बिहार शरीफ़ में सर्वश्रेष्ठ वृद्ध दुर्व्यवहार कानून वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
बिहार शरीफ़, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. बिहार शरीफ़, भारत में वृद्ध दुर्व्यवहार कानून कानून का संक्षिप्त अवलोकन

बिहार शरीफ़ में वृद्ध दुर्व्यवहार के मामलों के नियंत्रण के लिए एक केंद्रीकृत कानून संरचना मौजूद है। मुख्य तथ्य यह है कि वृद्ध दुर्व्यवहार के संबंध में कोई विशिष्ट 'एजिंग-एबल्यू' कानून अलग से नहीं है; बल्कि मौजूदा कानूनों के तहत सुरक्षा, रख-रखाव और संरक्षण के प्रावधान लागू होते हैं।

सबसे प्रमुख कानून हैं-Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) के अधिनियम-उपबंध और Domestic Violence Act जैसे प्रावधान। इन कानूनों के जरिये बुजुर्गों को रख-रखाव, संरक्षण और आपातकालीन सुरक्षा प्रदान की जाती है।

"This Act extends to the whole of India" - Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 (Central Act).

इन कानूनों के अंतर्गत बिहार के नागरिकों को भी वही सुरक्षा मिलती है, बशर्ते वे न्यायालय-निर्दिष्ट प्रक्रियाओं का पालन करें। बिहार में वृद्ध नागरिकों की देखभाल, सुरक्षा और वैधानिक सहायता के लिए जिला स्तर पर DLSA (District Legal Services Authority) और CSSA/BSLSA जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से मुफ्त कानूनी aid भी उपलब्ध है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • उदा: बिहार शरीफ, Nalanda जिले में एक वृद्ध माता-पिता को अपने बेटे और बहू द्वारा आर्थिक सहायता नहीं मिलना और घरेलू दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा हो। ऐसी स्थिति में रख-रखाव और सुरक्षा संबंधी आदेश के लिए वकील की जरूरत होती है ताकि Tribunals में आवेदन सही प्रकार से लगे और राहत शीघ्र मिले।

  • उदा: उम्र के कारण बुजुर्ग को चिकित्सीय देखभाल और आवश्यकीय सेवाओं से वंचित किया जा रहा हो। IPC के अंतर्गत प्रहसन-धारणा, क्रूरता और उत्पीड़न की धाराओं के साथ साथ Maintenance Act के अंतर्गत राहत के लिए वकील की आवश्यकता पड़ती है।

  • उदा: बुजुर्ग महिला पर घरेलू हिंसा के क्रम में आर्थिक शोषण और मानसिक आघात हो रहा हो, जिसे Protection of Women from Domestic Violence Act (2005) के तहत संरक्षित किया जा सके। ऐसे मामले में विशेषज्ञ कानूनी सलाह जरूरी है।

  • उदा: वृद्ध पिता ने अपनी संपत्ति के विरुद्ध बेटों से धोखाधड़ी या अवैध हस्तांतरण की शिकायत दर्ज करानी हो। ऐसे दस्तावेज, साक्ष्य एवं अदालत-प्रक्रिया के लिए अनुभवी advokat आवश्यक है।

  • उदा: बुजुर्ग व्यक्ति के लिए निवारक सुरक्षा (कड़े सुरक्षा आदेश) की मांग करनी हो ताकि आरोपी निकट-परिवार से दूर रहे। वकील के द्वारा धाराओं, दाखिलियों और सुरक्षा आदेशों के अनुरूप कदम उठाने होते हैं।

  • उदा: वृद्ध व्यक्ति की स्थिति असुरक्षित महसूस हो रही हो और उसे पुलिस सहायता की त्वरित जरूरत हो। ऐसे क्षणों में सही पुलिस-प्रशासनिक कार्रवाई और कानूनी मार्गदर्शन के लिए वकील की जरूरत पड़ती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 - यह कानून नये-पुराने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के रख-रखाव, संरक्षण और कल्याण के लिए प्रावधान देता है। साथ ही निधन/छूटे हुए सदस्यों के विरुद्ध अदालत-निर्देशों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराता है। (Source: India Code, indiacode.nic.in)

  • Indian Penal Code (IPC) के प्रावधान जिनका वृद्ध दुर्व्यवहार से संबंध हो सकता है: धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाने), 324 (घातक चोट पहुँचाने के लिए स्वेच्छा से चोट करना), 504 (अपमानजनक इशारे या गलतफहमी से सामना), 506 (-criminal intimidation), 509 (स्त्री की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले शब्द/चिह्न)। इन धाराओं के आधार पर प्रत्यक्ष या मौखिक दुर्व्यवहार के केस दर्ज होते हैं।

  • Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 - वृद्ध महिलाओं के घरेलू हिंसा से सुरक्षा के लिए एक विशिष्ट प्रवाधान है, जिसमें संरक्षण-आदेश, निष्कासन, आश्रय और राहतें शामिल हैं। यह पुरुष-सम्पर्क के भीतर वास्तविक महिलाओं के लिए लागू है और बुजुर्गों के विरुद्ध होने वाले मामलों में प्रयुक्त होता है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वृद्ध दुर्व्यवहार क्या है?

वृद्ध दुर्व्यवहार में शारीरिक, मानसिक, आर्थिक या भावनात्मक नुकसान पहुँचाने की गतिविधियाँ शामिल होती हैं। यह बच्चों, रिश्तेदारों या अन्य देख-रेख करने वालों द्वारा किया जा सकता है।

बिहार शरीफ में किन कानूनों से सुरक्षा मिल सकती है?

रख-रखाव के लिए Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007; चोट-धाराओं के लिए IPC; यदि बुजुर्ग महिला है तो Domestic Violence Act का प्रावधान; इन सब से सुरक्षा और राहत मिलती है।

गेह-खर्च, राशन और चिकित्सा देखभाल से जुड़ा अनुरोध कैसे दर्ज करूँ?

Maintenance Tribunal के पास आवेदन दें या जिला कोर्ट में मुकदमा दायर करें। साथ ही चिकित्सा देखभाल और आश्रय के लिए संबन्धित सरकारी योजनाएँ भी मांगी जा सकती हैं।

कौन से दस्तावेज चाहिए होंगे?

आधार-पत्‍ता, उम्र प्रमाण, पहचान पत्र, परिवार विवरण, बैंक खाता विवरण, मेडिकल रिकॉर्ड, खान-खर्च का प्रमाण, نتائج-पत्र आदि संलग्न करें।

क्या मुफ्त कानूनी सहायता मिल सकती है?

हाँ, यदि आय-समृद्धि कम हो और न्यायदायिक क्षमता محدود हो तो NALSA तथा बिहार DLSA के माध्यम से मुफ्त कानून-उपलब्ध कराई जाती है।

क्या वृद्ध दुर्व्यवहार के मामले में पुलिस भी सहायता कर सकती है?

हां, यदि तत्काल खतरा हो तो आप स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज करा सकते हैं या पुलिस सुरक्षा माँग सकते हैं।

रख-रखाव आदेश कब तक लागू रहता है?

रख-रखाव आदेश आमतौर पर Tribunals के निर्णय से जारी रहते हैं और परिस्थिति अनुसार संशोधित किया जा सकता है।

अगर अभिभावक-परिवार के सदस्य विदेश चले जाएँ तो?

हां, आप स्थानीय अदालत या Tribunals के जरिये आदेशों के अनुरूप विदेशी आय-व्यय की जानकारी के अनुरोध कर सकते हैं और आवश्यक मदद ले सकते हैं।

यदि आरोपी परिवार का सदस्य है तो क्या करना चाहिए?

सबूत सुरक्षित रखें, थाने में FIR या शिकायत दर्ज कराएं, और अधिकृत कानूनी सहायता लेकर Tribunal में राहत के लिए आवेदन करें।

क्या बच्चों के विरुद्ध 498A आदि धाराओं का प्रयोग संभव है?

यदि वृद्ध महिला या पुरुष को घरेलू हिंसा के साथ शोषण का अनुभव हो रहा है, तो 498A या अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज हो सकता है। अदालत निर्णय देगी कि कौन सा कानून लागू होगा।

क्या बुजुर्ग को तुरंत सुरक्षा चाहिए तो क्या करें?

तुरंत सुरक्षा के लिए स्थानीय थाने या महिला हेल्पलाइन/राष्ट्रीय कानूनी सेवाओं के तहत संरक्षण आदेश के लिए आवेदन करें।

क्या दस्तावेजी सबूत एक ही बार में पर्याप्त होते हैं?

नहीं, अदालत को मजबूत सबूत चाहिए होते हैं। फोटो, वीडियो, मेडिकल लक्षण, बैंक स्टेटमेंट, गवाह बयान आदि हर प्रमाण संग्रहीत रखें।

कहां से शुरू करूँ और किन स्रोतों से मार्गदर्शन मिल सकता है?

सबसे पहले नजदीकी DLSA या NALSA से संपर्क करें। वे नि:शुल्क कानूनी सहायता, वकील के चयन और अदालत-प्रक्रिया में मार्गदर्शन दे सकते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता और साक्षर कानूनी मार्गदर्शन के लिए मुख्य संस्थान। वेबसाइट: https://nalsa.gov.in

  • HelpAge India - वृद्ध जन-समर्थन, अधिकारों की जागरूकता और सुरक्षा-उपाय के लिए कार्यरत प्रतिष्ठित NGO। वेबसाइट: https://www.helpageindia.org

  • Agewell Foundation - वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायता, परामर्श और सूचना-सेवा प्रदान करने वाला संगठन। वेबसाइट: https://www.agewellfoundation.org

6. अगले कदम

  1. अपने बुजुर्ग के हालात का संक्षिप्त रिकॉर्ड बनायें-दिन-प्रतिदिन के घटनाक्रम, दर्द-चोट, आर्थिक नुकसान इत्यादि।

  2. आवश्यक दस्तावेज इकट्ठे करें-उम्र प्रमाण, पहचान पत्र, चिकित्सा रिकॉर्ड, बैंक विवरण आदि।

  3. NALA/BSLSA या DLSA से निकटता के साथ संपर्क करें और मुफ्त कानूनी मदद की पुष्टि करें।

  4. सबूत-संग्रह के साथ रक्षा-आदेश या रख-रखाव आदेश के लिए Tribunal/ District Court में आवेदन दें।

  5. यदि तुरंत सुरक्षा चाहिए तो Police Help Desk या Women Helpline से सहायता ले लें।

  6. अपने मामले के लिए एक अनुभवी advokat/advocate से फ़ायदा उठायें-उचित शुल्क-सराहना के साथ उचित नियुक्ति करें।

  7. स्थानीय फर्स्ट-हैंड गाइडेंस के लिए DLSA के चिह्नित कार्यालयों का बार-बार आकलन करें और आवश्यकता पड़ने पर पुनः सलाह लें।

सूत्र-आधारक उद्धरण उपलब्ध कराते समय आप नीचे दिए श्रोतों का उपयोग कर सकते हैं:

"The Act extends to the whole of India" - Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007, India Code.
"Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 aims to provide for more effective protection of the rights of women." - Ministry of Women and Child Development, Government of India.
"The National Legal Services Authority provides free legal aid to eligible senior citizens." - NALSA, https://nalsa.gov.in.

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