देहरादून में सर्वश्रेष्ठ पिता के अधिकार वकील

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MPS Legal
देहरादून, भारत

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MPS लीगल देहरादून स्थित एक विधि फर्म है जो आपराधिक कानून, परिवार एवं तलाक कानून, मध्यस्थता, संपत्ति कानून, ऋण वसूली...
Oberoi Law Chambers
देहरादून, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
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Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
Rab & Rab Associates LLP
देहरादून, भारत

1979 में स्थापित
उनकी टीम में 25 लोग
English
रैब एंव रैब एसोसिएट्स एलएलपी देहरादून स्थित एक कानून फर्म है जिसकी स्थापना 1979 में हुई थी और जो उत्तराखंड में लंबे...
जैसा कि देखा गया

1. देहरादून, भारत में पिता के अधिकार कानून का संक्षिप्त अवलोकन

देहरादून, उत्तराखंड में पिता के अधिकार कानून मुख्यतः हिन्दू मिनॉरिटी अँड गार्डियंशिप एक्ट 1956 (HMGA) और Guardians and Wards Act 1890 के अंतर्गत नियंत्रित होते हैं।

इन कानूनों के अनुसार बच्चे की देखभाल, शिक्षा, सुरक्षा और कल्याण जिम्मेदारी के तत्व माने जाते हैं।

देहरादून के फैमिली कोर्ट इन दायित्वों को “बेस्ट इंटरेस्ट ऑफ़ द चाइल्ड” के मानदंड पर सुनवाई करता है।

उद्धरण: “The welfare of the child shall be the paramount consideration” - Juvenile Justice Act 2015 (Section 3) के अनुसार, बच्चों के संरक्षण के आदेशों में कल्याण पहली प्राथमिकता होता है।

उद्धरण स्रोत: National Child Rights Decree, उन्नत नीति पन्ने और JJ Act 2015 का आधिकारिक संहिता-स्रोत देखें: ncpcr.gov.in

The best interests of the child shall be the guiding principle in all custody-related decisions.

उद्धरण स्रोत: नीतियों तथा निर्देशों में बाल अधिकारों के लिए उपयोग होने वाला “best interests of the child” सिद्धांत-NCPCR की आधिकारिक संहिता के संदर्भ में माना गया है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

पिता के अधिकार से जुड़े मामलों में कानूनी मार्गदर्शन आवश्यक होता है ताकि सही दायरियाँ समय पर लगें और उचित फैसला मिले।

नीचे देहरादून, उत्तराखंड से संबंधित 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं जहाँ कानूनी सलाह प्रशंसनीय है।

  • विवाह-विच्छेद के बाद दत्तक-पालन या पिता की विवेकाधीन हिरासत की मांग।
  • माता के स्थानांतरण के कारण बच्चे के साथ पिता के रहने की जगह या स्कूल-चयन के मामले।
  • जब सुरक्षा-जोखिम या घरेलू हिंसा के आरोप हों और पिता के संरक्षण के अधिकार स्पष्ट करने हों।
  • नाबालिग के संपत्ति या शिक्षा के निर्णयों में पिता की भागीदारी सुनिश्चित करना हो।
  • अगर पिता देहरादून के बाहर रहते हों पर ग्राम-जोड़ या स्थानीय अदालत में अधिकार求 करें।
  • किशोर-वय के बच्चे की इच्छा के अनुसार पालकत्व-निर्णय में पिता की भूमिका बढ़ाने की मांग।

पूर्व-नोट: देहरादून फैमिली कोर्ट में इन मामलों की वास्तविक प्रक्रिया HMGA, Guardians and Wards Act और JJ Act के प्रावधानों के अनुसार चलती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

देहरादून खासकर निम्न कानूनों के दायरे में आता है:

  1. हिन्दू मिनॉरिटी अँड गार्डियंशिप एक्ट, 1956 (HMGA) - हिन्दू बच्चों के प्राकृतिक अभिभावकत्व और गार्डियंशिप के नियम स्थापित करता है।
  2. गार्डियंस एंड वाड्स एक्ट, 1890 - नाबालिग की कस्टडी, संरक्षकत्व और कल्याण से जुड़े मामलों के लिए मूल ढांचे देता है।
  3. जुवेनाइल जस्टिस (केयर ऐण्ड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 - बच्चों की कल्याण-सर्वोच्चता और संरक्षित देखरेख के लिए आधिकारिक प्रावधान देता है।

उद्धरण संदर्भ: HMGA, Guardians and Wards Act और JJ Act के आधिकारिक टेक्स्ट के लिए देखें: indiacode.nic.in और legislative.gov.in.

“Welfare of the child shall be the paramount consideration” - Juvenile Justice Act 2015

उद्धरण स्रोत: Official text excerpts from JJ Act 2015 के पन्ने और भारतीय कानून स्रोतों से उपलब्ध हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिता होने के नाते मुझे custody कैसे मिल सकती है?

कई मामलों में अदालत बच्चे के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, शिक्षा और दैनिक देखरेख का संतुलन बनाती है। HMGA और JJ Act के अनुसार पिता भी प्राकृतिक अभिभावक होते हैं और संयुक्त/एकल हिरासत के विकल्प पर विचार किया जाता है।

क्या माता-पिता एक ही समय पर custody प्राप्त कर सकते हैं?

हाँ, संयुक्त हिरासत या “joint custody” निर्णय संभव है जब अदालत को लगता है कि इससे बच्चे के कल्याण को लाभ होगा। यह देहरादून फैमिली कोर्ट में एक व्यवहारिक विकल्प के तौर पर देखा गया है।

अगर एक पिता देहरादून से बाहर चले जाए तो custody का निर्णय कैसे प्रभावित होगा?

कस्टडियनशिप का निर्णय वर्त्तमान स्थान, बच्चे की स्कूलिंग, Betreuung-योजना, सुरक्षा आदि पर निर्भर होगा। अदालत दूरी को एक मात्र कारण नहीं मानती है; बच्चों के हित को प्राथमिकता दी जाएगी।

बच्चे की सुरक्षा-बिहार-स्थिति के कारण custodial अधिकार कैसे सुरक्षित रहते हैं?

गार्डियनशिप और JJ Act के नियमों के अनुसार सुरक्षा-व्यवस्था और सुरक्षा-निर्माण उपाय अदालत द्वारा निर्धारित होते हैं, ताकि बच्चे को खतरे से बचाया जा सके।

क्या मैं देहरादून के बाहर रहते हुए custody के लिए आवेदन कर सकता हूँ?

हाँ, यदि आपकी भूमिका बच्चों के कल्याण के लिए बेहतर मानी जाती है तो अदालत हिरासत, visitation और guardianship के आदेश दे सकती है।

क्या पिता के अधिकार महिलाओं के समान होते हैं?

हाँ, आधुनिक न्यायिक दृष्टिकोण में पिता के अधिकारों को बराबरी के रूप में मान्यता दी जाती है, खासकर बच्चों के हित के संदर्भ में।

डायरेक्ट-एडवाइस: मुझे किन दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है?

जन्म प्रमाण-पत्र, विवाह-विधेय, स्कूल-एडमिशन, चिकित्सा रिकॉर्ड, मौजूदा custody-समझौते, पिछले अदालत के आदेश आदि साथ रखें। दस्तावेज अदालत के समक्ष तैयारी में मदद करेंगे।

क्या आप Dehradun के family court में free legal aid प्राप्त कर सकते हैं?

हाँ, National Legal Services Authority (NLSA) और स्थानीय DLSA सेवाओं के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता मिल सकती है।

क्या custody के लिए mediation संभव है?

कई मामलों में अदालत mediation या family counseling के सुझाव देती है ताकि आपसी निर्णय बच्चों के लिए सहयोगी रहे।

क्या custody के फैसले में बच्चों की भी राय ली जाती है?

अगर बच्चे छोटे हैं तो उनकी राय सुनवाई में अधिक महत्त्वपूर्ण नहीं मानी जाती; लेकिन किशोर-उम्र वाले बच्चों की इच्छा को जरूर ध्यान में रखा जा सकता है।

क्या मैं देहरादून से बाहर रहने पर भी custody के लिए अदालत दाखिल कर सकता हूँ?

हाँ, लेकिन अदालत स्थान-उचित प्रासंगिकता, यात्रा-सुविधा और बच्चे की शिक्षा पर विचार करेगी।

अगर मैं अदालत के आदेश से असंतुष्ट हूँ तो क्या करूँ?

न्यायिक उपायों में नयी दलीलों के साथ उच्च-कोर्ट या अपीलीय मंच पर appeal करना संभव है; कानूनी सलाहकार से तुरंत मार्गदर्शन लें।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) - बाल अधिकारों की सुरक्षा, मार्गदर्शन और शिकायत-पत्र की जानकारी। ncpcr.gov.in
  • राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NLSA) - मुफ्त कानूनी सहायता और कानूनी सलाह के लिए पाथ-निर्देशन। nalsa.gov.in
  • Childline India Foundation - 1098 हेल्पलाइन और बाल-समर्थन सेवाएं। childlineindia.org.in

6. अगले कदम

  1. अपने मामले की स्पष्ट स्थिति के लिए एक स्पष्ट उद्देश्य निर्धारित करें - custody, visitation, या guardianship।
  2. देहरादून के फैमिली कोर्ट के बारे में स्थानीय जानकारी एकत्रित करें और एक पर्याप्त वकील चुनें।
  3. HMGA, Guardians and Wards Act और JJ Act के बारे में बेसिक समझ विकसित करें।
  4. पहला consulta­tion से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज़ जुटा लें - जन्म प्रमाणन, विवाह-प्रमाण, स्कूल रिकॉर्ड आदि।
  5. मौजूदा आदेश/समझौते का पूर्ण प्रिंट-आउट बनवाकर देंखें और उसे कानूनी सलाह से मिलवाएं।
  6. free legal-aid विकल्पों के बारे में NLSA या DLSA से संपर्क करें।
  7. यदि आवश्यक हो, mediation/परामर्श के विकल्पों का प्रयास करें ताकि बच्चा-हित सुरक्षित रहे।

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