बिहार शरीफ़ में सर्वश्रेष्ठ उत्तराधिकार कानून वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
बिहार शरीफ़, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. बिहार शरीफ़, भारत में उत्तराधिकार कानून का संक्षिप्त अवलोकन

उत्तराधिकार कानून परिवार की संपत्ति के अधिकारों को निर्धारित करता है. यह कानून यह बताता है कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद संपत्ति किसे मिलती है. बिहार शरीफ़ में ये नियम हिंदू, मुस्लिम, ईसाई आदि के व्यक्तिगत कानूनों के अनुसार लागू होते हैं.

मुख्य रूप से हिन्दू, ईसाई, मुसलमान आदि के लिए अलग कानून हैं. हिन्दू व उत्तराधिकार से जुड़ी स्थितियाँ हिंदू Succession Act, 1956 और उसके 2005 सुधार अधिनियम से प्रभावित होती हैं. wills, intestate succession और coparcenary अधिकार यहाँ प्रमुख धाराओं में आते हैं.

उच्च-स्तरीय बदलावों पर नज़र रखने के लिए आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लें. नीचे कुछ उद्धरण और स्रोत दिए गए हैं ताकि आप सत्यापित जानकारी पा सकें.

“This Act may be cited as the Hindu Succession Act, 1956.”
“An Act to amend and codify the law relating to intestate succession amongst Hindus.”
“In relation to a Hindu intestate, the daughter shall have the same rights in the coparcenary property as the son.”

नोट: बिहार शरीफ़ के निवासियों के लिए यह स्पष्ट है कि स्थानीय अदालतों में इन विधियों के अनुसार प्रस्तुतियाँ और दावे दर्ज होते हैं. सम्बन्धित दस्तावेज और प्रमाण सही रखना अत्यंत आवश्यक है.

आधिकारिक स्रोत जहां आप मूल पाठ और बदलाव देख सकते हैं:.Legislation.gov.in और राष्ट्रीय पोर्टल

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

उत्तराधिकार कानून में विशेषज्ञ सहायता कई बार अनिवार्य हो जाती है. नीचे बिहार शरीफ़ से जुड़े वास्तविक परिसीमाओं के कारण 4-6 परिस्थितियाँ दी गई हैं.

  • इंटेस्टेट संपत्ति पर दावा और भागीदारी का मसला: पिता के निधन के बाद परिवार के सदस्यों के बीच हिस्सा तय न हो। ऐसे मामलों में कानूनी सलाहकार मदद से सही हिस्सेदारी साबित करनी पड़ती है.

  • कॉपारसीनरी अधिकार के बारे में विवाद: बेटों और बेटियों के अधिकारों में स्पष्टता न होने पर अदालत में तर्क प्रस्तुत करना पड़ता है. बिहार के उत्तराधिकार मामलों में यह विशेषकर अहम है.

  • Will probate और परीक्षण आवश्यकताएं: वसीयत होने पर भी अदालत द्वारा प्रमाणपत्र (probate) की मांग की जाती है. वकील परीक्षण-प्रक्रिया में मार्गदर्शन देता है.

  • Will को चुनौती देने वाले मुकदमे: यदि परिवार के एक सदस्य को लगता है कि वसीयत अन्यायपूर्ण है या दबाव में बनाई गई है, तो विधिक सहायता आवश्यक होती है.

  • किशोर बच्चे या निर्भर सदस्य के लिए संरक्षक-नियोजन: माता-पिता के निधन पर बच्चों के भरण पोषण और संपत्ति का संरक्षक तय करना होता है.

  • भू-सम्पत्ति का अस्थायी विभाजन: संयुक्त परिवार में हिस्सेदारी और प्रॉपर्टी की स्थिति जटिल हो सकती है. अधिवक्ता उपयुक्त प्लान बनाते हैं.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

बिहार शरीफ़ में उत्तराधिकार से संबंधित प्रमुख कानून 2-3 प्रकार के हैं. इनका क्रियान्वयन राज्य के न्यायालय और केंद्रीय कानून के अनुरूप होता है.

  • हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 - हिन्दू परिवारों के लिए intestate और coparcenary अधिकारों को नियंत्रित करता है. 2005 के संशोधन ने बेटियों के समान अधिकार सुनिश्चित किये।

  • भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 - गैर हिन्दू समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों के अंतर्गत उत्तराधिकार को सुसंगत करता है; Will और probate से जुड़ी प्रक्रिया इसी अधिनियम के अधीन होती है.

  • हस्तांतरण-सम्पत्ति अधिनियम, 1882 - संपत्ति के वितरण और स्थानांतरण के नियम स्पष्ट करता है; उत्तराधिकार-सम्बन्धी विभाजन में मार्गदर्शक प्रावधान देता है.

  • बिहार फॅमिली कोर्ट अधिनियम, 1984 - पारिवारिक मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाकर प्रक्रिया सरल बनाती है; उत्तराधिकार-सम्बन्धी अधिकरणों में यह प्रमुख भूमिका निभाती है.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराधिकार कानून किन परिस्थितियों में मदद करता है?

यह कानून यह निर्धारित करता है कि मृत्यु के बाद संपत्ति किसे मिलनी चाहिए. यह सुनिश्चित करता है कि परिवार के सभी सदस्य न्यायसंगत रूप से भाग पा सकें.

हिन्दू परिवार में बेटी को कब से समान अधिकार मिला?

2005 के हिन्दू Succession अधिनियम में बेटी को coparcenary अधिकार बेटी के जन्म से प्राप्त हुए. इससे वही अधिकार पाती है जो पुत्र को थे.

Will क्या हमेशा जरूरी होता है?

Will सभी मामलों में जरूरी नहीं है, पर कुछ परिस्थितियों में probate की जरूरत पड़ती है ताकि वैधानिक अधिकार सुरक्षित रहें.

अगर Will नहीं है तो मेरे कौन-कौन से अधिकार हैं?

Will न होने पर intestate succession कानून लागू होते हैं. परिवार के Class I heirs और अन्य कानूनी प्रत्याशियों के बीच संपत्ति बंटती है.

क्या परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति का विभाजन कोर्ट से पहले समझौता संभव है?

हाँ, mediation अथवा नोटरी-समझौते से विवाद कम करने की कोशिश की जा सकती है. परंतु अंतिम विभाजन अदालत के आदेश से ही संभव होता है.

मृतक के պարտ-स्तवित परिवार के सदस्य कौन-से होते हैं?

यह निर्भर करता है कि मृतक हिन्दू, मुस्लिम या अन्य समुदाय से है. प्रत्येक समुदाय का उत्तराधिकार कानून अलग नियम देता है.

Coparcenary अधिकार क्या हैं?

Coparcenary के अंतर्गत एक स्त्री या पुरुष अपना भाग प्राप्त करता है और पितृ-वंश के संयुक्त परिवार में उसका हिस्सा निर्धारित होता है.

क्या बिहार में जाएंगे-जहां Will और probate अलग कानून से नियंत्रित होते हैं?

हाँ, हिन्दू Will और probate प्रक्रिया हिन्दू Succession Act तथा Indian Succession Act के अंतर्गत आती है. निजी कानून के अनुसार भिन्नताएं हो सकती हैं.

कौन सा दस्तावेज़ आवश्यक है?

पहचान प्रमाण, मृत्यु प्रमाण, संपत्ति के दस्तावेज, नामांतरण-चित्र आदि आवश्यक होते हैं. अदालत के निर्देश के अनुसार अन्य प्रमाण भी हो सकते हैं.

कब स्टाम्प-ड्यूटी और शुल्क लगते हैं?

Will, probate और अदालत में दायर दावों पर स्टाम्प-ड्यूटी लागू होती है. बिहार के अधिनियमों के अनुसार शुल्क अलग हो सकता है.

What is the procedure to file a succession case in Bihar?

सबसे पहले डॉक्यूमेंट जमा करें, फिर कोर्ट में पैरो-आधार पर सुनवाई होती है. न्यायालय एक नोटिस जारी कर सकता है और आवश्यक प्रमाण पूछ सकता है.

क्योंFamily Court में शिकायत दर्ज करानी चाहिए?

Family Court परिवारिक मामलों के जटिलताओं को सरल बनाता है. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार यह विकल्प उपलब्ध है.

कानूनी सहायता कहाँ से मिल सकती है?

NALSA और BSLSA जैसे सरकारी कानून-सेवा संस्थान फ्री-एडवाइज़री दे सकते हैं. स्थानीय अदालत की कानूनी सहायता इकाइयाँ भी मदद करती हैं.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - कानूनी सहायता हेतु राष्ट्रीय स्तर पर सुविधा देता है. वेबसाइट: https://nalsa.gov.in

  • Patna High Court Legal Services Committee - बिहार में न्यायसंगत सहायता के लिए साइटेड संसाधन उपलब्ध कराता है. वेबसाइट: http://patnahighcourt.bihar.gov.in/

  • National Portal of India - उत्तराधिकार, पंजीकरण एवं अन्य नागरिक सेवाओं के आधिकारिक संदर्भ. वेबसाइट: https://www.india.gov.in

6. अगले कदम

  1. अपना केस स्पष्ट करें: पक्षकार, संपत्ति का प्रकार, और लाभार्थियों की सूची बनाएं.

  2. गिरवी-प्रमाण और मृत्यु प्रमाण पत्र एकत्र करें. अन्य दस्तावेज़ जुड़ सकते हैं.

  3. कर्सी या परिवार अदालत में संपत्ति विभाजन के बारे में प्रारम्भिक सलाह लें.

  4. स्थानीय कानून-प्रयोजन के अनुसार एक अनुभवी अधिवक्ता चुनें. बिहार शरीफ़ में अनुभवी वकील से मिलें.

  5. कानूनी रणनीति तय करें: Will, intestate, coparcenary अधिकार, और अदालत की प्रक्रिया तय करें.

  6. आवश्यक प्रमाण-पत्र और अनुसंधान के लिए समय-सारिणी बनाएं.

  7. निर्णय आने पर आपसी समझौते या अदालतीय आदेश के अनुसार कार्रवाई करें.

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