वाराणसी में सर्वश्रेष्ठ उत्तराधिकार कानून वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
वाराणसी, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. वाराणसी, भारत में उत्तराधिकार कानून कानून का संक्षिप्त अवलोकन

वाराणसी में उत्तराधिकार कानून परिवारिक संपत्ति के वितरण को निर्धारित करता है. उत्तराधिकार कानून सामान्यतः हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई आदि समुदायों के लिए अलग अनुप्रयोग बनाते हैं. इस गाइड में वाराणसी की स्थानीय प्रक्रिया, मौजूदा कानून और व्यावहारिक कदम बताए जाएंगे.

मुख्य रूप से हिन्दू समुदाय के लिए हिन्दू Succession Act, 1956 (संशोधित 2005) महत्वपूर्ण है. इसी से coparcenary अधिकार, वारिसों की भागीदारी और intestate succession के नियम निर्धारित होते हैं. वसीयत बनाना और प्रॉbate प्रक्रिया भी वाराणसी के स्थानीय न्यायालयों से जुड़ी होती है.

नोट: उत्तराधिकार कानून की कई धाराओं में हाल के परिवर्तन स्पष्ट रूप से लागू हैं. 2005 के संशोधन ने पुत्र की तरह ही बेटी के coparcenary अधिकार सुनिश्चित किए, और 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे और स्पष्ट किया.

“The daughter of a coparcener shall, by birth, become a coparcener in the same manner as the son.”

- Hindu Succession Act, 1956 (amendment) के अनुसार संशोधित अनुभाग 6 से लिया गया उद्धरण.

“A daughter by birth is a coparcener in her own right in the same manner as the son.”

- Vineeta Sharma vs Rakesh Sharma, 2020, Supreme Court का प्रमुख निर्णय।

“An Act to consolidate the law relating to intestate and testamentary succession.”

- The Indian Succession Act, 1925 का आधिकारिक उद्देश्य विवरण

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

वाराणसी के उत्तराधिकार मामलों में विशेषज्ञ वकालत आवश्यक है ताकि कानूनी प्रक्रिया समझी जाए. नीचे 4-6 वास्तविक स्थितियों के उदाहरण दिये गए हैं.

  • परिवारिक संपत्ति पर intestate succession विवाद: माता-पिता के निधन के बाद बच्चों के बीच शेयर का सही वितरण पक्का करना होता है.
  • coparcenary अधिकार को स्पष्ट करना: बेटी या बहू के अधिकारों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है.
  • यथोचित वसीयत बनवाना: बूढ़े माता-पिता के लिए वैकल्पिक योजना और वैध Will बनवाने में मदद चाहिए.
  • प्रॉबे‍ट और वैधानिक अनुदान: वारिसों के नाम पर प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए कोर्ट से प्रॉबे‍ट चाहिए हो सकता है.
  • स्थानीय दस्तावेज़ जाँच और साक्ष्यों का संकलन: जन्म-दशहरा प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, मूल संपत्ति प्रपत्र आदि चाहिए होते हैं.
  • विवाद-निवारण और हिस्सेदारी का भाग: अगर परिवार में संपत्ति का विवाद हो तो mediation और अदालत दोनों रास्ते उपलब्ध हैं.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

वाराणसी में उत्तराधिकार कानून को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानूनों में नीचे दिए गए प्रमुख कानून आते हैं.

  • हिन्दू धर्म का उत्तराधिकार कानून - हिन्दू Succession Act, 1956 (संशोधित 2005). coparcenary अधिकार बेटियों को भी दिए गए हैं.
  • भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम - The Indian Succession Act, 1925. intestate और testamentary succession के नियमों का समुच्चय.
  • मुस्लिम Personal Law (Shariat) Application Act, 1937 - मुस्लिम समुदाय के उत्तराधिकार नियमों का सञ्चालन.

वाराणसी में इन कानूनों की प्रैक्टिकल धारणाएं जिला न्यायालय के probate પ્રશ્નों और परिवार अदालतों के निर्णयों पर निर्भर करती हैं. स्थानीय अदालतों के निर्णयों में coparcenary अधिकारों की व्याख्या सुदृढ़ होती है. वेब-आधारित अदालती मार्गदर्शक भी उपलब्ध हैं.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी में उत्तराधिकार कानून क्या है?

उत्तराधिकार कानून भारत के विविध समुदायों के लिए अलग-अलग कानूनों का एक समूह है. हिन्दू के लिए हिन्दू Succession Act, मुसलमान के लिए Shariat अधिनियम आदि प्रमुख हैं. वाराणसी में इन कानूनों का लागू होना स्थानीय अदालतों से तय होता है.

Will क्या आवश्यक है और कितनी प्रक्रिया लगती है?

Will एक वैध दस्तावेज है जो संपत्ति के वितरण को निर्देशित करता है. वाराणसी में Will की प्रॉब्लेट प्रक्रिया शामिल हो सकती है और कोर्ट-स्वीकृत Will के लिए समय ले सकता है.

बेटियों के coparcenary अधिकार कब से प्रभावी होते हैं?

2005 के हिन्दू Succession Act संशोधन के साथ बेटियों को coparcenary अधिकार मिलना शुरू हुआ. Vineeta Sharma केस ने इसे और स्पष्ट किया.

Intestate मामले में किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?

जायदाद-खतिया, जन्म-प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाणपत्र, अंतिम Will (यदि हो) और संपत्ति के वास्तविक रिकॉर्ड आवश्यक होते हैं. दस्तावेज़ पूरे होने पर मान्यता आसान रहती है.

Probate क्या होता है और कब चाहिए?

Probat वह न्यायिक अग्रिम अनुमति है जो Will के अनुसार संपत्ति के वितरण की वैधानिक पुष्टि करती है. वाराणसी में चीजें अदालत के अनुसार होती हैं.

कौन सा कोर्ट प्रश्नों का उत्तर देता है?

Varanasi district court में probate matters और civil suits दायर होते हैं. कुछ मामलों में family court के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.

कपार्सिनरी वितरण कैसे तय होता है?

Coparcenary अधिकार परिवार के सदस्य के जन्म के साथ शुरू होता है. कानूनन बेटियों को भी बराबर हिस्सा मिलता है, जैसा कि 2005 amendment में दिया गया है.

क्या जीवित माता-पिता भी संपत्ति दे सकते हैं?

हाँ, Will के माध्यम से या कोर्ट के आदेश से, माता-पिता और अन्य कानूनी वारिसों के बीच संपत्ति का वितरण तय किया जा सकता है.

वाराणसी में Will बनाने के लिए कौन से कदम लेने चाहिए?

Will बनाने से पहले सभी संपत्तियों की सूची बनाएं. डॉक्टर की सिफारिश के अनुसार गरिमा और स्पष्टता के साथ Will लिखवाएं और दो-तीन स्वतंत्र साक्षियों के साथ साइन करवाएं.

Provisional orders और injunctions कब मिलते हैं?

कभी-कभी कोर्ट पार्टियों के विरुद्ध interim orders दे सकता है. यह संपत्ति-हस्तांतरण रोकने के लिए होता है जब कानून में देरी हो.

Varanasi में कानूनी सहायता कैसे प्राप्त करें?

यदि आप आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं, तो NALSA और UP SLSA जैसी संस्थाओं से मुफ्त या कम-शुल्क कानूनी सहायता मिल सकती है.

क्या विवाहित महिलाओं के अधिकार अलग होते हैं?

हिन्दू कानून के अनुसार विवाहित महिलाओं के coparcenary अधिकार विवाह के बाद भी प्रभावी रहते हैं. परिस्तिथियाँ और दस्तावेज अलग हो सकते हैं.

5. अतिरिक्त संसाधन

उत्तराधिकार कानून के लिए निम्न संस्थाओं से मार्गदर्शन और कानूनी सहायता ले सकते हैं.

  • National Legal Services Authority (NALSA) - आधिकारिक वेबसाइट: https://nalsa.gov.in
  • Uttar Pradesh State Legal Services Authority (UP SLSA) - UP के कानूनी सहायता कार्यक्रमों के लिए मुख्य सरकारी पोर्टल
  • Bar Council of India - वकील चयन और पंजीकरण से जुड़ी जानकारी: https://barcouncilofindia.org

6. अगले कदम

  1. अपने मामले का संक्षिप्त परीक्षण करें और लक्ष्य तय करें कि Will बनवाना है या intestate स्थिति है.
  2. Varanasi के जिले के Probate Court या Family Court से आवश्यक जानकारी प्राप्त करें.
  3. कनिष्ठ वकील, जो succession law में विशेषज्ञ हो, संपर्क करें और पहले ही अपॉइंटमेंट लें.
  4. सभी दस्तावेज एकत्रित करें: जन्म प्रमाण, मृत्यु प्रमाण, संपत्ति रिकॉर्ड, Will आदि.
  5. कानूनी शुल्क, अदालत शुल्क और अनुमानित समय का अवलोकन करें और स्पष्टीकरण मांगें.
  6. पहले नियुक्त वकील के साथ एक पेचीदा-समझौता निर्णय करें और संपूर्ण रणनीति बनाएं.
  7. वाराणसी के स्थानीय अदालतों के लिए आवश्यक फॉर्म और प्रकिया का पालन करें और उचित समय-सीमा में दायर करें.

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