बिहार शरीफ़ में सर्वश्रेष्ठ पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन सलाह एवं अनुपालन वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
बिहार शरीफ़, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. बिहार शरीफ़, भारत में पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन सलाह एवं अनुपालन कानून के बारे में: [ बिहार शरीफ़, भारत में पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन सलाह एवं अनुपालन कानून का संक्षिप्त अवलोकन]

बिहार शरीफ़ में ESG-वार अनुपालन का आधार केंद्र तथा राज्य कानूनों का संयुक्त प्रभाव है। स्थानीय नियंत्रण के लिए BSPCB कदम उठाती है, जबकि केंद्रीय कानून और कार्यक्रम सभी उद्योगों पर लागू होते हैं।

उद्देश्य- पर्यावरण, समाजिक दायित्व और संचालन-नीतियों की पालना कर स्वस्थ विकास सुनिश्चित करना।

“The State shall endeavour to protect and improve the environment and to safeguard the forests and wildlife of the country.” - Constitution of India, Article 48A
“Right to life includes the right to a clean and healthy environment.” - Subhash Kumar v State of Bihar, 1994

मुख्य संस्थाएं- बिहार राज्य पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (BSPCB), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) आदि।

लोक-हित-उपयोगी बदलाव- 2019-24 के बीच पर्यावरण-अनुमोदन प्रक्रिया की स्पष्टता बढ़ी है और प्लास्टिक नियंत्रण, ई-अपशिष्ट नियंत्रण आदि पर दायित्व सख्त हुए हैं।

उच्चारण के लिए आधिकारिक स्रोत देखें: CPCB, BSPCB, MoEFCC, NGT और संविधान के प्रावधान।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है:

  • नज़दीकी औद्योगिक क्षेत्र में जल-अपशिष्ट या वायुप्रदूषण के मामले में BSPCB या CPCB के समन और दंड-कार्यवाही से जुड़ा मार्गदर्शक चाहिए। बिहार के Patna, Nalanda आदि क्षेत्रों में अनुपालन जाँच और अनुरोध जरूरी होते हैं।

  • किसी परियोजना के लिए EIA अनुज्ञप्ति, समय-सीमा और पर्यावरण प्रबंध योजना (EMP) की जाँच आवश्यक हो। EIA नोटिफिकेशन के अनुसार बिहार में बड़े उद्यमों को जोखिम-आकलन करना पड़ता है।

  • पर्यावरण-जनित दायित्व, सुरक्षा-बीमा और Public Liability Insurance (PLI) मामले में दावा, निष्कासन-याचिका या प्रतिवादी-सामना आवश्यक हो सकता है।

  • आरटीआई के जरिए पर्यावरणीय दस्तावेज़ों की माँग करना हो या अदालत-निर्देशों के अनुरूप राहत चाहिए हो, तब अनुभवी अधिवक्ता मदद दे सकते हैं।

  • स्थानीय समुदाय-सम्बन्धी सामाजिक दायित्व (Social Responsibility) के मामले में कॉम्प्लायंस-चेक और रिपोर्टिंग की ज़रूरत हो।

  • NGT या उच्च न्यायालय में पर्यावरण-विवाद की याचिका दायर करनी हो, तब स्पेशलिज़्ड पर्यावरण-लॉ के विशेषज्ञ वकील आवश्यक रहते हैं।

3. स्थानीय कानून अवलोकन:

Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974- जल स्रोतों के प्रदूषण को रोकने के लिए मानक पॉल्यूशन-लिमिट्स और निगरानी-तंत्र बनाए जाते हैं। BSPCB इन नियमों को बिहार में लागू करती है।

Air (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981- वायुमंडलीय प्रदूषण के नियंत्रण के लिए मानक और अनुमति-प्रक्रिया निर्धारित है।

Environment Protection Act, 1986- प्रदूषण-रोकथाम, संवर्धन और नियंत्रण के लिए केंद्रीय-स्तरीय शक्तियाँ देता है।

EIA नोटिफिकेशन, 2006 (और अद्यतन)- बड़े उद्योगों के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन अनिवार्य हुआ। बिहार में परियोजनाओं की मंजूरी इस नोटिफिकेशन के अनुसार दी जाती है।

Public Liability Insurance Act, 1991- प्रदीप्त hazard-धर्म के मामलों में क्षति-चक्रीक दावों के लिए बीमा अनिवार्य बनाती है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ESG क्या होता है?

ESG(Environmental, Social, Governance) सुपाठ्य वित्तीय-प्रणाली है। यह कंपनियों की स्थायित्व-पूर्वक स्वास्थ्य, समुदाय-हित और पारदर्शी संचालन को मापता है।

बिहार में पर्यावरण अनुज्ञप्ति कैसे प्राप्त करें?

परियोजना के अनुसार ईआईए नोटिफिकेशन के अन्तर्गत मंजूरी चाहिए होती है। प्रक्रिया में आवेदन, समीक्षा, सार्वजनिक टिप्पणी और अंतिम निर्णय शामिल हैं।

अगर किसी फैक्ट्री से जल- या वायुदोष हो रहा हो तो क्या करें?

सबसे पहले BSPCB या CPCB को शिकायत दें। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज़ी साक्ष्यों के साथ औपचारिक शिकायत-प्रक्रिया शुरू होती है।

कैसे पता करें कि किसी कंपनी के पास पर्यावरण-स्वीकृति है?

कंपनी के पर्यावरण स्टेशनरी/ऑडिट-रीपोर्ट को BSPCB-CPCB प्लेटफॉर्म पर जाँचें। पर्यावरण-प्रणालियों की सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध होती है।

NGT या उच्च न्यायालय में याचिका कब दायर करें?

अगर स्थानीय प्रशासन से संतोषजनक समाधान नहीं मिलता है या औद्योगिक दायित्व का अतिक्रमण होता है, तो अनुभवी अधिवक्ता के साथ NGT-याचिका उपयुक्त हो सकती है।

अगर मुझे नुकसान हुआ हो तो कैसे दावा करें?

नुकसान-आधारित दावों के लिए मेडिकल रिकॉर्ड, प्रमाण-प्रतियाँ और प्रदूषण-स्तर-डाटा एकत्र करें। कानूनी सलाहकार आपूर्ति करेगा कि किस क्लेम-फॉर्म का उपयोग करें।

कौन से कानून बिहार में लागू होते हैं?

Water Act, Air Act और EP Act बिहार में BSPCB के साथ मिलकर लागू होते हैं। साथ ही EIA नोटिफिकेशन से परियोजनाओं की निगरानी होती है।

क्या सामाजिक दायित्व( CSR ) और ESG एक ही हैं?

CSR और ESG एक-दूसरे से जुड़े हैं, पर CSR समाज-उन्मुख दायित्व है जबकि ESG नियम-पालना, वातावरण-प्रबंधन और शासन-नीतियों पर केन्द्रित है।

मैं किन दस्तावेज़ों की तैयारी करूँ?

भूमि-स्वामित्व प्रमाण, परियोजना-योजना, पर्यावरण-आकलन, प्रदूषण-निगरानी-रिपोर्ट, और स्थानीय जन-अप Marm रिपोर्ट एकत्र करें।

क्या मैं RTI से पर्यावरण जानकारी मांग सकता हूँ?

जी हाँ, RTI के तहत पर्यावरण-परिसर से जुड़ी जानकारी माँगी जा सकती है, जैसे अनुमति पत्र, आकलन-डाक्यूमेंट्स, प्रतिवेदन आदि।

कौन से दंड या दायित्व होते हैं?

उद्योग-धन, यदि प्रदूषण-उल्लंघन होता है, तो जुर्माना, अपील-प्रक्रिया और जेल-पर्याप्त दायित्व तक हो सकता है।

5. अतिरिक्त संसाधन

6. अगले कदम

  1. अपने केस की प्रकृति समझें और आवश्यक दस्तावेज़ इकट्ठा करें।
  2. बिहार-विशिष्ट ESG वकील की खोज शुरू करें, जो BSPCB-लॉइनिंग में पारंगत हो।
  3. कानून की आवश्यक धारा और दायित्वों के बारे में प्रारम्भिक परामर्श लें।
  4. परियोजना-धारणाओं और पर्यावरण-स्वीकृति का सत्यापन कराएँ।
  5. RTI के जरिये अनुदानित या सार्वजनिक दस्तावेज़ मांगें (यदि आवश्यक हो)।
  6. यदि समस्या हल न हो तो NGT या उच्च न्यायालय के मार्ग से राहत के विकल्प पर विचार करें।
  7. कानूनी शुल्क, समय-सीमा और अपेक्षित परिणामों पर स्पष्ट समझ बनाएं।

उच्चारण और संदर्भ के लिंक- आधिकारिक स्रोतों के पन्ने देखें: CPCB, BSPCB, MoEFCC, Constitution of India - Article 48A, NGT.

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