फरीदाबाद में सर्वश्रेष्ठ तलाक और अलगाव वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

Tiwari & Associates Law Firm

Tiwari & Associates Law Firm

15 minutes मुफ़्त परामर्श
फरीदाबाद, भारत

2017 में स्थापित
उनकी टीम में 6 लोग
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तिवारी एंड एसोसिएट्स एक दशक से प्रतिष्ठित वकील फर्म है। हमारे विशेषज्ञ कानूनी पेशेवरों की टीम के साथ, हम नागरिक,...
Advocate Deependra Pati Tiwari

Advocate Deependra Pati Tiwari

30 minutes मुफ़्त परामर्श
फरीदाबाद, भारत

2017 में स्थापित
उनकी टीम में 1 व्यक्ति
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नागरिक, आपराधिक, वैवाहिक, श्रम कानून, कंपनी कानून, उपभोक्ता विवाद और अन्य कानूनी परामर्श में काम करता है। हमारे पास...
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भारत तलाक और अलगाव वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें तलाक और अलगाव के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

शादीशुदा जीवन का मुद्दा।
तलाक और अलगाव परिवार
डिवोर्स कैसे प्राप्त करें। इसके मानदंड क्या हैं?
वकील का उत्तर MAH&CO. द्वारा

आपके प्रश्न के लिए धन्यवाद।तलाक, खुला, और वैवाहिक विवाद समाधान में दशकों के अभ्यास के साथ एक अनुभवी पारिवारिक वकील के रूप में, मैं आपको पाकिस्तान में तलाक प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकता हूँ। तलाक प्रक्रिया...

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क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
विवाह परिवार तलाक और अलगाव
मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा

आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...

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1. फरीदाबाद, भारत में तलाक और अलगाव कानून का संक्षिप्त अवलोकन

फरीदाबाद हरियाणा राज्य का एक जिला है जहाँ तलाक और अलगाव मामलों की सुनवाई क्षेत्रीय Family Court और जिला अदालतों में होती है। अदालतों में बहुधा हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई और अन्य समुदायों के समानान्तर कानून लागू होते हैं। नीचे के अनुसार प्रमुख कानूनों के अंतर्गत तलाक़ और अलगाव के मुद्दों का निपटारा किया जाता है।

फरीदाबाद में तलाक-युग्मित मामलों के लिए सबसे सामान्य मार्ग हिंदू विवाह अधिनियम 1955 तथा Special Marriage Act 1954 के तहत होता है, जबकि के लिए अन्य समुदायों के लिए उनके व्यक्तिगत कानून लागू हो सकते हैं। अदालतें Mutual Divorce और मुकदमेबाजी दोनों प्रकार के आवेदन सुनती हैं।

व्यावहारिक बात यह है कि जल-स्थल पर निवास, पक्षों की स्थिरता और बच्चों के हित के आधार पर न्यायालय jurisdiction तय करता है। स्थानीय अदालतों के अनुसार निष्पादन के समय-सीमा और प्रक्रिया में बदलाव होते रहते हैं।

“No decree shall be pronounced by the court until after the expiration of six months from the date of the petition for divorce by mutual consent.”
Hindu Marriage Act 1955 - Section 13B (Mutual divorce)
“The Act provides for the protection of the rights of women who are victims of violence.”
Protection of Women from Domestic Violence Act 2005 - preamble

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  1. परिदृश्य 1 - फरीदाबाद में mutual consent तलाक में प्रक्रिया-योजना बनानी हो

    हिंदू विवाह अधिनियम के तहत mutual divorce के लिए छह माह का cooling period रहता है. एक वकील दोनों पक्षों की सहमति, कागजात और न्यायालय की डेडलाइन के अनुसार केस को गति देता है. बिना वकील के अक्सर कागजात-घोटाले और समय-खपत बढ़ती है.

  2. परिदृश्य 2 - मुकदमा-आधारित तलाक में तलाशी-उद्धरण और गवाह प्रबंधन

    यदि पति-पत्नी के बीच मतभेद गहरे हैं और पक्ष मुकदमेबाजी चाहते हैं, तो अदालत के सम्मुख साक्ष्यों, गवाहों और प्रमाण-पत्रों की सही तैयारी चाहिए. एक अनुभवी अधिवक्ता मामले की रणनीति बनाता है और हर चरण में प्रतिनिधित्व करता है.

  3. परिदृश्य 3 - child custody और maintenance के दावे

    बच्चों के संरक्षण और maintenance के लिए धारण-लागत, सुविधाओं और वयस्क-देखभाल के दावों की उचित प्रस्तुति जरूरी है. वकील जाँच-परख कर रिकवरी, समय-सारिणी और कोर्ट-ऑर्डर के अनुपालन को सुनिश्चित करता है.

  4. परिदृश्य 4 - घरेलू हिंसा के मामले (DV Act)

    घरेलू हिंसा के प्रतिकार में सुरक्षा-ऑर्डर, निष्कासन और संरक्षण के आदेश के लिए अनुभवी कानूनी सहयोग आवश्यक है. एक वकील DV ऐक्ट के अंतर्गत राहत कदम का मार्गदर्शन देता है.

  5. परिदृश्य 5 - सम्पत्ति विभाजन, दायित्व और विरासत

    तलाक की स्थिति में संयुक्त संपत्ति, ऋण और दायित्वों का सही विभाजन महत्त्वपूर्ण होता है. विशेषज्ञ वकील कानून के अनुरूप उचित वितरण और दस्तावेज बनवाने में मदद करता है.

  6. परिदृश्य 6 - ई-फाइलिंग और फरीदाबाद के लोक-स्तर पर अद्यतन प्रावधान

    फरीदाबाद के कुछ कोर्ट ई-फाइलिंग और ऑनलाइन प्रक्रियाओं को अपना रहे हैं. एक वकील इन बदलावों के साथ केस फाइलिंग की प्रभावी योजना बनाता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

फरीदाबाद के निवासियों पर खासकर हरियाणा हाई कोर्ट, दिवानी/फैमिली कोर्ट के निर्देश लागू होते हैं. नीचे दो से तीन प्रमुख कानून हैं जो तलाक और अलगाव के मामले संभालते हैं।

  • हिंदू विवाह अधिनियम 1955 - हिंदू विवाह का वैधानिक पंजीकरण, तलाक, निर्वाचन और प्रताड़ना से संबंधित प्रावधान स्पष्ट करते हैं.
  • Special Marriage Act 1954 - धर्म-रहित विवाह के नियम, तलाक और अलगाव के प्रावधान संपूर्ण नागरिकता पर लागू होते हैं.
  • Indian Divorce Act 1869 - ईसाई समुदाय के लिए तलाक के विशिष्ट नियम प्रदान करता है; प्रचलन में हिंदू विवाह अधिनियम की तरह प्रयुक्त होता है.
“No party to a marriage shall be required to marry; The Act provides for the solemnization of marriages outside the community of any particular religion.”
Special Marriage Act 1954 - preamble
“A woman or man who is unable to maintain his or her spouse may apply for maintenance under the relevant provisions of the law.”
Criminal Procedure Code Section 125 - maintenance provisions

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तलाक और अलगाव में क्या अंतर है?

तलाक एक कानूनी विकल्‍प है जो विवाह को समाप्त करता है. अलगाव एक स्थिति है जहाँ अविवाहित रहते हुए पति-पत्नी अलग रहते हैं, परन्तु विवाह बनाए रखा जा सकता है. Faridabad के केसों में कई बार लोग अंतर समझे बिना तलाक-निपटाने पहुँच जाते हैं.

मैं Faridाबाद में किस कोर्ट में तलाक दाखिल कर सकता/सकती हूँ?

अधिकतर मामलों में Family Court, Faridabad में दाखिला होता है. यदि एक पक्ष अन्य राज्य में रहता हो, तब भी कोर्ट-निर्देशन के अनुसार उपयुक्त स्थान तय किया जा सकता है. स्थानीय न्यायालयों की वेबसाइट पर दाखिले की जानकारी मिलती है.

Mutual divorce के लिए cooling-off period कितनी होती है?

Mutual consent तलाक के लिए सामान्यतः छह माह की शीत-प्रतिष्ठा अवधि होती है. अदालतें विशेष परिस्थितियों में अवधि घटाने पर विचार कर सकती हैं.

Maintenance कब मिलता है और कितना मिलता है?

Section 125 CrPC के तहत पत्नी, बच्चे या वृद्ध माता-पिता को maintenance मिल सकता है. अदालत आय, खर्च और जीवन-स्तर के अनुसार राशी तय करती है.

बच्चों के संरक्षण के लिए क्या किया जाना चाहिए?

Custody के निर्णय बच्चों के सर्वोत्तम हित पर आधारित होते हैं. Haryana में अदालतें माता-पिता के अनुरूप सुपुर्दगी के आदेश दे सकती हैं. उचित योजना आवश्यक है.

कौन-से दस्तावेज़ चाहिए होते हैं?

पहचान प्रमाणपत्र, विवाह प्रमाणपत्र, पासपोर्ट आकार के फोटो, बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र, आय प्रमाण-पत्र और पिछले मामलों के रिकॉर्ड आदि documents चाहिए होते हैं.

तलाक के खर्च का अनुमान कितना होता है?

खर्च अदालत, वकील-फीस, किराए-कार्यान्वयन आदि पर निर्भर करता है. Faridabad में सरल मामलों में कुछ हजार से लाखों रुपये तक खर्च आ सकता है.

क्या तलाक के बाद भी संपत्ति पर दावा किया जा सकता है?

हाँ, तलाक के बाद भी संयुक्त संपत्ति, विकल्प-निर्देश और दायित्वों का विभाजन हो सकता है. यह समझौते और कोर्ट-ऑर्डर पर निर्भर करता है.

अगर मेरा पार्टनर अदालत में पेश नहीं होता है तो?

गैर-हाज़िर रहने पर भी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. कोर्ट डिफ़ॉल्ट नोटिस और समन जारी कर सकता है. एक वकील इस स्थिति को संभालता hai.

क्या हम अलग रहते हुए भी तलाक दाखिल कर सकते हैं?

हाँ, यह संभव है कि अलग रहने के बावजूद mutual consent से तलाक की प्रक्रिया शुरू की जा सके. पर Cooling period का पालन आवश्यक है.

फरीदाबाद में DV-एक्ट से कौन-सी राहत मिल सकती है?

DV-एक्ट से सुरक्षा आदेश, शरण-स्थल और संरक्षण के उपाय मिल सकते हैं. यह महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करता है.

क्या मुझे समुदाय-विशिष्ट कानून के बारे में जानना चाहिए?

हाँ, अपने समुदाय के अनुसार नियम भिन्न हो सकते हैं. Hindu, Muslim, Christian आदि समुदायों के लिए उपयुक्त कानून लागू होते हैं.

5. अतिरिक्त संसाधन

तलाक और अलगाव के लिए विश्वसनीय मार्गदर्शन और कानूनी सहायता के लिए नीचे सामान्य स्रोत देंखें:

  • National Legal Services Authority (NALSA) - नि:शुल्क कानूनी aid और मार्गदर्शन का प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान. https://nalsa.gov.in
  • eCourts Portal - देश भर की अदालतों की जानकारी और ऑनलाइन सेवाएँ. https://www.ecourts.gov.in
  • District Legal Services Authority, Faridabad - Faridabad जिले के लिए लोक-उपाय और कानूनी सहायता. (स्थानीय प्रवर्तन के लिए स्थानीय नवंबर-निर्देश देखें)

6. अगले कदम

  1. अपनी स्थिति और जरूरत का स्पष्ट उद्देश्य तय करें कि तलाक, अलगाव या custody-maintenance कौन सा मार्ग सही रहेगा.
  2. Faridabad-के अनुभवी परिवार वकील खोजें जो स्थानीय अदालतों में काम कर चुके हों.
  3. क्लाइंट-से-वकील पहली मुलाकात में सभी आवश्यक दस्तावेज़ लेकर जाएँ.
  4. फी-स्टैक, retainer agreement और संभावित खर्च की स्पष्ट बात करें.
  5. कानूनी सलाह के आधार पर अगला कदम तय करें और अदालत के तारीखों का पालन करें.
  6. ऑनलाइन फॉर्म-फाइलिंग या दस्तावेज़ इलेक्ट्रॉनिक भेजने के बारे में पक्का करें यदि अदालत इसे स्वीकार करती है.
  7. कानूनी अधिकारों और निजता के मुद्दों पर सतर्क रहें और परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें.

ध्यान दें: यह मार्गदर्शिका सामान्य सूचना के लिए है. किसी भी मामले में आप एक अनुभवी advokat से व्यक्तिगत सलाह लें. अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोत देखें:

  • indiacode.nic.in - कानून की आधिकारिक टेक्स्ट
  • nalsa.gov.in - राष्ट्रीय कानूनी सहायता
  • ecourts.gov.in - ई-कोर्ट्स पोर्टल

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