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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

Sushil Wattal

Sushil Wattal

30 minutes मुफ़्त परामर्श
जम्मू, भारत

2009 में स्थापित
उनकी टीम में 5 लोग
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सुशील वाट्टल एक अभ्यासरत अधिवक्ता हैं और कानून के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक अनुभव रखते हैं। वह व्यवसायों,...
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भारत विवाह वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

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क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
विवाह परिवार तलाक और अलगाव
मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा

आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...

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1 उत्तर

1. जम्मू, भारत में विवाह कानून के बारे में: जम्मू, भारत में विवाह कानून का संक्षिप्त अवलोकन

जम्मू क्षेत्र में विवाह कानून का ढांचा मुख्य रूप से भारतीय क्षेत्रीय कानूनों पर निर्भर है। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि समुदायों के लिए विभिन्न व्यक्तिगत कानून और नागरिक कानून लागू होते हैं।

मुख्य कानून प्रकार दो बड़े समूह में आते हैं: पारिवारिक कानून (यानी विवाह-पत्नीत्व और तलाक से जुड़े नियम) और नागरिक/संयुक्त विवाह कानून (जिनमें आपसी रजिस्ट्रेशन और वैधानिक विवाह शामिल हैं)। विशेष विवाह अधिनियम और हिंदू विवाह अधिनियम जैसी केंद्रीय धाराओं के अनुसार विवाह स्थापित होते हैं, जबकि कुछ मामलों में मुस्लिम पर्सनल लॉ और अन्य व्यक्तिगत कानून प्रभावी रहते हैं।

2019 के बाद जम्मू-कश्मीर के प्रशासनिक बदलाव के बावजूद विवाह से जुड़े कुछ कानून केंद्रीय अधिनियमों के अंतर्गत ही चलते हैं।

“The Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019 reorganises the state into two Union Territories.”
यह परिवर्तन प्रशासनिक ढांचे को बदले पर विवाह से जुड़े निजी कानूनों की मौजूदा व्यवस्था को पूर्ववत भी रहने दिया गया है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • तलाक, पृथक-आवेदन या रख-रखाव से जुड़े मामले में न्यायिक प्रक्रिया सही ढंग से पूरी करने के लिए एक अनुभवी वकील की जरूरत होती है. जम्मू शहर के फैमिली कोर्ट में दायर याचिका के साथ उचित दस्तावेजी सत्यापन आवश्यक होते हैं.

  • बच्चों के अधिकार, संरक्षण, अभिभावकत्व और कस्टडी के मामलों में कानूनी सलाह आवश्यक रहती है ताकि न्यायिक निर्णय बच्चों के हित में हों।

  • पारस्परिक विवाह, खासकर बहुधर्मी/बहुधर्मीय विवाह के मामले में 30 दिन के नोटिस की प्रक्रिया और पंजीकरण की जटिलताओं को समझना जरूरी है, ताकि विवाह वैध हो सके।

  • किसी भी प्रकार के घरेलू अत्याचार, संरक्षण कानून और maintenance के दायरे में उचित राहत पाने हेतु एक सक्षम अधिवक्ता की भूमिका अहम है।

  • उच्च अदालतों और फैमिली कोर्ट में उचित दस्तावेज, साक्ष्य और तर्क प्रस्तुत करने के लिए अनुभवी कानूनी सुझाव लाभदायक रहते हैं।

  • यदि आप जम्मू-कश्मीर के भीतर किसी समुदाय के व्यक्तिगत कानून के दायरे में आते हैं, तो स्थानीय प्रथाओं और अधिनियमों की परस्पर समझ की जरूरत पड़ेगी, जिसे विशेषज्ञ वकील बेहतर समझाते हैं।

उद्धरण: केंद्रीय कानूनों के प्रावधानों और जम्मू-कश्मीर के प्रशासनिक परिवर्तन के बारे में आधिकारिक स्रोत देखें।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 - यह हिंदू समुदाय के भीतर विवाह के पंजीकरण, वैधानिकता और तलाक आदि से जुड़े प्रावधान देता है।

“An Act to amend and codify the law relating to marriage among Hindus.”

विशेष विवाह अधिनियम, 1954 - यह विभिन्न धर्मों के व्यक्तियों के बीच नागरिक विवाह के लिए संज्ञान देता है और समाज-धर्म से मुक्त वैवाहिक व्यवस्था प्रदान करता है।

“An Act to provide for the civil marriage of persons belonging to different religions.”

मुस्लिम पर्सनल लॉन्‍ (शरियत) एप्लिकेशन Act, 1937 - जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में मुस्लिम व्यक्तियों के व्यक्तिगत कानून की कुछ धाराओं को शरियत के अनुसार लागू करने के लिए स्थापित कानून माना जाता है।

“An Act to apply the Shariat in matters of personal law among Muslims.”

इन कानूनों के साथ जम्मू-कश्मीर के विशेष प्रशासनिक इतिहास के कारण कुछ मामलों में स्थानीय अदालतों की प्रक्रियाओं में अंतर आ सकता है। आधिकारिक स्रोत से पाठ्यों का संदर्भ लेते रहें:

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू में विवाह को पंजीकृत कैसे किया जाता है?

विधि के अनुसार, वैवाहिक पंजीकरण के लिए आप सामान्यतः हिन्दू विवाह अधिनियम या विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत आवेदन करते हैं। जिला विवाह रजिस्ट्रार कार्यालय में आवश्यक कागजात प्रस्तुत करें।

Inter-racial या inter-religious विवाह के लिए कौन सा कानून लागू होता है?

ऐसे विवाह के लिए विशेष विवाह अधिनियम 1954 लागू होता है, जो दो अलग-धर्मीय व्यक्तियों को Civil Marriage की अनुमति देता है। 30 दिन का नोटिस देना जरूरी हो सकता है।

तलाक के लिए मुझे किस कानून के अंतर्गत जाना चाहिए?

कुल मिलाकर तलाक का मार्ग हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 या मुस्लिम पर्सनल लॉन्‍ (शरियत) एप्लिकेशन एक्ट, 1937 के अंतर्गत हो सकता है, समुदाय पर निर्भर है। फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर सकती हैं।

कस्टडी और अभिभावकत्व कैसे तय होते हैं?

कस्टडी और अभिभावकत्व Child Welfare and Guardianship Act और परिवार न्यायालय के निर्णय के अनुसार तय होते हैं, बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता मिलती है।

Maintenance या alimony किस आधार पर मिलता है?

Maintenance कानूनों के अनुसार, तलाक के बाद एक पक्ष को अन्य पक्ष से सहायता मिल सकती है। यह आय, जीवनशैली, बच्चों के खर्च आदि पर निर्भर होता है और अदालत के निर्देश से तय होता है।

30 दिन के नोटिस का क्या मतलब है और कहाँ देना होता है?

विशेष विवाह के दौरान नोटिस 30 दिन पहले विवाह अधिकारी के पास देना होता है, ताकि किसी भी बाधा पर विचार किया जा सके। जम्मू क्षेत्र में यह प्रक्रिया स्थानीय विवाह अधिकारी के अनुसार चलती है।

क्या मुस्लिम विवाह के लिए कोई विशेष रजिस्ट्रेशन जरूरी है?

यदि मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के अंतर्गत विवाह होता है, तो भागीदारी/रजिस्ट्रेशन क्षेत्रीय प्रथाओं पर निर्भर हो सकता है; कानूनी मार्गदर्शन से जरूरी दस्तावेज तय करें।

Divorce के बाद maintenance कैसे तय होता है?

तलाक के बाद maintenance स्थिर आय और बच्चों की जरूरतों के आधार पर अदालत द्वारा निर्धारित होता है। यह उम्र, स्वास्थ्य और आय पर निर्भर रहता है।

अगर दस्तावेज गलत हों तो क्या करें?

गलत दस्तावेज के मामले में अदालत से सुरक्षा आदेश या पुनः आवेदन के लिए वकील की मदद लें। सही दस्तावेजों के साथ ही प्रक्रिया सुगम होती है।

क्या जम्मू में same-sex विवाह मान्य हैं?

भारतीय कानून में अभी तक समान-लिंग विवाह को वैधता नहीं मिली है; विवाह हेतु वैकल्पिक कानूनी मार्ग (जैसे SMA) के प्रावधानों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन स्थिति स्थिति-विशिष्ट है।

कौन से कागज़ात सामान्यतः आवश्यक होते हैं?

पहचान पत्र, आय प्रमाण, जन्म प्रमाण पत्र, विवाह पंजीकरण के आवेदन फॉर्म, और आवश्यकता अनुसार समुदाय-विशिष्ट प्रमाण पत्र आदि आम तौर पर मांगे जाते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  1. National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता और परिवार कानून मामलों के लिए मार्गदर्शन. https://nalsa.gov.in/
  2. National Commission for Women (NCW) - महिला अधिकारों, विवाह-सम्बन्धी शिकायतों के समाधान के लिए संसाधन. https://ncw.nic.in/
  3. Ministry of Women and Child Development (WCD) - जनरल गाइडेंस, पेस-इं-शूट और विवाहित महिलाओं के अधिकार. https://wcd.nic.in/

6. अगले कदम

  1. अपना केस प्रकार स्पष्ट करें - तलाक, कस्टडी, maintenance, पंजीकरण आदि निर्धारित करें।
  2. जम्मू-कश्मीर में अनुभवी फैमिली लॉयर या एडवोकेट खोजें जिनका स्पेशलाइज़ेशन matrimonial law में हो।
  3. लोकल बार काउंसिल या NALSA के अंतर्गत उपलब्ध फ्री-लीगल-एड सुविधा का उपयोग करें।
  4. पहला कॉन्सल्टेशन निर्धारित करें ताकि आपके मामले के लिए संभावित रणनीति समझें।
  5. आवश्यक दस्तावेज सूची बनाकर एकत्र करें-पहचान, आय, विवाह प्रमाण, बच्चे के दस्तावेज आदि।
  6. निर्धारित फीस-रूपरेखा और कार्य-विधि समझें; लिखित वर्किंग-एग्रीमेंट लें।
  7. अगर आवश्यक हो तो फैमिली कोर्ट के कार्यालय से तारीख व नोटिस के बारे में जानकारी लें।

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