गोपালगंज में सर्वश्रेष्ठ तलाक और अलगाव वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
गोपালगंज, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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भारत तलाक और अलगाव वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें तलाक और अलगाव के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

शादीशुदा जीवन का मुद्दा।
तलाक और अलगाव परिवार
डिवोर्स कैसे प्राप्त करें। इसके मानदंड क्या हैं?
वकील का उत्तर MAH&CO. द्वारा

आपके प्रश्न के लिए धन्यवाद।तलाक, खुला, और वैवाहिक विवाद समाधान में दशकों के अभ्यास के साथ एक अनुभवी पारिवारिक वकील के रूप में, मैं आपको पाकिस्तान में तलाक प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकता हूँ। तलाक प्रक्रिया...

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क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
विवाह परिवार तलाक और अलगाव
मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा

आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...

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1. गोपालगंज, भारत में तलाक और अलगाव कानून के बारे में: गोपालगंज, भारत में तलाक और अलगाव कानून ka संक्षिप्त अवलोकन

तलाक और अलगाव के मामले भारत के व्यक्तिगत कानूनों द्वारा संचालित होते हैं. गोपालगंज, बिहार में नागरिक अदालतों के अधीन यह प्रक्रिया पूरी होती है. हिन्दू विवाह अधिनियम 1955, विशेष विवाह अधिनियम 1954 और भारतीयDivorce Act 1869 जैसे कानून लागू होते हैं. क्षेत्रीय नियमों के साथ फेमिली कोर्ट में मामलों की सुनवाई होती है, जो त्वरित निपटान का लक्ष्य रखती है.

गोपालगंज जिला पटना उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है. अदालतों की पहुँच, फौजदारी खर्च और नगर-गाँव के कारण मामलों की धारणा भिन्न हो सकती है. अलगाव या तलाक के लिए स्थानीय फर्म-फाउन्डेशन और कानूनी सहायता उपलब्ध है. महत्वपूर्ण है कि आप सही अधिकार क्षेत्र और कानून का चयन करें ताकि आपके केस की प्रकृति के अनुसार सही धाराओं में याचिका दायर हो सके.

महत्वपूर्ण तथ्य - परिवार न्यायालय, विवाह-परिवार से जुड़े विवादों के त्वरित निपटान हेतु स्थापित हुए थे. इसके अंतर्गत तलाक, निजता, बच्चे के संरक्षण आदि मुद्दे आते हैं. स्थिति के अनुसार अदालतें देय आदेश दे सकती हैं.

"NALSA's mandate is to provide free legal services to eligible persons." - National Legal Services Authority (NALSA)

"The Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 seeks to protect women from domestic violence." - Ministry of Women and Child Development

"The Hindu Marriage Act, the Special Marriage Act and the Indian Divorce Act regulate divorce and matrimonial matters." - Government of India

आधिकारिक स्रोत देखें: महत्वपूर्ण कानून-वस्तु के लिए NALSA, WCD and BIS‑BSLSA साइट्स जैसे संसाधन उपयोगी हैं. नीचे URLs दिए जाते हैं.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: तलाक और अलगाव कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं

गोपालगंज में तलाक और अलगाव के मामलों में कानून के विशेषज्ञ के मार्गदर्शन की आवश्यकता अक्सर रहती है. नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं जो एक अधिवक्ता की सहायता स्पष्ट करते हैं.

  • 1) Cruelty या Domestic Violence की शिकायत - पति/पत्नी से अत्याचार के अभियोग लगते हैं; केस दायर करने हेतु प्रमाण और सुरक्षा आदेश चाहिए. एक advi-सर द्वारा सही धाराओं में आवेदन संभव है.
  • 2) Mutual Consent Divorce - दोनों पक्ष सहमत हों पर कम-से-कम 6 माह का अवधी नियम लागू है; समय-सीमा और दस्तावेज़ तैयार करने हेतु वकील जरूरी है.
  • 3) Custody और Maintenance जैसी सुरक्षा-सम्बंधी मांगें - बच्चों की संरक्षा, शिक्षा और समर्थन के लिए न्यायिक निर्णय आवश्यक होते हैं; अनुभवी counsel की जरूरत रहती है.
  • 4) Inter-Religious Marriage से जुड़े मामलों - Special Marriage Act के अंतर्गत केस दायर करने पर स्थानीय प्रक्रिया स्पष्ट करनी होती है; कानूनी सलाहकार मार्गदर्शन देते हैं.
  • 5) Marriage Property और Debts का विभाजन - संपत्ति, दायित्व और रोजगार-आय से जुड़े दावे चरणबद्ध होते हैं; सही कानून का चयन अनिवार्य है.
  • 6) Residency और Jurisdiction सम्बन्धी जटिलताएं - किस अदालत में दायर करें, यह स्थानीय निवास, विवाह स्थान और बच्चों के स्थान पर निर्भर करता है; वकील सही मार्गदर्शन देंगे.

गोपालगंज के केसों में सामान्यतः परिवार कोर्ट में दाखिल करना होता है; कुछ परिस्थितियों में जिला अदालत भी सुनवाई कर सकती है. एक अनुभवी कानूनी सलाहकार आपके दस्तावेज़, समय-रेखा और खर्चों की स्पष्ट योजना बना सकता है.

3. स्थानीय कानून अवलोकन: गोपालगंज, भारत में तलाक और अलगाव को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें

  • हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 - हिन्दू व्यक्तियों के विवाह-तलाक से जुड़े विषयों के प्रमुख प्रावधान.
  • विशेष विवाह अधिनियम, 1954 - inter-religious विवाह और उनके तलाक के लिए एक समान प्रक्रिया उपलब्ध कराता है.
  • भारतीय Divorce Act, 1869 - ईसाई विवाह से जुड़े तलाक-निर्णयों के लिए प्रचलित कानून.
  • Domestic Violence Act, 2005 (PWDVA) - घरेलू हिंसा से महिलाएं सुरक्षा और सहायता प्राप्त करें; सुरक्षा आदेश आदि.
  • धारा 125 CrPC - संतुलितMaintenance/भरण-भोषण की अधिकारिता; बच्चों और पत्नी आदि के लिए नियमित सहायता के निर्देश।

इन कानूनों के साथ स्थानीय प्रक्रियात्मक नियम और फेमिली कोर्ट के नियम भी लागू होते हैं. गोपालगंज में केस की प्रकृति के अनुसार सही धाराओं का चयन महत्त्वपूर्ण है.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तलाक कैसे दायर किया जा सकता है?

तलाक के लिए पहले अन्य विकल्पों पर विचार करें. यदि आप सहमत नहीं हैं तो विविध grounds के आधार पर याचिका दाखिल करें. गोपालगंज की फेमिली कोर्ट में दायर करना सामान्य तरीका है.

Mutual consent divorce क्या है और कितनी अवधि लगती है?

Mutual consent divorce में दोनों पार्टनर सहमत होते हैं. सामान्य तौर पर दस्तावेज़ों के मिलान के बाद छह महीनों की प्रतीक्षा-समय सीमा होती है; अदालत कभी इसे समाप्त कर सकती है.

custody of children कौन तय करता है?

बच्चों की custody सर्वोच्च हित में तय होती है.आमतौर पर माता-पिता के बीच समझौते या अदालत के आदेश से तय होता है. अदालत बच्चा की सुरक्षा और शिक्षा के अनुसार निर्णय लेती है.

Maintenance या alimony कैसे तय होता है?

Maintenance, बच्चों के लिए भरण-पोषण और पत्नी की सहायता के उद्देश्य से तय होता है. भुगतान राशि आय, शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतों पर निर्भर करती है.

Domestic violence के मामलों में क्या कदम उठाएं?

PWDVA के अंतर्गत protection order, non-contact order आदि मिलते हैं. पुलिस रिपोर्ट, मेडिकल प्रमाण और Lok Adalat/Court की सहायता से आगे बढ़ना उचित रहता है.

Hindu Marriage Act के अनुसार तलाक की grounds क्या हैं?

Cruelty, desertion, adultery, convert करने, मानसिक रोग, irretrievable breakdown आदि grounds सामान्य हैं. अदालत इन पर विचार कर न्यायसंगत निर्णय देती है.

जुडिशियल separation क्या है और यह कब लिखा जा सकता है?

Judicial separation एक वैधानिक अलगाव की स्थिति है. यह तलाक नहीं है, परन्तु पति-पत्नी अब अपनी कानूनी जिम्मेदारियों से अलग रहते हैं.

Inter-religious marriage के लिए कौन सा कानून लागू होगा?

Inter-religious विवाह के लिए Special Marriage Act लागू होता है. यह विवाह एवं तलाक के लिए एक समान प्रक्रिया देता है.

कौन सा दस्तावेज जरूरी होते हैं?

आमतौर पर पहचान-प्रमाणपत्र, विवाह प्रमाणपत्र, जन्म-प्रमाणपत्र, बच्चों के प्रमाण-पत्र, आय-सम्बन्धी दस्तावेज, लेखा-जोखा आदि आवश्यक होते हैं.

चाइल्ड कस्टडी के लिए क्या प्रक्रिया है?

चाइल्ड कस्टडी के लिए अदालत ने कई मानदंड दिए हैं. बच्चे का हित सर्वोच्च माना जाता है. दोनों माता-पिता के अनुरोधों पर निर्णय लिया जाता है.

गोपालगंज में प्रक्रिया कितनी तेज होता है?

यह अदालत, जिला-स्थिति और पक्षों के दस्तावेज़ पर निर्भर है. कुछ मामले जल्दी निपट जाते हैं, अन्य में समय लग सकता है.

Mutual divorce के लिए क्या खर्च आता है?

खर्च पक्ष-स्थिति के अनुसार बदलता है. वकील शुल्क, फाइलिंग फीस, अदालत के खर्चे आदि शामिल होते हैं. आप जबरजस्तें के अनुसार योजना बनाएं.

यदि एक पक्ष विदेश गया हो, तो क्या कर सकते हैं?

जुरिस्डिक्शन, सेवा-सम्पर्क और प्रतीक्षा-समय जैसी बातों के लिए स्थान-आधारित मार्गदर्शन चाहिए. अनुभवी counsel एक व्यवस्थित योजना बना सकते हैं.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - नि:शुल्क या सस्ती कानूनी सहायता के लिए मार्गदर्शन. nalsa.gov.in
  • Bihar State Legal Services Authority (BSLSA) - बिहार के भीतर कानूनी सहायता कार्यक्रम. bslsa.bihar.gov.in
  • District Legal Services Authority, Gopalganj - स्थानीय सहायता और सुविधाओं के बारे में जानकारी. districts.ecourts.gov.in/gopalganj

6. अगले कदम

  1. अपनी स्थिति का स्पष्ट सारांश तैयार करें: विवाह-स्थल, बच्चे, आय, संपत्ति आदि.
  2. गोपालगंज के फेमिली कोर्ट के बारे में जानकारी जुटाएं और एक सलाहकार से मिलें.
  3. कौन सा कानून आपके केस के लिए उपयुक्त है, यह पहचानें (HMA, SMA, IDA आदि).
  4. दस्तावेजों की एक सूची बनाएं और सभी आवश्यक प्रमाण जुटाएं.
  5. स्थानीय advi-सर से पहले से प्रश्न तैयार रखें ताकि बैठक में स्पष्ट सलाह मिले.
  6. यदि संभव हो तो मुफ्त कानूनी सहायता के विकल्प लागू करें.
  7. एग्रीमेंट-आधारित समाधान पर विचार करें; जहां उचित हो mediation या Lok Adalat का लाभ लें.

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