गया में सर्वश्रेष्ठ सरकारी अनुबंध वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
गया, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

1. गया, भारत में सरकारी अनुबंध कानून के बारे में: गया, भारत में सरकारी अनुबंध कानून का संक्षिप्त अवलोकन

सरकारी अनुबंध भारत में सार्वजनिक सेवाओं और विकास के लिए आवश्यक समझौते हैं। इन अनुबंधों में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही प्रमुख मानदंड रहते हैं।

सरकारी खरीद-प्रक्रिया आम तौर पर ई-प्रोक्योरमेंट और हर स्तर पर लिखित दिशानिर्देशों के अनुसार संचालित होती है। धोखाधड़ी और अनुचित लाभ से बचने के लिए मानक प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं।

Public procurement shall be conducted in a transparent, competitive and accountable manner.

Source: Central Public Procurement Portal (CPPP) - https://eprocure.gov.in/epublish/app

महत्वपूर्ण बिंदु: guna, मूल्य, गुणवत्ता और समय पर आपूर्ति पर संतुलन बनाना अक्सर एक चुनौती होती है।

Public procurement policy is designed to promote transparency, maintain fairness, and ensure value for money.

Source: Department of Expenditure, Ministry of Finanace - General Financial Rules (GFR) से सम्बन्धित दिशानिर्देश

नोट: भारत के केंद्र-स्तरीय अनुबंधों के लिए GFR और उससे सम्बद्ध वित्तीय नियम मानक हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: गया, भारत से संबंधित 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

नीचे गये 6 प्रकार के परिदृश्य अक्सर सरकारी अनुबंध मामलों में महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

  • टेंडर चयन में अस्पष्ट मूल्यांकन मापदंड या निष्पक्षता के प्रश्न उठना और इसके परिणामस्वरूप विवाद।
  • बिडर के चयन के बाद स्पष्टीकरण या आपत्ति के बावजूद निष्पादन-निर्णय में देरी या गलत फैसला।
  • कार्य के प्रदर्शन-गारंटी, जरीव रिडम्प्शन या कमी-नुकसान के दावे पर विवाद।
  • एकाधिक संस्थाओं के बीच बाँकी धन, भुगतान की देरी और (FIR/व Vigilance) शिकायतें।
  • धन-प्रथागत भ्रष्टाचार या अनुचित निविदा-प्रक्रिया के आरोप, जिन्हें CVC या कोर्ट-स्तर पर चुनौती दी जा सके।
  • लोक-हित के लिए उच्च-जोखिम परियोजनाओं में आपसी समझौते, एमएसई/Make in India नीति के अनुपालन को लेकर सवाल।

गया, बिहार-आधारित परियोजनाओं में भी यही प्रकार के मुद्दे आम होते हैं, जबकि स्थानीय रिकॉर्ड्स से प्रमाणित मामलों की जाँच राज्य-स्तर पर होती है। एक अनुभवी वकील इन कानूनी दस्तावेजों, निविदा-आवेदन, और अनुबंध-प्रावधानों की जाँच में सहायता करता है।

“Arbitration is an effective mechanism for resolving disputes arising out of public contracts.”

Source: Arbitration and Conciliation Act, 1996 - आधिकारिक कानूनी ढांचा

3. स्थानीय कानून अवलोकन: गया, भारत में सरकारी अनुबंध को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

  • Indian Contract Act, 1872 - अनुबंध की बुनियादी कसौटियाँ, प्रत्यक्ष और पर्यवेक्षित अनुबंध-प्रावधान निर्धारित करता है।
  • General Financial Rules, 2017 (GFR) - केंद्र शासन के खरीद-प्रक्रिया के लिए मानक नियम हैं; पारदर्शिता, मूल्य-वो money और अनुशासन इसमें निहित हैं।
  • Arbitration and Conciliation Act, 1996 (अध्यायन/संशोधन सहित) - सरकारी अनुबंधों के विवाद निपटाने के लिए वितरण-प्रक्रिया और विकल्प सुझाता है; उचित-तरीके से मध्यस्थता के प्रावधान उपलब्ध कराता है।
  • Public Procurement Policy for Make in India / Public Procurement (Preference to Domestic Manufacturers) Order - घरेलू निर्माताओं को प्राथमिकता देने के लिए प्रावधान बनाते हैं; विदेशी-सम्बन्धी प्रतिस्पर्धा पर भी प्रभाव डालता है।
  • Public Procurement Policy for Micro and Small Enterprises (MSME) / Public Procurement Policy - एमएसएमई को प्राथमिकता देकर छोटा उद्यमों को बाजार में अवसर देता है (2012 तथा उसके संशोधन)।

इन कानूनों के अलावा स्थानीय प्रशासनिक नियम, जिला-स्तर के निविदा निर्देश और फाइनेंशियल ऑडिट-नियम भी लाभ-हानि के दायरे बनाते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरकारी अनुबंध क्या है?

सरकारी अनुबंध वह लिखित समझौता है जिसमें सरकार किसी कार्य, सेवा या वस्तु की पूर्ति के लिए ठेकेदार से शर्तें निर्धारित करती है।

कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी होते हैं?

निविदा आमंत्रण, टैंडर-नियम, ठेका-समझौता, प्रदर्शन-गारंटी, भुगतान शर्तें और अनुशासनात्मक नियम आवश्यक होते हैं।

टेंडर पास होने पर क्यों विवाद होता है?

परीक्षक मूल्यांकन मानदंड, तकनीकी योग्यता, या भाव-निर्णय से असहमति बन सकती है।

गया में सरकारी अनुबंध के लिए कौन-सेarkt कानून लागू होते हैं?

Indian Contract Act, GFR और Arbitration Act सामान्य-रूप से लागू होते हैं; Make in India की नीतियाँ भी प्रभाव डालती हैं।

क्या आपराधिक न्यायिक कदम उठाए जा सकते हैं?

यदि भ्रष्टाचार या अनुचित तरीके से निविदा-प्रक्रिया हुई हो, तो CVC, CID या अदालत में शिकायत की जा सकती है।

डिजिटल खरीद-प्रक्रिया कैसे काम करती है?

ई-प्रोक्योरमेंट प्लेटफॉर्म पर निविदा, बोली, संवेदना और अनुबंध-प्रकाशन होते हैं; यह पारदर्शिता बढ़ाता है।

क्या Make in India नीति लागू है?

हाँ, Public Procurement Policy Make in India Domestic preference देता है; सरकारी खरीद में domestic vendors को तवज्जो मिलती है।

क्या MSME को प्राथमिकता मिलती है?

MSME को प्राथमिकता देने के निर्देश निविदा-घोषणाओं में स्पष्ट रहते हैं; लक्ष्य छोटे और मध्यम उद्यमों को अवसर देना है।

कब और कैसे आपटेंडर चेंज कर सकते हैं?

प्रत्येक चरण पर लिखित संशोधन नोटिस और संशोधित दस्तावेज जारी होते हैं; प्रभावित पक्षों को मौका दिया जाता है।

यदि अनुबंध में देरी हो जाए तो क्या करें?

प्रारम्भिक देरी नोटिस, समय-सीमा वृद्धि और विवरण-आधारित आपत्तियाँ दायर करें; अदालत/विधिक माध्यम से समाधान संभव है।

निपटान के लिए क्या विकल्प हैं?

सूट-कोर्ट, मध्यस्थता (Arbitration) या लोक अदालत के माध्यम से विवाद निपट सकता है, अनुबंध-धान करें।

सरकार के भुगतान कब तक होता है?

आमतौर पर 30-45 दिन के भीतर भुगतान की उम्मीद की जाती है; समय-सीमा में देरी पर ब्याज चुकाने का प्रावधान हो सकता है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Central Public Procurement Portal (CPPP) - सार्वजनिक खरीद और निविदाओं के लिए आधिकारिक पोर्टल: https://eprocure.gov.in/epublish/app
  • DPIIT - Public Procurement Policy - Make in India व Domestic preference नीति के स्रोत: https://dpiit.gov.in/public-procurement-policy
  • Department of Expenditure - General Financial Rules - सरकारी खरीद के नियमों के लिए आधिकारिक गाइड: https://doe.gov.in

6. अगले कदम: सरकारी अनुबंध वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने प्रोजेक्ट के प्रकार और मूल्य-सीमा स्पष्ट करें; आवश्यकता-विश्लेषण लिखित रखें।
  2. गया-आसपास कानून-प्रैक्टिस वाले अनुभवी advcoates, कानून-फर्म या सरकारी-प्रबंधन विशेषज्ञों की सूची बनाएँ।
  3. उनके पास सरकारी अनुबंध, निविदा-नीति और ADR/Arbitration अनुभव चेक करें।
  4. पूर्व-परामर्श सत्र लेकर केस-रीडिंग, रिस्क-एसेसमेंट और फीस-स्टैक्चर स्पष्ट करें।
  5. प्रारम्भिक प्रस्ताव (RFP) या फ्री-स्क्रीनिंग-डॉक्यूमेंट मांगें; उनके जवाब की तुलना करें।
  6. स्थानीय रेफरेंसेस और अदालत-ट्रैक रिकॉर्ड सुनिश्चित करें; अगर संभव हो तो गया/बिहार के मामलों का उदाहरण माँगें।
  7. फाइन-टाइन्ड एग्रीमेंट पर सहमति बनाकर संविदात्मक-प्रावधान, शुल्क संरचना और गोपनीयता समझौते पर हस्ताक्षर करें।

अंतिम सुझाव: गया, भारत में सरकारी अनुबंध मामलों के लिए स्थानीय वकील चयन करते समय उनके क्षेत्र-विशेष ज्ञान, सरकारी प्रॉसेस, ई-प्रोक्योरमेंट पद्धति और ADR-टूल्स के ज्ञान को प्राथमिकता दें।

सरकारी अनुबंध कानून से जुड़ी जानकारी के लिए आप निम्न आधिकारिक स्रोत देख सकते हैं: - Central Public Procurement Portal (CPPP): https://eprocure.gov.in/epublish/app - DPIIT Public Procurement Policy: https://dpiit.gov.in/public-procurement-policy - Department of Expenditure: https://doe.gov.in

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