बिहार शरीफ़ में सर्वश्रेष्ठ नशे में गाड़ी चलाना वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
बिहार शरीफ़, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. बिहार शरीफ़, भारत में नशे में गाड़ी चलाने कानून का संक्षिप्त अवलोकन

बिहार शरीफ़ में नशे में गाड़ी चलाना एक अपराध है और इसे रिकॉर्डेड अपराध के रूप में माना जाता है। यह अपराध मोटर व्हीकल्स एक्ट 1988 की धारा 185 के अंतर्गत आता है। 2019 के संशोधन ने दंड और लाइसेंस प्रतिबन्धों को और सख्त किया है।

जाँच के समय Breathalyzer या रक्त-परीक्षण से शराब या दवाओं के प्रभाव की पुष्टि की जाती है। दोष साबित होने पर जेल, जुर्माना और लाइसेंस पर प्रभाव जैसी सजा हो सकती है। स्थानीय ट्रैफिक थाने और जिला अदालतें इन मामलों को संदिग्ध-गम्भीर मानती हैं।

“No person shall drive a motor vehicle in a public place after consuming any intoxicating liquor or any drug.”

स्रोत: Ministry of Road Transport and Highways (MORTH) - morth.gov.in

“The Motor Vehicles (Amendment) Act, 2019 increases penalties for offenses under Section 185.”

स्रोत: Ministry of Road Transport and Highways (MORTH) - morth.gov.in

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे बिहार शरीफ़ से सम्बंधित वास्तविक प्रवृत्तियों के प्रकार नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक परिदृश्य के साथ कानूनी सलाह आवश्यक हो सकती है।

  • पहली बार पकड़े जाना: शराब के प्रभाव में गाड़ी चलाने पर धारा 185 के अंतर्गत मामला दर्ज हो सकता है। वकील तुरंत जमानत, जाँच-प्रक्रिया और बचाव-रणनीति तय कर सकता है।

  • दोहराया अपराध: पूर्व रिकॉर्ड होने पर सजा harsher हो सकती है और लाइसेंस निलंबन बढ़ सकता है। अनुभवी अधिवक्ता ट्रायल-रणनीति बनाता है।

  • दुर्घटना के साथ DUI: शराब के प्रभाव में वाहन चलाने से चोट या मृत्यु होती है तो IPC धाराओं जैसे 304A लग सकती हैं।

  • व्यावसायिक चालक का मामला: टैक्सी, बस या लोडिंग वाहन ड्राइवर के विरुद्ध harsher दंड और लाइसेंस-निलंबन की संभावना बढ़ती है।

  • नाबालिग साथी होने पर सुरक्षा-उल्लंघन के आरोप: गंभीर सुरक्षा कानून लागू होते हैं और बचाव-रणनीति अलग बनती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

The Motor Vehicles Act, 1988 की धारा 185 के अंतर्गत नशे में गाड़ी चलाने पर अपराध माना जाता है। अदालतें दण्ड, जमानत और लाइसेंस-रद्दीकरण के प्रावधान संचालित करती हैं।

2019 के Motor Vehicles (Amendment) Act ने Section 185 के अंतर्गत दंड बढ़ाए और लाइसेंस-निलंबन के प्रवधान मजबूत किए। यह संशोधन केंद्र स्तर पर लागू है और बिहार में भी प्रभावी है।

अतिरिक्त रूप से, DUI के मामलों में यदि दुर्घटना होती है, तो IPC की धाराओं जैसे 279 (rash driving) या 304A (death due to negligence) आपराधिक प्रविष्टियाँ बन सकती हैं।

“The Motor Vehicles Act, 1988 criminalizes driving a vehicle after consuming intoxicants.”

स्रोत: MORTH और India Code के आधिकारिक विवरण

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नशे में गाड़ी चलाने पर किन धाराओं के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है?

सब से सामान्य धाराओं के तहत धारा 185 MVA के अंतर्गत गिरफ्तारी हो सकती है। इसके अलावा दुर्घटना पर IPC धाराएं भी लग सकती हैं, जैसे 304A.

अगर मुझे गिरफ्तार कर लिया जाए तो क्या मैं बेल पा सकता हूँ?

हाँ, सामान्यतः बेल की संभावना होती है। अदालत और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर यह निर्भर करता है। वकील bail-आवेदन की योजना बनाते हैं।

कहाँ से कानूनी सहायता पाई जा सकती है?

राष्ट्रीय या राज्य-स्तर पर मुफ्त कानूनी सहायता NALSA द्वारा उपलब्ध है। Bihar के लिए BSLSA और जिला-न्यायिक संस्था भी सहायता दे सकते हैं।

क्या गाड़ी जब्त हो सकती है?

हाँ, कई बार वाहन प्रतिबन्धित या जब्त किया जा सकता है, खासकर यदि दुर्घटना हुई हो या Repeat-offender हो।

क्या ड्रायवर लाइसेंस तुरंत निलंबित हो सकता है?

हाँ, अस्थायी निलंबन या लाइसेंस-स्टेप-डिस्टन (license suspension) के आदेश दिए जा सकते हैं।

क्या कानून अंतरराज्यीय मामलों पर भी लागू होता है?

हाँ, यह राष्ट्रीय कानून है और बिहार सहित सभी राज्यों में लागू है।

क्या BAC के लिए कोई मानक सीमा होती है?

राष्ट्रीय स्तर पर एक निश्चित BAC सीमा के बारे में केंद्रवर्ती धारा 185 के दायरे में स्पष्ट उल्लेख है, पर पुलिस उसे प्रमाणित करती है।

ड्राइविंग के लिए किन परिस्थितियों में बचाव संभव है?

उचित परीक्षण प्रक्रिया, चिकित्सा कारण, और शारीरिक स्थिति के आधार पर बचाव संभव हो सकता है। सटीक मामले पर निर्भरता होगी।

क्या मेडिकल कारण से शराब के प्रभाव कम किया जा सकता है?

ऐसे मामलों में डॉक्टर की उपलब्धता, उपचार और प्रमाणन निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अदालत में मेडिकल रिकॉर्ड प्रस्तुत करने होंगे।

क्या अगर अदालत मेरे पक्ष में फैसला दे दे तो কি होता है?

निर्णय के अनुसार सजा घटे या हटे सकती है; द्वितीय पक्ष में पुनः appeal आदि की जा सकती है।

क्या बच्चों के सामने DUI पर विशेष नियम लागू होते हैं?

हाँ, बच्चों के साथ गाड़ी चलाने पर सुरक्षा नियम और दंड बढ़ सकते हैं। मामलों की गंभीरता अधिक मानी जाती है।

क्या आरोपी की आयु प्रभावित करेगी सजा?

हाँ, नाबालिग या 18 वर्ष से कम आयु में DUI पर विशेष सुरक्षा नियम लागू होते हैं।

कौन से दस्तावेज़ रखना आवश्यक होते हैं?

आइडेंटिटी प्रूफ, लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, और यदि उपलब्ध हो तो BAC тест परिणाम।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराती है। अधिक जानकारी: https://nalsa.gov.in
  • Bihar State Legal Services Authority (BSLSA) - बिहार में कानूनी सहायता के कार्यक्रम संचालित करता है।
  • Parivahan - Ministry of Road Transport and Highways - ड्राइविंग, लाइसेंस, दस्तावेज़ आदि के ऑनलाइन संसाधन प्रदान करता है। अधिक जानकारी: https://parivahan.gov.in

6. अगले कदम

  1. घटना की तिथि, समय, स्थान और सम्मिलित लोगों का रिकॉर्ड बनाएं।
  2. तुरंत एक अनुभवी वकील या कानूनी सलाहकार से संपर्क करें।
  3. ड्रग-टेस्ट/ब्रेस्ट टेस्ट के परिणाम, मेडिकल रिकॉर्ड और पुलिस दस्तावेज इकट्ठा करें।
  4. जमानत के लिए नियम-संरचना और bail-आवेदन की तैयारी करें।
  5. कानूनी सहायता के लिए NALSA या BSLSA से संपर्क करें और मुफ्त सलाह लें।
  6. नों-समझौता के बजाय कोर्ट-मैदान पर उचित प्रस्तुतिकरण तैयार रखें।
  7. अगले कोर्ट-डेस से पहले सभी प्रमाण जुटाने की योजना बनाएं।

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