अररिया में सर्वश्रेष्ठ गृह हिंसा वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH
अररिया, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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भारत गृह हिंसा वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें गृह हिंसा के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

क्या मैं अपनी बेटी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर सकता हूँ, क्योंकि मुझे उसके ठिकाने की जानकारी नहीं है?
परिवार गृह हिंसा अभिभावकत्व परिसर दायित्व संपत्ति क्षति
उसके बारे में मेरे पास कोई जानकारी नहीं है, इसलिए मुझे उसे अपनी बेटी कहना भी मुश्किल हो रहा है। मैंने उसकी पढ़ाई, कॉलेज हॉस्टल और ट्यूशन फीस में लाखों रुपये निवेश किए हैं और उसे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेजा था ताकि वह अपना एमएस कर सके। लेकिन...
वकील का उत्तर Aggarwals & Associates द्वारा

हाँ, आप निकटतम पुलिस स्टेशन में घर में घुसपैठ के लिए शिकायत कर सकते हैं। आपके मामले पर विस्तृत चर्चा के लिए आप हमें 8686083333 पर संपर्क कर सकते हैं या [email protected] पर मेल कर सकते हैं।

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घरेलू हिंसा के मामले के बारे में जानने के लिए
गृह हिंसा
मेरी भाभी ने मुझे DV ACT के बारे में एक नोटिस भेजा है। मैं इस अदालत प्रक्रिया के बारे में जानना चाहता/चाहती हूँ।
वकील का उत्तर D.H.Associates द्वारा

क्या आप इसे विस्तार से साझा कर सकते हैं जैसे कि यह क्या नोटिस है, न्यायालय का नोटिस या कानूनी नोटिस... यदि यह कानूनी नोटिस है तो अपने वकील से इसका उत्तर देने को कहें या यदि यह न्यायालय का...

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1. अररिया, भारत में गृह हिंसा कानून का संक्षिप्त अवलोकन

अररिया जिले में गृह हिंसा के मामलों के लिए केंद्रीय कानून Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 लागू है। यह कानून महिलाओं को सुरक्षा, राहत और संरक्षण देता है। स्थानीय स्तर पर जिला महिला एवं बाल विकास कार्यालय के अधीन Protection Officer तैनात होते हैं।

PWDVA 2005 के अंतर्गत पीड़ित महिलाएं संरक्षित दायरे में सुरक्षा आदेश, निवास आदेश, वित्तीय राहत और मुआवजे की मांग कर सकती हैं। शिकायत दर्ज कराने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन किया जाता है।

अररिया में सुरक्षा के लिए 181 महिला हेल्पलाइन और 112 आपातकालीन सेवाएं भी उपलब्ध हैं। यह सेवाएं तत्काल सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।

“The Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 provides for protection orders, monetary relief, shelter for victims.”
“It extends to the whole of India.”

Official sources: Ministry of Women and Child Development, National Commission for Women, India Code - Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे अररिया के वास्तविक जीवन परिस्थितियों को देखते हुए 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं। इन परिस्थितियों में कानूनी सलाहकार, अधिवक्ता या वकील की जरूरत स्पष्ट होती है।

  • परिदृश्य 1 - घरेलू हिंसा के लगातार खतरे के कारण सुरक्षा आदेश की मांग। पति या ससुरालजन से लगातार डर, मार-पीट, धमकी से पीड़ित महिला को अदालत से संरक्षण आदेश चाहिए होता है।
  • परिदृश्य 2 - निवास आदेश के लिए आवेदन। शादी के बाद आंतरिक जीवन में हिंसा होती है तो पीड़ित महिला अपने आवास से बाहर नहीं निकलना चाहती, इसलिए निवास आदेश जरूरी होता है।
  • परिदृश्य 3 - वित्तीय सहायता और मुआवजे की मांग। चिकित्सा खर्च, दवाओं, बच्चों की देखभाल आदि के लिए राहत राशि आवश्यक हो सकती है।
  • परिदृश्य 4 - 498A IPC के अंतर्गत अपराध दर्ज कराना और दुष्कर्म-सम्बंधी धाराओं के अनुरोध। सुरक्षा के अलावा आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी आवश्यक हो जाती है।
  • परिदृश्य 5 - बच्चों के संरक्षण और अभिभावक-पालन संबंधी مسائل। DV अदालत के फैसलों के अनुरूप बच्चों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करनी होती है।
  • परिदृश्य 6 - कानूनी सहायता की जरूरत में ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच। शैक्षणिक अवरोध, भाषा, दूरी जैसी बाधाओं के कारण विशेषज्ञ सलाह जरूरी हो सकती है।

इन परिस्थितियों में एक अनुभवी advokat या legal advisor की मदद से मामले की शुरुआत,-अधिकार-हिस्ट्री बनना और निरंतर मार्गदर्शन सरल हो जाता है।

नोट - अररिया के कई ग्राम्य क्षेत्रों में विशेष समुदायों के कारण पहुँचना चुनौतीपूर्ण होता है; एक सक्षम वकील स्थानीय अदालत प्रक्रिया और डिस्ट्रीक्ट-लेवल प्रोटेक्शन ऑफिसर से पहले से समन्वय कर सकता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  1. Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 (PWDVA) - गृह हिंसा के खिलाफ केंद्रीय कानून का प्रमुख कानून है। यह सुरक्षा आदेश, निवास आदेश, वित्तीय राहत और मुआवजे के प्रावधान देता है।
  2. Indian Penal Code, 1860 (IPC) - 498A (क्रूरता पर दायर), 354 (मॉडेस्ट पर आक्रमण) और 506 (धमकी) जैसी धाराओं को DV केस में अक्सर इस्तेमाल किया जाता है।
  3. Code of Criminal Procedure, 1973 (CrPC) - DV मामलों में संरक्षण आदेश, गिरफ्तारी के प्रावधान और अनुपालन के लिए न्यायिक प्रक्रिया को संचालित करता है; 125 CrPC (Maintenance) जैसे पहलुओं को भी संबद्ध किया जा सकता है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या घरेलू हिंसा का कानून केवल सम्मानित विवाह के लिए है?

नहीं, DV कानून लागू होता है चाहे महिला का संबंध शादी से हो या live-in relationship, या अन्य घरेलू संबंधों से हो।

मैं Protection Order कैसे हासिल कर सकता हूँ?

PWDVA के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट या अदालत में आवेदन दें। एक Protection Officer भी आपकी सहायता कर सकता है।

क्या मुझे shelter या शैल्टर होम मिल सकता है?

हाँ, DV कानून shelter, सुरक्षित आश्रय और आवश्यक सेवाएं प्रदान करता है। राज्य-स्तर पर शेल्टर होम उपलब्ध होते हैं।

Monetary relief कहाँ से मिलता है?

याचिका में चिकित्सा खर्च, बच्चो की देखभाल, घर के रख-रखाव आदि के लिए मौद्रिक राहत मांगी जा सकती है।

क्या मैं अपने पति के खिलाफ कोर्ट में IPC 498A दर्ज करा सकती हूँ?

हाँ, अगर आपके साथ क्रूरता या अत्याचार होता है, आप IPC 498A के तहत शिकायत दर्ज करवा सकती हैं। DV के साथ यह सामान्यतः सह-आरोप होते हैं।

कौन-सी अदालत या किस विभाग के साथ संपर्क करूँ?

सबसे पहले अपने क्षेत्र के Protection Officer से संपर्क करें, फिर स्थानीय DV कोर्ट या जिला कोर्ट से मदद लें।

क्या मुझे कानूनी aid या मुफ्त वकील मिल सकता है?

हाँ, National Legal Services Authority (NALSA) और राज्य-स्तर के Legal Services Authorities मुक्त कानूनी सहायता प्रदान करते हैं।

कौन से प्रमाण जरूरी होते हैं?

पहचान पत्र, विवाह प्रमाण, डॉक्टर के उपचार के रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, मौजूदा सुरक्षा आदेश आदि जरूरी हो सकते हैं।

क्या DV केस आगे बढ़ सकता है अगर मैं चुप रहूं?

समग्र कार्रवाई से बचना सुरक्षित नहीं है। कानून संरक्षित राहत और सुरक्षा उचित समय पर देना चाहता है।

क्या DV के मामले में बच्चों पर असर पड़ेगा?

हाँ, न्यायालय बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और देखभाल के फैसले ले सकता है।

क्या मैं शिकायत ऑनलाइन दाखिल कर सकता हूँ?

कई जिलों में ऑनलाइन आवेदनों की व्यवस्था शुरू हो चुकी है, पर आपके जिले की स्थिति देखने के लिए स्थानीय DV ऑफिस से पुष्टि करें।

अगर मैं अपने रिश्तेदार की सुरक्षा के लिए आदेश चाहता हूँ?

PWDVA के अंतर्गत रिश्तेदार भी protected person हो सकते हैं; अदालत में सक्षम आवेदन करें।

यदि स्थिति तुरंत खतरनाक हो तो क्या करूँ?

त्वरित सहायता के लिए 100 नंबर या 112 पर कॉल करें, फिर निकटतम पुलिस थाने में पहुंचें।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Commission for Women (NCW) - आधिकारिक सहायता और मार्गदर्शन के लिए द्वार। https://ncw.nic.in
  • National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता के प्रावधान। https://nalsa.gov.in
  • Ministry of Women and Child Development (MWCD) - DV कानून, हेल्पलाइन और सेवाओं का आधिकारिक पोर्टल। https://wcd.nic.in

6. अगले कदम

  1. घरेलू हिंसा से प्रभावित होने पर अपने मुद्दे का उद्देश्य तय करें ( सुरक्षा, निवास, मुआवजा आदि ).
  2. पास के Protection Officer या DV कोर्ट से संपर्क करें और पहले सहायता प्राप्त करें।
  3. NALSA या स्थानीय वैध कानूनी सहायता सेवाओं के अंतर्गत वकील सुनिश्चित करें।
  4. जरूरी दस्तावेज़ जुटाएं: पहचान, विवाह प्रमाण-पत्र, चिकित्सीय रिकॉर्ड और गवाह विवरण।
  5. स्थानीय पुलिस या हेल्पलाइन 181/100-112 का उपयोग करें और घटनाओं का रिकॉर्ड बनायें।
  6. अगले कदम के लिए अदालत के नोटिस, संरक्षण आदेश और निवास आदेश के फॉर्म भरकर दाखिल करें।
  7. हमेशा कानूनी सलाहकार के साथ अदालत प्रक्रिया के दौरान संपर्क में रहें और उल्लेख करें कि आप अररिया जिले से हैं।

नोट: यह मार्गदर्शिका गृह हिंसा से जुड़ी कानूनी जानकारी देती है, किन्तु वास्तविक मामले में स्थानीय न्यायालय और सरकारी प्राधिकरणों की अद्यतन प्रावधानों की पुष्टि आवश्यक है।

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