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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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वाराणसी, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
Labour Law Desk
वाराणसी, भारत

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Labour Law Desk एक भारतीय विधिक अभ्यास है जिसके वाराणसी और इलाहाबाद में कार्यालय हैं, जो बहुराष्ट्रीय, सार्वजनिक और निजी...
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वाराणसी, भारत में एफडीए कानून कानून का संक्षिप्त अवलोकन

वाराणसी में दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और खाद्य पदार्थों के नियम केंद्रीय और राज्य संस्थाओं के संयुक्त नियंत्रण से संचालित होते हैं. मुख्य regulator CDSCO है जो मानक तय करता है और सुरक्षा सुनिश्चित करता है. राज्य स्तर पर UP FDA लाइसेंसिंग, निरीक्षण और अनुपालन चेक करती है.

CDSCO भारत का राष्ट्रीय नियामक निकाय है जो दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के लिए मानक तय करता है. DCGI नए दवा अनुमोदन और क्लिनिकल ट्रायल के लिए जिम्मेदार है. इन दोनों के अनुसार स्थानीय व्यवस्थापन वाराणसी में आवश्यक लाइसेंसिंग और निरीक्षण का आधार बनते हैं.

वाराणसी के दवा विक्रेता, अस्पताल और लैब को स्थानीय UP FDA से लाइसेंस लेना होता है. विदेश से दवाएं आयात करने वाले कंपनियों को CDSCO से आयात लाइसेंस चाहिए. संरचना का यह संयोजन नगरपालिका-राज्य-तंत्र पर निर्भर है.

CDSCO is the national regulatory body for pharmaceuticals and medical devices in India.
The DCGI conducts approvals of new drugs and clinical trials in India.
The Drugs and Cosmetics Act, 1940 provides for regulation of import, manufacture and distribution of drugs.

आधिकारिक स्रोत देखें: CDSCO और e-Gazette. स्वास्थ्य मंत्रालय की जानकारी भी उपयोगी है: MoHFW.

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • वाराणसी में दवा लाइसेंसिंग के लिए UP FDA में आवेदन और पंजीकरण प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन चाहिए.
  • कंपनी स्थापना के समय दवा निर्माण यूनिट या आयात-निर्यात लाइसेंस आदि की आवश्यकता हो सकती है.
  • دवा विज्ञापन, लेबलिंग, पैकेजिंग और विज्ञापन नीति के अनुपालन में कानूनी सलाह चाहिए.
  • निरीक्षण के समय नोटिस मिला हो तो प्रतिवाद और जवाबी पन्ने बनवाने की जरूरत हो सकती है.
  • क्लिनिकल ट्रायल साइट или मेडिकल डिवाइस रजिस्ट्रेशन के लिए DCGI/UP FDA अनुमति चाहिए.
  • वाराणसी आधारित फार्मेसी या डिस्ट्रीब्यूशन चैन के लिए विदेशी सप्लाय और आयात नियम समझने हों तो वकील मदद करेगा.

उदाहरण के तौर पर वाराणसी के एक अस्पताल ने बिना लाइसेंस दवा बेची, तब स्थानीय UP FDA द्वारा कार्रवाई संभव है. ऐसे मामलों में कानूनी सलाह सुरक्षित मार्ग है.

स्थानीय कानून अवलोकन

  • The Drugs and Cosmetics Act, 1940 और Drugs and Cosmetics Rules, 1945 दवाओं के आयात, निर्माण, वितरण और लेबलिंग को नियंत्रित करते हैं.
  • Medical Device Rules, 2017 चिकित्सा उपकरणों के पंजीकरण, विपणन और निर्माण प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करते हैं.
  • Food Safety and Standards Act, 2006 खाद्य पदार्थों, पेय और खाद्य supplements के नियमन के लिए लागू है; यूपी में UP FDA इसे भी देखती है जहां खाद्य-उत्पाद भी संबंधित कानूनों के अंतर्गत आते हैं.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फड अफडे क्या हैं और किसे समझना ज़रूरी है?

एफडीए कानून दवाओं, मेडिकल उपकरणों तथा खाद्य पदार्थों के उद्योग को नियंत्रित करता है. यूपी के अस्पताल, दवा विक्रेता और निर्माता इसे समझ कर चलें ताकि अवैध बिक्री, खामियाँ या गलत लेबलिंग से बचें.

CDSCO और UP FDA में क्या अंतर है?

CDSCO केंद्रीय नियामक है जो आयात-निर्यात और नई दवाओं की मंजूरी पर अधिकार रखता है. UP FDA राज्य स्तर पर लाइसेंसिंग, निरीक्षण और अनुपालन करता है.

वाराणसी में दवा बेचने के लिए लाइसेंस कब चाहिए?

स्थानीय दवा स्टोर, थोक विक्रेता और फार्मेसी को UP FDA का लाइसेंस चाहिए. बिना लाइसेंस के बिक्री पर कानूनी कार्रवाई संभव है.

दवा लाइसेंस के लिए आवेदन कैसे करें?

उत्तरी प्रदेश के राज्य फूड-ड्रग्स विभाग के निर्देशों के अनुसार फॉर्म, क्वालिफिकेशन, परीक्षण प्रमाण पत्र और फीस जमा करनी होगी. साथ में परिसर के दस्तावेज जरूरी रहते हैं.

कितना समय लगता है एक लाइसेंस मिलने में?

आमतौर पर 6 से 12 सप्ताह का प्रोसेस समय माना जाता है. प्रक्रिया करीब से शुरू कर के निरीक्षण के पश्चात पूरा होता है.

क्या प्रसारक या विज्ञापन पर रोक है?

हाँ. दवाओं और कॉस्मेटिक सामान के विज्ञापन, दवा के सेवन-फायदे, दुष्प्रभाव आदि पर सख्त नियंत्रण है. नियमों का उल्लंघन दंड का कारण बन सकता है.

क्या दवा आयात के लिए अलग से मंजूरी चाहिए?

हाँ. विदेश से दवा आयात करने वाले कारोबारियों को CDSCO आयात लाइसेंस चाहिए. इसके अलावा भारत के प्रादेशिक नियम भी लागू रहते हैं.

क्या कानूनी सलाहकार को चुनना कठिन है?

नहीं. FDA कानून में विशेषज्ञता वाले वकील, स्थानीय बार-एसोसिएशन के सदस्य, और पूर्व निरीक्षण अनुभव वाले व्यक्ति बेहतर विकल्प होते हैं.

क्लिनिकल ट्रायल साइट्स के लिए कौन सक्षम है?

DCGI अनुमोदन आवश्यक है. यूपी में स्थानीय संस्थाओं और अस्पतालों के साथ क्लिनिकल ट्रियल को कानूनी मानक के अनुसार चलाया जाना चाहिए.

मेडिकल डिवाइस रजिस्ट्रेशन कैसे होता है?

Medical Device Rules के अनुसार उत्पाद पंजीकरण, क्लासिफिकेशन और विपणन-अनुमति जरूरी है. स्थानीय रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया यूपी FDA के माध्यम से होती है.

अगर निरीक्षण में गलती पाई जाए तो क्या करना चाहिए?

स्पष्टीकरण भेजें, सुधारात्मक कदम उठाएं और आवश्यक संशोधनों के साथ फिर निरीक्षण की योजना बनाएं. लंबित समस्या पर वकील से सलाह लें.

फार्मेसी-स्टोर के लिए कौनसे रिकॉर्ड जरूरी रहते हैं?

उत्पादन-खरीद-स्टॉक, बिक्री रजिस्टर, लाइसेंस और आयात-निर्यात दस्तावेज सुरक्षित रखें. निरीक्षक के सामने यह प्रस्तुत करना चाहिए.

अतिरिक्त संसाधन

  • Central Drugs Standard Control Organization (CDSCO) - राष्ट्रीय नियामक वेबसाइट. cdsco.gov.in
  • Uttar Pradesh Food, Drugs and Cosmetics Department - राज्य स्तर पर अनुपालन के लिए केंद्रित संसाधन. up.gov.in
  • Pharmacy Council of India (PCI) - Pharmacist पंजीकरण और शिक्षा मानदंड. pci.nic.in

अगले कदम

  1. अपने व्यवसाय की सही ज़रूरत स्पष्ट करें जैसे लाइसेंसिंग, आयात, क्लिनिकल ट्रायल आदि.
  2. वाराणसी-उत्तर प्रदेश में उपलब्ध UP FDA मार्गदर्शिकाओं को पढ़ें और आवश्यक दस्तावेज बनाएं.
  3. FDA कानून में विशेषज्ञता वाले वकील की प्रारम्भिक कंसल्टेशन बुक करें.
  4. पिछले अनुपालन रिकॉर्ड, निरीक्षण जवाब और डिप्लॉयमेंट योजना एकत्र करें.
  5. संभावित और अनुभवी वकीलों के साथ फीस और अनुबंध की स्पष्ट चर्चा करें.
  6. आईटी-आधारित अनुपालनों के लिए आवश्यक डिजिटल दस्तावेज तैयार रखें.
  7. कायदा की भाषा में स्पष्ट, लिखित पंजीकरण कदम उठाएं और क्रमिक रिपोर्ट दें.

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