लखनऊ में सर्वश्रेष्ठ सामान्य मुकदमेबाजी वकील

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2017 में स्थापित
English
लॉयर कॉर्पोरेट, मुख्यालय लखनऊ में स्थित, एक प्रतिष्ठित कानूनी फर्म है जो कॉर्पोरेट, संपत्ति, रियल एस्टेट, तलाक,...
R K and Associates
लखनऊ, भारत

2003 में स्थापित
English
आर.के. एंड एसोसिएट्स भारत में एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है, जो दिवालियापन, सिविल, आपराधिक, वृद्ध एवं पारिवारिक कानून...

1980 में स्थापित
English
1980 में स्थापित, डी एस चौबे एंड एसोसिएट्स (एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स) लखनऊ, भारत में आधारित एक पूर्ण-सेवा विधिक फर्म...
Advo Talks
लखनऊ, भारत

2019 में स्थापित
English
AdvoTalks, जो अकरशन श्रीवास्तव द्वारा मुख्य विधि अधिकारी वत्सल्य अजीत श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में स्थापित एक...
लखनऊ, भारत

English
एटी लॉ चैम्बर एक गतिशील पूर्ण-सेवा कानूनी फर्म है जिसका मुख्यालय लखनऊ, भारत में स्थित है, और इसके अतिरिक्त...
Mishra & Associates Law Firm

Mishra & Associates Law Firm

30 minutes मुफ़्त परामर्श
लखनऊ, भारत

2012 में स्थापित
उनकी टीम में 6 लोग
English
Hindi
मिश्रा एंड एसोसिएट्स दशकों से एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है। हमारे विशेषज्ञ कानूनी पेशेवरों की टीम के साथ, हम सिविल,...

2010 में स्थापित
उनकी टीम में 500 लोग
English
ABHISHEK BHATNAGAR AND ASSOCIATES LEGAL CONSULTANTS LLP is a Lucknow-based law firm with PAN India reach, founded in 2010 by Adv. Abhishek Bhatnagar. It is recognized for its focus on cyber laws and cyber forensics, and has grown into a prominent, dedicated, committed, tested, and trusted name for...
LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH
लखनऊ, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

भारत सामान्य मुकदमेबाजी वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 1 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें सामान्य मुकदमेबाजी के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

मालिक सुरक्षा राशि नहीं दे रहा है
नागरिक मुक़दमा सामान्य मुकदमेबाजी
मेरे मकान मालिक ने पिछले महीने का किराया ले लिया और कुछ दिनों के बाद सुरक्षा जमा राशि देने का वादा किया, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया वह अत्यधिक मांग करता रहा और कहता है कि वह मेरी राशि नहीं दे सकता।
वकील का उत्तर D.H.Associates द्वारा

वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजें।

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1 उत्तर

1. लखनऊ, भारत में सामान्य मुकदमेबाजी कानून के बारे में

लखनऊ में सामान्य मुकदमेबाजी नागरिक मामलों से जुड़ा क्षेत्र है. यह कॉन्ट्रैक्ट, प्रॉपर्टी, दाय-हक, डिफेमेशन जैसी सामान्य थर्मों से जुड़े विवादों को सुलझाता है.

मुख्य कानून CPC 1908, Indian Evidence Act 1872 और Indian Contract Act 1872 के साथ लागू होते हैं. इन कानूनों के तहत वादी-प्रतिवादी के अधिकार और प्रक्रियाएं निर्धारित हैं.

Lucknow में जिला अदालतें सामान्य मुकदमेबाजी के मुख्य क्षेत्र हैं. Allahabad High Court की Lucknow बेंच राज्य के उच्च-स्तरीय आदेशों और अपीलों पर কাজ करती है. नागरिक मामलों के लिए प्रथम स्थान जिला अदालतें हैं.

ADR के माध्यम जैसे Lok Adalat और arbitration से भी हल निकल सकता है. समय-सीमा, लागत और प्रक्रिया की स्पष्टता इन मामलों में अहम रहती है.

“The State shall not deny to any person equality before the law or the equal protection of laws within the territory of India.”

Source: Constitution of India, Article 14. Official portal: legislative.gov.in

“NALSA provides free legal services to eligible persons who have limited or no means to pursue legal proceedings.”

Source: National Legal Services Authority (NALSA). Official site: nalsa.gov.in

“Lok Adalat is a system for amicable settlement of disputes and provides speedy justice at a lower cost.”

Source: eCourts Portal. Official site: ecourts.gov.in

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • कॉन्‍ट्रैक्ट-डिफॉल्ट - Lucknow में कॉन्ट्रैक्ट क्लॉज के अनुसार बकाया मांगना और डिफॉल्ट के बाद मुकदमा दायर करना सामान्य है. एक वकील बेहतर दीर्घकालीन समाधान और अनुबंध-वार जवाब दे सकता है.

  • प्रॉपर्टी-टाइटल विवाद - Lucknow शहर के पुराने और नए पते पर title-डिप्लिकेट और बंटवारे का मामला आम है. अधिवक्ता title-प्रूफ और रिकॉर्ड चेक में मदद कर सकता है.

  • किरायेदारी और रेंट कानून - किराएदार-स्वामी के विवाद Lucknow में बढ़ते जा रहे हैं. उचित राहत और eviction-प्रक्रिया के लिए advicer की जरूरत पड़ेगी.

  • ऋण-नोटिस और ऋण-बकाया - स्थानीय बैंकों या संस्थाओं के विरुद्ध debt recovery suits Lucknow में आम हैं. आकस्मिक राहत के लिए अदालत-आदेश आवश्यक हो सकता है.

  • धन-हानि या defamation - व्यक्तिगत या व्यवसायिक प्रतिष्ठा से जुड़े दावे Lucknow में सक्रिय हैं. पर्याप्त साक्ष्यों के साथ दावा प्रस्तुत करना चाहिए.

  • VARIOUS सरकारी-प्रशासनिक विवाद - राजस्व, भवन-आदेश और अनुशासनिक उपायों के विरुद्ध वादी को उचित प्रतिनिधित्व चाहिए.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) - civil suits, plaint, written statement, evidence, trial, and appeals के सामान्य कदम निर्धारित करता है.
  • Indian Contract Act, 1872 - अनुबंध की मान्यताओं, बाध्यकारी दायित्व और breach के उपाय बताता है.
  • Transfer of Property Act, 1882 - संपत्ति-हस्तांतरण, sale, mortgage आदि पर नियम देता है.
  • Indian Evidence Act, 1872 - साक्ष्यों के पहचान, सत्यापन और पक्ष-निर्णয় के नियम देता है.

UP Rent Control Act सहित क्षेत्र-विशिष्ट कानून भीदा पर लागू होते हैं, खासकर tenancy-प्रश्नों के लिए. Lucknow में इन कानूनों की व्यावहारिक सहायता District DLSA से प्राप्त हो सकती है.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सामान्य मुकदमेबाजी क्या है?

यह नागरिक मामलों से जुड़े विवादों की प्रक्रिया है. समझौता और न्याय पाने के लिए अदालत-प्रक्रिया का पालन किया जाता है.

Lucknow में मुकदमा कैसे दायर करें?

सबसे पहले suitable कोर्ट चुनें. फिर plaint, witnesses, दस्तावेज और शुल्क के साथ एक civil suit फाइल करें.

कौन-सी दस्तावेज आवश्यक हैं?

प्रमाण पत्र, agreement-रजिस्ट्रेशन प्रतियां, पहचान-पत्र, भूमि-रोशी, पत्राचार आदि संलग्न करें. हर मामले के अनुसार अतिरिक्त दस्तावेज लगेंगे.

अदालत में किस प्रकार का खर्च आएगा?

फीस, अधारण-खर्च, प्रक्रियात्मक शुल्क और legal aid-फीस मिलाकर कुल लागत निर्धारित होगी. Lucknow district court में अलग-अलग शुल्क होते हैं.

क्या मैं mediation या Lok Adalat से हल निकाल सकता हूँ?

हाँ. Lok Adalat और mediation से त्वरित और कम खर्च-कर्तव्य समाधान संभव है. कुछ मुद्दों पर यह पहले विकल्प भी हो سکتا है.

क्या मैं High Court में अपील कर सकता हूँ?

जी हाँ. District Court के निर्णय के विरुद्ध High Court की अधिकार-सीमा में अपील संभव है. अपील के लिए निर्धारित समय-सीमा और शुल्क होते हैं.

क्या मैं मुफ्त कानूनी सहायता ले सकता हूँ?

हां. NALSA द्वारा पात्र व्यक्तियों को मुफ्त कानूनी सेवाएं मिलती हैं. आय-समूह और मामले की प्रकृति के अनुसार सहायता मिलती है.

कैसे मैं अच्छा सामान्य मुकदमाबाज़ वकील चुनूं?

लोकल-फील्ड में अनुभव, ट्रैक रिकॉर्ड, उपलब्धता और फीस समझौते को चेक करें. पहले परामर्श में उम्मीद-खनियाँ स्पष्ट करें.

कब interim relief या injunction चाहिए?

जब मामला-दौरान नुकसान अनुदार हो सकता हो. court-स्तर पर temporary orders से status-quo बनाए रखा जा सकता है.

क्या admissible submissions पहले से तैयार कर सकते हैं?

हाँ. आपके दस्तावेज की सूची बनाकर advocate के साथ तैयारी करें. यह प्रक्रिया को तेज कर देता है.

क्या मैं अदालत की भाषा में दस्तावेज प्रस्तुत कर सकता हूँ?

सामान्यतः हिंदी या अंग्रेजी में submissions acceptable होते हैं. court के अनुरोध पर अनुवाद/समर्थन-प्रत्र दे सकते हैं.

कौन से समय-सीमा कानून में महत्वपूर्ण हैं?

plaint-filing, reply, and evidence- समय-सीमा CPC 1908 के अधीन तय होते हैं. समय-सीमा का उल्लंघन案件-स्थिति पर असर डाल सकता है.

Lucknow में क्या ADR-परामर्श उपलब्ध हैं?

हाँ. Lucknow-के ADR-प्रक्रिया और Lok Adalat के माध्यम से लोक-न्याय संभव है. स्थानीय district court-office से मार्गदर्शन लें.

5. अतिरिक्त संसाधन

  1. National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता के लिए आधिकारिक साइट पर आवेदन-विधि और निर्देश मिलते हैं. nalsa.gov.in.

  2. Allahabad High Court, Lucknow Bench - Lucknow क्षेत्र के केशों के लिए उच्च-स्तरीय आधिकार-उपचार का स्रोत. Official portal: allahabadhighcourt.in.

  3. District Legal Services Authority (DLSA) Lucknow - Lucknow जिले के नागरिकों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता और Lok Adalat आयोजन. Official eCourts portal: districts.ecourts.gov.in/lucknow.

6. अगले कदम

  1. अपना विषय और उद्देश्य स्पष्ट करें; किस प्रकार का dispute है, उसका प्रकार पहचानें.
  2. Lucknow के अनुभवी सामान्य मुकदमेबाजी_advocate की सूची बनाएं; क्षेत्र-विशेष अनुभव देखें.
  3. पहला मुलाकाती-परामर्श लें; फीस-चर्चा और अपेक्षित परिणाम स्पष्ट करें.
  4. जर संभव हो तो ADR- विकल्प पर बातचीत करें; Lok Adalat के बारे में पूछें.
  5. दस्तावेजों की एक मास्टर-लिस्ट बनाएं; सभी आवश्यक रिकॉर्ड साथ रखें.
  6. फीस-फॉर्म और retainers के बारे में written agreement लें; transparency बनाए रखें.
  7. जूरी-शर्तों और jurisdiction की जानकारी को verify करें; UP-कॉन्फ़िगरेशन समझ लें.

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