हैदराबाद में सर्वश्रेष्ठ तलाक और अलगाव वकील
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हैदराबाद, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
भारत तलाक और अलगाव वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें तलाक और अलगाव के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- शादीशुदा जीवन का मुद्दा।
- डिवोर्स कैसे प्राप्त करें। इसके मानदंड क्या हैं?
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वकील का उत्तर MAH&CO. द्वारा
आपके प्रश्न के लिए धन्यवाद।तलाक, खुला, और वैवाहिक विवाद समाधान में दशकों के अभ्यास के साथ एक अनुभवी पारिवारिक वकील के रूप में, मैं आपको पाकिस्तान में तलाक प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकता हूँ। तलाक प्रक्रिया...
पूरा उत्तर पढ़ें - क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
- मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
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वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा
आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...
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1. हैदराबाद, भारत में तलाक और अलगाव कानून के बारे में: हैदराबाद,भारत में तलाक और अलगाव कानून का संक्षिप्त अवलोकन
तलाक और अलगाव के मामलों में भारत के मालिक कानून लागू होते हैं। हैदराबाद में इन मामलों की सुनवाई सामान्य तौर पर परिवार न्यायालयों द्वारा होती है। विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू होते हैं, परDv प्राकृतिक न्याय भी समान रूप से लागू होता है।
कानून का आधार क्या है?
तयशुदा नियमों के अनुसार विवाह टूटने पर तलाक, विवाह-विच्छेद और पालन-पोषण के मामले निपटते हैं। हैदराबाद में नागरिक कानून की संरचना भारत के केंद्रीय कानूनों से संचालित है। इस क्षेत्र में हलचलें परिवार न्यायालयों द्वारा तेज़ी से ली जाती हैं।
हैदराबाद में न्यायिक संरचना
हैदराबाद में पारिवारिक मामले सामान्यतः परिवार न्यायालय जाते हैं। यहाँ जन्म-परिवार, संपत्ति-वितरण और बच्चों के अधिकार जैसे मुद्दे भी आते हैं। स्थानीय वकीलों की सहायता से प्रक्रिया सरल बन जाती है।
“Legal aid shall be provided to eligible persons in civil matters, including matrimonial disputes.”
उच्चारण के अनुसार, राष्ट्रीय कानूनी सहायता प्राधिकरण (NALSA) मुफ़्तर कानूनी सहायता प्रदान करता है। यह विशेषकर तलाक जैसे मामलों में लाभदायक है।
तेज़ और प्रभावी पहुंच के लिए उपाय
हैदराबाद में दंपतियों को परिवार न्यायालय की समयसीमा और प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी जरूरी है। कानूनी सहायता और विवाह-विच्छेद के लिए दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें।
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: तलाक और अलगाव कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। हैदराबाद, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें
तलाक और अलगाव के मुद्दों पर किसी वकील की मदद अनिवार्य हो सकती है। व्यावहारिक उदाहरण नीचे दिए जाते हैं।
- घरेलू हिंसा के आरोप या धमकी का सामना हो रहा हो; सुरक्षा और राहत के वादे आवश्यक हों।
- बच्चों की हिरासत, संरक्षण या पिता/माता के अधिकार के विवाद हों।
- Maintenance या alimony के निर्धारण में कठिनाई हो या भुगतान बंद हो रहा हो।
- Mutual consent तलाक के बावजूद संपत्ति विभाजन और देनदारियाँ स्पष्ट न हों।
- अंतर-धर्म विवाह या跨-राज्य/跨-देश विवाह के कारण कानूनी जटिलताएं हों।
- तलाक के दायरे में मुस्लिम कानून के अंतर्गत तलाक, बहिष्कार या वित्तीय सहायता के मुद्दे हों (Dissolution of Muslim Marriage Act आदि के अंतर्गत)।
इन स्थितियों में एक अनुभवी advokat, legal advisor या advocate की सलाह जरूरी है ताकि अधिकार सुरक्षित रहें और उचित प्रक्रिया अपनाई जा सके।
3. स्थानीय कानून अवलोकन: हैदराबाद, भारत में तलाक और अलगाव को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें
नीचे के मुख्य कानून पूरे भारत में लागू होते हैं तथा हैदराबाद में भी प्रभावी रहते हैं। इनमें व्यक्तिगत कानून भी शामिल होते हैं।
- हिन्दू मैरिज एक्ट, 1955 - हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध विवाहों के तलाक और धार्मिक पुनर्विवाह संबंधी प्रावधान देता है।
- विशेष विवाह अधिनियम, 1954 - अन्तरधार्मिक या गैर-धार्मिक विवाहों के लिए सामान्य कानून बनाता है।
- मुस्लिम पर्सनल लॉ (Shariat) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 और ड Dissolution of Muslim Marriage Act, 1939 - मुस्लिम दम्पतियों के तलाक और वैधानिक अधिकारों के लिए प्रमुख मार्गदर्शन देता है।
- Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 - घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा के अधिकार देता है और राहतें प्रदान करता है।
- फैमिली कोर्ट्स एक्ट, 1984 - परिवार न्यायालयों की स्थापना और matrimonial disputes के त्वरित निपटान के लिए मूल ढांचा देता है।
उल्लेखनीय उद्धरण:
“The Act provides for establishment of Family Courts for the speedy settlement of matrimonial disputes.”स्रोत: Family Courts Act, 1984 (legislative.gov.in)
“An Act to provide for more effective protection of the rights of women who are victims of violence.”
संसाधन: Domestic Violence Act, 2005 की आधिकारिक व्याख्या wcd nic.in पर है
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तलाक किन-किन आधारों पर हो सकता है?
तलाक के आधार सामान्यतः cruelty, desertion, adultery, मानसिक अस्वस्थता, irretrievable breakdown आदि से हो सकता है। परन्तु आधार पत्नी या पति के अनुसार बदल सकता है।
हम Hyderabad में किस अदालत में मुकदमा दायर कर सकते हैं?
अक्सर हैदराबाद में परिवार न्यायालय में मामला दाखिल किया जाता है। यह वही मंच है जो तलाक, हिरासत और الدعم के मुद्दे सुने।
Mutual Divorce के लिए कितने समय का इंतजार चाहिए?
Mutual divorce के लिए पहले चरण में धारणिक एक सप्ताह से कम से अधिक छह माह का प्रतीक्षा समय हो सकता है, परन्तु यह स्थिति पर निर्भर है।
कौन सा कदम पहली प्राथमिकता होना चाहिए?
पहला कदम दस्तावेज एकत्र करना है, जैसे विवाह प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और आय-व्यय विवरण।
कौन सा कानून बच्चों के अधिकार पर लागू होता है?
हैदराबाद में बच्चों के संबंधी अधिकार अक्सर हिंदू, मुस्लिम या अन्य परंपरागत कानून के अंतर्गत तय होते हैं, परन्तु संरक्षित अधिकार Family Court के नियमों से तय होते हैं।
Maintenance कैसे तय होता है?
Maintenance का निर्धारण आय, बच्चों की जरूरतें और जीवन स्तर के आधार पर किया जाता है। अदालतें आमतौर पर अनुरोध स्वीकार कर सकती हैं।
क्या मैं मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता हूँ?
हाँ, NALSA के माध्यम से योग्य व्यक्तियों को मुफ्त कानूनी सहायता मिल सकती है।
क्या मैं तलाक के लिए एक-दूसरे के साथ mediation कर सकता हूँ?
हां, mediation या वैध समाधान के माध्यम से कई मामलों का निपटान संभव है।
अगर मेरा पति/पत्नी विदेश में रहता है तो क्या करूँ?
दूसरे देश में रहने पर भी अदालत के पास निवास-स्थल के अनुसार मामला सुना जा सकता है।
क्या तलाक के बाद संपत्ति का विभाजन कैसे होता है?
संपत्ति विभाजन सामान्यतः व्यक्तिगत संपत्ति पर निर्भर करता है। संयुक्त संपत्ति में समान भागीदारी के नियम बनते हैं।
क्या तलाक के दौरान child custody का निर्णय स्थगित होता है?
नहीं, custodial अधिकार पहले से दायित्व और बच्चों के सर्वोत्तम हित के अनुसार तय होता है।
अगर एक पक्ष देरी से जवाब दे तो क्या हो सकता है?
जवाब में देरी से अदालत प्रसीजर की गति प्रभावित हो सकती है, परन्तु प्रक्रिया जारी रहती है।
5. अतिरिक्त संसाधन
तलाक और अलगाव से संबंधित सहायता और मार्गदर्शन के लिए नीचे के संगठन सहायक हैं।
- National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता के लिए आवेदन करें। वेबसाइट: https://www.nalsa.gov.in/
- Telangana State Legal Services Authority (TSLSA) - हैदराबाद में क्षेत्रीय कानूनी सहायता प्रबंधन। वेबसाइट: http://tslsa.telangana.gov.in/
- National Commission for Women (NCW) - महिलाओं के अधिकारों हेतु मार्गदर्शन और शिकायत निपटान। वेबसाइट: https://www.ncw.nic.in/
“The Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 aims to provide for more effective protection of the rights of women who are victims of violence.”स्रोत: wcd.nic.in
6. अगले कदम
- अपने मामले का संक्षिप्त मूल्यांकन करें और आवश्यक दस्तावेज़ इकट्ठा करें।
- NALSA की वेबसाइट पर मुफ्त कानूनी सहायता के लिए पात्रता जाँचें।
- हैदराबाद के स्थानीय परिवार न्यायालयों के बारे में जानकारी प्राप्त करें और एक वकील की initial consultation बुक करें।
- अपनी आय और धन-सम्पत्तियों का ट्रैक रखें ताकि उचित maintenance और विभाजन तय हो सके।
- यदि संभव हो तो mediation या counseling के माध्यम से एक वैधानिक समाधान खोजें।
- कानूनी दस्तावेज़ तैयार रखें और अदालत की समय-सारिणी के अनुसार कदम उठाएं।
- आगे की कानूनी योजना के लिए Telangana Bar Association से संपर्क करें और सही advokat चुनें।
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