चेन्नई में सर्वश्रेष्ठ गृह हिंसा वकील
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भारत गृह हिंसा वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें गृह हिंसा के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- क्या मैं अपनी बेटी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर सकता हूँ, क्योंकि मुझे उसके ठिकाने की जानकारी नहीं है?
- उसके बारे में मेरे पास कोई जानकारी नहीं है, इसलिए मुझे उसे अपनी बेटी कहना भी मुश्किल हो रहा है। मैंने उसकी पढ़ाई, कॉलेज हॉस्टल और ट्यूशन फीस में लाखों रुपये निवेश किए हैं और उसे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेजा था ताकि वह अपना एमएस कर सके। लेकिन...
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वकील का उत्तर Aggarwals & Associates द्वारा
हाँ, आप निकटतम पुलिस स्टेशन में घर में घुसपैठ के लिए शिकायत कर सकते हैं। आपके मामले पर विस्तृत चर्चा के लिए आप हमें 8686083333 पर संपर्क कर सकते हैं या [email protected] पर मेल कर सकते हैं।
पूरा उत्तर पढ़ें - घरेलू हिंसा के मामले के बारे में जानने के लिए
- मेरी भाभी ने मुझे DV ACT के बारे में एक नोटिस भेजा है। मैं इस अदालत प्रक्रिया के बारे में जानना चाहता/चाहती हूँ।
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वकील का उत्तर D.H.Associates द्वारा
क्या आप इसे विस्तार से साझा कर सकते हैं जैसे कि यह क्या नोटिस है, न्यायालय का नोटिस या कानूनी नोटिस... यदि यह कानूनी नोटिस है तो अपने वकील से इसका उत्तर देने को कहें या यदि यह न्यायालय का...
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1. चेन्नई, भारत में गृह हिंसा कानून का संक्षिप्त अवलोकन
चेन्नई समेत तमिलनाडु राज्य में गृह हिंसा के विरुद्ध मुख्य राष्ट्रीय कानून Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 (PWDVA) लागू है। यह अधिनियम महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने, सुरक्षा और आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए बनाया गया है। यह कानून शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, आर्थिक हिंसा तथा धमकी जैसे आक्रमणों को शामिल करता है।
PWDVA क्षेत्र-विशिष्ट प्रावधान देता है-उच्च न्यायालय/जिला न्यायालय के पात्र अदालतों द्वारा संरक्षण आदेश, निवास आदेश और मौद्रिक राहत जैसे उपाय दिये जाते हैं। चेन्नई में DV मामलों के निपटान के लिए जिला न्यायालय और फॅमिली कोर्ट zentrale जगह हैं, और DLSA (District Legal Services Authority) द्वारा नि:शुल्क वकील-सेवा भी मिलती है।
"An Act to provide for more effective protection of the rights of women guaranteed under the Constitution who are victims of violence at home."
"The Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 provides for civil remedies including protection orders, residence orders and monetary relief."
महत्वपूर्ण नोट: चेन्नई-तमिलनाडु में DV मामलों का दायरा राष्ट्रीय DV कानून के अंतर्गत है। स्थानीय अदालतें और DLSA-टीम महिला हित के लिये मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करती हैं।
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
स्थिति-उचित सुरक्षा आदेश के लिए आवेदन करते समय आपको एक अनुभवी अधिवक्ता चाहिए। न्यायालय के समक्ष आपकी दलीलें सही ढंग से प्रस्तुत हों, यह कोर्ट के निर्णय की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।
आर्थिक राहत और रख-रखाव के लिए monetary relief की मांग की प्रक्रिया जटिल हो सकती है; एक कानूनी सलाहकार आपके दायरे और आय-खर्च के अनुसार उचित राहत सुनिश्चित कर सकता है।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच बचाव आवश्यक हो तो वकील IPC धाराओं (जैसे 498A, 354, 506) के प्रासंगिक उद्धरणों के साथ आपकी रक्षा कर सकता है।
यदि साथी व्यक्ति द्वारा गलत आरोप लगाए जाते हैं, तो कानूनी प्रतिनिधित्व से बचाव और फालतू खर्चों से बचना संभव होता है।
छोटी-छोटी अदालतों में भी DV मामलों के अलग-अलग चरण (पिटिशन, एग्ज़-पाᵗरᵗा आदेश, सुनवाई) में एक सक्षम अधिवक्ता मार्गदर्शन दे सकता है।
चेन्नई के DLSA/ TLSLSA से नि:शुल्क कानूनी सहायता पाने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ और प्रक्रियाओं में मदद चाहिए हो तो एक वकील सबसे अधिक मदद करेगा।
3. स्थानीय कानून अवलोकन
Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 (PWDVA)-घरेलू हिंसा के विरुद्ध संस्थागत सुरक्षा, निवास आदेश, monetary relief आदि के उपाय निर्धारित करता है।
Indian Penal Code (IPC) धाराएं-DV मामलों में क्रूरता के कई पहलुओं के लिये 498A (क्रूरता), 354 (महिला की चुस्ती-चमक पर आक्रमण या बदतमीजी), 323 (स्वतः चोट पहुँचाना), 506 (आतंकित करना) आदि धाराओं का प्रयोग किया जाता है।
Dowry Prohibition Act, 1961- दहेज के लिए होने वाले उत्पीड़न और हिंसा से जुड़ी घटनाओं को रोकने हेतु केंद्रिय कानून है; DV मामलों में दहेज-आधारित हिंसा से जुड़ी धाराओं का दुरुपयोग नहीं होता।
महत्वपूर्ण सावधानी: तमिलनाडु में DV कानून केंद्र द्वारा समान रूप से लागू होता है; चेन्नई में DV मामलों के लिए फॅमिली कोर्ट, जिला न्यायालय और पुलिस के साथ-साथ DLSA द्वारा मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध है।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
घरेलू हिंसा क्या-क्या प्रकार की होती है?
घरेलू हिंसा में शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, आर्थिक हिंसा और धमकी शामिल हैं। यह दम्पति-धर्म के अलावा परिवार के अन्य सदस्यों के विरुद्ध भी हो सकती है।
मैं कैसे अपने लिए DV protection order प्राप्त कर सकती/सकता हूँ?
PWDVA के अंतर्गत AGgrieved woman Protection Officer के पास या कोर्ट में protective order के लिये अप्लाई कर सकती हैं। कोर्ट ऑर्डर ex-parte दे सकता है।
कौन सा वकील DV केस के लिये सही रहता है?
जो अनुभवी अधिवक्ता DV Act, IPC धाराओं और Family Court प्रक्रियाओं में निपुण हो, वही बेहतर सहायता दे सकेगा।
मैं कैसे monetary relief पा सकता/सकती हूँ?
PWDVA के अनुसार court या protection officer के माध्यम से maintenance, medical care और child support जैसी monetary relief के लिये आवेदन किया जा सकता है।
क्या DV केस में live-in पार्टनर भी सुरक्षा पा सकता है?
हाँ, यदि दोनों के बीच domestic relationship बनती है और महिला को हिंसा का सामना करना पड़ रहा हो, तो DV Act के दायरे में live-in relationship भी आ सकता है।
क्या पुलिस DV शिकायत दर्ज कर सकती है?
हाँ, DV शिकायत police स्टेशन में दर्ज करानी चाहिए। पुलिस को संज्ञान लेते हुए FIR या complaint दर्ज करना होता है, ताकि अदालत में सुनवाई हो सके।
DV की सुनवाई कितनी देर तक होती है?
यह अदालत, उपलब्ध साक्ष्यों और पक्ष-प्रतिपक्ष की उपस्थिति के अनुसार बदलती है। अदालतें त्वरित सुनवाई के लिये आदेश दे सकती हैं।
क्या DV मामले में पुलिस चेक-अप/Medical examination की जरूरत पड़ती है?
कॉमनली DV के मामलों में victim की medical examination कराया जा सकता है ताकि injuries का प्रमाण मिले और केस मजबूत हो।
यदि मैंने DV मामला दर्ज कराया है, क्या मैं relocation/निवास स्थान बदल सकती हूँ?
हाँ, DV protection order के तहत निवास स्थान पर रहने, या सुरक्षित स्थान पर जाने के आदेश दिए जा सकते हैं।
क्या अदालत की सुरक्षा के बावजूद मैं अकेले रह सकती/सकता हूँ?
हाँ, पर व्यक्ति सुरक्षा और जीवन-यापन के जोखिम को देखते हुए appropriate protective measures बनाए रखने चाहिए।
क्या मैं मुफ्त कानूनी सहायता ले सकती/सकता हूँ?
हाँ, तमिलनाडु के TLSLSA और जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA) DV Victims को नि:शुल्क वकील-सेवा देते हैं।
कौन-सी जानकारी/दस्तावेज़ मेरे साथ होने चाहिए?
प्रमाण-स्वरूप पहचान पत्र, domicile proof, विवाह/नाते-रिश्ता का प्रमाण पत्र, violence की कहानी, शारीरिक चोटों के प्रमाण, financial documents आदि रखें।
5. अतिरिक्त संसाधन
Tamil Nadu State Legal Services Authority (TLSLSA)- मुफ्त कानूनी सहायता और DV मामलों में मार्गदर्शन के लिये प्राथमिक स्रोत। वेबसाइट: https://tlslsa.tn.gov.in
National Legal Services Authority (NALSA)- DV-Victims के लिये केंद्र-स्तर पर सहायता व्यवस्था और OSC/ One Stop Centre की जानकारी। वेबसाइट: https://nalsa.gov.in
Centre for Social Research (CSR) - Chennai Chapter- DV मामलों में जागरूकता, समर्थन और संसाधन। वेबसाइट: https://www.csrs.in
6. अगले कदम
- घरेलू हिंसा की घटनाओं का तुरंत रिकॉर्ड बनाएं-तस्वीर, डॉक्टर के प्रमाण, बात-चीत के संदेश आदि सुरक्षित जगह पर रखें।
- चेन्नई के किसी अनुभवी वकील/कानूनी सलाहकार से संपर्क करें जो PWDVA, IPC और परिवार अदालत के प्रावधानों में दक्ष हो।
- PWDVA के अंतर्गत protection order/ residence order के लिये अदालत में आवेदन करें या Protection Officer से सहायता लें।
- Monetary relief, maintenance और child support हेतु मौद्रिक राहत के लिये आवेदन करें; आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें।
- नौकरी/घर/शेल्टर के संदर्श में सुरक्षा उपाय करें; DLSA/OSC के साथ Shelter/Legal Aid विकल्पों के बारे में पता करें।
- DV मामलों के लिए कोर्ट की अगली सुनवाई की तिथियाँ और दस्तावेज़ तय रखें; कोर्ट के आदेशों का पालन करें।
- यदि जरूरी हो, निकटतम OSC/Police Station में सुरक्षा निर्देश और प्राथमिक चिकित्सा/ मानसिक सहायता की व्यवस्था करवाएं।
न्यायिक वadziवेसा: इस गाइड में दी गई जानकारी केवल सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। किसी भी निर्णय से पहले एक कानूनी सलाहकार या वकील से व्यक्तिगत परामर्श लें।
स्रोत (official उद्धरण):
“An Act to provide for more effective protection of the rights of women guaranteed under the Constitution who are victims of violence at home.”
“The Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 provides for civil remedies including protection orders, residence orders and monetary relief.”
“Tamil Nadu State Legal Services Authority provides free legal aid and assistance to victims of domestic violence to ensure speedy justice.”
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