं.
  • द dissolved शर्त मुस्लिम विवाह अधिनियम-1939 - मुस्लिम समुदाय के divorces के लिए अदालत से dissolution के उपाय निर्धारित करता है; 2019 के मुस्लिमWomen Protection on Marriage Act से marriage talaq के त्वरित-तोड़ के नियम बदले गए हैं.
“Personal laws in India govern marriage and divorce for different communities, including Hindu, Muslim and Christian groups.”

Source: National Portal of India - Personal Laws

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तलाक के लिए मुझे किन अदालतों में दायर करना होगा?

अयोध्या में सामान्यतः फैमिली कोर्ट या जिला अदालत तलाक के मामले देखती है. यदि मामला mutual consent है, तो 13B के अंतर्गत dissolution proceedings चलती हैं. प्रक्रिया में कोर्ट द्वारा दस्तावेज़ सत्यापित होते हैं.

Mutual consent तलाक कब तक पूरा होता है?

आमतौर पर छह महीने के cooling-off period के साथ शुरू होता है और कभी-कभी दो वर्षों तक भी लग सकते हैं. कुछ मामलों में अदालत पहले से सुनवाई कर इसे accelerate कर सकती है.

कौन-कौन से वैधानिक प्रमाण पत्र चाहिए होते हैं?

पहचान प्रमाण, विवाह प्रमाण-पत्र, बच्चों के जन्म प्रमाण, आय-व्यय विवरण, घर-सम्पत्ति के कागजात, और DV याMaintenance से जुड़ा कुछ प्रमाण आवश्यक हो सकता है.

Maintenance और child custody कैसे तय होते हैं?

कानून एक समान अधिकार देता है कि बच्चे की custody, visitation rights, और maintenance स्थिति के अनुसार तय हों. अदालत आय, खर्च, और बच्चे के हित को प्रमुख मानती है.

अगर DV का मामला हो तो क्या करें?

protection under Domestic Violence Act 2005 के तहत राहत, अंतरिम आदेश, संरक्षण, और गिरफ्तारी जैसे कदम उठाए जा सकते हैं. समस्या होने पर तुरंत बचाव के आदेश माँगे जाते हैं.

क्या ऑनलाइन फाइलिंग संभव है?

हाँ, eCourts प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन फाइलिंग, स्टेटस चेकिंग और सुनवाई की व्यवस्था कुछ जिलों में उपलब्ध है. उत्तर प्रदेश में यह सेवाएं व्यापक धारणाओं के साथ बढ़ी हैं.

क्या कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है?

NALSA और राज्य स्तरीय कानूनी सहायता संस्थाओं के द्वारा पात्र व्यक्तियों को मुफ्त या सस्ती कानूनी सहायता मिलती है. औपचारिक शुल्कों में छूट संभव है.

तलाक के बाद संपत्ति कैसे बंटी जाएगी?

संपत्ति बंटवारे में देय दायित्व, मौजूदा अधिकार और दायरे ध्यान में रखे जाते हैं. तलाक के निर्णय में परिसंपत्तियों का विभाजन और ऋण का समाधान शामिल हो सकता है.

अगर spouse भारत से बाहर चला गया हो तो क्या?

विदेश से भी तलाक दाखिल हो सकता है; आइटम्स, सुविधा-प्रमाण, और वैकल्पिक प्रत्यय अभी भी स्थानीय कोर्ट के नियमों के अनुसार मान्य होते हैं. कानूनी सलाह आवश्यक है.

त्वरित आदेश कैसे मिलते हैं?

DV या सुरक्षा से सम्बंधित मामलों में interim relief जल्दी मिलता है. custoy और maintenance के लिए भी interim orders संभव हैं.

तलाक के लिए कितना खर्च आ सकता है?

खर्च का दायरा वकील की फीस, सरकारी शुल्क, और स्टेप-इन-स्टेप प्रक्रिया पर निर्भर करता है. Ayodhya में प्रारम्भिक फाइलिंग से लेकर निर्णय तक खर्च अलग-अलग हो सकता है.

Interfaith विवाह के लिए क्या विशेष कानून हैं?

Special Marriage Act के अंतर्गत विवाह गैर-हिन्दू नागरिकों के लिए भी वैधानिक है और तलाक के उपाय यहाँ उपलब्ध हैं. यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शिता प्रदान करती है.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - https://nalsa.gov.in
  • eCourts - Official Portal for online filing, case status, and hearings - https://ecourts.gov.in
  • National Portal of India - Personal Laws and Legal Aid - https://www.india.gov.in/spotlight/legal-aid-services

6. अगले कदम

  1. अपनी स्थिति स्पष्ट करें: कौन सा कानून आपके केस के लिए उपयुक्त है.
  2. आवश्यक दस्तावेज इकट्ठे करें: विवाह प्रमाण-पत्र, आय-व्यय, बच्चों के प्रमाण आदि.
  3. आस-पड़ोस या परिचित से अनुभवी वकील की पहचान करें.
  4. कानूनी मुफ्त या सस्ते सलाह के लिए NALSA या UPLSA जैसी संस्थाओं से संपर्क करें.
  5. पहली परामर्श के लिए रिकॉर्ड और सवाल तैयार रखें.
  6. कोर्ट फीस और अन्य शुल्क का अनुमान लगाएं और बजट बनाएं.
  7. फाइलिंग से पहले अपने वकील के साथ केस रणनीति तय करें.

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