मधुबनी में सर्वश्रेष्ठ किशोर न्याय वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
मधुबनी, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
Hindi
English
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

1. मधुबनी, भारत में किशोर न्याय कानून के बारे में

मधुबनी जिले में किशोर न्याय के लिए मुख्य कानून जम्मू-जोड़ा गया केंद्रीय ढांचा है The Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015. यह कानून बच्चों के संरक्षण, देख-रेख, विकास और पुनर्वास पर केंद्रित है।

स्थानीय विभागों में District Child Protection Unit (DCPU), Child Welfare Committee (CWC) और Juvenile Justice Board (JJB) कार्य करते हैं, ताकि किशोर-विरोधी कानून और देखरेख के मामलों का त्वरित और उपयुक्त निपटान हो सके।

नीति-आधारित सहायता के लिये NALSA के माध्यम से नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध रहती है, ताकि किशोरों को न्याय प्रक्रिया में समान अवसर मिलें।

“The Juvenile Justice Act provides for the care, protection, development and rehabilitation of children in need of care and protection and in conflict with law.”
- Ministry of Women and Child Development, Government of India

“Protection of child rights is essential for every child to enjoy a life of dignity and opportunity.”
- National Commission for Protection of Child Rights

“Every child has the right to protection from violence and exploitation.”
- UNICEF India

हाल के परिवर्तनों के साथ जिले में CWC, JJB और DCPU के प्रावधान सशक्त हुए हैं ताकि बाल-अपमान, उत्पीड़न और अपराध-निवारण के लिए त्वरित न्याय संभव हो।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

किशोर न्याय कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले प्रमुख परिदृश्य

  • किशोर мерзे के रूप में पुलिस हिरासत या पूछताछ के दौरान उचित कानूनी प्रतिनिधित्व चाहिए हो।
  • किशोर-आरोपी पर Juvenile Justice Board (JJB) में ट्रायल या समन हो और त्वरित पुनर्वास के विकल्प चाहिए हों।
  • JNIC मामले में बाल-रक्षा उपलब्ध कराने के लिये District Child Protection Unit (DCPU) से सहयोग की आवश्यकता हो।
  • POCSO घटनाओं में एक बचाव-उच्चारण की आवश्यकता हो, ताकि बालिक/किशोर को सुरक्षा और न्याय मिले।
  • कानून के अनुसार छोड़-छाड़, जमानत या ऑब्जर्वेशन होम में स्थानांतरण जैसे निर्णय के लिये विशेषज्ञ वकील चाहिए हो।
  • जिन्हें सरकारी कानूनी सहायता से लाभ मिलना संभव है, उन्हें NALSA के माध्यम से उचित मार्गदर्शन चाहिए हो।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • The Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 - किशोर in conflict with law (JCL) और in need of care and protection (JNIC) के लिए समग्र ढांचा देता है; JJB, CWC, DCPU और सुधारात्मक पुनर्वास प्रक्रियाओं को स्थापित करता है।
  • Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 (POCSO) - बच्चों के साथ यौन अपराधों से सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करता है; किशोरों पर भी लागू होता है और त्वरित जाँच-प्रक्रिया सुनिश्चित करता है।
  • Right to Education Act, 2009 (RTE) - बच्चों के लिये मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करता है; किशोरों के बेहतर शिक्षा अवसरों के लिये महत्त्वपूर्ण है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किशोर न्याय कानून क्या है?

यह قانون बच्चों के संरक्षण, देख-रेख और पुनर्वास के लिए केंद्रित है। इसमें जुवेनाइल इन कॉन्टैक्ट विद लॉ (JCL) और जुवेनाइल इन नीड ऑफ केयर एंड प्रोटेक्शन (JNIC) दोनों प्रकार के प्रकरण आते हैं।

मधुबनी में इन प्रकरणों का निपटान कहाँ होता है?

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) में ट्रायल और निर्णय होते हैं। बच्चों के संरक्षण के लिए चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (CWC) और जिला चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट (DCPU) साथ काम करते हैं।

कौन सी उम्र बालक-रूपी अपराध के लिए मानी जाती है?

अक्सर 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को बाल-वर्ग माना जाता है। बिहार में भी JJ Act के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे इस प्रक्रिया के अन्तर्गत आते हैं।

क्या 16 से 18 वर्ष के किशोर भी जघन्य अपराध पर ट्रायल में आ सकता है?

JJ Act के अनुसार, कुछ घटनाओं में ऐसे किशोरजनों के विषय में JJB द्वारा निर्णय होते हैं, परन्तु यह कानून के दायरे में स्पष्ट निर्धारण पर निर्भर है।

किया गया अपराध कब तक fragment होता है?

किशोरी-युवक के लिए समय-सीमा और सुनवाई की गति निर्धारित कानून के अनुसार रहती है। JJB के समक्ष त्वरित सुनवाई के प्रावधान हैं।

कानूनी सहायता कैसे मिलेगी?

NALSA के माध्यम से नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध हो सकती है। स्थानीय जन-हित सेवाओं के लिये DCPU या CWC से संपर्क करें।

एक बच्चा यदि आरोपी है तो क्या वह जेल जाएगा?

किशोर न्याय नियम के अनुसार बच्चों को जेल में नहीं रखा जाना चाहिए; उचित पुनर्वास और संरक्षित वातावरण में रखा जाता है, जब तक कि निर्णय नहीं होता।

किशोर पर आरोपित POCSO का केस कैसे संभाला जाता है?

POCSO के अंतर्गत सुरक्षा से जुड़ी प्रक्रियाएं लागू हैं; बालक/बालिका के लिए खास आडिटिंग सुनवाई और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित होते हैं।

अगर मामला धारा-फाइन या गिरफ्तारी गलत हो तो क्या करें?

कानूनी सलाहकार से तुरन्त संपर्क करें और स्थानीय पुलिस, DCPU, JJB से आवश्यक जानकारी मांगें।

किशोर न्याय में किस प्रकार का दायरा है?

किशोर न्याय में जाँच, सुनवाई, पुनर्वास, शिक्षा, चिकित्सा और पुनर्वास पर विशेष जोर रहता है।

क्या दस्तावेज़ी आवश्यकताएं हैं?

पहचान प्रमाण, जन्म प्रमाण, स्कूल प्रमाणपत्र, माता-पिता के दस्तावेज और अगर उपलब्ध हो तो नारी-शक्ती प्रांत के प्रमाण भी साथ रखें।

कानूनी सहायता के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी?

आय प्रमाण पत्र, छात्र-रायन (school roll) और पत्ते-पत्रों समेत पहचान संबंधी कागजात आवश्यक होते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) - https://ncpcr.gov.in/
  • Bihar Department of Women, Child Development and Social Welfare (WCD) - https://wcd.bihar.gov.in/
  • National Legal Services Authority (NALSA) - https://nalsa.gov.in/

6. अगले कदम

  1. अपने मामले का संक्षेप समझ लें और आवश्यक प्रश्न लिख लें।
  2. मधुबनी के पास के DCPU, CWC और JJB के संपर्क नंबर खोजें।
  3. किसी अनुभवी किशोर-न्याय विशेष वकील/कानूनी सलाहकार से शुरुआती परामर्श लें।
  4. NGO या सरकारी कानूनी सहायता (NALSA) के लिये आवेदन करें और फ्री लॉयर-सेवा की पुष्टि करें।
  5. जरूरत हो तो स्थानीय अदालत में free legal aid के प्रमाण-पत्र जमा करें।
  6. प्रत्येक कदम पर दस्तावेज संकलित रखें और दोस्त, परिवार के सदस्य के साथ प्रक्रिया साझा करें।
  7. घोषित दरों और शुल्क की शर्तें स्पष्ट रूप से पूछें और लिखित ठोस योजना बनाएं।

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