देहरादून में सर्वश्रेष्ठ किशोर न्याय वकील

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Oberoi Law Chambers
देहरादून, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
English
Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
MPS Legal
देहरादून, भारत

English
MPS लीगल देहरादून स्थित एक विधि फर्म है जो आपराधिक कानून, परिवार एवं तलाक कानून, मध्यस्थता, संपत्ति कानून, ऋण वसूली...
जैसा कि देखा गया

1. देहरादून, भारत में किशोर न्याय कानून के बारे में

देहरादून, उत्तराखंड में किशोर न्याय कानून का उद्देश्य बच्चों के हित, सुरक्षा और पुनर्वास है. यह कानून 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है और उनके विशिष्ट समाधान प्रदान करता है.

किशोर न्याय के लिए कानून के अनुसार बाल कल्याण समितियाँ और किशोर न्याय बोर्ड बनते हैं. देहरादून जिले में इन संस्थाओं के माध्यम से CICL के मामले निपटते हैं. इनके निर्णय का लक्ष्य परिवारिक संरक्षा और शिक्षा व पुनर्वास है.

“The Juvenile Justice Act 2015 emphasizes care, protection and rehabilitation of children in conflict with law.”

Source: National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) - https://ncpcr.gov.in

उच्चतम न्यायालय और NCPCR के दिशानिर्देशों के अनुसार बच्चे को पहले एक बच्चे के रूप में माना जाए, फिर अपराधी नहीं. यह देहरादून के व्यवहारिक अनुपालन में लागू होता है.

“A child in conflict with the law must be treated as a child first and given due process and humane treatment.”

Source: Ministry of Women and Child Development (MoWCD) - https://wcd.nic.in

देहरादून के लिए महत्वपूर्ण संरचनाएँ: देहरादून के JJB, बाल कल्याण समिति (CWC) और District Legal Services Authority (DLSA) देहरादून. ये संस्थाएं CICL के लिए मुकदमे और पुनर्वास योजना बनाते हैं.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • स्थिति 1 - गिरफ्तारी के समय कानूनी मार्गदर्शन

    यदि बच्चा गिरफ्तार हो या हिरासत में हो, तो एक अनुभवी अधिवक्ता तुरंत आकर अधिकारों की रक्षा करे और प्रक्रिया समझाए.

    वकील बचाव रणनीति बनाकर JJB और CWC के समक्ष उचित प्रवर्तन सुनिश्चित करेगा.

  • स्थिति 2 - हिरासत या निरीक्षण गृह में रखना

    किशोर न्याय बोर्ड के आदेश के अनुरूप विकल्पों पर सवाल उठे तो वकालत मदद देगी.

    वक्ता पुनर्वास-आधारित कार्यक्रमों पर जोर देगा और शिक्षा से जुड़ी व्यवस्था करवाएगा.

  • स्थिति 3 - जमानत या अग्रिम सुरक्षा

    बेल-केस के लिए कानूनी तर्क और आवश्यक दस्तावेज तैयार कराएंगे.

    वकील जमानत में देरी के जोखिम घटाने के उपाय बताएगा.

  • स्थिति 4 - साक्ष्य और बयानों का प्रबंधन

    किशोर के बयान के रिकॉर्ड और मौजूदा साक्ष्यों की कानूनी वैधता जाँचेंगे.

    गलत या दबाव-पूर्ण बयानों से बचाने की सलाह देंगे.

  • स्थिति 5 - पुनर्वास और शिक्षा कार्यक्रम

    किशोर के लिए शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और चिकित्सा-समर्थन योजना बनवाएंगे.

    पुनर्वास के लिए दायरे, समय-सीमा और निगरानी तय करवाएंगे.

  • स्थिति 6 - अपीलीय प्रक्रियाओं

    यदि निर्णय गलत हो तो उच्च न्यायालय या अपीलीय दायरों की तैयारी करेंगे.

    टाइम-लाइन और ओरल-हियरिंग की व्यवस्थाएँ सूचित करेंगे.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • किशोर न्याय (कारय और संरक्षण) अधिनियम, 2015 - CICL के लिए परिवार-केन्द्रित, पुनर्वास-आधारित प्रक्रियाओं को प्राथमिकता देता है. JJB और CWC की स्थापना पूर्व-निर्धारित है.

  • पोक्सो अधिनियम, 2012 - minors के साथ यौन अपराधों के मामलों में त्वरित सुनवाई और सुरक्षा प्रावधान सुनिश्चित करता है.

  • बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2005 - NCPCR के माध्यम से बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, निगरानी और संस्थागत ढांचे को मजबूत करता है.

  • उद्धृत प्रावधानों के अनुपालन के लिए देहरादून में DLSA और CWC भी तैनात रहते हैं ताकि CICL के लिए सही सलाह और सहायता मिल सके.

नोट: Uttarakhand में इन कानूनों के क्रियान्वयन के लिए राज्य-स्तर पर नियम और दिशानिर्देश लागू होते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किशोर न्याय कानून क्या है?

यह कानून बच्चों के हित, सुरक्षा और पुनर्वास पर केंद्रित है. 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर विशेष प्रक्रिया लागू होती है.

देहरादून में CICL मामलों की सुनवाई कौन देखता है?

देहरादून में CICL के मामलों को Juvenile Justice Board और Child Welfare Committee के माध्यम से संभाला जाता है. जिला अदालत व्यवस्था का निगरानी करती है.

क्या हर CICL को जेल में डाला जा सकता है?

नहीं. JJ Act के अनुसार बच्चों को सामान्य जेल में नहीं रखा जाता. विकल्पों में पुनर्वास, शिक्षा-केन्द्रित कार्यक्रम शामिल हैं.

गिरफ्तारी के समय मुझे क्या अधिकार हैं?

गिरफ्तारी के समय व्यक्ति-गणित, counsel के साथ बातचीत, अभिरक्षा का अधिकार रहता है. इन अधिकारों की पुष्टि वकील करवाते हैं.

कैसे पता करें कि कौन सा वकील है जो CICL मामलों में अनुभव रखता है?

स्थानीय DLSA, बार काउंसिल से संपर्क करें और CICL मामलों के विशेषज्ञ वकील के निर्देश प्राप्त करें.

लोंग-ड्रामा के बिना शुरुआती परामर्श कैसे लें?

पहला परामर्श सामान्यतः मुफ्त या कम शुल्क पर होता है. अपने केस-फाइल, जन्म प्रमाण और स्कूल रिकॉर्ड साथ रखें.

क्या बिना शुल्क के कानूनी सहायता मिल सकती है?

हाँ, DLSA के माध्यम से गरीब या कमजोर बच्चों को मुफ्त कानूनी सहायता मिलती है. पात्रता की पुष्टि जरूरी है.

मैं अपने बच्चे के लिए किस प्रकार का पुनर्वास चुन सकता हूँ?

पुनर्वास में शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और परिवार-संरक्षण कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं.

किस प्रकार के मामलों में POCSO लागू होते हैं?

यदि अपराध बाल-यौन शोषण या हिंसा से जुड़ा हो, तब POCSO के प्रावधान लागू होते हैं. तेजी से सुनवाई और सुरक्षा सुनिश्चित किया जाता है.

कौन-सी दस्तावेज जरूरी होंगे?

जन्म प्रमाण, स्कूल रिकॉर्ड, माता-पिता/ guardian पहचान, चिकित्सीय रिकॉर्ड आदि साथ रखें।

अपील कब संभव है?

JJB के निर्णय पर बार-बार appeal संभव है. अपीलीय दायरों के लिए उचित समयावधि और प्रक्रिया बताई जाएगी.

क्या डिफॉल्ट केस-प्रक्रिया में देरी हो सकती है?

नहीं-नहीं. JJ Act समय-सीमा और प्रक्रियाओं को स्पष्ट करता है ताकि त्वरित निपटार हो. देरी के मामले में वकील तर्क देंगे.

क्या ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध है?

हाँ, NCPCR और MoWCD की साइट्स पर हेल्पलाइन नंबर, दिशानिर्देश और संसाधन उपलब्ध हैं.

5. अतिरिक्त संसाधन

6. अगले कदम

  1. अपने बच्चे की उम्र, आरोप और स्थिति स्पष्ट करें. लिखित नोट रखें.
  2. Dehradun के JJB और CWC से संपर्क करें और केस-स्टेटस जानें.
  3. किशोर न्याय कानून में अनुभव रखने वाले अधिवक्ता या कानूनी सलाहकार से मिलें.
  4. जरूरी दस्तावेज एकत्र करें-जन्म प्रमाण, पहचान पत्र, स्कूल रिकॉर्ड आदि.
  5. DLSA से मुफ्त कानूनी सहायता के लिए आवेदन करें अगर पात्र हों.
  6. पहली बैठक में केस-योजना, फीस और समय सीमा स्पष्ट पूछें.
  7. जो भी निर्णय हो उसे समझें और आवश्यक हो तो अपील की तैयारी करें.

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