सिकंदराबाद में सर्वश्रेष्ठ तलाक और अलगाव वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

Abhaya Legal Services
सिकंदराबाद, भारत

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अभया लीगल सर्विसेज़, जिसका प्रधानालय हैदराबाद, भारत में है, एक व्यापक एवं स्वतंत्र कानून फर्म है जो घरेलू और...
Vakils Associated
सिकंदराबाद, भारत

English
वकील्स एसोसिएटेड भारत में एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है, जो विभिन्न अभ्यास क्षेत्रों में व्यापक कानूनी सेवाओं के लिए...
DMR Law Chambers
सिकंदराबाद, भारत

1984 में स्थापित
English
डीएमआर लॉ चैंबर्स, जिसका स्थापना 1984 में श्री डी. माधव राव द्वारा की गई थी, जो आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट बार के वरिष्ठ...
जैसा कि देखा गया

भारत तलाक और अलगाव वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें तलाक और अलगाव के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

शादीशुदा जीवन का मुद्दा।
तलाक और अलगाव परिवार
डिवोर्स कैसे प्राप्त करें। इसके मानदंड क्या हैं?
वकील का उत्तर MAH&CO. द्वारा

आपके प्रश्न के लिए धन्यवाद।तलाक, खुला, और वैवाहिक विवाद समाधान में दशकों के अभ्यास के साथ एक अनुभवी पारिवारिक वकील के रूप में, मैं आपको पाकिस्तान में तलाक प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकता हूँ। तलाक प्रक्रिया...

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क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
विवाह परिवार तलाक और अलगाव
मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा

आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...

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1. सिकंदराबाद, भारत में तलाक और अलगाव कानून के बारे में

सिकंदराबाद, हैदराबाद क्षेत्र (तेलंगाना) में तलाक-अलगाव के नियम केंद्रीय कानूनों द्वारा नियंत्रित होते हैं। हिन्दू विवाह-आइट (HMA), भारतीय अलग‑याच Act (DIA), स्पेशल मेरिज एक्ट (SMA) जैसे कानूनों से विवाह-विच्छेद के मामले संचालित होते हैं। इसके अलावा मुस्लिम, ईसाई और अन्य धार्मिक समूहों के लिए अपने‑अपने व्यक्तिगत कानून और संशोधित कानून लागू होते हैं।

पारिवारिक मामलों के लिए सिकंदराबाद में फैमिली कोर्ट, जिला अदालत और हाई कोर्ट के संचालन से प्रक्रियाँ चलती हैं। नागरिक प्रक्रिया संहिता (CPC) और साक्ष्य कानून भी इन मामलों में लागू होते हैं। हाल के वर्षों में तलाक‑Mutual Divorce के मार्ग, अंतर‑धार्मिक विवाह के पंजीकरण, गृह‑उन्नति और DV के संरक्षण के प्रावधान मजबूत हुए हैं।

महत्वपूर्ण नोट: यह मार्गदर्शक सामान्य जानकारी प्रदान करता है; व्यक्तिगत सलाह के लिए किसी अनुभवी अधिवक्ता से मिलना आवश्यक है। नीचे दिए अनुभाग स्थानीय व्यवहार और प्रक्रियाओं पर केंद्रित हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • 1 वर्ष की पृथकता के बाद संयुक्त याचिका द्वारा तलाक- सिकंदराबाद के परिवार न्यायालयों में mutual consent divorce के लिए एक सही‑सही याचना, रिकॉर्डिंग और स्टेप्स के लिए अधिवक्ता की जरूरत होती है। उदाहरण: पति‑पत्नी ने एक वर्ष से अधिक समय से अलग रहना शुरू किया, परवाही के साथ dokumentation चाहिए।

  • गृह‑हिंसा या DV मामले- DV अधिनियम के अंतर्गत संरक्षण, निवास स्थान, मुआवजे आदि आदेश पाने के लिए कानूनी प्रतिनिधित्व आवश्यक है। राजधानी शहर हैदराबाद में DV शिकायतों की तेज़ सुनवाई संभव है।

  • बच्चों की कस्टड़ी और पालन-पोषण- अदालतें मुवक्किल के हित में custody, access, maintenance आदि निर्णय लेती हैं; एक वकील सही समय पर कानूनी दलीलों को सुव्यवस्थित कर सकता है।

  • धार्मिक विवाह के लिए पंजीकरण या तलाक- हिंदू, ईसाई, मुसलमान या अन्य धार्मिक समुदाय के लिए स्थानीय कानूनों के अनुरूप प्रक्रिया जरूरी होती है; क्षेत्रीय अदालतों में विशेषज्ञता चाहिए।

  • NRIs/विदेश में रहने वाले पति या पत्नी के साथ संपर्क आधारित प्रक्रियाएं- सेवाओं, वैधानिक नोटिस और विदेश में रहने पर कानूनी कार्रवाई की वैधता सुनिश्चित करने के लिए अनुभवयुक्त वकील चाहिए।

  • धन‑आस्ति/मालिकानہ विवाद- तलाक के बाद संपत्ति, दान‑उपहार, प्रॉपर्टी‑डिविज़न आदि के निपटारों के लिए अदालती मार्गदर्शन आवश्यक हो सकता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 (HMA)- हिन्दू जोड़े की वैवाहिक उपस्थिति, तलाक, विवाह विच्छेद के नियम इस अधिनियम से संचालित होते हैं।

  • स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 (SMA)- inter‑faith या inter‑caste विवाह के पंजीकरण और तलाक के लिए प्रयुक्त होता है; सिकंदराबाद में इससे जुड़वाँ मामले सामने आ सकते हैं।

  • डोमेस्टिक वायलेन्स एक्ट, 2005 (DV Act)- घरेलू हिंसा के शिकार को सुरक्षा‑आदेश, निवास‑आदेश, मुआवजा आदि നേടने के अधिकार देता है; Telangana में इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है।

नोट: मुस्लिम‑पर्सनल लॉ, ईसाई‑विवाह अधिकार आदि के लिए विशेष कानून उपलब्ध हैं। हाल के वर्षों में मुस्लिम महिलाओं के तलाक से जुड़े अधिकारों में सुधार के प्रावधान लागू हुए हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तलाक और अलगाव क्या एक ही चीज़ हैं?

नहीं, तलाक विवाह‑बंधन को समाप्त करता है, जबकि separation में कानूनी रूप से विवाह برقرار रहता है पर दोनों पक्ष अलग रहते हैं। कई मामलों में separation बाद ही तलाक की याचिका दायर की जाती है।

Mutual consent divorce के लिए कितनी देर चाहिए?

HMA के अनुसार संयुक्त याचिका पर एक वर्ष की separation के बाद decree मिल सकता है; SMA/DI जैसे कानूनों में समय‑सीमा भिन्न हो सकती है।

क्या Secunderabad में DV के लिए तुरंत संरक्षण मिल सकता है?

हाँ, DV Act के अंतर्गत aggrieved party को protection order, residence order और compensation जैसी राहत मिल सकती है; अदालतें शीघ्र सुनवाई करने के निर्देश दे सकती हैं।

क्या परिवार अदालत में बच्चे की custody के लिए चीज़ें अलग से मजबूत करनी पड़ती हैं?

निश्चित रूप से; अदालत बच्चों के हित को प्राथमिक मानती है और custody, visits, maintenance आदि के लिए स्पष्ट आदेश देती है।

कौन से दस्तावेज़ आवश्यक होंगे?

पहचान पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, तलाक‑पूर्व agreements, बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र आदि सामान्य रूप से चाहिए होते हैं।

अगर spouse विदेश में रहता है तो क्या तलाक संभव है?

हाँ, विदेशी संदर्भ में सेवा, नोटिस और प्राप्तीय दस्तावेजों के साथ तलाक की प्रक्रिया चल सकती है; यह प्रक्रिया अधिक समय ले सकती है और संचार में सावधानी चाहिए।

Maintenance‑alimony कैसे तय होता है?

Maintenance child‑support और spousal‑alimony प्रत्येक पक्ष की आय, बच्चों की जरूरतें और जीवन‑यापन के खर्च पर निर्भर करता है; अदालत समुचित निर्णय दे सकती है।

कस्टडी के समय मैं कैसे मजबूत दलील दे सकता हूँ?

बच्चे के सर्वोत्तम हित, वातावरण, शिक्षा और सुरक्षा पर केंद्रित प्रासंगिक साक्ष्य प्रस्तुत करें; वकील आपके पक्ष के अनुरूप योजना बनायेगा।

डायरेक्टरी से वकील कैसे चुनें?

स्थानीय अनुभव, पूर्व मुव्वकिल के संदर्भ, फीस संरचना और कोर्ट‑प्रैक्टिस देखें; पहले मुफ्त परामर्श के दौरान स्पष्ट अपेक्षाएँ रखें।

फीस संरचना क्या सामान्य है?

फीस निर्भर करती है केस जटिलता, समय, कोर्ट‑प्रैक्टिस और शहर के अनुसार भिन्न हो सकती है; अक्सर initial consultation के बाद estimate मिल जाता है।

क्या मैं अदालत में खुद भी दायर कर सकता हूँ?

कानूनी तौर पर संभव है, लेकिन तलाक, custody और maintenance जैसे मामलों में अधिवक्ता द्वारा परामर्श और दाखिले अधिक सुरक्षित और सरल रहते हैं।

कहाँ से सही जानकारी मिल सकती है?

सरकारी वैध स्रोतों और अनुभवी adviors से मिलना सबसे सुरक्षित है; नीचे official स्रोतों के उद्धरण और लिंक दिए गए हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - सरकार की थीम पर निःशुल्क कानूनी सेवाएँ; https://nalsa.gov.in
  • Telangana State Legal Services Authority (TLSLSA) - क्षेत्रीय कानूनी सहायता पोर्टल, स्थानीय मार्गदर्शन के लिए संपर्क करें; आधिकारिक स्रोत देखें
  • National Commission for Women (NCW) - महिलाओं के अधिकारों के लिए मार्गदर्शन और सहायता; https://ncw.nic.in

6. अगले कदम

  1. अपने मुद्दे को स्पष्ट करें-तलाक, separation, maintenance, custody आदि किन बातों पर आप ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।
  2. सिकंदराबाद‑स्थित वकील/अधिवक्ता की सूची बनाएं-Bar Council ऑफ Telangana से अनुभवी अभ्यास देखने लायक हैं।
  3. कॉनस्यूमर‑कंसल्टेशन के लिए 2-3 स्थानीय अद्वितीय वकीलों से मिलें; पहला परामर्श अक्सर मुक्त होता है।
  4. अपने दस्तावेज संकलित करें-पहचान, विवाह प्रमाण, बच्चों के प्रमाण‑पत्र, आय‑प्रमाण आदि।
  5. फीस संरचना, टाइमिंग और court‑ड्रॉइंग के बारे में स्पष्ट लिखित समझौता बनाएं।
  6. DV, custody या maintenance के लिए आवश्यक अस्थायी आदेश पर चर्चा करें।
  7. अगला कदम तय करें-कानूनी प्रतिनिधित्व को संभालते हुए याचिका दाखिल करें और अदालत की समय‑रेखा के अनुसार अगला कदम बढ़ाएं।
“A decree of divorce may be granted on a petition presented jointly by both parties after the expiry of a period of one year from the date of separation.”

उच्चारित उद्धरण हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 के अंतर्गत MUTUAL CONSENT divorces के नियम से लिया गया है। स्रोत: Hindu Marriage Act, 1955 (Section 13B) - Official text: https://indiacode.nic.in

“The protection order may include restraining the respondent from aiding or contacting the aggrieved person.”

यह Domestic Violence Act, 2005 के संरक्षण‑आदेश के अंतर्गत 보호 विवरण का एक उदाहरण है; स्रोत: Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 - Official text: https://indiacode.nic.in

“Any person who is subjected to domestic violence may claim protection and relief under this Act.”

DV Act की संकल्पना के संदर्भ में एक सामान्य उद्घोषणा; स्रोत: Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 - Official text: https://indiacode.nic.in

नोट: ऊपर के उद्धरण एक मार्गदर्शक उद्धरण हैं; सटीक शब्द‑रचना के लिए आधिकारिक पाठ देखें, जैसे Hindu Marriage Act, 1955, Special Marriage Act, 1954 और Domestic Violence Act, 2005 की प्रामाणिक धारा‑नक्शे।

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अस्वीकरण:

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