हज़ारीबाग में सर्वश्रेष्ठ पिता के अधिकार वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
हज़ारीबाग, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. हज़ारीबाग, भारत में पिता के अधिकार कानून का संक्षिप्त अवलोकन

हज़ारीबाग, झारखंड में पिता के अधिकार कानून राष्ट्रीय विधियों के अनुसार संचालित होते हैं। राज्य में परिवारिक मामलात आम तौर पर फैमिली कोर्ट के अधीन आते हैं। निर्णय का मूल आधार बच्चे के सर्वश्रेष्ठ हित को माना जाता है।

The welfare of the minor is the paramount consideration in guardianship matters.

यह Principle Hindu Minority and Guardianship Act, 1956 तथा Guardians and Wards Act, 1890 जैसी केंद्रीय धाराओं से समर्थित है।

झारखंड में Guardians and Wards Act और HMGA के अनुसार पिता को प्राकृतिक अभिभावक का दर्जा दिया गया है, पर निर्णय सचेतना के साथ welfare के अनुसार होता है।

The best interests of the child guide decisions in family law matters.

फैमिली कोर्ट में custody, guardianship और maintenance जैसे मुद्दे सीधे निपटते हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • Custody और Guardianship विवाद: माता-पिता अलग रहते हैं और बच्चे की custody पर असहमति है।
    पुष्टि-साक्ष्य, आवेदन पत्र और अदालत के समक्ष तर्क जरूरी होते हैं।
  • Maintenance के दावे: बच्चों या पत्नी के लिए राशन-भरण मांगने के लिए CrPC 125 के अंतर्गत याचिका दलना पड़ती है।
    वकील उचित दस्तावेज़ और आय-उत्पादन का प्रमाण जुटाने में मदद करेगा।
  • Order modification या execution: शिक्षा, रोजगार या स्थानांतरण के कारण custody बदली जा सकती है।
    अपनी स्थिति स्पष्ट कर अदालत से संशोधन मांगना पड़ता है।
  • Emergency custody पिटीशन: Guardians and Wards Act के अंतर्गत सुरक्षा या बाल के जोखिम पर तात्कालिक आदेश चाहिए हो सकता है।
  • DNA पaternity परीक्षण या पितृत्व सत्यापन: पितृत्व दावे के लिए कानूनी प्रक्रिया चाहिए होती है, खासकर दिवालिया स्थिति में।
  • ऊपर-ऊपर की सुरक्षा और संरक्षण: घरेलू विवाद या बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी जटिल स्थितियों में कानूनी मार्गदर्शन आवश्यक है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

हिंदू माइनोरिटी एंड गार्डियनशिप एक्ट, 1956 (HMGA)

HMGA अभिभावक के रूप में पिता और माता दोनों को प्राकृतिक अभिभावक बनाते हैं। यह कानून बाल की देखभाल और संपत्ति के उत्तरदायित्व को स्पष्ट करता है।

झारखंड में HMGA के अनुसार बच्चे के सम्यक हित को प्राथमिक महत्व दिया जाता है।

गार्डियन एंड वॉर्ड्स एक्ट, 1890

यह कानून संरक्षित करता है कि छोटों की देखभाल और संपत्ति की सुरक्षा किसके द्वारा होगी। अदालतें बाल के हित के अनुरूप निर्णय देती हैं।

झारखंड के क्षेत्र में Guardians and Wards Act परिवारिक अदालतों के माध्यम से लागू होता है।

फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984

इस अधिनियम से प्रत्येक जिले में फैमिली कोर्ट बने ताकि तलाक, तलाक के बाद custody, maintenance आदि के मामले तेज़ी से निपटें।

हज़ारीबाग में भी फैमिली कोर्ट इन मुद्दों के लिए प्राथमिक मंच है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिता के अभिभावक अधिकार क्या हैं?

पिता को सामान्यतः प्राकृतिक अभिभावक का दर्जा मिलता है। निर्णय में बाल के हित को सबसे ऊपर माना जाता है।

हज़ारीबाग में custody मामले किस अदालत में सुलझते हैं?

इन मामलों को फैमिली कोर्ट में लड़ा जाता है। आवश्यक दस्तावेज के साथ पंजीकरण से केस शुरू किया जा सकता है।

मैं custody या guardianship के लिए कैसे याचिका लगा सकता/सकती हूँ?

अपील उनके क्षेत्र की फैमिली कोर्ट में दाखिल होती है। वकील पहले सामान्य निवेदन और प्राथमिकी जमा कराएंगे।

Best interests का अर्थ क्या है?

बाल के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और भावनात्मक समृद्धि का समन्वय सर्वोपरि माना जाता है।

Modification कब संभव है?

परिस्थितियां बदली हों तो अदालत custody या visitation के आदेश में संशोधन कर सकती है।

Maintenance के लिए किन दस्तावेज़ों की जरूरत होती है?

आय प्रमाण, बच्चों की खर्च-खर्च और घरेलू स्थिति का विवरण जरूरी होता है।

कैसे visitation rights enforce होते हैं?

कानून के अनुसार non-custodial parent को visitation या access rights मिलते हैं। उल्लंघन पर अदालत से आदेश कराइए जा सकता है।

DNA tests कब स्वीकार्य हैं?

पितृत्व के सिद्धांत के लिए न्यायालय DNA टेस्ट के अनुरोध को मानता है, जब तथ्य स्पष्ट हों।

क्या पिता मर्यादा-रक्षा के दावे कर सकते हैं?

अगर बच्चे की सुरक्षा खतरे में हो, तो अभिभावक कोर्ट से सुरक्षा आदेश प्राप्त कर सकता है।

क्या पिता की जगह माता ही मुख्य अभिभावक होती हैं?

कानून माता-पिता दोनों को प्राकृतिक अभिभावक मान सकता है, पर बाल के हित के अनुरूप निर्णय लिया जाता है।

क्या पितृत्व-स्वीकृति के बिना custody संभव है?

custodial अधिकार आम तौर पर paternity पर निर्भर रहते हैं; सत्यापन आवश्यक हो सकता है।

अगर माता दूसरी जगह रहती है तो क्या visitation प्रभावित होगी?

दूर रहने के बावजूद visitation के नियम लागू रहते हैं; न्यायालय स्थान-परिवर्तन पर निर्णय कर सकता है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - https://nalsa.gov.in
  • National Commission for Women (NCW) - https://ncw.nic.in
  • District Courts eCourts Portal - Hazaribagh - https://districts.ecourts.gov.in/hazaribagh

6. अगले कदम

  1. स्थिति साफ करें: custody, maintenance, या guardianship का स्पष्ट उद्देश्य तय करें।
  2. आवश्यक दस्तावेज़ एकत्र करें: विवाह प्रमाणपत्र, बच्ची-बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र, वर्तमान पता आदि।
  3. स्थानीय वकील ढूंढें: परिवार कानून में अनुभव रखने वाले अधिवक्ता खोजें और प्राथमिक चर्चा तय करें।
  4. फी-शर्तें समझें: शुल्क संरचना, घंटे और उपलब्धता समझें और लिखित फीस अनुबंध लें।
  5. पहला परामर्श लें: उपलब्ध विकल्पों, अवधि और संभावित परिणाम पर स्पष्ट मार्गदर्शन मांगेँ।
  6. दस्तावेज़ व्यवस्थित रखें: अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए सभी रिकॉर्ड सहज रखें।
  7. फैमिली कोर्ट में याचिका दायर करें: उचित फॉर्म और दस्तावेज जमा करें।

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