सहरसा में सर्वश्रेष्ठ किशोर न्याय वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
सहरसा, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

1. सहरसा, भारत में किशोर न्याय कानून के बारे में

सहरसा बिहार के पूर्वी हिस्से में स्थित एक जिला है।

किशोर न्याय कानून बच्चों के इलाज, सुरक्षा और पुनর্বास पर केन्द्रित है।

यह कानून बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्रमुख मानकर कार्य करता है।

2021 में किशोर न्याय अधिनियम में संशोधन हुआ, ताकि आवश्यक परिस्थितियों में 16-18 वर्ष के किशोर भी गम्भीर अपराध के मामलों में ट्रायल कर सकें। राजधानी पटना से संचालित न्यायिक प्रक्रियाएं सहरसा के जिला अदालत, Juvenile Justice Board और Child Welfare Committee के साथ मिलकर काम करती हैं।

The Act provides for care, protection and rehabilitation of children in conflict with law.

Source: Ministry of Women and Child Development (WCD) - https://wcd.nic.in

Best interests of the child shall be the guiding principle in all actions concerning children.

Source: National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) - https://ncpcr.gov.in

The act aims to preserve the best interests of the child through a child-friendly justice delivery system.

Source: Press Information Bureau (PIB) - https://www.pib.gov.in

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

किशोर न्याय मामलों में सही कानूनी सहायता आवश्यक है ताकि बच्चे के अधिकार सुरक्षित रहें।

सहरसा से जुड़े वास्तविक परिदृश्यों में अधिवक्ता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है ताकि प्रक्रिया स्पष्ट और निष्पक्ष रहे।

  • परिदृश्य 1: किसी बच्चे पर सहरसा के स्थानीय थाने में अपराध का आरोप लगे। जैसे ही गिरफ्तारी हो, वकील तुरंत सूचना दे कर गिरफ्तारी रजिस्टर सही तरीके से बने, यह जरूरी है।
  • परिदृश्य 2: बच्चे का चयनित कानूनी प्रतिनिधि JJ Board या CWC के समक्ष उपस्थित हो ताकि अधिकारों की सुरक्षा हो सके।
  • परिदृश्य 3: बाल-तथा नाबालिग पीड़ित या गवाह के रूप में सहरसा में घटना के समय حفاظت और गवाह सुरक्षा की मांग हो तो वकील मदद करें।
  • परिदृश्य 4: बच्चों के लिए गिरफ्तारी के बाद उचित Bail या बाल-रिहाई की जरूरत हो तो कानूनी सलाह आवश्यक है।
  • परिदृश्य 5: 16-18 वर्ष के बच्चे द्वारा गम्भीर अपराध पर विचार हो और ट्रांसफर के प्रश्न हों तो विशिष्ट विधिक परामर्श चाहिए।
  • परिदृश्य 6: CWC या JJ Board के निर्णय के विरुद्ध अपील या समीक्षा की जरूरत हो तो अनुभवी अधिवक्ता की सलाह लें।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

सहरसा में किशोर न्याय से संचालित प्रमुख कानून नीचे दिए गए हैं।

  • किशोर न्याय (देखभाल और सुरक्षा) अधिनियम, 2015 - 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर लागू और JJB, CWC जैसी संस्थाओं के माध्यम से देखरेख का प्रावधान।
  • POCSO अधिनियम, 2012 - बाल-लैंगिक उत्पीड़न के मामलों में सुरक्षा और सुनवाई के प्रावधान प्रदान करता है।
  • बिहार राज्य किशोर न्याय नियम, 2017 (या समकक्ष बिहार कानून-नियम) - बिहार राज्य के अंतर्गत JJ Act के अनुपालन नियम और प्रक्रियात्मक निर्देश।

इन कानूनों के अनुसार Saharsa जिले में Juvenile Justice Board, Child Welfare Committee और स्थानीय अदालतों के साथ लागू निर्देश काम करते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किशोर क्या 18 वर्ष से कम के बच्चे को कहते हैं?

हाँ, JJ Act के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे ही बाल-रूप में माने जाते हैं।

अगर बच्चा पुलिस हिरासत में हो तो मेरा क्या अधिकार है?

आप बच्चे के साथ कानूनन संरक्षित अधिकारों के बारे में सही सूचना दें। बच्चे को वकील से सलाह लेने, माता-पिता या संरक्षक से मिली-जुली अनुमति, और फरार न होने के निर्देश मिलते हैं।

मैं Saharsa में किशोर न्याय मामले के लिए वकील कैसे ढूंढूं?

स्थानीय बार असोसिएशन, NCPCR के हेल्पलाइन और NALSA के लोक-उपयोगी संसाधनों से संपर्क करें। विशेषज्ञता किशोर न्याय में हो तो बेहतर लाभ मिलता है।

बच्चे के विरुद्ध गम्भीर अपराध हो तो क्या ट्रायल सामान्य अदालत में होगा?

2021 में किशोर न्याय अधिनियम में संशोधन हुआ है जो कुछ मामलों में 16-18 वर्ष के बच्चों के विरुद्ध गम्भीर अपराध पर ट्रायल सामान्य अदालत में हो सकता है।

कौन-सी संस्था अपने अधिकारों के संरक्षण में सहायता देती है?

NCPCR, WCD, और NALSA जैसी संस्थाएं कानूनी सहायता और संरक्षण के लिए उपलब्ध हैं।

क्या बच्चे के लिए कानूनी सहायता मुफ्त हो सकती है?

हाँ, बिहार और केंद्र सरकार के जरिये नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध है; NALSA और लोक-उपयोगी कानून-सहायता सेवाओं से संपर्क करें।

किशोर न्याय बोर्ड (JJB) क्या है?

JJB बच्चे के लिए देखभाल, संरक्षण और पुनर्वास के निर्णय लेता है। यह अदालत नहीं है, बल्कि अलग ट्राय-युनिट है।

कौन-सी स्थिति में केस CWC में जाता है?

सीडब्ल्यूसी बाल-देखभाल और सुरक्षा के लिए शिकायतों की समीक्षा करती है। यदि बच्चा खतरे में हो तो CWC समुचित कदम उठाती है।

बच्चे की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?

सबसे पहले स्थानीय कानून-व्यवस्था को सूचित करें, फिर अधिवक्ता से सलाह लें और आवश्यक हो तो CWC से संपर्क करें।

क्या POCSO के मामलों में विशेष सुरक्षा सुरक्षा है?

हाँ, POCSO कानून के तहत बच्चों के विरुद्ध अपराधों में विशेष गवाह सुरक्षा और जल्दी सुनवाई के उपाय होते हैं।

कौन सा दस्तावेज़ साथ रखना चाहिए?

जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता/संरक्षक के पहचान-पत्र, मुकदमे के दस्तावेज और मेडिकल रिकॉर्ड रखना लाभदायक रहता है।

किशोर न्याय में अपील कैसे संभव है?

JO/आवेदन JJ Act के अंतर्गत संभव है; सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय की दिशा-निर्देश के अनुसार प्रक्रिया अपनाई जाती है।

5. अतिरिक्त संसाधन

किशोर न्याय से जुड़ी जानकारी और मदद के लिए नीचे प्रमुख संगठन हैं:

  • National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) - https://ncpcr.gov.in
  • Ministry of Women and Child Development (WCD) - https://wcd.nic.in
  • NALSA (National Legal Services Authority) - https://nalsa.gov.in

6. अगले कदम

  1. स्थिति की सटीक जानकारी इकट्ठा करें, जैसे उम्र, मामलें का nature, और गिरफ्तारी की तारीख।
  2. निकटतम वकील या कानून-सेवा ऑर्गनाइज़ेशन से संपर्क करें; किशोर न्याय में अनुभवी होने पर प्राथमिकता दें।
  3. माता-पिता या संरक्षक के साथ मिलकर अपना खाता और पहचान-सत्यापन सुनिश्चित करें।
  4. JJ Board या CWC से मिलने के लिए समय-सारिणी पूछें और पूर्व-आरोप-निवर्तन की तैयारी करें।
  5. आवश्यक दस्तावेज और मेडिकल रिकॉर्ड तैयार रखें ताकि सुनवाई में सहूलियत हो।
  6. अगर स्थिति जरूरत हो तो नि:शुल्क कानूनी सहायता के लिए NALSA या लोक-उपयोगी सेवाओं से अनुरोध करें।
  7. स्थानीय न्यायिक प्रणाली के निर्देशों का पालन करते रहें और हार-जीत से आगे भी बच्चों के हित को देखें।

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