पटना में सर्वश्रेष्ठ तलाक और अलगाव वकील
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पटना, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
भारत तलाक और अलगाव वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें तलाक और अलगाव के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- शादीशुदा जीवन का मुद्दा।
- डिवोर्स कैसे प्राप्त करें। इसके मानदंड क्या हैं?
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वकील का उत्तर MAH&CO. द्वारा
आपके प्रश्न के लिए धन्यवाद।तलाक, खुला, और वैवाहिक विवाद समाधान में दशकों के अभ्यास के साथ एक अनुभवी पारिवारिक वकील के रूप में, मैं आपको पाकिस्तान में तलाक प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकता हूँ। तलाक प्रक्रिया...
पूरा उत्तर पढ़ें - क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
- मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
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वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा
आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...
पूरा उत्तर पढ़ें
1. पटना, भारत में तलाक और अलगाव कानून के बारे में
पटना में तलाक और अलगाव के नियम धर्म-आधारित निजी कानून के अंतर्गत आते हैं।
हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई और अन्य समुदायों के लिए अलग कानून लागू होते हैं, जिनमें प्रमुख हैं हिन्दू विवाह अधिनियम, Special Marriage Act और PWDV अधिनियम।
इन मामलों की अदालत में सुनवाई सामान्यतः फैमिली कोर्ट में होती है जो बिहार में स्थापित है ताकि पारिवारिक विवाद शीघ्र सुलझ सके।
“An Act to amend and codify the law relating to marriage among Hindus.”
Source: The Hindu Marriage Act, 1955 - पेंशन/प्रीएम्बल (Official text available on IndiaCode and Legislative sites)
“An Act to provide for the civil marriage of persons of India and for matters connected therewith.”
Source: The Special Marriage Act, 1954 - प्रीएम्बल (Official text available on IndiaCode and Legislative sites)
“An Act to provide for more effective protection of the rights of women guaranteed under the Constitution who are victims of violence.”
Source: Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 - प्रीएमबल (Official text available on IndiaCode and Legislative sites)
पटना निवासियों के लिए व्यवहारिक नोट:
- Mutual consent divorce आम तौर पर कम समय लेता है अगर दोनों पक्ष सहमत रहते हैं।
- प्रत्येक केस की स्थानीय फैमिली कोर्ट में ही सुनवाई होती है, इसलिए नज़दीकी कोर्ट की पहचान महत्वपूर्ण है।
- कानूनी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखें ताकि वकील से बेहतर सुझाव मिलें।
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
नीचे पटना के संदर्भ में कुछ सामान्य परिस्थितियाँ हैं जिनमें कानून सलाह जरूरी हो जाती है।
- 1) आपसी सहमति से तलाक लेना चाहते हैं तो एक अनुभवी अधिवक्ता दस्तावेजीकरण और सुनवाई रणनीति पर मार्गदर्शन देता है।
- 2) बच्चों की सुरक्षा और संरक्षित custody की चिंता है, तो संरक्षक न्याय और बाल कल्याण कानून के अनुसार कदम उठाने चाहिए।
- 3) घरेलु हिंसा का आरोप है तो PWDV अधिनियम के तहत सुरक्षा आदेश, राहत और सहायता चाहिए होती है।
- 4) interfaith/ inter-religion विवाह है, जिसे Special Marriage Act के तहत पंजीकृत करना चाहिए।
- 5) दाम्पत्य के दौरान वित्तीय सहायता/maintenance के मुद्दे उठते हैं, तो उचित धाराओं के अनुसार राहत चाहिए।
- 6) जायदाद-सम्पत्ति का विभाजन और विवाह के बाद के दायित्वों का स्पष्ट विभाजन जरूरी है।
पटना में इन मामलों के लिए स्थानीय वकील से मिलना लाभकारी है ताकि क्षेत्राधिकार-विशिष्ट प्रक्रियाओं को सही तरीके से समझा जा सके।
3. स्थानीय कानून अवलोकन
पटना, बिहार में तलाक और अलगाव को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानून नीचे हैं।
- The Hindu Marriage Act, 1955 - हिन्दू विवाह, तलाक, विभाजन और रख-रखाव से जुड़ी धारणाएँ निर्धारित करता है।
- The Special Marriage Act, 1954 - interfaith विवाह और तलाक के मामलों के लिए नागरिक पंजीकरण के साथ मार्गदर्शन देता है।
- Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 - घरेलु हिंसा के विरुद्ध सुरक्षा आदेश और सहायता प्रदान करता है।
पटना की प्रशासनिक इकाइयों के अनुसार स्थानीय अदालतें इन कानूनों के अंतर्गत मामलों की सुनवाई करती हैं।
“An Act to provide for the civil marriage of persons of India and for matters connected therewith.”
Source: The Special Marriage Act, 1954
“An Act to amend and codify the law relating to marriage among Hindus.”
Source: The Hindu Marriage Act, 1955
“An Act to provide for more effective protection of the rights of women guaranteed under the Constitution who are victims of violence.”
Source: Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005
4. अक्सर पूछे जाने والے प्रश्न
तलाक़ और अलगाव में क्या अंतर है?
तलाक़ दो अलग चीजें हैं; तलाक में विवाह समाप्त हो जाता है और कानूनी जिम्मेदारियाँ खत्म होती हैं। अलगाव में夫妻 कानूनन अलग रहते हैं लेकिन विवाह रुक-रुक कर बना रहता है।
पटना में तलाक कैसे फाइल करें?
सबसे पहले अपने क्षेत्र के फैमिली कोर्ट में निवास प्रमाण के साथ मामला दर्ज करें। इसके बाद न्यायालय के अनुसार अगला कदम उठाते हैं।
Mutual consent तलाक की प्रक्रिया कितनी देर में पूरी होती है?
आमतौर पर छह महीने के काउंसिलिंग पीरियड के बाद अदालत decreto देती है। कुछ अदालतें कोर्ट के निर्देशों के अनुसार समय बढ़ा-घटा सकती हैं।
कौन से दस्तावेज जरूरी होते हैं?
पहचान, विवाह प्रमाण, बच्चों के जन्म प्रमाण, निवास प्रमाणपत्र, तलाकशुदा/संपत्ति से जुड़े दस्तावेज आदि आवश्यक रहते हैं।
Custody फैसला कैसे होता है?
बच्चों के सर्वोत्तम हित के मानदंड तय करते हैं। सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि मापदंडों को केंद्र में रखा जाता है।
Maintenance कैसे तय होता है?
वर्तमान आय, लाभ-हानि, बच्चों की देखभाल लागत, जीवन शैली आदि के आधार पर alimony या maintenance निर्धारित किया जाता है।
PWDV अधिनियम के तहत क्या मदद मिलती है?
सुरक्षा आदेश, आश्रय, वित्तीय सहायता और medico-legal 지원 अधिकारियों के माध्यम से मिलती है।
क्या तलाक के लिए ऑनलाइन आवेदन संभव है?
कुछ उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों में ई-फाइलिंग के विकल्प शुरू हुए हैं, पर व्यवस्था क्षेत्रीय है।
Divorce के लिए कानूनी सहायता कैसे मिल सकती है?
NALSA या BSLSA जैसे संगठनों के माध्यम से मुफ्त या कम लागत वाली कानूनी सहायता मिल सकती है।
यदि प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं होता?
कानून अनुमति देता है कि यदि पर्याप्त प्रमाण हो तो फैसला अन्यथा जारी किया जा सकता है।
आर्थिक दायित्वों में बदलाव कैसे करें?
court के आदेश के अनुसार modification संभव है, विशेषकर आय में परिवर्तन होने पर।
Patna में बच्चे की अदालत-स्थापना से परहेज हो सकता है?
बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के आधार पर अदालत मार्गदर्शन देती है।
Divorce के बाद संपत्ति का विभाजन कैसे होता है?
विवाह के दौरान अर्जित संपत्ति पर समान या न्यायसंगत बंटवारा किया जाता है, कोर्ट के निर्देशों के अनुसार।
5. अतिरिक्त संसाधन
तलाक़ और अलगाव से जुड़ी सहायता के लिए नीचे कुछ विश्वसनीय संगठनों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
- National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता के लिए राष्ट्रीय मंच।
- Bihar State Legal Services Authority (BSLSA) - बिहार राज्य में कानूनी सहायता सेवाएं प्रदान करता है।
- District Legal Services Authority, Patna (DLSA Patna) - पटना जिले में जिला-स्तरीय कानूनी सहायता इसका प्रमुख केंद्र है।
व्यावहारिक संपर्क हेतु आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध जानकारी देखें।
6. अगले कदम
- अपनी स्थिति स्पष्ट करें; तलाक का प्रकार (Mutual consent बनाम contested) तय करें।
- आवश्यक दस्तावेज एकत्र करें, ताकि वकील पहले से तैयारी कर सकें।
- स्थानीय फैमिली कोर्ट Patna की jurisdiction確認 करें और एक योग्य वकील चुनें।
- पहले से विस्तृत परिवार-चर्चा व डाक्यूमेंट्री प्लान बनाएं ताकि सुनवाई सरल हो।
- कानूनी सहायता चाहिए तो NALSA या BSLSA से संपर्क करें और आवेदन दें।
- क्लाइंट-वाईटेशन के अनुसार法院 से समन, प्रमाण-पत्र और तिथि की पुष्टि करें।
- कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के बाद वास्तविक सुनवाई के लिए तैयार रहें और निरंतर संवाद बनाए रखें।
पटना निवासियों के लिए एक सारगर्भित सलाह: कानून की सही जानकारी और स्थानीय कोर्ट की प्रक्रियाओं की सीख आपके केस को बेहतर गति देगी।
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