प्रयागराज में सर्वश्रेष्ठ अभिभावकत्व वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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प्रयागराज, भारत

2016 में स्थापित
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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भारत अभिभावकत्व वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

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क्या मैं अपनी बेटी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर सकता हूँ, क्योंकि मुझे उसके ठिकाने की जानकारी नहीं है?
परिवार गृह हिंसा अभिभावकत्व परिसर दायित्व संपत्ति क्षति
उसके बारे में मेरे पास कोई जानकारी नहीं है, इसलिए मुझे उसे अपनी बेटी कहना भी मुश्किल हो रहा है। मैंने उसकी पढ़ाई, कॉलेज हॉस्टल और ट्यूशन फीस में लाखों रुपये निवेश किए हैं और उसे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेजा था ताकि वह अपना एमएस कर सके। लेकिन...
वकील का उत्तर Aggarwals & Associates द्वारा

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1 उत्तर

प्रयागराज, भारत में अभिभावकत्व कानून के बारे में: [ प्रयागराज, भारत में अभिभावकत्व कानून का संक्षिप्त अवलोकन]

अभिभावकत्व कानून का उद्देश्य नाबालिग के सुरक्षा, देखरेख और संपत्ति के प्रबंधन का न्यायपूर्ण नियंत्रण प्रदान करना है. यह कानून नाबालिग के हितों को प्राथमिकता देता है. प्रयागराज में यह प्रक्रिया मुख्य रूप से परिवार न्यायालय और जिला अदालत द्वारा संचालित होती है.

1890 के Guardians and Wards Act और 1956 के Hindu Minority and Guardianship Act इन दोनों का संयुक्त दायरा प्रयागराज के नागरिकों पर लागू होता है. इन कानूनों से संरक्षक का चयन, कर्तव्य, अधिकार और समय-सीमा निर्धारित होती है. परिवार न्यायालय प्रयागराज में दायर मामलों के लिए इन प्रावधानों का अनुपालन अनिवार्य होता है.

हाल में प्रयागराज के परिवार न्यायालयों में ऑनलाइन फाइलिंग और रिकॉर्ड-कीपिंग के प्रवाह ने प्रक्रिया को सरल बनाया है.

“An Act to amend the law relating to the guardianship of minors.”
स्रोत: Guardians and Wards Act, 1890.
“An Act to amend the law relating to guardianship and custody of minors in Hindu families.”
स्रोत: Hindu Minority and Guardianship Act, 1956.
“Family Courts in India adjudicate guardianship petitions under the Guardians and Wards Act.”
स्रोत: National Portal of India.

प्रयागराज निवासियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने मामले के लिए स्थानीय अदालतों के नियम और समयरेखा समझें. अदालत की फीस, दलाल-रहित सलाह और दस्तावेज की आवश्यकताएं क्षेत्रीय रूप से भिन्न हो सकती हैं. इसलिए सही योजना बनाकर आगे बढ़ना लाभदायक रहता है.

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: [अभिभावकत्व कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। प्रयागराज, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें]

प्रयागराज में अभिभावकत्व मामलों में वकील जरूरी भूमिका निभाते हैं. वे औपचारिक दायरों, गवाही में तर्क और रिकॉर्ड-तैयारी में मदद करते हैं. नीचे Prayagraj से संबंधित 4-6 वास्तविक परिदृश्य दिए गए हैं.

  • विवाह-विच्छेद के दौरान नाबालिग बच्चे के सुरक्षित पालन-पोषण का guardian नियुक्ति निर्णय लेना हो, तो कानूनी सलाह जरूरी है.
  • माता-पिता की मृत्यु के बाद नाबालिग के संपत्ति के Guardianship और estate management का मामला हो तो वकील चाहिए.
  • हिंदू परिवार में minor के custody व custody के साथ guardianship संबन्धित विवाद हो, तब योग्य advokat मार्गदर्शन देता है.
  • विकलांग बच्चे के लिए guardianship और कल्याण के विशेष निर्देशों की जरूरत हो तो विशेषज्ञ की जरूरत पड़ती है.
  • एक अन्य पारिवारिक सदस्य के द्वारा guardian नियुक्त किया जाना हो और स्थानांतरण, क्षेत्राधिकार, या सुरक्षित custody सुनिश्चित करना हो तो قانونی सलाह आवश्यक है.

इन परिदृश्यों में एक सामान्य बात है: अदालत के अनुसार बच्चों के सर्वोच्च हित को ही केंद्र में रखा जाता है. इसलिए एक अनुभवी advokat के साथ आगे बढ़ना बेहतर है.

स्थानीय कानून अवलोकन: [ प्रयागराज, भारत में अभिभावकत्व को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें]

Prayagraj में अभिभावकत्व मामलों का नियंत्रण मुख्य रूप से इन कानूनों से होता है. नीचे विशिष्ट कानूनों के नाम दिए गए हैं.

  • Guardians and Wards Act, 1890 - नाबालिगों के guardianship और उनके व्यक्तित्व तथा संपत्ति के प्रबंधन से जुड़ी सामान्य अदालत-निर्देशन प्रक्रिया को परिभाषित करता है. स्रोत: Legislation.gov.in
  • Hindu Minority and Guardianship Act, 1956 - हिंदू बच्चों के लिए माता-पिता के अधिकार, guardianship और भविष्य की जिम्मेदारियाँ निर्धारित करता है. स्रोत: Legislation.gov.in
  • Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 - बाल अधिकार, देखभाल और संरक्षित Guardianship प्रावधानों को सूचीबद्ध करता है. Prayagraj में लागू अदालतों द्वारा इसी कानून के अंतर्गत बाल संरक्षण के प्रावधानों का पालन किया जाता है. स्रोत: Legislation.gov.in

Prayagraj में इन कानूनों के अनुरूप Family Court Prayagraj और Allahabad High Court का मार्गदर्शन प्रमुख है. कानूनी प्रक्रिया में दस्तावेज, जमानत और सुनवाई की तिथि स्थानीय अदालत के नोटिस-चक्र पर निर्भर करती है. स्थानीय व्यवहार में पूर्व-तय योजना अधिक प्रभावी रहती है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिभावकत्व कानून क्या है?

यह कानून नाबालिग के लिए संरक्षक नियुक्ति, सुरक्षा और संपत्ति के प्रबंध को नियंत्रित करता है. Guardians and Wards Act 1890 और Hindu Minority and Guardianship Act 1956 मिलाकर लागू होते हैं. यह Prayagraj के परिवार न्यायालयों में लागू होता है.

guardian कब नियुक्त किया जा सकता है?

किसी भी नाबालिग के हित में संरक्षक नियुक्त किया जा सकता है. अदालत संरक्षक को व्यक्ति और संपत्ति दोनों का नियंत्रण दे सकती है. नियुक्ति प्रक्रिया में अदालत की समीक्षा जरूरी है.

guardian of person बनाम guardian of property में अंतर क्या है?

guardian of the person बच्चों की देखरेख, शिक्षा, चिकित्सा आदि का प्रबंधन करता है. guardian of the property नाबालिग के संपत्ति-प्रबंधन को संभालता है. कई मामलों में दोनों भूमिकाएं एक ही व्यक्ति निभा सकता है.

Prayagraj में guardianship के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?

पहचान के प्रमाण, जन्म प्रमाणन, माता-पिता की मृत्यु/विवाह प्रमाण, निवास प्रमाण, बच्चे के शैक्षणिक रिकॉर्ड और संपत्ति-संबंधी दस्तावेज आवश्यक होते हैं. स्थानीय अदालत के निर्देशों के अनुसार अतिरिक्त दस्‍तावेज भी दे सकते हैं.

guardianship पिटिशन कैसे दायर करें?

पिटिशन दाखिल करते समय आवेदन-फॉर्म, अभिभावकत्व का कारण, बच्चे की सेहत और शिक्षा की जानकारी दें. साथ में पहचान-प्रमाण और निवास प्रमाण प्रस्तुत करें. अदालत द्वारा तारीख दी जाती है.

guardianship के मामलों में कौनसी अदालतें जिम्मेदार होती हैं?

Prayagraj क्षेत्र में यह जिम्मेदारी Family Court Prayagraj और Allahabad High Court की है. छोटे मामले District Courts के अधिकार-क्षेत्र में आते हैं. स्थानीय अदालतों के निर्देश अनिवार्य होंगे.

guardianship में पिता और माता के अधिकार कैसे तय होते हैं?

Hindu Minorities Act के अनुसार माता-पिता के सामान्य अधिकार रहते हैं, पर अदालत बच्चे के सर्वोच्च हित के अनुसार संरक्षक का चयन करती है. पिता और माता में प्रत्यक्ष विवाद होने पर अदालत निर्णय लेती है.

क्या guardianship को बदला जा सकता है?

हाँ, अगर परिस्थितियाँ बदलीं, जैसे guardianship 停 या guardianship का उचित पालन नहीं हो रहा हो, तो अदालत से संशोधन की अनुमति ली जा सकती है. नया guardian नियुक्त करने की प्रक्रिया फिर से शुरू होती है.

guardianship कब खत्म हो सकता है?

जब नाबालिग 18 वर्ष का हो जाए या अदालत का आदेश हो कि guardianship समाप्त किया जाए, तब यह समाप्त हो सकता है. कुछ मामलों में शिक्षा समाप्त तक guard-ship जारी रह सकता है.

क्या guardians विदेश में रह सकता है?

guardian का निवास स्थान नाबालिग के हित के अनुरूप होना चाहिए. यदि संरक्षक विदेश में रहता है, तब प्रयोजित व्यवस्था के अनुसार अदालत के निर्देशों का पालन अनिवार्य होता है.

परिवार अदालत में बच्चों के संरक्षक का चयन कैसे होता है?

अदालत बच्चों के हित, सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य पर विचार करती है. विशेषज्ञ रिपोर्ट और वकील के तर्क इस निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

क्या guardianship के लिए खर्च कबूलने होते हैं?

अदालत द्वारा संचालित शुल्क और वकील की फीस खर्चों में शामिल हो सकती है. फीस क्षेत्र-विशिष्ट हो सकती है और अग्रिम में तय हो सकती है.

guardianship में संपत्ति का प्रबंधन कैसे करते हैं?

संरक्षक संपत्ति के रजिस्ट्रेशन, आय-व्यय रिकॉर्ड और कर-निर्देशों का पालन करता है. यह नाबालिग के लाभ के अनुसार किया जाता है और अदालत के अनुमोदन के अनुरोध के साथ होता है.

अतिरिक्त संसाधन: [ अभिभावकत्व से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों की सूची बनाएं ]

  • National Commission for Protection of Child Rights NCPCR - https://ncpcr.gov.in
  • National Legal Services Authority NALSA - https://nalsa.gov.in
  • District Legal Services Authority DLSA Prayagraj (Allahabad) - https://districts.ecourts.gov.in/allahabad

ये संगठन अभिनव मार्गदर्शन, मुफ्त वकील सहायता और बच्चों के अधिकारों के लिए सहायता प्रदान करते हैं. Prayagraj निवासियों के लिए यह एक उपयोगी başlangıç-पथ है. NCPCR और NALSA की आधिकारिक वेबसाइटों पर Guardianship से जुड़े संसाधन उपलब्ध हैं.

अगले कदम: [ अभिभावकत्व वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया ]

  1. अपनी स्थिति स्पष्ट करें और किन-किन पहलुओं में संरक्षक चाहिए यह निर्धारित करें.
  2. Prayagraj के Family Court या District Court के बारे में जानकारी एकत्र करें. क्षेत्रीय कानून-गाइडेंस हासिल करें.
  3. अनुभव वाले अभिभावकत्व वकील की सूची बनाएं; करीब 3-5 विकल्प चयन करें.
  4. पहले फ्री-कंसल्टेशन या मीटिंग लें; पूछें कितने मामलों में उनकी सफलता दर है.
  5. केस-फीस, retainer, घंटा दर आदि स्पष्ट करें और लिखित समझौता लें.
  6. दस्तावेज़-सूची तैयार करें: पहचान, जन्म प्रमाण, संपत्ति दस्तावेज, मृत्यु प्रमाण आदि.
  7. यदि संभव हो, ADR विकल्पों पर विचार करें ताकि समय और खर्च कम हो सके.

प्रयागराज निवासियों के लिए सुझाव: ऑनलाइन फॉर्म, e-filing और फाइलिंग तिथि की पुष्टि करें. स्थानीय कोर्ट की नोटिस समय सीमाओं का पालन करें. तथा guardianship मामले में पारिवारिक सलाहकार से भी सलाह लें.

धारक स्रोत: - Guardians and Wards Act, 1890 long title: An Act to amend the law relating to the guardianship of minors. स्रोत: https://legislation.gov.in - Hindu Minority and Guardianship Act, 1956 long title: An Act to amend the law relating to guardianship and custody of minors in Hindu families. स्रोत: https://legislation.gov.in - Family Courts overview: https://www.india.gov.in/my-government/ministries-publications - Allahabad High Court व स्थानीय Family Court पेज: https://www.allahabadhighcourt.in/ और https://districts.ecourts.gov.in/allahabad

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