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भारत तलाक और अलगाव वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें तलाक और अलगाव के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- शादीशुदा जीवन का मुद्दा।
- डिवोर्स कैसे प्राप्त करें। इसके मानदंड क्या हैं?
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वकील का उत्तर MAH&CO. द्वारा
आपके प्रश्न के लिए धन्यवाद।तलाक, खुला, और वैवाहिक विवाद समाधान में दशकों के अभ्यास के साथ एक अनुभवी पारिवारिक वकील के रूप में, मैं आपको पाकिस्तान में तलाक प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकता हूँ। तलाक प्रक्रिया...
पूरा उत्तर पढ़ें - क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
- मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
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वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा
आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...
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भारत में तलाक और अलगाव कानून का संक्षिप्त अवलोकन
भारत में तलाक और अलगाव धर्म-आधारित कानूनों के अंतर्गत नियंत्रित होते हैं, जिनमें मुख्य नागरिक कानून हिन्दू-धर्म के लिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955, सभी के लिए सामान्य मार्ग के रूप में विशेष विवाह अधिनियम 1954 और ईसाई विवाह के लिए भारतीय तलाक अधिनियम 1869 प्रमुख हैं. इन कानूनों के तहत तलाक के लिए अदालत से डीक्री प्राप्त करने के लिए निर्धारित Grounds रखे गए हैं.
इन कानूनों के साथ-साथ क्षेत्रीय वर्षों-से-विकसित न्यायिक फलक में परिवार अदालतों का गठन किया गया है ताकि तलाक, पृथकता, माता-पिता के अधिकार और बच्चे के हित जैसी मामलों को मुख्य धारा में सुलझाया जा सके. कोविड-19 के दौरान न्यायिक प्रक्रियाओं में ई-फाइलिंग और वीडियो काउंसलिंग जैसी सुविधाओं को बढ़ावा मिला है ताकि देरी कम हो और पुनर्वास-सम्बन्धी मामलों का निपटारा तेज हो.
उद्धरण:
"Hindu Marriage Act, 1955 - An Act to provide for the solemnization of marriages between Hindus and for matters connected therewith."
"Special Marriage Act, 1954 - An Act to provide for civil marriages for all Indian citizens irrespective of religion."
"Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 - An Act to provide for more effective protection of the rights of women guaranteed under the Constitution who are victims of violence."
तलाक-आगामी निर्णय लेने के लिए निवास-आधार पर उचित न्यायिक क्षेत्राधिकार चुनना आवश्यक है. राज्य-स्तर पर Family Court के जुरிடिक्शन के नियम अलग हो सकते हैं. स्थानीय कानूनों और अदालत के निर्देशों के अनुसार सलाह लें.
व्यवहारिक सलाह- अगर आप या आपका साथी भारत के बाहर रहते हैं, तब भी तलाक के लिए भारत के भीतर उचित अदालत में अधिकार-प्रक्रिया पूरी की जा सकती है; ई-फाइलिंग और डिजिटल प्रक्रिया के बारे में स्थानीय अदालत से जानकारी लें.
आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है?
तलाक और अलगाव के मामलों में कानूनी सलाह और वकील की सुलभ सहायता आवश्यक होती है ताकि आपके अधिकार, दायित्व और बच्चों के हित सुरक्षित रहें. नीचे 4-6 वास्तविक परिस्थितियाँ दी गई हैं जिनमें वकीل की सहायाता लाभकारी होती है.
- घरेलू हिंसा के मामले में सुरक्षा-आदेश और संरक्षण मांग- DV Act 2005 के प्रावधानों के अनुसार राहत पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया जरूरी होती है; एक वकील दस्तावेज़ीकरण, नोटिस और अदालत-आर्डर में मदद कर सकता है. उदाहरण: घरेलू हिंसा के संदर्भ में पीड़िता को संरक्षण पाने के लिए संबंधित अदालत में आवेदन।
- क्रूरता या Desertion के Grounds पर Divorce- हिंदू विवाह अधिनियम या अन्य व्यक्तिगत कानूनों के Grounds के साथ न्यायिक अपील करना कठिन हो सकता है; अधिवक्ता सही Ground चुनकर दलील बनाते हैं. उदाहरण: पति के दमन-प्रवृत्ति के कारण पत्नी ने divorce petition दायर की।
- Mutual Consent Divorce (13B) की प्रक्रिया- दोनों पक्ष एक साथ तलाक चाहते हैं पर किन-किन दस्तावेज़ों की आवश्यकता है, यह समझना जरूरी होता है. उदाहरण: अलग-अलग जगह रहते हुए भी आपसी सहमति से एक स्वर में निर्णय लेते हैं और कानूनन प्रक्रिया पूरी करते हैं.
- 児儿童 के अधिकार, Custody और Support- बच्चों के हित, यात्रा, शिक्षा आदि के बिंदुओं पर योग्य निर्णय लेने हेतु कानूनी मार्गदर्शन आवश्यक रहता है. उदाहरण: एक बच्चे की custody के प्रश्न पर अदालत child custody order बनाती है।
- अकसर पेचीदा संपत्ति-वितरण- परिवारिक संपत्ति, मौलिक अधिकार, और साझा ऋण आदि के सही बंटवारे के लिए कानूनी सलाह जरूरी होती है. उदाहरण: संयुक्त संपत्ति के वितरण पर विवाद।
स्थानीय कानून अवलोकन
तलाक और अलगाव को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानून निम्न हैं. इनमें से सबसे अधिक उपयोग हिन्दू-धर्म के लिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955 है, उससे आगे Special Marriage Act 1954 और Christians के लिए Indian Divorce Act 1869 प्रमुख हैं.
- हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955- हिन्दू विवाह एवं तलाक से जुड़े Grounds, विवाह-सम्बन्धी अधिकार-रक्षा के प्रावधान. उद्धरण:
"Hindu Marriage Act, 1955 - An Act to provide for the solemnization of marriages between Hindus and for matters connected therewith."
- विशेष विवाह अधिनियम, 1954- धर्म-निरपेक्ष विवाह और तलाक के प्रावधान; सभी भारतीय नागरिकों के लिएcivil form of marriage का प्रावधान. उद्धरण:
"Special Marriage Act, 1954 - An Act to provide for civil marriages for all Indian citizens irrespective of religion."
- भारतीय तलाक अधिनियम, 1869- ईसाई विवाह पर तलाक के लिए विशेष कानून.
नोट- मुस्लिम समुदाय के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ और दुर्लभ मामलों में Dissolution of Muslim Marriages Act, 1939 तथा Shariat Act 1937 के प्रावधान लागू होते हैं. अगर आपका मामला संवैधानिक रूप से इन समुदायों से जुड़ा है, तो संबंधित कानून अलग होगा. अधिक जानकारी हेतु स्थानीय वकील से परामर्श लें.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तलाक क्या है?
तलाक एक कानूनी क्रम है जिससे विवाह समाप्त हो सकता है. यह अदालत के बैनस पर एक डिक्री के माध्यम से होता है और दोनो पक्षों के अधिकार-हितों की रक्षा के लिए दिशानिर्देश तय करता है.
भारत में तलाक के प्रकार कौन-कौन से हैं?
मुख्य प्रकार Mutual Consent Divorce (13B) और Contested Divorce होते हैं. Mutual Consent में दोनों पक्ष एक साथ सहमत होते हैं; Contested में Grounds पर अदालत निर्णय देती है.
किस अदालत में केस दायर किया जा सकता है?
अधिकतर मामलों में Family Court में तलाक-सम्बन्धी आवेदन दायर किया जाता है. Jurisdiction सामान्यतः वही क्षेत्र है जहाँ विवाह हुआ था या जहां पार्टियाँ रहते हैं.
Mutual Consent Divorce की प्रक्रिया क्या है?
दोनों पक्ष एक-दूसरे से सहमत होते हैं, एक वापसी-वार्तालाप और एक मुख्य पिटिशन दायर किया जाता है. फिर Court द्वारा संयुक्त आदेश पारित होता है और अंततः तलाक की डिक्री मिलती है.
कस्टडी (Child Custody) कैसे तय होती है?
बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दी जाती है. अदालत माता-पिता के समान अधिकारों और बच्चे की शिक्षा, सुरक्षा एवं कल्याण के आधार पर निर्णय देती है.
Maintenance या alimony कब और कितना मिलेगा?
Maintenance CrPC 125 के अनुसार निर्भर करता है क्षमता-योग्यता और आय-स्थिति पर. तलाक के बाद भी बच्चों के लिए maintenance निर्धारित किया जा सकता है.
क्या तलाक के बाद संपत्ति-हकदार बने रहते हैं?
तलाक के पश्चात विवाह-सम्बन्धी संपत्ति और संयुक्त ऋण आदि का बंटवारा कानून द्वारा निर्धारित होता है. आम तौर पर तलाक के पश्चात संपत्ति का विभाजन पार्टियों के बीच समझौते या अदालत के आदेश से होता है.
क्या विदेश में रहने वाला पति या पत्नी तलाक क्रिया में हिस्सा ले सकता है?
हाँ, भारत के बाहर रहने पर भी अदालत के पास दायर कर सकते हैं. कई मामले विदेश-स्थित पक्षों के transcript, summons और online hearing के माध्यम से निपटते हैं.
कानूनी सहायता कैसे मिली जा सकती है?
कम आय वाले परिवरों के लिए लोक-सेवा कानूनी सहायता उपलब्ध है. NALSA, राज्य-स्तरीय Legal Services Authorities आपके लिए नि:शुल्क या कम शुल्क पर वकील मुहैया कराते हैं.
कस्टोडी और डोमेस्टिक वायलेन्स के मामलो में क्या उपाय हैं?
Domestic Violence Act 2005 के प्रावधानों के अंतर्गत सुरक्षा-आदेश, राहत और संरक्षण मिलना संभव है. यदि आप सुरक्षित वातावरण में नहीं रहते हैं, तो तुरंत कानूनी सहायता लें.
तलाक कानून में हाल की क्या प्रमुख बदलाव आये हैं?
कोरोना काल के दौरान ई-फाइलिंग और वीडियो-हियरिंग जैसी डिजिटल प्रक्रियाएं बढ़ी हैं. कई राज्यों ने परिवार अदालतों में ऑनलाइन सेवाएं और प्रभावी प्रक्रिया-समय सीमा बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं.
तलाक के लिए किन-किन दस्तावेजों की आवश्यकता रह सकती है?
पहचान, विवाह प्रमाण, बच्चों के जन्म-प्रमाण, आय-प्रमाण, संपत्ति-सम्बन्धी दस्तावेज आदि सामान्यतः चाहिए होते हैं. कोर्ट-निर्देशों के अनुसार दस्तावेज़ समय-समय पर अग्रिम जमा कर दें.
तलाक के बाद बच्चों के नाम-परिवारिक रिकॉर्ड कैसे बदले जाते हैं?
जन्म-प्रमाण-पत्र, स्कूल रिकॉर्ड आदि में माता-पिता के नाम और पते के बदलाव के लिए न्यायादेश के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ सकती हैं.
अतिरिक्त संसाधन
तलाक और अलगाव से जुड़ी सहायता के लिए नीचे 3 प्रतिष्ठित संगठनों से संपर्क किया जा सकता है.
- राष्ट्रीय विधिक सेवा संस्थान (NALSA) - नि:शुल्क कानूनी सहायता और जानकारी के लिए: https://nalsa.gov.in
- राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) - महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए मार्गदर्शन: https://ncw.nic.in
- भारत बार काउंसिल - वकीलों के पंजीकरण और पेशेवर मानक: https://www.barcouncilofindia.org
अगले कदम
- अपनी स्थिति साफ-साफ़ लिखें: धर्म, नागरिकता, निवास और बच्चों के बारे में विवरण इकट्ठा करें.
- अपने क्षेत्र के Family Court के बारे में जानकारी लें और jurisdiction तय करें.
- कौन सा प्रकार तलाक आपके केस के अनुरूप है, यह समझें (Mutual Consent या Contested).
- कानूनी सलाहकार या अधिवक्ता से initial consultation निर्धारित करें.
- जरूरी दस्तावेज़ बनवाएं और उनसे नोट्स बनाकर रख दें.
- कानूनी सहायता के लिए NALSA या NCW जैसी सेवाओं के बारे में पूछें.
- पहली सुनवाई और तैयारी के लिए एक स्पष्ट योजना बनाएं - दायरे, दलीलें और अपेक्षित परिणाम.
यदि आप चाहें, मैं आपके स्थिति-विशिष्ट दस्तावेज़ों की एक चेकलिस्ट और एक आरंभिक पूछताछ-तैयारी का ड्राफ्ट बना सकता/सकती हूँ.
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